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हरियाणा के मुलाना स्थित गोला गांव में बरसाती सीजन सिर पर होने के बावजूद बेगना नदी की डीसिल्टिंग (गाद निकालने) और खुदाई का काम सर्वे के फेर में फंसा है। ग्रामीणों को आशंका है कि सिंचाई एवं संबंधित विभाग की लेटलतीफी के चलते इस बार भी पिछले साल जैसे बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बेगना नदी का टेंडर तो हो चुका है, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि साल 2025 में 25 मई को ही नदी में उफान आ गया था। ग्रामीणों ने विभाग की सुस्ती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा साल बीत जाने के बाद भी पानी की समय पर निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बलजिन्द्र सिंह, स्वर्ण सिंह, बलदेव सिंह, गुरकैम सिंह, सोहन सिंह और राकेश जैसे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी केवल गांव में पानी आने के बाद ही दिखाई देते हैं, उससे पहले उनकी उपस्थिति नहीं होती। ग्रामीणों ने गांव को बेगना के पानी से बचाने के लिए हर कार्यालय में शिकायतें सौंपी हैं। करीब दो हफ्ते पहले, विभाग की इस ढिलाई से परेशान गोला गांव के लोग मुख्यमंत्री नायब सैनी से शिकायत करने पहुँचे। ग्रामीण देसराज के अनुसार, मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को फोन कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए, जिसके बाद कुछ ही दिनों के भीतर नदी का टेंडर हो गया। हालांकि, टेंडर होने के बावजूद धरातल पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। गौरतलब है कि बरसाती सीजन में बेगना नदी का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों और गांव तक पहुँच जाता है, जिससे गोला, गोली, टमनौली, नहौनी, शेरपुर और साबांपुर जैसे कई गाँवों में जल प्रलय जैसी तबाही मचती है। इससे किसानों की फसलें जलमग्न हो जाती हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गोला गांव में गलियाँ डूब जाती हैं, घरों में पानी घुस जाता है और संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ घरों में सांप निकलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीणों को रात भर जागना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर खुदाई का काम पूरा होने से पहले ही बरसात शुरू हो गई, तो इस टेंडर का कोई औचित्य नहीं रहेगा। गोला गांव की सरपंच जसप्रीत कौर ने उम्मीद जताई है कि काम जल्द शुरू होगा ताकि ग्रामीणों को समस्या का सामना न करना पड़े।

7 hrs ago
user_Manish sharma
Manish sharma
मुलाना सेंट, अंबाला, हरियाणा•
7 hrs ago

हरियाणा के मुलाना स्थित गोला गांव में बरसाती सीजन सिर पर होने के बावजूद बेगना नदी की डीसिल्टिंग (गाद निकालने) और खुदाई का काम सर्वे के फेर में फंसा है। ग्रामीणों को आशंका है कि सिंचाई एवं संबंधित विभाग की लेटलतीफी के चलते इस बार भी पिछले साल जैसे बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बेगना नदी का टेंडर तो हो चुका है, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि साल 2025 में 25 मई को ही नदी में उफान आ गया था। ग्रामीणों ने विभाग की सुस्ती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा साल बीत जाने के बाद भी पानी की समय पर निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बलजिन्द्र सिंह, स्वर्ण सिंह, बलदेव सिंह, गुरकैम सिंह, सोहन सिंह और राकेश जैसे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी केवल गांव में पानी आने के बाद ही दिखाई देते हैं, उससे पहले उनकी उपस्थिति नहीं होती। ग्रामीणों ने गांव को बेगना के पानी से बचाने के लिए हर कार्यालय में शिकायतें सौंपी हैं। करीब दो हफ्ते पहले, विभाग की इस ढिलाई से परेशान गोला गांव के लोग मुख्यमंत्री

नायब सैनी से शिकायत करने पहुँचे। ग्रामीण देसराज के अनुसार, मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को फोन कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए, जिसके बाद कुछ ही दिनों के भीतर नदी का टेंडर हो गया। हालांकि, टेंडर होने के बावजूद धरातल पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। गौरतलब है कि बरसाती सीजन में बेगना नदी का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों और गांव तक पहुँच जाता है, जिससे गोला, गोली, टमनौली, नहौनी, शेरपुर और साबांपुर जैसे कई गाँवों में जल प्रलय जैसी तबाही मचती है। इससे किसानों की फसलें जलमग्न हो जाती हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गोला गांव में गलियाँ डूब जाती हैं, घरों में पानी घुस जाता है और संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ घरों में सांप निकलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीणों को रात भर जागना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर खुदाई का काम पूरा होने से पहले ही बरसात शुरू हो गई, तो इस टेंडर का कोई औचित्य नहीं रहेगा। गोला गांव की सरपंच जसप्रीत कौर ने उम्मीद जताई है कि काम जल्द शुरू होगा ताकि ग्रामीणों को समस्या का सामना न करना पड़े।

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  • हरियाणा के मुलाना स्थित गोला गांव में बरसाती सीजन सिर पर होने के बावजूद बेगना नदी की डीसिल्टिंग (गाद निकालने) और खुदाई का काम सर्वे के फेर में फंसा है। ग्रामीणों को आशंका है कि सिंचाई एवं संबंधित विभाग की लेटलतीफी के चलते इस बार भी पिछले साल जैसे बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बेगना नदी का टेंडर तो हो चुका है, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि साल 2025 में 25 मई को ही नदी में उफान आ गया था। ग्रामीणों ने विभाग की सुस्ती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा साल बीत जाने के बाद भी पानी की समय पर निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बलजिन्द्र सिंह, स्वर्ण सिंह, बलदेव सिंह, गुरकैम सिंह, सोहन सिंह और राकेश जैसे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी केवल गांव में पानी आने के बाद ही दिखाई देते हैं, उससे पहले उनकी उपस्थिति नहीं होती। ग्रामीणों ने गांव को बेगना के पानी से बचाने के लिए हर कार्यालय में शिकायतें सौंपी हैं। करीब दो हफ्ते पहले, विभाग की इस ढिलाई से परेशान गोला गांव के लोग मुख्यमंत्री नायब सैनी से शिकायत करने पहुँचे। ग्रामीण देसराज के अनुसार, मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को फोन कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए, जिसके बाद कुछ ही दिनों के भीतर नदी का टेंडर हो गया। हालांकि, टेंडर होने के बावजूद धरातल पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। गौरतलब है कि बरसाती सीजन में बेगना नदी का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों और गांव तक पहुँच जाता है, जिससे गोला, गोली, टमनौली, नहौनी, शेरपुर और साबांपुर जैसे कई गाँवों में जल प्रलय जैसी तबाही मचती है। इससे किसानों की फसलें जलमग्न हो जाती हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गोला गांव में गलियाँ डूब जाती हैं, घरों में पानी घुस जाता है और संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ घरों में सांप निकलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीणों को रात भर जागना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर खुदाई का काम पूरा होने से पहले ही बरसात शुरू हो गई, तो इस टेंडर का कोई औचित्य नहीं रहेगा। गोला गांव की सरपंच जसप्रीत कौर ने उम्मीद जताई है कि काम जल्द शुरू होगा ताकि ग्रामीणों को समस्या का सामना न करना पड़े।
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    हरियाणा के मुलाना स्थित गोला गांव में बरसाती सीजन सिर पर होने के बावजूद बेगना नदी की डीसिल्टिंग (गाद निकालने) और खुदाई का काम सर्वे के फेर में फंसा है। ग्रामीणों को आशंका है कि सिंचाई एवं संबंधित विभाग की लेटलतीफी के चलते इस बार भी पिछले साल जैसे बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बेगना नदी का टेंडर तो हो चुका है, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि साल 2025 में 25 मई को ही नदी में उफान आ गया था।

ग्रामीणों ने विभाग की सुस्ती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा साल बीत जाने के बाद भी पानी की समय पर निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बलजिन्द्र सिंह, स्वर्ण सिंह, बलदेव सिंह, गुरकैम सिंह, सोहन सिंह और राकेश जैसे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी केवल गांव में पानी आने के बाद ही दिखाई देते हैं, उससे पहले उनकी उपस्थिति नहीं होती। ग्रामीणों ने गांव को बेगना के पानी से बचाने के लिए हर कार्यालय में शिकायतें सौंपी हैं।

करीब दो हफ्ते पहले, विभाग की इस ढिलाई से परेशान गोला गांव के लोग मुख्यमंत्री नायब सैनी से शिकायत करने पहुँचे। ग्रामीण देसराज के अनुसार, मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को फोन कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए, जिसके बाद कुछ ही दिनों के भीतर नदी का टेंडर हो गया। हालांकि, टेंडर होने के बावजूद धरातल पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि बरसाती सीजन में बेगना नदी का पानी ओवरफ्लो होकर खेतों और गांव तक पहुँच जाता है, जिससे गोला, गोली, टमनौली, नहौनी, शेरपुर और साबांपुर जैसे कई गाँवों में जल प्रलय जैसी तबाही मचती है। इससे किसानों की फसलें जलमग्न हो जाती हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गोला गांव में गलियाँ डूब जाती हैं, घरों में पानी घुस जाता है और संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ घरों में सांप निकलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे ग्रामीणों को रात भर जागना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर खुदाई का काम पूरा होने से पहले ही बरसात शुरू हो गई, तो इस टेंडर का कोई औचित्य नहीं रहेगा। गोला गांव की सरपंच जसप्रीत कौर ने उम्मीद जताई है कि काम जल्द शुरू होगा ताकि ग्रामीणों को समस्या का सामना न करना पड़े।
    user_Manish sharma
    Manish sharma
    मुलाना सेंट, अंबाला, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • सढोरा उप तहसील परिसर के पास स्थित एक खाली जगह, जिसका उपयोग अब तक नगर पालिका द्वारा कूड़ा-कर्कट डालने के लिए किया जा रहा था, पर अब समाजसेवी संस्था उज्जवल भविष्य संस्था पशु-पक्षियों के पीने के पानी के लिए एक जलाशय का निर्माण कर रही है। संस्था के संचालक राकेश शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में बेसहारा पशु-पक्षी घूमते रहते हैं, और भीषण गर्मी में उनके लिए पानी की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। शर्मा के अनुसार, संस्था ने पहले भी इस खाली जगह के सदुपयोग के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी के मद्देनज़र, अब उज्जवल भविष्य संस्था समाज के सहयोग से इस भूमि के एक हिस्से को साफ-सुथरा करके जलाशय का निर्माण कर रही है। यह जलाशय विशेष रूप से जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगा। संस्था ने बताया कि इस जलाशय के चारों ओर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे, जिससे इलाके की सुंदरता बढ़ेगी और पशु-पक्षियों को आश्रय भी मिलेगा। उनका कहना है कि जहाँ मनुष्यों के लिए जगह-जगह वाटर कूलर जैसी व्यवस्थाएं होती हैं, वहीं पशु-पक्षियों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं होती, और इसी कमी को पूरा करने के उद्देश्य से यह जलाशय बनाया जा रहा है ताकि उन्हें भीषण गर्मी में भी पानी मिल सके।
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    सढोरा उप तहसील परिसर के पास स्थित एक खाली जगह, जिसका उपयोग अब तक नगर पालिका द्वारा कूड़ा-कर्कट डालने के लिए किया जा रहा था, पर अब समाजसेवी संस्था उज्जवल भविष्य संस्था पशु-पक्षियों के पीने के पानी के लिए एक जलाशय का निर्माण कर रही है। संस्था के संचालक राकेश शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में बेसहारा पशु-पक्षी घूमते रहते हैं, और भीषण गर्मी में उनके लिए पानी की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

शर्मा के अनुसार, संस्था ने पहले भी इस खाली जगह के सदुपयोग के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी के मद्देनज़र, अब उज्जवल भविष्य संस्था समाज के सहयोग से इस भूमि के एक हिस्से को साफ-सुथरा करके जलाशय का निर्माण कर रही है। यह जलाशय विशेष रूप से जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगा।

संस्था ने बताया कि इस जलाशय के चारों ओर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे, जिससे इलाके की सुंदरता बढ़ेगी और पशु-पक्षियों को आश्रय भी मिलेगा। उनका कहना है कि जहाँ मनुष्यों के लिए जगह-जगह वाटर कूलर जैसी व्यवस्थाएं होती हैं, वहीं पशु-पक्षियों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं होती, और इसी कमी को पूरा करने के उद्देश्य से यह जलाशय बनाया जा रहा है ताकि उन्हें भीषण गर्मी में भी पानी मिल सके।
    user_Satpal sharma
    Satpal sharma
    Local News Reporter सढौरा एसटी, यमुनानगर, हरियाणा•
    6 hrs ago
  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में एक प्रेस वार्ता आयोजित की है। इस सूचना को साझा करते हुए सकारात्मकता और उत्साह व्यक्त किया गया है।
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    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में एक प्रेस वार्ता आयोजित की है। इस सूचना को साझा करते हुए सकारात्मकता और उत्साह व्यक्त किया गया है।
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    10 hrs ago
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) की 23वीं किस्त जारी की है। इस किस्त के तहत, देश भर के 9 करोड़ 44 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके खातों में पहुंचती है। सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें आर्थिक सहायता, फसल बीमा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि तकनीक को बढ़ावा देना और बाजार तक बेहतर पहुंच शामिल है। केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि इन योजनाओं का पैसा बिचौलियों के बजाय सीधे किसानों तक पहुंच रहा है, जिससे DBT व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ी है और लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि मिल रही है। इस किस्त को किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे उन्हें खेती के शुरुआती खर्चों में मदद मिलेगी और बीज, खाद तथा कृषि उपकरणों की खरीद में राहत मिलेगी। यह छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा प्रदान करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में भी बड़ी संख्या में किसान PM किसान योजना का लाभ उठा रहे हैं, जहां वे इस सहायता राशि का उपयोग गेहूं, धान, सरसों और अन्य फसलों की खेती संबंधी जरूरतों को पूरा करने में करते हैं। किसानों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे योजना का लाभ निर्बाध रूप से प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते, आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी रखें। सरकार PM किसान सम्मान निधि योजना को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, और अब भविष्य में किसानों के लिए सरकार के अन्य बड़े फैसलों पर नज़र रहेगी।
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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) की 23वीं किस्त जारी की है। इस किस्त के तहत, देश भर के 9 करोड़ 44 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके खातों में पहुंचती है। सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

सरकार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें आर्थिक सहायता, फसल बीमा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि तकनीक को बढ़ावा देना और बाजार तक बेहतर पहुंच शामिल है। केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि इन योजनाओं का पैसा बिचौलियों के बजाय सीधे किसानों तक पहुंच रहा है, जिससे DBT व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ी है और लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि मिल रही है।

इस किस्त को किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे उन्हें खेती के शुरुआती खर्चों में मदद मिलेगी और बीज, खाद तथा कृषि उपकरणों की खरीद में राहत मिलेगी। यह छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा प्रदान करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में भी बड़ी संख्या में किसान PM किसान योजना का लाभ उठा रहे हैं, जहां वे इस सहायता राशि का उपयोग गेहूं, धान, सरसों और अन्य फसलों की खेती संबंधी जरूरतों को पूरा करने में करते हैं।

किसानों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे योजना का लाभ निर्बाध रूप से प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते, आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी रखें। सरकार PM किसान सम्मान निधि योजना को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, और अब भविष्य में किसानों के लिए सरकार के अन्य बड़े फैसलों पर नज़र रहेगी।
    user_Ajay khurana
    Ajay khurana
    जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    10 hrs ago
  • यमुनानगर जिले के रादौर स्थित छोटा बांस की डेहा बस्ती से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो गया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बस्ती निवासी अपना सामान लेकर विभिन्न क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं। लोग टेंपो, छोटा हाथी और कैंटर जैसे वाहनों से दड़वा, कांसापुर, लाडवा, इंद्री, करनाल और ताजेवाला जैसे स्थानों पर जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ जगहों पर लोगों को सामान उतारने की अनुमति नहीं मिली, जिसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा और अब वे अन्य स्थानों की तलाश कर रहे हैं। इसी दौरान, पिछले दिनों मीडिया में काफी चर्चा में रहे डेहा बस्ती के पिटबुल कुत्ते की भी मौत की सूचना मिली है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि भीषण गर्मी, बिजली आपूर्ति बाधित रहने और बदलती परिस्थितियों के कारण कुत्ते की हालत बिगड़ गई थी। हालांकि, उसकी मौत के कारणों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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    यमुनानगर जिले के रादौर स्थित छोटा बांस की डेहा बस्ती से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो गया है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बस्ती निवासी अपना सामान लेकर विभिन्न क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं।

लोग टेंपो, छोटा हाथी और कैंटर जैसे वाहनों से दड़वा, कांसापुर, लाडवा, इंद्री, करनाल और ताजेवाला जैसे स्थानों पर जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ जगहों पर लोगों को सामान उतारने की अनुमति नहीं मिली, जिसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा और अब वे अन्य स्थानों की तलाश कर रहे हैं।

इसी दौरान, पिछले दिनों मीडिया में काफी चर्चा में रहे डेहा बस्ती के पिटबुल कुत्ते की भी मौत की सूचना मिली है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि भीषण गर्मी, बिजली आपूर्ति बाधित रहने और बदलती परिस्थितियों के कारण कुत्ते की हालत बिगड़ गई थी। हालांकि, उसकी मौत के कारणों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
    user_Radaur Yamunanagar News 24x7
    Radaur Yamunanagar News 24x7
    Local News Reporter रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    15 hrs ago
  • अंबाला जिले के मुलाना ग्राम पंचायत ने गांव में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए युद्ध स्तर पर एक विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, गांव के छोटे-बड़े सभी नालों की व्यापक सफाई करवाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाना और ग्रामीणों को गंदगी व जलभराव की समस्या से निजात दिलाना है। ग्राम पंचायत मुलाना के सरपंच प्रवीन कुमार ने जानकारी दी कि नालों की सफाई सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसके लिए दो जेटिंग मशीनें मंगाई गई हैं, जो लगभग एक माह तक गांव में सफाई कार्य करेंगी। इन मशीनों की मदद से बंद पड़े और गंदगी से भरे नालों की गहन सफाई की जाएगी। सरपंच प्रवीन कुमार स्वयं इस पूरे सफाई अभियान की देखरेख कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। इस अभियान के दौरान नालों में जमा कचरा, मिट्टी और अन्य अवरोधों को हटाया जाएगा, जिससे बरसात के मौसम में होने वाली जलभराव की समस्या से भी बड़ी राहत मिलेगी।
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    अंबाला जिले के मुलाना ग्राम पंचायत ने गांव में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए युद्ध स्तर पर एक विशेष सफाई अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, गांव के छोटे-बड़े सभी नालों की व्यापक सफाई करवाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाना और ग्रामीणों को गंदगी व जलभराव की समस्या से निजात दिलाना है।

ग्राम पंचायत मुलाना के सरपंच प्रवीन कुमार ने जानकारी दी कि नालों की सफाई सुनिश्चित करने हेतु विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसके लिए दो जेटिंग मशीनें मंगाई गई हैं, जो लगभग एक माह तक गांव में सफाई कार्य करेंगी। इन मशीनों की मदद से बंद पड़े और गंदगी से भरे नालों की गहन सफाई की जाएगी।

सरपंच प्रवीन कुमार स्वयं इस पूरे सफाई अभियान की देखरेख कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। इस अभियान के दौरान नालों में जमा कचरा, मिट्टी और अन्य अवरोधों को हटाया जाएगा, जिससे बरसात के मौसम में होने वाली जलभराव की समस्या से भी बड़ी राहत मिलेगी।
    user_Manish sharma
    Manish sharma
    मुलाना सेंट, अंबाला, हरियाणा•
    21 hrs ago
  • सीआईए-1 ने बुजुर्गों से लूटपाट करने वाले एक गिरोह का सफलतापूर्वक खात्मा कर दिया है। यह गिरोह अकेले या असहाय बुजुर्गों को अपनी बातों में फंसाकर या डरा-धमकाकर उनके गहने और नकदी लूटता था। बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस टीम ने जाल बिछाया और इस गिरोह के तीन शातिर अपराधियों को धर दबोचा। उनके पास से लूटे गए गहने और नकदी भी बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार, ये अपराधी नशे के लिए इस तरह की वारदातों को अंजाम देते थे। इस मामले में डीएसपी अंबाला वीरेंद्र ने भी बयान दिया है।
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    सीआईए-1 ने बुजुर्गों से लूटपाट करने वाले एक गिरोह का सफलतापूर्वक खात्मा कर दिया है। यह गिरोह अकेले या असहाय बुजुर्गों को अपनी बातों में फंसाकर या डरा-धमकाकर उनके गहने और नकदी लूटता था। बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस टीम ने जाल बिछाया और इस गिरोह के तीन शातिर अपराधियों को धर दबोचा। उनके पास से लूटे गए गहने और नकदी भी बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार, ये अपराधी नशे के लिए इस तरह की वारदातों को अंजाम देते थे। इस मामले में डीएसपी अंबाला वीरेंद्र ने भी बयान दिया है।
    user_N R Rahul Jakhar
    N R Rahul Jakhar
    Local News Reporter अंबाला, अंबाला, हरियाणा•
    9 hrs ago
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