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उत्तराखंड में 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के फैसले के खिलाफ पेड़ों को बचाने की एक अनोखी मुहिम देखने को मिली है। इस फैसले के विरोध में एक महिला ने मुंडन कराकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महिला का कहना है कि यह आंदोलन पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए है। इस अनोखे कदम के बाद अब यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पेड़ों को बचाने के लिए इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन सचमुच ज़रूरी हैं।

17 hrs ago
user_Pawan sharma
Pawan sharma
Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
17 hrs ago

उत्तराखंड में 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के फैसले के खिलाफ पेड़ों को बचाने की एक अनोखी मुहिम देखने को मिली है। इस फैसले के विरोध में एक महिला ने मुंडन कराकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महिला का कहना है कि यह आंदोलन पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए है। इस अनोखे कदम के बाद अब यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पेड़ों को बचाने के लिए इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन सचमुच ज़रूरी हैं।

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  • मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की नामवार लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एएनएम (ANM) तथा सीएचओ (CHO) को प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला के साथ नियमित मॉनिटरिंग के लिए अटैच करने और जरूरत पड़ने पर रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने प्रदेशभर के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों को सोमवार सुबह एएनएम की बैठक लेकर लाईनलिस्ट और उसके कारणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं ताकि समय रहते आवश्यक हस्तक्षेप किया जा सके। मुख्य सचिव ने रविवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों की विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और गायनी विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटों में हुए सामान्य व सिजेरियन प्रसव और उनकी वर्तमान हालत के बारे में भी फीडबैक लिया। उन्होंने विशेष रूप से निर्देशित किया कि प्रसव के बाद अगले 24 घंटे तक धात्री महिला की गहन निगरानी की जाए।
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    मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की नामवार लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एएनएम (ANM) तथा सीएचओ (CHO) को प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला के साथ नियमित मॉनिटरिंग के लिए अटैच करने और जरूरत पड़ने पर रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने प्रदेशभर के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों को सोमवार सुबह एएनएम की बैठक लेकर लाईनलिस्ट और उसके कारणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं ताकि समय रहते आवश्यक हस्तक्षेप किया जा सके।

मुख्य सचिव ने रविवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों की विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और गायनी विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटों में हुए सामान्य व सिजेरियन प्रसव और उनकी वर्तमान हालत के बारे में भी फीडबैक लिया। उन्होंने विशेष रूप से निर्देशित किया कि प्रसव के बाद अगले 24 घंटे तक धात्री महिला की गहन निगरानी की जाए।
    user_Sunita sharma
    Sunita sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • NEET परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि ओएमआर (OMR) शीट के मिलान के अनुसार उसके 609 अंक बन रहे थे, लेकिन NTA की वेबसाइट पर महज कुछ ही घंटों के भीतर उसका परिणाम बदलकर सिर्फ 167 अंक दिखा दिया गया। छात्रा का दृढ़ता से कहना है कि यह केवल उसके साथ हुई कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रा ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से गुहार लगाते हुए अपील की है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे गंभीर मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली में युवाओं का विश्वास दोबारा से कायम हो सके। गौरतलब है कि छात्रा के इन आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इस पूरे मामले पर फिलहाल NTA की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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    NEET परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि ओएमआर (OMR) शीट के मिलान के अनुसार उसके 609 अंक बन रहे थे, लेकिन NTA की वेबसाइट पर महज कुछ ही घंटों के भीतर उसका परिणाम बदलकर सिर्फ 167 अंक दिखा दिया गया।

छात्रा का दृढ़ता से कहना है कि यह केवल उसके साथ हुई कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

छात्रा ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से गुहार लगाते हुए अपील की है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे गंभीर मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली में युवाओं का विश्वास दोबारा से कायम हो सके। गौरतलब है कि छात्रा के इन आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इस पूरे मामले पर फिलहाल NTA की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    11 hrs ago
  • उत्तराखंड में 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के फैसले के खिलाफ पेड़ों को बचाने की एक अनोखी मुहिम देखने को मिली है। इस फैसले के विरोध में एक महिला ने मुंडन कराकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महिला का कहना है कि यह आंदोलन पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए है। इस अनोखे कदम के बाद अब यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पेड़ों को बचाने के लिए इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन सचमुच ज़रूरी हैं।
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    उत्तराखंड में 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के फैसले के खिलाफ पेड़ों को बचाने की एक अनोखी मुहिम देखने को मिली है। इस फैसले के विरोध में एक महिला ने मुंडन कराकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

महिला का कहना है कि यह आंदोलन पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए है। इस अनोखे कदम के बाद अब यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पेड़ों को बचाने के लिए इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन सचमुच ज़रूरी हैं।
    user_Pawan sharma
    Pawan sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • राजस्थान में मानसून के मौसम में भी बादल रूठे हुए हैं, जिससे गर्मी के कारण लोगों का हाल बेहाल हो गया है। हर तरफ बस यही चिंता बनी हुई है कि आखिर बारिश का मौसम कब शुरू होगा और इस सताती गर्मी से कब राहत मिलेगी।
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    राजस्थान में मानसून के मौसम में भी बादल रूठे हुए हैं, जिससे गर्मी के कारण लोगों का हाल बेहाल हो गया है। हर तरफ बस यही चिंता बनी हुई है कि आखिर बारिश का मौसम कब शुरू होगा और इस सताती गर्मी से कब राहत मिलेगी।
    user_Rakesh Kumar Swami
    Rakesh Kumar Swami
    सांगानेर, जयपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • जयपुर जिले के बस्सी क्षेत्र में कानोता के हीरावाला गांव स्थित ग्रीन सिटी कॉलोनी की सड़क सालों से इसी तरह बदहाल पड़ी हुई है। इतने सालों बाद भी इस मार्ग की कोई सुध नहीं ली गई है और यह जस की तस पड़ी है। अब लोग निराश होकर यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस सड़क की हालत कब तक सुधरेगी।
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    जयपुर जिले के बस्सी क्षेत्र में कानोता के हीरावाला गांव स्थित ग्रीन सिटी कॉलोनी की सड़क सालों से इसी तरह बदहाल पड़ी हुई है। इतने सालों बाद भी इस मार्ग की कोई सुध नहीं ली गई है और यह जस की तस पड़ी है। अब लोग निराश होकर यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस सड़क की हालत कब तक सुधरेगी।
    user_Indian News
    Indian News
    बस्सी, जयपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आई है, जहां छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। यह दृश्य न केवल व्यवस्था की कमी को उजागर करता है, बल्कि इस बात का भी साफ संकेत है कि आज भी कई इलाकों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर इन बच्चों का यह सफर वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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    राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आई है, जहां छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। यह दृश्य न केवल व्यवस्था की कमी को उजागर करता है, बल्कि इस बात का भी साफ संकेत है कि आज भी कई इलाकों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर इन बच्चों का यह सफर वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
    user_Jitesh kumar
    Jitesh kumar
    जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
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