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नारी शक्ति बंदनअधिनियम, संसद में 33 परसेंट आरक्षण न मिलने पर पूरे भारत में महिलाओं का विरोध प्रदर्शन, जगह जगह पर पुतला फूंके, जमकर नारे बाजी इसी क्रम में रेणुकूट सोनभद्र में महिलाओं ने किया विरोध प्रदर्शन , प्रस्तुत है कुछ झलकियां , ऐसे ही खबरें देखने के लिए चैनल को शासक्रब जरूर करे
संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
नारी शक्ति बंदनअधिनियम, संसद में 33 परसेंट आरक्षण न मिलने पर पूरे भारत में महिलाओं का विरोध प्रदर्शन, जगह जगह पर पुतला फूंके, जमकर नारे बाजी इसी क्रम में रेणुकूट सोनभद्र में महिलाओं ने किया विरोध प्रदर्शन , प्रस्तुत है कुछ झलकियां , ऐसे ही खबरें देखने के लिए चैनल को शासक्रब जरूर करे
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- चिनीयां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट शुक्रवार दोपहर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब प्रभु प्रकाश मिशन विद्यालय जमुनिया टांड की चौथी कक्षा की करीब 12 वर्षीय छात्रा जंगल में रोती और भागती हुई मिली। जब चिनियां थाना क्षेत्र के चिरका गांव निवासी जयराम सिंह रंका जा रहे थे, तभी बड़का नाला के पास जंगल के बीच उन्होंने बच्ची को इस हालत में देखा। जयराम सिंह ने तुरंत अपनी बाइक रोकी और बच्ची को सुरक्षित अपने गांव चिरका ले आए। पूछताछ में बच्ची ने अपना नाम खुशबू कुमारी, पिता नागेंद्र सिंह, निवासी महूडंड (डंडई थाना क्षेत्र) बताया। बच्ची ने घबराई हुए अंदाज में बताया कि कुछ अज्ञात लोग मेरे साथ एक और लड़की को पकड़कर हाथ बांधकर जंगल में ले गए थे, जहां से वह किसी तरह खुद को छुड़ाकर भाग निकली। हालांकि, विद्यालय प्रबंधन ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज करते हुए इसे बच्ची की “बहानेबाजी” बताया। स्कूल इंचार्ज का कहना है कि छात्रा नई-नई दाखिल हुई है और इस तरह की बातें करती रहती है। उनके मुताबिक, उसके साथ कोई दूसरी बच्ची हॉस्टल से बाहर नहीं गई है। घटना की खबर फैलते ही मौके पर सैकड़ों ग्रामीण जुट गए। परिजनों विद्यालय के फादर को सूचना दी गई, जिसके बाद बच्ची की मां भी मौके पर पहुंच गईं। लेकिन खबर लिखे जाने तक विद्यालय की ओर से कोई शिक्षक, वार्डन या जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर नहीं पहुंचा था। बताते चले कि इसी सप्ताह मंगलवार को भी इसी विद्यालय के हॉस्टल से 7-8 साल के दो मासूम बच्चे भागकर जंगल के रास्ते आ गए थे, जिन्हें ग्रामीणों ने पकड़कर सुरक्षित चिनीयां थाना मोड़ तक पहुंचाया था। अब लगातार दूसरी घटना ने विद्यालय प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में आक्रोश है और लोग इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं। अब सवाल यह उठना है कि क्या हॉस्टल में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है? या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही से मासूमों की जिंदगी खतरे में डाली जा रही है ?1
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