कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौगई में 16 जून की रात एक भाजपा नेता समेत तीन लोगों की कार में जलाकर व फरसे से वार कर नृशंस हत्या के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। राज्य सरकार ने इस बहुचर्चित हत्याकांड की सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी है, जिसकी मांग परिजनों और करणी सेना द्वारा लगातार की जा रही थी। इस संबंध में 30 जून को एक अधिसूचना भी जारी की गई है। यह वारदात रेत खनन और परिवहन पर वर्चस्व को लेकर ठाकुर गुट और त्रिपाठी गुट के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान का परिणाम थी। घटना से ठीक एक दिन पहले, 15 जून को भी मारपीट हुई थी। 16 जून की रात करीब 10:30 बजे भरत कुमार सिंह उर्फ लल्ला सिंह अपने साथियों योगेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, मयंक सिंह और नागेंद्र सिंह के साथ नौगई गांव पहुंचे थे। पुरानी रंजिश के चलते मनोज त्रिपाठी के घर के सामने विवाद बढ़ गया, जिसके बाद भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी और अन्य व्यक्तियों ने भरत सिंह की फॉर्च्यूनर कार में पेट्रोल डालकर आग लगा दी और धारदार हथियारों से हमला किया। इस घटना में भरत सिंह की कार में ही जलकर मौत हो गई, जबकि शिक्षक नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हमले में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने अब तक इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस नृशंस तिहरे हत्याकांड से पूरा कोरिया जिला और प्रदेश हिल गया था। पीड़ित परिवार ने आरोपियों को फांसी देने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत सहित अन्य नेताओं ने 29 जून को पीड़ित परिवार से मुलाकात कर राज्य सरकार और प्रशासन-पुलिस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने भी आरोपियों का एनकाउंटर करने और सीबीआई जांच की पुरजोर मांग की थी। सीबीआई जांच की बढ़ती मांगों के बीच, राज्य सरकार के गृह विभाग ने हत्याकांड की सीबीआई जांच को मंजूरी दी। जारी अधिसूचना में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनहत थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 126(2), 296, 351(3), 151(2), 3(5) तथा 190, 191(2), 191(3), 109, 324, 103(1), 326(जी) के तहत दर्ज अपराध के अनुसंधान के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों की शक्तियों और क्षेत्राधिकार का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में करने की सहमति प्रदान की गई है।
कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौगई में 16 जून की रात एक भाजपा नेता समेत तीन लोगों की कार में जलाकर व फरसे से वार कर नृशंस हत्या के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। राज्य सरकार ने इस बहुचर्चित हत्याकांड की सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी है, जिसकी मांग परिजनों और करणी सेना द्वारा लगातार की जा रही थी। इस संबंध में 30 जून को एक अधिसूचना भी जारी की गई है। यह वारदात रेत खनन और परिवहन पर वर्चस्व को लेकर ठाकुर गुट और त्रिपाठी गुट के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान का परिणाम थी। घटना से ठीक एक दिन पहले, 15 जून को भी मारपीट हुई थी। 16 जून की रात करीब 10:30 बजे भरत कुमार सिंह उर्फ लल्ला सिंह अपने साथियों योगेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, मयंक सिंह और नागेंद्र सिंह के साथ नौगई गांव पहुंचे थे। पुरानी रंजिश के चलते मनोज त्रिपाठी के घर के सामने विवाद बढ़ गया, जिसके बाद भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी और अन्य व्यक्तियों ने भरत सिंह की फॉर्च्यूनर कार में पेट्रोल डालकर आग लगा दी और धारदार हथियारों से हमला किया। इस घटना में भरत सिंह की कार में ही जलकर मौत हो गई, जबकि शिक्षक नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हमले में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने अब तक इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस नृशंस तिहरे हत्याकांड से पूरा कोरिया जिला और प्रदेश हिल गया था। पीड़ित परिवार ने आरोपियों को फांसी देने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत सहित अन्य नेताओं ने 29 जून को पीड़ित परिवार से मुलाकात कर राज्य सरकार और प्रशासन-पुलिस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने भी आरोपियों का एनकाउंटर करने और सीबीआई जांच की पुरजोर मांग की थी। सीबीआई जांच की बढ़ती मांगों के बीच, राज्य सरकार के गृह विभाग ने हत्याकांड की सीबीआई जांच को मंजूरी दी। जारी अधिसूचना में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनहत थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 126(2), 296, 351(3), 151(2), 3(5) तथा 190, 191(2), 191(3), 109, 324, 103(1), 326(जी) के तहत दर्ज अपराध के अनुसंधान के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों की शक्तियों और क्षेत्राधिकार का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में करने की सहमति प्रदान की गई है।
- कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौगई में 16 जून की रात एक भाजपा नेता समेत तीन लोगों की कार में जलाकर व फरसे से वार कर नृशंस हत्या के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। राज्य सरकार ने इस बहुचर्चित हत्याकांड की सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी है, जिसकी मांग परिजनों और करणी सेना द्वारा लगातार की जा रही थी। इस संबंध में 30 जून को एक अधिसूचना भी जारी की गई है। यह वारदात रेत खनन और परिवहन पर वर्चस्व को लेकर ठाकुर गुट और त्रिपाठी गुट के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान का परिणाम थी। घटना से ठीक एक दिन पहले, 15 जून को भी मारपीट हुई थी। 16 जून की रात करीब 10:30 बजे भरत कुमार सिंह उर्फ लल्ला सिंह अपने साथियों योगेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, मयंक सिंह और नागेंद्र सिंह के साथ नौगई गांव पहुंचे थे। पुरानी रंजिश के चलते मनोज त्रिपाठी के घर के सामने विवाद बढ़ गया, जिसके बाद भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी और अन्य व्यक्तियों ने भरत सिंह की फॉर्च्यूनर कार में पेट्रोल डालकर आग लगा दी और धारदार हथियारों से हमला किया। इस घटना में भरत सिंह की कार में ही जलकर मौत हो गई, जबकि शिक्षक नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हमले में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने अब तक इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस नृशंस तिहरे हत्याकांड से पूरा कोरिया जिला और प्रदेश हिल गया था। पीड़ित परिवार ने आरोपियों को फांसी देने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत सहित अन्य नेताओं ने 29 जून को पीड़ित परिवार से मुलाकात कर राज्य सरकार और प्रशासन-पुलिस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने भी आरोपियों का एनकाउंटर करने और सीबीआई जांच की पुरजोर मांग की थी। सीबीआई जांच की बढ़ती मांगों के बीच, राज्य सरकार के गृह विभाग ने हत्याकांड की सीबीआई जांच को मंजूरी दी। जारी अधिसूचना में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनहत थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं जैसे 126(2), 296, 351(3), 151(2), 3(5) तथा 190, 191(2), 191(3), 109, 324, 103(1), 326(जी) के तहत दर्ज अपराध के अनुसंधान के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों की शक्तियों और क्षेत्राधिकार का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में करने की सहमति प्रदान की गई है।1
- अंबिकापुर में सरगुजा पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए जाने वाले म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खाताधारक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के बैंक खाते में गेमिंग, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों से संबंधित ₹2,430 की राशि मिली थी, साथ ही खाते में एक से अधिक संदिग्ध लेनदेन भी पाए गए। पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली जानकारी के आधार पर थाना गांधीनगर और साइबर सेल ने इस मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान बेलखरीखा निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद सम्मी, पिता फकरुद्दीन, के नाम पर संचालित बैंक खाते का उपयोग साइबर ठगी से जुड़ी रकम प्राप्त करने के लिए किए जाने के प्रमाण मिले। इस खाते के खिलाफ विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन शिकायतें भी दर्ज थीं। इसके आधार पर थाना गांधीनगर में अपराध क्रमांक 406/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 317(4) एवं 111 के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी मोहम्मद सम्मी को पीजी कॉलेज के पास से हिरासत में लिया और पूछताछ की। पूछताछ में उसने अनुज सिंह के साथ मिलकर बैंक खाते की खरीद-फरोख्त करने और कमीशन लेकर खाते का उपयोग गेमिंग व साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम के लेनदेन में किए जाने की बात स्वीकार की। पुलिस ने बताया कि आरोपी के खाते में ठगी की राशि एक से अधिक बार प्राप्त हुई थी। इस मामले में सह-आरोपी अनुज सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद सम्मी को भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस कार्रवाई में थाना गांधीनगर प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, साइबर सेल प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक अजीत मिश्रा, सहायक उपनिरीक्षक सुभाष ठाकुर तथा आरक्षक वीरेंद्र पैकरा, आनंद प्रकाश केरकेट्टा, जानकी राजवाड़े और घनश्याम देवांगन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरगुजा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या ओटीपी उपलब्ध न कराएं, क्योंकि ऐसा करना स्वयं भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।1
- मुख्यमंत्री साय ने मैनपाट से जुड़े मुद्दे पर अपना बयान दिया है। इस दौरान, उन्होंने किसानों और जंगलों की कटाई के विषय पर अलग-अलग जवाब प्रस्तुत किए।1
- रायपुर से एक वायरल पॉलिटिकल अपडेट में, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सत्ताधारी दल (भाजपा) पर सबसे बड़ा और तीखा सियासी हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया और ANI के सामने दिए गए अपने ताज़ा बयान में समान नागरिक संहिता (UCC) और राम मंदिर दानपात्र विवाद—इन दो संवेदनशील मुद्दों को लेकर सरकार और सिस्टम की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। बघेल ने छत्तीसगढ़ में UCC के लिए कमेटी बनाए जाने की टाइमिंग और औचित्य पर गंभीर सवाल उठाए। उनके तर्क के अनुसार, जब भाजपा शासित राज्यों में UCC बिल पहले ही पारित किए जा चुके हैं, तो छत्तीसगढ़ में कमेटी बनाने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यह कानून राज्य में निवास करने वाली 42 प्रकार की जनजातियों की प्राचीन परंपराओं को सीधा नुकसान पहुंचाएगा, और इसे महज़ 'वोट की राजनीति' करार दिया। इसके अलावा, बघेल ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बाद अब स्वयं राम मंदिर के दानपात्र विवाद को 'बंटवारे के झगड़े' और 'भ्रष्टाचार' से जोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला है, जो लंबे समय से चल रहा था। बघेल ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर परिसर के 'सीसीटीवी फुटेज गायब' कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि FIR केवल आठ छोटे कर्मचारियों पर की गई है, जबकि 'मुख्य कर्ता-धर्ता' (Masterminds) अभी भी आज़ाद हैं। बघेल ने इस पूरी घटना को सिस्टम द्वारा की जा रही एक 'बड़ी लीपापोती' बताया। अडिग छत्तीसगढ़िया न्यूज़ के विश्लेषण के अनुसार, भूपेश बघेल ने इन बयानों से एक ही तीर से दो बड़े निशाने साधे हैं। एक तरफ उन्होंने UCC मुद्दे पर राज्य के विशाल आदिवासी वोटबैंक (42 जनजातियों) को साधा है, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर दान विवाद में सिस्टम की 'पारदर्शिता' को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्तर के नेता द्वारा 'CCTV गायब होने' और 'सैकड़ों करोड़ की लीपापोती' जैसे ऑन-रिकॉर्ड आरोप सत्ता पक्ष और मंदिर ट्रस्ट दोनों के लिए जवाबदेही का बड़ा संकट खड़ा करते हैं। इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक की सियासत में गरमाहट आना तय है।1
- जशपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पत्थलगांव थाना क्षेत्र से एक आरोपी को अवैध अंग्रेजी और देसी शराब के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी विश्वनाथ शर्मा (उम्र 54 वर्ष), जो ग्राम लुड़ेग, थाना पत्थलगांव, जिला जशपुर, छत्तीसगढ़ का निवासी है, उसे 27 लीटर 300 मिलीलीटर अवैध शराब के साथ पकड़ा गया। जब्त शराब की अनुमानित कीमत लगभग 16,440 रुपये बताई गई है। घटना में प्रयुक्त प्लेटिना मोटरसाइकिल (क्रमांक CG 14-MU -1427) को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है, और आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले का संक्षिप्त विवरण यह है कि 28 जून 2026 की रात करीब 10:00 बजे, पत्थलगांव थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति प्लेटिना मोटरसाइकिल पर भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब लेकर ग्राम पालीडीह की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल बताए गए स्थान की ओर रवाना हुई, जहां उन्होंने मोटरसाइकिल पर बोरी और झोला लटकाकर आ रहे संदिग्ध व्यक्ति को घेराबंदी कर रोका। पूछताछ में व्यक्ति ने अपना नाम विश्वनाथ शर्मा बताया। पुलिस द्वारा उसके पास रखी बोरी व झोले की तलाशी लेने पर अवैध रूप से रखी अंग्रेजी शराब, जिसमें मैकडॉनल नंबर 1 व्हिस्की की 750 मिलीलीटर वाली 02 बोतलें, सिंबा कंपनी की 650 मिलीलीटर वाली 12 बियर बोतलें, मुडोफ कंपनी की 180 मिलीलीटर वाली 25 व्हिस्की पौवा, गोल्डन गोवा कंपनी की 180 मिलीलीटर वाली 60 व्हिस्की पौवा और 180 मिलीलीटर वाली 15 देसी प्लेन मदिरा पौवा शामिल थी, बरामद हुई। इस प्रकार कुल 114 नग में 27 लीटर 300 मिलीलीटर अवैध शराब जब्त की गई। आरोपी शराब के संबंध में कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने गवाहों के समक्ष सभी अवैध अंग्रेजी व देसी शराब को जब्त करते हुए आरोपी विश्वनाथ शर्मा को हिरासत में लेकर थाना लाया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और पर्याप्त सबूत पाए जाने पर उसके विरुद्ध थाना पत्थलगांव में 34(2) आबकारी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। इस कार्यवाही में थाना प्रभारी पत्थलगांव निरीक्षक विनीत कुमार पांडे, प्रधान आरक्षक सुभाष नायक, आरक्षक राजेंद्र रात्रे और विनोद यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि पत्थलगांव क्षेत्र में अवैध अंग्रेजी और देसी मदिरा के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है, और नशे के सौदागरों के खिलाफ जशपुर पुलिस की कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी।3
- चांदनी क्षेत्र के अंतर्गत विकासखंड ओडगी की ग्राम पंचायत पासल के जेल्हापारा में रहने वाले अनुसूचित जनजाति परिवार कई महीनों से स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। लगभग 30 से 35 घरों की इस बस्ती में पीने के पानी के लिए लगाया गया सोलर पंप और नल जल योजना कई महीनों से खराब पड़ी हुई है, जिससे ग्रामीणों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने खराब सोलर पंप की जानकारी कई बार जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और जनपद पंचायत सदस्यों को दी है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की है।2
- छत्तीसगढ़ राज्य के DGP अरुण देव गौतम, जो हर मंगलवार को पुलिस कर्मचारियों के परिजनों से मिलते और उनकी परेशानियाँ सुनते हैं, ने 30 जून 2026 को एक अनोखा फैसला लिया। इस दिन DGP से मिलने के लिए 200 से अधिक निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिवार पहुँचे थे, जो पिछले 8-10 वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। इन परिवारों ने DGP से मिलने के लिए चार दिन पहले ही लिखित सूचना दी थी, लेकिन DGP ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया, जबकि वे अन्य लोगों से मिलते रहे। इस घटना से यह संकेत मिलता है कि DGP फिलहाल लंबे समय से नक्सल क्षेत्र में तैनात इन कर्मचारियों का स्थानांतरण करने के पक्ष में नहीं हैं। निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिजनों, जिनमें उनके माता-पिता, पत्नियाँ, बच्चे और भाई-बहन शामिल थे, में इस बात को लेकर काफी रोष देखा गया। वे सभी DGP से यह जानने आए थे कि उनके स्थानांतरण कब किए जाएँगे, लेकिन DGP ने सीधे मिलने से इनकार करके जवाब देने से परहेज किया। इन सभी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों ने अपने स्थानांतरण के लिए कई बार आवेदन किया है, जिन पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर पुलिस विभाग ने जवाब दिया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों का मैदानी इलाकों में स्थानांतरण हर तीन साल में किया जाता है। ऐसे में यह समझ से परे है कि अगर यह नियम लागू है, तो फिर 200 से अधिक निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8-10 साल से नक्सल क्षेत्रों में कैसे फंसे हुए हैं। सँयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने DGP के इस रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि DGP चार घंटे का पॉडकास्ट कर सकते हैं, लेकिन चार दिन पहले से सूचना देने के बाद भी पुलिस परिवार के सदस्यों से एक मिनट भी मिलकर उनकी समस्या का समाधान नहीं कर सकते। दीवान ने यह भी कहा कि यदि DGP पर कोई दबाव है, तो वे उन्हें बताएँ ताकि संघ सीधे दबाव बनाने वाले व्यक्ति से बात कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि DGP ने पुलिस मुख्यालय को पुलिस बल से घेरकर छावनी बना दिया और परिवार के सदस्यों से मिलने से इनकार कर दिया, जिसका सीधा अर्थ है कि उनके पास सवालों के जवाब नहीं हैं। दीवान ने इसे एक निंदनीय कार्य बताया और कहा कि DGP ने पुलिस परिवार से मुलाकात न करके यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी मुद्दे पर स्वयं निर्णय लेने में हिचक रहे हैं और किसी और के निर्देश का पालन कर रहे हैं। उनके इस कृत्य से पूरे पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों और उनके परिजनों को निराशा हुई है, और पुलिस परिवार के बुजुर्ग माता-पिता, बच्चे और महिलाएँ इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।1
- रामगढ़ पर्वत को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा, "पर्वत क्यों गिरेगा?" उन्होंने यह भी बताया कि वे रामगढ़ पर्वत पर विकास कार्यों के लिए ₹1 करोड़ की घोषणा कर चुके हैं।1