बुझी आग ने फिर धरा विकराल रूप किसान का 200 कुंतल गेहूं सुलझ गया मगर जलने से बाल-बाल बचा आबादी तक पहुंचीं लपटें—पाइप व गेहूं की ढंठल जलकर राख समथर/झांसी। कस्बा क्षेत्र के मौजा समथर एवं मौजा चमरा इमली में अचानक लगी आग ने दिनभर हड़कंप मचा दिया। दोनों स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड व स्थानीय ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मौजा समथर में स्थिति और भी गंभीर हो गई, जहां घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पा लिया गया था और लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन कुछ ही देर बाद आग ने अचानक फिर विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवाओं और खेतों में मौजूद सूखी गेहूं की खड़ी ढंठल ने आग को दोबारा भड़का दिया, जिससे लपटें तेजी से फैलती हुई आबादी के नजदीक पहुंचने लगीं और लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालात बिगड़ते देख ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बिजली विभाग को सूचना देकर आपूर्ति चालू कराई, ताकि मोटर और अन्य जल उपकरणों के माध्यम से आग बुझाने में सहायता मिल सके। फायर ब्रिगेड टीम द्वारा गाड़ी से पानी को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया और स्थानीय लोगों ने मिलकर पाइपों व उपलब्ध संसाधनों के जरिए लगातार पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया।इसके बावजूद आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेत में रखे सिंचाई पाइप और गेहूं की खड़ी ढंठल जलकर राख हो गई। वहीं अन्नू कुरचानिया पुत्र मिथलेश कुरचानिया के खेत पर रखा करीब 200 कुंतल गेहूं भी आग की चपेट में आकर सुलग उठा, हालांकि समय रहते प्रयासों के चलते उसे पूरी तरह नष्ट होने से बचा लिया गया। गनीमत रही कि आग को समय रहते आगे बढ़ने से रोक लिया गया, जिससे नजदीकी आबादी को बड़े नुकसान से बचाया जा सका।
बुझी आग ने फिर धरा विकराल रूप किसान का 200 कुंतल गेहूं सुलझ गया मगर जलने से बाल-बाल बचा आबादी तक पहुंचीं लपटें—पाइप व गेहूं की ढंठल जलकर राख समथर/झांसी। कस्बा क्षेत्र के मौजा समथर एवं मौजा चमरा इमली में अचानक लगी आग ने दिनभर हड़कंप मचा दिया। दोनों स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड व स्थानीय ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मौजा समथर में स्थिति और भी गंभीर हो गई, जहां घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पा लिया गया था और लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन कुछ ही
देर बाद आग ने अचानक फिर विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवाओं और खेतों में मौजूद सूखी गेहूं की खड़ी ढंठल ने आग को दोबारा भड़का दिया, जिससे लपटें तेजी से फैलती हुई आबादी के नजदीक पहुंचने लगीं और लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालात बिगड़ते देख ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बिजली विभाग को सूचना देकर आपूर्ति चालू कराई, ताकि मोटर और अन्य जल उपकरणों के माध्यम से आग बुझाने में सहायता मिल सके। फायर ब्रिगेड टीम द्वारा गाड़ी से पानी को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया और स्थानीय लोगों ने मिलकर पाइपों
व उपलब्ध संसाधनों के जरिए लगातार पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया।इसके बावजूद आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेत में रखे सिंचाई पाइप और गेहूं की खड़ी ढंठल जलकर राख हो गई। वहीं अन्नू कुरचानिया पुत्र मिथलेश कुरचानिया के खेत पर रखा करीब 200 कुंतल गेहूं भी आग की चपेट में आकर सुलग उठा, हालांकि समय रहते प्रयासों के चलते उसे पूरी तरह नष्ट होने से बचा लिया गया। गनीमत रही कि आग को समय रहते आगे बढ़ने से रोक लिया गया, जिससे नजदीकी आबादी को बड़े नुकसान से बचाया जा सका।
- आबादी तक पहुंचीं लपटें—पाइप व गेहूं की ढंठल जलकर राख समथर/झांसी। कस्बा क्षेत्र के मौजा समथर एवं मौजा चमरा इमली में अचानक लगी आग ने दिनभर हड़कंप मचा दिया। दोनों स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड व स्थानीय ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मौजा समथर में स्थिति और भी गंभीर हो गई, जहां घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पा लिया गया था और लोगों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन कुछ ही देर बाद आग ने अचानक फिर विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवाओं और खेतों में मौजूद सूखी गेहूं की खड़ी ढंठल ने आग को दोबारा भड़का दिया, जिससे लपटें तेजी से फैलती हुई आबादी के नजदीक पहुंचने लगीं और लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालात बिगड़ते देख ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बिजली विभाग को सूचना देकर आपूर्ति चालू कराई, ताकि मोटर और अन्य जल उपकरणों के माध्यम से आग बुझाने में सहायता मिल सके। फायर ब्रिगेड टीम द्वारा गाड़ी से पानी को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया और स्थानीय लोगों ने मिलकर पाइपों व उपलब्ध संसाधनों के जरिए लगातार पानी डालकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया।इसके बावजूद आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेत में रखे सिंचाई पाइप और गेहूं की खड़ी ढंठल जलकर राख हो गई। वहीं अन्नू कुरचानिया पुत्र मिथलेश कुरचानिया के खेत पर रखा करीब 200 कुंतल गेहूं भी आग की चपेट में आकर सुलग उठा, हालांकि समय रहते प्रयासों के चलते उसे पूरी तरह नष्ट होने से बचा लिया गया। गनीमत रही कि आग को समय रहते आगे बढ़ने से रोक लिया गया, जिससे नजदीकी आबादी को बड़े नुकसान से बचाया जा सका।3
- Post by Kshatr Pal shivhare1
- इटौरा में पूर्व प्रधान को जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर मिली जान से मारने की धमकी थाना बरुआ सागर क्षेत्र के इटौरा पूर्व प्रधान मानवेन्द्र अहिरवार के खेत पर बुंदेलखंड पैकेज के तहत निर्माण कार्य में ठेकेदार के द्वारा मानक विहीन तरीके से काम करने का विरोध किया तो ठेकेदार जयहिंद यादव ने गाली गलौज मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी है जिसके बाद पूर्व प्रधान ने थाना बरुआसागर में 17 तारीख दिन बुधवार को अपना लिखित में शिकायती पत्र सौंप कर न्याय की गुहार लगाई लेकिन अभी तक बरुआ सागर पुलिस की जांच ही पूरी नहीं हुई है और पीड़ित अभी भी न्याय के लिए भटक रहा है और कभी भी पूर्व प्रधान पर जानलेवा हमला हो सकता है आज बुधवार को समय शाम 3 बजे शिकायती पुलिस क्षेत्राधिकारी टहरौली असमा बकार को अपना लिखित में शिकायती पत्र देकर न्याय कि गुहार लगाई है1
- gram pradhan se 2 baar shikayat karne ke baad bhi koi sunwai nhi hui hai1
- तुर्का लहचूरा पोस्ट पसौरा जिला झांसी तहसील टहरौली ब्लॉक गुरसराय थाना फतेहपुर प्रधान प्रदीप कुमार दीक्षित तुर्का लहचूरा4
- जालौन के कोंच में छात्र पर डंडों बेल्ट से हमला आई गम्भीर चोटें घटना CCTV में कैद1
- मंच पर अचानक पहुंची महिला योगी के सामने रो पड़ी #YogiAdityanath #WestBngalElection2026 #WomenReservation #WomenReservationBillnotPass #MuslimReservation #Bengal #ModiVsMamata #Ghuspaithiya #Rohingya #MamataBanerjee #Kolkata #Emotional1
- जालौन के कोंच नगर में जैसे ही तेज धूप और बढ़ते तापमान ने अपने तेवर दिखाए, वैसे ही मिट्टी के मटकों की मांग अचानक बढ़ गई। सुबह 9 बजे से ही बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी और शीतल जल के लिए लोग मटके खरीदते नजर आए। घरों के साथ-साथ दुकानों और कार्यस्थलों पर भी मटकों की उपयोगिता फिर से बढ़ती दिख रही है। नगर के प्रमुख बाजार सागर चौकी पर मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर अच्छी खासी रौनक देखने को मिली। दुकानदारों ने गर्मी को देखते हुए मटके, सुराही और अन्य पारंपरिक बर्तन सजा लिए हैं। दुकानदार नफीस नासिर ने बताया कि सुराही की कीमत 50 से 80 रुपये के बीच है, जबकि मटके 80 से 150 रुपये तक बिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी गर्मी की शुरुआत है, आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने की उम्मीद है। दूसरे दुकानदार निसार के मुताबिक, आधुनिक समय में भले ही फ्रिज आम हो गए हों, लेकिन कई लोग आज भी मटके के पानी को ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट मानते हैं। खासकर ग्रामीण और पारंपरिक जीवनशैली पसंद करने वाले लोग मटकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। गौरतलब है कि मटके न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि बिजली की खपत भी नहीं करते, जिससे यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हैं। बढ़ती गर्मी के साथ कोंच में मटकों की मांग और कारोबार दोनों में तेजी देखी जा रही है।1