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जशपुर में शिक्षिका और चपरासी फरार आशिकी फिल्म देखने, स्कूली बच्चों की कोई परवाह नही

8 hrs ago
user_हमर जशपुर
हमर जशपुर
Sanna, Jabalpur•
8 hrs ago

जशपुर में शिक्षिका और चपरासी फरार आशिकी फिल्म देखने, स्कूली बच्चों की कोई परवाह नही

More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
  • दरअसल यहाँ का पुल थोड़ा संकरी है जिसके कारण लापरवाही बरतने पर बड़ी घटना का अंजाम देता है यहां घटना होते ही रहते है #news
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    दरअसल यहाँ का पुल थोड़ा संकरी है जिसके कारण लापरवाही बरतने पर बड़ी घटना का अंजाम देता है यहां घटना होते ही रहते है #news
    user_JASHPUR ZONE
    JASHPUR ZONE
    जशपुर, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • रामप्रवेश गुप्ता *महुआडांड़ में शिक्षा व्यवस्था फेल, शिक्षक बेलगाम—जांच में खुली पोल* ..... *प्रखंड के सरकारी स्कूलों में लापरवाही चरम पर.....शिक्षक कई दिनों से बिना सूचना स्कूल से गायब....जांच में पहुंचे जनप्रतिनिधि को शिक्षक अनुपस्थित मिले...गैरहाजिर शिक्षकों ने स्कूल में कोई आवेदन तक नहीं दिया.....पढ़ाई के समय बच्चों को “बालवीर” फिल्म दिखाकर खानापूर्ति.....ग्रामीणों का गंभीर आरोप—अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा खेल.....स्कूल प्रबंधन पूरी तरह फेल, जवाबदेही से बचते नजर आए जिम्मेदार....मौके पर प्राचार्य ने साधी चुप्पी, कुछ भी बोलने से किया इंकार.....बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित, भविष्य के साथ खिलवाड़*.....
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    रामप्रवेश गुप्ता 
*महुआडांड़ में शिक्षा व्यवस्था फेल, शिक्षक बेलगाम—जांच में खुली पोल* ..... *प्रखंड के सरकारी स्कूलों में लापरवाही चरम पर.....शिक्षक कई दिनों से बिना सूचना स्कूल से गायब....जांच में पहुंचे जनप्रतिनिधि को  शिक्षक अनुपस्थित मिले...गैरहाजिर शिक्षकों ने स्कूल में कोई आवेदन तक नहीं दिया.....पढ़ाई के समय बच्चों को “बालवीर” फिल्म दिखाकर खानापूर्ति.....ग्रामीणों का गंभीर आरोप—अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा खेल.....स्कूल प्रबंधन पूरी तरह फेल, जवाबदेही से बचते नजर आए जिम्मेदार....मौके पर प्राचार्य ने साधी चुप्पी, कुछ भी बोलने से किया इंकार.....बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित, भविष्य के साथ खिलवाड़*.....
    user_आदर्श मोबाइल एण्ड रेलवे टिकट
    आदर्श मोबाइल एण्ड रेलवे टिकट
    Mobile Store महुआडांड़, लातेहार, झारखंड•
    23 hrs ago
  • एंकर..आदिवासी क्षेत्र होने के बावजूद, आदिवासी समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है… खासकर पहाड़ी कोरवा जनजाति, जिन्हें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के रूप में पहचान मिली है… आज अपने ही अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं… पीढ़ियों से अपनी जमीन पर जीवन यापन करने वाले इन परिवारों की जमीनें अब बाहरी लोगों द्वारा हड़पी जा रही हैं… अवैध अतिक्रमण और जबरन कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं… चार पीढ़ियों से जिन जमीनों पर इनका जीवन टिका था… आज वही जमीन इनके हाथों से फिसलती नजर आ रही है… बलरामपुर से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत तरकाखाड़ में हालात और भी गंभीर हैं… जहां खुलेआम आदिवासियों की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है… कई मामले कोर्ट में वर्षों से लंबित हैं… लेकिन न्याय की धीमी प्रक्रिया ने पीड़ितों की उम्मीदें लगभग तोड़ दी हैं… सरकार आदिवासी विकास के नाम पर हर साल करोड़ों का बजट और बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणा करती है… लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है… विकास कागजों तक सीमित है… और आदिवासी आज भी अपने हक और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं… पीड़ित पहाड़ी कोरवा समाज का कहना है कि उनके पूर्वजों ने जंगल की जमीन को उपजाऊ बनाकर जीवन बसाया था… लेकिन अब बाहरी लोग और कुछ प्रभावशाली वर्ग उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं… यहां तक कि अधिकारियों द्वारा समझौता कर आधी जमीन छोड़ने का दबाव भी बनाया जा रहा है… जिसे आदिवासी समाज सिरे से खारिज कर रहा है… सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने साफ कहा है कि यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं… बल्कि पूरे जिले में पहाड़ी कोरवा समाज इसी दर्द से गुजर रहा है… उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वर्षों से काबिज लोगों को कानूनी दस्तावेज दिए जाएं… वन अधिकार पट्टा जारी किया जाए… और भूमाफियाओं पर सख्त कार्रवाई हो… चेतावनी भी दी गई है… कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए… तो यह समाज अपनी जमीन और पहचान दोनों खो देगा… और अगर किसी तरह की अप्रिय घटना घटती है… तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी… अब सवाल ये है… कि आखिर कब तक आदिवासी अपने ही हक के लिए संघर्ष करते रहेंगे… और कब उन्हें मिलेगा उनका अधिकार…?
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    एंकर..आदिवासी  क्षेत्र होने के बावजूद, आदिवासी समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है… खासकर पहाड़ी कोरवा जनजाति, जिन्हें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के रूप में पहचान मिली है… आज अपने ही अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं…
पीढ़ियों से अपनी जमीन पर जीवन यापन करने वाले इन परिवारों की जमीनें अब बाहरी लोगों द्वारा हड़पी जा रही हैं… अवैध अतिक्रमण और जबरन कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं… चार पीढ़ियों से जिन जमीनों पर इनका जीवन टिका था… आज वही जमीन इनके हाथों से फिसलती नजर आ रही है…
बलरामपुर से महज 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत तरकाखाड़ में हालात और भी गंभीर हैं… जहां खुलेआम आदिवासियों की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है… कई मामले कोर्ट में वर्षों से लंबित हैं… लेकिन न्याय की धीमी प्रक्रिया ने पीड़ितों की उम्मीदें लगभग तोड़ दी हैं…
सरकार आदिवासी विकास के नाम पर हर साल करोड़ों का बजट और बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणा करती है… लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है… विकास कागजों तक सीमित है… और आदिवासी आज भी अपने हक और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं…
पीड़ित पहाड़ी कोरवा समाज का कहना है कि उनके पूर्वजों ने जंगल की जमीन को उपजाऊ बनाकर जीवन बसाया था… लेकिन अब बाहरी लोग और कुछ प्रभावशाली वर्ग उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं… यहां तक कि अधिकारियों द्वारा समझौता कर आधी जमीन छोड़ने का दबाव भी बनाया जा रहा है… जिसे आदिवासी समाज सिरे से खारिज कर रहा है…
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने साफ कहा है कि यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं… बल्कि पूरे जिले में पहाड़ी कोरवा समाज इसी दर्द से गुजर रहा है… उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वर्षों से काबिज लोगों को कानूनी दस्तावेज दिए जाएं… वन अधिकार पट्टा जारी किया जाए… और भूमाफियाओं पर सख्त कार्रवाई हो…
चेतावनी भी दी गई है… कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए… तो यह समाज अपनी जमीन और पहचान दोनों खो देगा… और अगर किसी तरह की अप्रिय घटना घटती है… तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी…
अब सवाल ये है… कि आखिर कब तक आदिवासी अपने ही हक के लिए संघर्ष करते रहेंगे… और कब उन्हें मिलेगा उनका अधिकार…?
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • मौसम को तो किया कहना जब कब नही कभी भी आज सकती है
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    मौसम को तो किया कहना जब कब नही कभी भी आज सकती है
    user_User5130
    User5130
    Uparkhatanga•
    3 hrs ago
  • सरस्वती शिशु मन्दिर ने धूमधाम से मनाया हिन्दू नववर्ष अम्बिकापुर- सनातन हिन्दू भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 सरस्वती शिशु मन्दिर उ.मा.विद्यालय देवागंज रोड ने प्रतिवर्ष की भांति हिन्दू नववर्ष समीपस्थ ग्राम रामपुर में गुरुवार को धूमधाम से मनाया।आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीपमाला देशमुख शासकीय शिक्षिका, विशिष्ट अतिथि सहव्यवस्थापक प्रतिमा त्रिपाठी और उप सरपंच धरम साय मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने श्रीराम दरबार व भारत माता की छबि पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रतिमा त्रिपाठी ने भारतीय हिन्दू नववर्ष की शुभकामना देते हुए कहा कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस माता शैलपुत्री आप सभी को सुख -समृद्धि व आरोग्य प्रदान करे। भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होती है इसका पौराणिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक अनेकानेक कारण है।सरस्वती सरस्वती शिशु मंदिर ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में सनातन संस्कृति का जनजागरण कार्य में लगी है। विद्यालय की बहनों ने एकल भजन व सामुहिक लोक गीत की मनमोहक प्रस्तुति दिए। अपने उद्बोधन में दीपमाला देशमुख ने हिन्दू नववर्ष के ऐतिहासिक व वैज्ञानिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा इस दिन हम सभी अपने घरों में भगवा ध्वज अवश्य लगायें तथा द्वार पर रंगोली व शाम को दीपक जला कर नववर्ष का स्वागत करें।कार्यक्रम को बरिष्ठ आचार्य भूधर किशोर त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया।कार्यक्रम में काफी संख्या गांववासी उपस्थित रहे। विद्यालय के सभी आचार्य परिवार के सहयोग व उपस्थिति से कार्यक्रम सफल रहा। मंच का संचालन सीमा खानवलकर और आभार प्रदर्शन प्रधानाचार्य सुप्रिया सिंह द्वारा हुआ।भारत माता की आरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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    सरस्वती शिशु मन्दिर ने धूमधाम से मनाया हिन्दू नववर्ष
अम्बिकापुर-  सनातन हिन्दू भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 सरस्वती शिशु मन्दिर उ.मा.विद्यालय देवागंज रोड ने प्रतिवर्ष की भांति हिन्दू नववर्ष समीपस्थ ग्राम रामपुर में गुरुवार को धूमधाम से मनाया।आज के कार्यक्रम  के मुख्य अतिथि दीपमाला देशमुख  शासकीय शिक्षिका, विशिष्ट अतिथि सहव्यवस्थापक प्रतिमा त्रिपाठी और उप सरपंच धरम साय  मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ  अतिथियों ने श्रीराम दरबार व भारत माता की छबि पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रतिमा त्रिपाठी ने भारतीय हिन्दू नववर्ष की शुभकामना देते हुए कहा कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस माता शैलपुत्री आप सभी को सुख -समृद्धि व आरोग्य  प्रदान करे। भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होती है इसका पौराणिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक अनेकानेक कारण है।सरस्वती सरस्वती शिशु मंदिर ऐसे  आयोजनों के माध्यम से समाज में सनातन संस्कृति का जनजागरण  कार्य में लगी है। विद्यालय की बहनों ने एकल भजन व सामुहिक लोक गीत की मनमोहक प्रस्तुति  दिए। अपने उद्बोधन में दीपमाला देशमुख ने हिन्दू नववर्ष के ऐतिहासिक  व वैज्ञानिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा इस दिन हम सभी अपने घरों में भगवा ध्वज अवश्य लगायें तथा द्वार पर रंगोली व शाम को दीपक जला कर नववर्ष का स्वागत  करें।कार्यक्रम को बरिष्ठ आचार्य भूधर किशोर त्रिपाठी ने भी  सम्बोधित किया।कार्यक्रम  में काफी संख्या गांववासी उपस्थित रहे। विद्यालय के सभी आचार्य परिवार के सहयोग व उपस्थिति से कार्यक्रम  सफल रहा। मंच का संचालन सीमा खानवलकर और आभार प्रदर्शन प्रधानाचार्य सुप्रिया सिंह द्वारा हुआ।भारत माता की आरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम  का समापन हुआ।
    user_Himanshu raj
    Himanshu raj
    Social Media Manager अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • Post by Dipak gupta
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    Post by Dipak gupta
    user_Dipak gupta
    Dipak gupta
    पत्रकार गुमला, गुमला, झारखंड•
    4 hrs ago
  • अमन, भाईचारे और खुशियों के साथ चैनपुर में मनाई गई ईद, गूंजे एकता के संदेश मुस्लिम समुदाय का प्रमुख पर्व ईद-उल-फितर चैनपुर प्रखंड में इस वर्ष हर्षोल्लास और आपसी सौहार्द के साथ मनाया गया। जानकारी देते हुए सुबह लगभग ग्यारह बजे बताया गया कि बरवेनगर, जमगई एवं चैनपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा की गई, जहां अकीदतमंदों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ी। ईद की नमाज के दौरान ईदगाहों में विशेष रूप से अधिक भीड़ देखने को मिली। जामा मस्जिद में इमाम हसमत रजा की अगुवाई में नमाज अदा की गई, जिसमें क्षेत्र की अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ मांगी गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी, जिससे पूरे क्षेत्र में भाईचारे का माहौल बना रहा। इस अवसर पर चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने लोगों को ईद की शुभकामनाएं देते हुए शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील की। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल एवं दंडाधिकारी तैनात रहे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। ईद के मौके पर बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। नए कपड़ों में सजे बच्चे एक-दूसरे के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान करते नजर आए। मुस्लिम बहुल इलाकों में दिनभर उत्सव जैसा माहौल बना रहा। चैनपुर अंजुमन इस्लामिया मस्जिद में आयोजित कार्यक्रम में इमाम हसमत रजा, सदर शकील खान, सेक्रेटरी जहरूदिम खान सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर अंजुमन कमेटी के सदर शकील खान ने कहा कि “ईद हमें यह सिखाती है कि हम अपने दिलों से नफरत और भेदभाव को खत्म करें और एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखें। समाज की असली ताकत उसकी एकता और भाईचारे में होती है।” उन्होंने आगे कहा कि “इस पवित्र मौके पर हमें अपने आसपास के जरूरतमंदों का ख्याल रखना चाहिए और उन्हें भी अपनी खुशियों में शामिल करना चाहिए। जब समाज का हर व्यक्ति खुश रहेगा, तभी सच्चे मायनों में ईद की खुशी पूरी होगी।” उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी मिलकर शांति, सौहार्द और आपसी विश्वास को बनाए रखें, ताकि क्षेत्र में हमेशा सकारात्मक वातावरण बना रहे। इस प्रकार, ईद-उल-फितर का यह पर्व चैनपुर प्रखंड में सामाजिक एकता, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देकर शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
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    अमन, भाईचारे और खुशियों के साथ चैनपुर में मनाई गई ईद, गूंजे एकता के संदेश
मुस्लिम समुदाय का प्रमुख पर्व ईद-उल-फितर चैनपुर प्रखंड में इस वर्ष हर्षोल्लास और आपसी सौहार्द के साथ मनाया गया। जानकारी देते हुए सुबह लगभग ग्यारह बजे बताया गया कि बरवेनगर, जमगई एवं चैनपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा की गई, जहां अकीदतमंदों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ी।
ईद की नमाज के दौरान ईदगाहों में विशेष रूप से अधिक भीड़ देखने को मिली। जामा मस्जिद में इमाम हसमत रजा की अगुवाई में नमाज अदा की गई, जिसमें क्षेत्र की अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ मांगी गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी, जिससे पूरे क्षेत्र में भाईचारे का माहौल बना रहा।
इस अवसर पर चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने लोगों को ईद की शुभकामनाएं देते हुए शांति और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील की। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल एवं दंडाधिकारी तैनात रहे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
ईद के मौके पर बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। नए कपड़ों में सजे बच्चे एक-दूसरे के साथ मिठाइयों का आदान-प्रदान करते नजर आए। मुस्लिम बहुल इलाकों में दिनभर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
चैनपुर अंजुमन इस्लामिया मस्जिद में आयोजित कार्यक्रम में इमाम हसमत रजा, सदर शकील खान, सेक्रेटरी जहरूदिम खान सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अंजुमन कमेटी के सदर शकील खान ने कहा कि “ईद हमें यह सिखाती है कि हम अपने दिलों से नफरत और भेदभाव को खत्म करें और एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखें। समाज की असली ताकत उसकी एकता और भाईचारे में होती है।”
उन्होंने आगे कहा कि “इस पवित्र मौके पर हमें अपने आसपास के जरूरतमंदों का ख्याल रखना चाहिए और उन्हें भी अपनी खुशियों में शामिल करना चाहिए। जब समाज का हर व्यक्ति खुश रहेगा, तभी सच्चे मायनों में ईद की खुशी पूरी होगी।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी मिलकर शांति, सौहार्द और आपसी विश्वास को बनाए रखें, ताकि क्षेत्र में हमेशा सकारात्मक वातावरण बना रहे।
इस प्रकार, ईद-उल-फितर का यह पर्व चैनपुर प्रखंड में सामाजिक एकता, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देकर शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
    user_चैनपुर अपडेट
    चैनपुर अपडेट
    Classified ads newspaper publisher चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    1 hr ago
  • हमारे यहां हर तरह के टैटू बनाए एवं मिटाए जाते हैं एवं फेस के दाग धब्बे उच्च तकनीक लेजर मशीन द्वारा हटाए जाते हैं
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    हमारे यहां हर तरह के टैटू बनाए एवं मिटाए जाते हैं एवं फेस के दाग धब्बे उच्च तकनीक लेजर मशीन द्वारा हटाए जाते हैं
    user_Pawan arya
    Pawan arya
    Art Therapist गुमला, गुमला, झारखंड•
    13 hrs ago
  • ​महासमुंद/बागबाहरा: छत्तीसगढ़ के बागबाहरा क्षेत्र का एक शांत गांव मोंगरापाली इन दिनों शिक्षा जगत के एक ऐसे कलंक की गवाह बन रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। यहाँ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल (केंद्र क्रमांक 0614) अब परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि 'नकल की मंडी' बन चुका है। आरोप है कि यहाँ ज्ञान की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का वह 'जिन्न' बह रहा है जो पिछले तीन सालों से सिस्टम की फाइलों में कैद था। ​शिक्षा का 'सौदा': 25 लाख की सालाना उगाही? ​मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी हैं। सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, इस केंद्र के प्रभारी प्राचार्य विकास कुमार साहू पर परीक्षार्थियों से 'पास कराने' के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप है। ​रेट कार्ड: चर्चा है कि हर साल यहाँ 20 से 25 लाख रुपये का अवैध कारोबार होता है। ​आउटसोर्सिंग: दूसरे जिलों से परीक्षार्थियों को बाकायदा 'सेटिंग' के तहत यहाँ बुलाया जाता है। ​व्हाइट बोर्ड पर किस्मत: परीक्षा हॉल में शिक्षक नहीं, बल्कि 'ठेकेदार' बैठते हैं और व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर परीक्षार्थियों की 'किस्मत' बांचते हैं। ​शिकायत, बगावत और डर का 'यू-टर्न' ​इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि संस्थान के ही दो शिक्षकों— जे.पी. साहू और संतोष दुबे ने किया। मामला जब रायपुर स्थित संभागीय कार्यालय (लोक शिक्षण संचालनालय) पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। ​ट्विस्ट: जांच शुरू होते ही शिकायतकर्ता शिक्षक अपने बयानों से पलट गए और लिखित में कह दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। अब सवाल यह है कि: ​क्या उन पर कोई बड़ा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है? ​क्या 'मोंगरापाली सिंडिकेट' ने उन्हें चुप करा दिया है? ​DEO की एंट्री: "कागजों से नहीं, कानून से होगी जांच" ​मामला गर्म होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय लहरे ने अपनी टीम के साथ केंद्र पर धावा बोला। करीब दो घंटे तक चली सघन निगरानी के बाद DEO ने स्पष्ट किया कि मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। ​विजय लहरे (DEO, महासमुंद) का कड़ा रुख: ​"हमने अपनी मौजूदगी में उत्तर पुस्तिकाओं को सील करवाकर थाने में जमा कराया है। शिकायतकर्ता भले ही अपने बयानों से मुकर जाएं, लेकिन हमारे पास उच्च कार्यालय से जांच के आदेश हैं। हम विधिवत जांच करेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तय है।" ​सिस्टम पर 5 तीखे सवाल: ​तीन साल की चुप्पी: अगर यह खेल तीन साल से चल रहा था, तो ब्लॉक और जिला स्तर के उड़नदस्ते अब तक नींद में क्यों थे? ​सेटिंग का नेटवर्क: क्या यह उगाही सिर्फ स्कूल स्तर तक सीमित है या इसका हिस्सा ऊपर तक जा रहा है? ​ओपन स्कूल की साख: उन गरीब और मेहनती छात्रों का क्या, जो अपनी मेहनत से परीक्षा देते हैं? क्या उनके भविष्य का सौदा चंद रुपयों के लिए कर दिया जाएगा? ​शिकायतकर्ताओं का यू-टर्न: जांच एजेंसी यह पता क्यों नहीं लगा रही कि शिकायतकर्ताओं को डराया किसने? ​जिन्न या जंजाल: क्या प्रशासन इस 'नकल के जिन्न' को वापस बोतल में बंद कर पाएगा या यह भ्रष्टाचार का वायरस दूसरे केंद्रों को भी निगल जाएगा? ​साख दांव पर है! ​ओपन स्कूल प्रणाली उन लोगों के लिए 'दूसरा मौका' होती है जो शिक्षा की मुख्यधारा से टूट जाते हैं। लेकिन मोंगरापाली कांड ने साबित कर दिया है कि जहाँ मौका होता है, वहां कुछ लोग 'धोखा' ढूंढ ही लेते हैं। मोंगरापाली का यह मामला अब जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है। ​सावधान! यह तो सिर्फ एक केंद्र की बानगी है। अगले अंक में हम करेंगे एक और ओपन स्कूल का सनसनीखेज पर्दाफाश... जल्द ही!
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    ​महासमुंद/बागबाहरा: छत्तीसगढ़ के बागबाहरा क्षेत्र का एक शांत गांव मोंगरापाली इन दिनों शिक्षा जगत के एक ऐसे कलंक की गवाह बन रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। यहाँ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल (केंद्र क्रमांक 0614) अब परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि 'नकल की मंडी' बन चुका है। आरोप है कि यहाँ ज्ञान की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का वह 'जिन्न' बह रहा है जो पिछले तीन सालों से सिस्टम की फाइलों में कैद था।
​शिक्षा का 'सौदा': 25 लाख की सालाना उगाही?
​मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी हैं। सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, इस केंद्र के प्रभारी प्राचार्य विकास कुमार साहू पर परीक्षार्थियों से 'पास कराने' के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप है।
​रेट कार्ड: चर्चा है कि हर साल यहाँ 20 से 25 लाख रुपये का अवैध कारोबार होता है।
​आउटसोर्सिंग: दूसरे जिलों से परीक्षार्थियों को बाकायदा 'सेटिंग' के तहत यहाँ बुलाया जाता है।
​व्हाइट बोर्ड पर किस्मत: परीक्षा हॉल में शिक्षक नहीं, बल्कि 'ठेकेदार' बैठते हैं और व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर परीक्षार्थियों की 'किस्मत' बांचते हैं।
​शिकायत, बगावत और डर का 'यू-टर्न'
​इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि संस्थान के ही दो शिक्षकों— जे.पी. साहू और संतोष दुबे ने किया। मामला जब रायपुर स्थित संभागीय कार्यालय (लोक शिक्षण संचालनालय) पहुंचा, तो हड़कंप मच गया।
​ट्विस्ट: जांच शुरू होते ही शिकायतकर्ता शिक्षक अपने बयानों से पलट गए और लिखित में कह दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। अब सवाल यह है कि:
​क्या उन पर कोई बड़ा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है?
​क्या 'मोंगरापाली सिंडिकेट' ने उन्हें चुप करा दिया है?
​DEO की एंट्री: "कागजों से नहीं, कानून से होगी जांच"
​मामला गर्म होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय लहरे ने अपनी टीम के साथ केंद्र पर धावा बोला। करीब दो घंटे तक चली सघन निगरानी के बाद DEO ने स्पष्ट किया कि मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है।
​विजय लहरे (DEO, महासमुंद) का कड़ा रुख:
​"हमने अपनी मौजूदगी में उत्तर पुस्तिकाओं को सील करवाकर थाने में जमा कराया है। शिकायतकर्ता भले ही अपने बयानों से मुकर जाएं, लेकिन हमारे पास उच्च कार्यालय से जांच के आदेश हैं। हम विधिवत जांच करेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तय है।"
​सिस्टम पर 5 तीखे सवाल:
​तीन साल की चुप्पी: अगर यह खेल तीन साल से चल रहा था, तो ब्लॉक और जिला स्तर के उड़नदस्ते अब तक नींद में क्यों थे?
​सेटिंग का नेटवर्क: क्या यह उगाही सिर्फ स्कूल स्तर तक सीमित है या इसका हिस्सा ऊपर तक जा रहा है?
​ओपन स्कूल की साख: उन गरीब और मेहनती छात्रों का क्या, जो अपनी मेहनत से परीक्षा देते हैं? क्या उनके भविष्य का सौदा चंद रुपयों के लिए कर दिया जाएगा?
​शिकायतकर्ताओं का यू-टर्न: जांच एजेंसी यह पता क्यों नहीं लगा रही कि शिकायतकर्ताओं को डराया किसने?
​जिन्न या जंजाल: क्या प्रशासन इस 'नकल के जिन्न' को वापस बोतल में बंद कर पाएगा या यह भ्रष्टाचार का वायरस दूसरे केंद्रों को भी निगल जाएगा?
​साख दांव पर है!
​ओपन स्कूल प्रणाली उन लोगों के लिए 'दूसरा मौका' होती है जो शिक्षा की मुख्यधारा से टूट जाते हैं। लेकिन मोंगरापाली कांड ने साबित कर दिया है कि जहाँ मौका होता है, वहां कुछ लोग 'धोखा' ढूंढ ही लेते हैं। मोंगरापाली का यह मामला अब जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है।
​सावधान! यह तो सिर्फ एक केंद्र की बानगी है। अगले अंक में हम करेंगे एक और ओपन स्कूल का सनसनीखेज पर्दाफाश... जल्द ही!
    user_RISHIKESH MISHRA
    RISHIKESH MISHRA
    Local News Reporter लैलूंगा, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
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