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महा-खुलासा: मोंगरापाली ओपन स्कूल में 'नकल का जिन्न' आज़ाद, शिक्षा के मंदिर में चल रहा था 'पास गारंटी' का काला बाज़ार!... ​महासमुंद/बागबाहरा: छत्तीसगढ़ के बागबाहरा क्षेत्र का एक शांत गांव मोंगरापाली इन दिनों शिक्षा जगत के एक ऐसे कलंक की गवाह बन रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। यहाँ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल (केंद्र क्रमांक 0614) अब परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि 'नकल की मंडी' बन चुका है। आरोप है कि यहाँ ज्ञान की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का वह 'जिन्न' बह रहा है जो पिछले तीन सालों से सिस्टम की फाइलों में कैद था। ​शिक्षा का 'सौदा': 25 लाख की सालाना उगाही? ​मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी हैं। सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, इस केंद्र के प्रभारी प्राचार्य विकास कुमार साहू पर परीक्षार्थियों से 'पास कराने' के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप है। ​रेट कार्ड: चर्चा है कि हर साल यहाँ 20 से 25 लाख रुपये का अवैध कारोबार होता है। ​आउटसोर्सिंग: दूसरे जिलों से परीक्षार्थियों को बाकायदा 'सेटिंग' के तहत यहाँ बुलाया जाता है। ​व्हाइट बोर्ड पर किस्मत: परीक्षा हॉल में शिक्षक नहीं, बल्कि 'ठेकेदार' बैठते हैं और व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर परीक्षार्थियों की 'किस्मत' बांचते हैं। ​शिकायत, बगावत और डर का 'यू-टर्न' ​इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि संस्थान के ही दो शिक्षकों— जे.पी. साहू और संतोष दुबे ने किया। मामला जब रायपुर स्थित संभागीय कार्यालय (लोक शिक्षण संचालनालय) पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। ​ट्विस्ट: जांच शुरू होते ही शिकायतकर्ता शिक्षक अपने बयानों से पलट गए और लिखित में कह दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। अब सवाल यह है कि: ​क्या उन पर कोई बड़ा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है? ​क्या 'मोंगरापाली सिंडिकेट' ने उन्हें चुप करा दिया है? ​DEO की एंट्री: "कागजों से नहीं, कानून से होगी जांच" ​मामला गर्म होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय लहरे ने अपनी टीम के साथ केंद्र पर धावा बोला। करीब दो घंटे तक चली सघन निगरानी के बाद DEO ने स्पष्ट किया कि मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। ​विजय लहरे (DEO, महासमुंद) का कड़ा रुख: ​"हमने अपनी मौजूदगी में उत्तर पुस्तिकाओं को सील करवाकर थाने में जमा कराया है। शिकायतकर्ता भले ही अपने बयानों से मुकर जाएं, लेकिन हमारे पास उच्च कार्यालय से जांच के आदेश हैं। हम विधिवत जांच करेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तय है।" ​सिस्टम पर 5 तीखे सवाल: ​तीन साल की चुप्पी: अगर यह खेल तीन साल से चल रहा था, तो ब्लॉक और जिला स्तर के उड़नदस्ते अब तक नींद में क्यों थे? ​सेटिंग का नेटवर्क: क्या यह उगाही सिर्फ स्कूल स्तर तक सीमित है या इसका हिस्सा ऊपर तक जा रहा है? ​ओपन स्कूल की साख: उन गरीब और मेहनती छात्रों का क्या, जो अपनी मेहनत से परीक्षा देते हैं? क्या उनके भविष्य का सौदा चंद रुपयों के लिए कर दिया जाएगा? ​शिकायतकर्ताओं का यू-टर्न: जांच एजेंसी यह पता क्यों नहीं लगा रही कि शिकायतकर्ताओं को डराया किसने? ​जिन्न या जंजाल: क्या प्रशासन इस 'नकल के जिन्न' को वापस बोतल में बंद कर पाएगा या यह भ्रष्टाचार का वायरस दूसरे केंद्रों को भी निगल जाएगा? ​साख दांव पर है! ​ओपन स्कूल प्रणाली उन लोगों के लिए 'दूसरा मौका' होती है जो शिक्षा की मुख्यधारा से टूट जाते हैं। लेकिन मोंगरापाली कांड ने साबित कर दिया है कि जहाँ मौका होता है, वहां कुछ लोग 'धोखा' ढूंढ ही लेते हैं। मोंगरापाली का यह मामला अब जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है। ​सावधान! यह तो सिर्फ एक केंद्र की बानगी है। अगले अंक में हम करेंगे एक और ओपन स्कूल का सनसनीखेज पर्दाफाश... जल्द ही!

3 hrs ago
user_RISHIKESH MISHRA
RISHIKESH MISHRA
Local News Reporter लैलूंगा, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
3 hrs ago

महा-खुलासा: मोंगरापाली ओपन स्कूल में 'नकल का जिन्न' आज़ाद, शिक्षा के मंदिर में चल रहा था 'पास गारंटी' का काला बाज़ार!... ​महासमुंद/बागबाहरा: छत्तीसगढ़ के बागबाहरा क्षेत्र का एक शांत गांव मोंगरापाली इन दिनों शिक्षा जगत के एक ऐसे कलंक की गवाह बन रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। यहाँ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल (केंद्र क्रमांक 0614) अब परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि 'नकल की मंडी' बन चुका है। आरोप है कि यहाँ ज्ञान की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का वह 'जिन्न' बह रहा है जो पिछले तीन सालों से सिस्टम की फाइलों में कैद था। ​शिक्षा का 'सौदा': 25 लाख की सालाना उगाही? ​मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी हैं। सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, इस केंद्र के प्रभारी प्राचार्य विकास कुमार साहू पर परीक्षार्थियों से 'पास कराने' के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप है। ​रेट कार्ड: चर्चा है कि हर साल यहाँ 20 से 25 लाख रुपये का अवैध कारोबार होता है। ​आउटसोर्सिंग: दूसरे जिलों से परीक्षार्थियों को बाकायदा 'सेटिंग' के तहत यहाँ बुलाया जाता है। ​व्हाइट बोर्ड पर किस्मत: परीक्षा हॉल में शिक्षक नहीं, बल्कि 'ठेकेदार' बैठते हैं और व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर परीक्षार्थियों की 'किस्मत' बांचते हैं। ​शिकायत, बगावत और डर का 'यू-टर्न' ​इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि संस्थान के ही दो शिक्षकों— जे.पी. साहू और संतोष दुबे ने किया। मामला जब रायपुर स्थित संभागीय कार्यालय (लोक शिक्षण संचालनालय) पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। ​ट्विस्ट: जांच शुरू होते ही शिकायतकर्ता शिक्षक अपने बयानों से पलट गए और लिखित में कह दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। अब सवाल यह है कि: ​क्या उन पर कोई बड़ा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है? ​क्या 'मोंगरापाली सिंडिकेट' ने उन्हें चुप करा दिया है? ​DEO की एंट्री: "कागजों से नहीं, कानून से होगी

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जांच" ​मामला गर्म होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय लहरे ने अपनी टीम के साथ केंद्र पर धावा बोला। करीब दो घंटे तक चली सघन निगरानी के बाद DEO ने स्पष्ट किया कि मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। ​विजय लहरे (DEO, महासमुंद) का कड़ा रुख: ​"हमने अपनी मौजूदगी में उत्तर पुस्तिकाओं को सील करवाकर थाने में जमा कराया है। शिकायतकर्ता भले ही अपने बयानों से मुकर जाएं, लेकिन हमारे पास उच्च कार्यालय से जांच के आदेश हैं। हम विधिवत जांच करेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तय है।" ​सिस्टम पर 5 तीखे सवाल: ​तीन साल की चुप्पी: अगर यह खेल तीन साल से चल रहा था, तो ब्लॉक और जिला स्तर के उड़नदस्ते अब तक नींद में क्यों थे? ​सेटिंग का नेटवर्क: क्या यह उगाही सिर्फ स्कूल स्तर तक सीमित है या इसका हिस्सा ऊपर तक जा रहा है? ​ओपन स्कूल की साख: उन गरीब और मेहनती छात्रों का क्या, जो अपनी मेहनत से परीक्षा देते हैं? क्या उनके भविष्य का सौदा चंद रुपयों के लिए कर दिया जाएगा? ​शिकायतकर्ताओं का यू-टर्न: जांच एजेंसी यह पता क्यों नहीं लगा रही कि शिकायतकर्ताओं को डराया किसने? ​जिन्न या जंजाल: क्या प्रशासन इस 'नकल के जिन्न' को वापस बोतल में बंद कर पाएगा या यह भ्रष्टाचार का वायरस दूसरे केंद्रों को भी निगल जाएगा? ​साख दांव पर है! ​ओपन स्कूल प्रणाली उन लोगों के लिए 'दूसरा मौका' होती है जो शिक्षा की मुख्यधारा से टूट जाते हैं। लेकिन मोंगरापाली कांड ने साबित कर दिया है कि जहाँ मौका होता है, वहां कुछ लोग 'धोखा' ढूंढ ही लेते हैं। मोंगरापाली का यह मामला अब जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है। ​सावधान! यह तो सिर्फ एक केंद्र की बानगी है। अगले अंक में हम करेंगे एक और ओपन स्कूल का सनसनीखेज पर्दाफाश... जल्द ही!

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    ​महासमुंद/बागबाहरा: छत्तीसगढ़ के बागबाहरा क्षेत्र का एक शांत गांव मोंगरापाली इन दिनों शिक्षा जगत के एक ऐसे कलंक की गवाह बन रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। यहाँ स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल (केंद्र क्रमांक 0614) अब परीक्षा केंद्र नहीं, बल्कि 'नकल की मंडी' बन चुका है। आरोप है कि यहाँ ज्ञान की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का वह 'जिन्न' बह रहा है जो पिछले तीन सालों से सिस्टम की फाइलों में कैद था।
​शिक्षा का 'सौदा': 25 लाख की सालाना उगाही?
​मोंगरापाली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी हैं। सूत्रों और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, इस केंद्र के प्रभारी प्राचार्य विकास कुमार साहू पर परीक्षार्थियों से 'पास कराने' के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप है।
​रेट कार्ड: चर्चा है कि हर साल यहाँ 20 से 25 लाख रुपये का अवैध कारोबार होता है।
​आउटसोर्सिंग: दूसरे जिलों से परीक्षार्थियों को बाकायदा 'सेटिंग' के तहत यहाँ बुलाया जाता है।
​व्हाइट बोर्ड पर किस्मत: परीक्षा हॉल में शिक्षक नहीं, बल्कि 'ठेकेदार' बैठते हैं और व्हाइट बोर्ड पर उत्तर लिखकर परीक्षार्थियों की 'किस्मत' बांचते हैं।
​शिकायत, बगावत और डर का 'यू-टर्न'
​इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि संस्थान के ही दो शिक्षकों— जे.पी. साहू और संतोष दुबे ने किया। मामला जब रायपुर स्थित संभागीय कार्यालय (लोक शिक्षण संचालनालय) पहुंचा, तो हड़कंप मच गया।
​ट्विस्ट: जांच शुरू होते ही शिकायतकर्ता शिक्षक अपने बयानों से पलट गए और लिखित में कह दिया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। अब सवाल यह है कि:
​क्या उन पर कोई बड़ा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है?
​क्या 'मोंगरापाली सिंडिकेट' ने उन्हें चुप करा दिया है?
​DEO की एंट्री: "कागजों से नहीं, कानून से होगी जांच"
​मामला गर्म होते ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय लहरे ने अपनी टीम के साथ केंद्र पर धावा बोला। करीब दो घंटे तक चली सघन निगरानी के बाद DEO ने स्पष्ट किया कि मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है।
​विजय लहरे (DEO, महासमुंद) का कड़ा रुख:
​"हमने अपनी मौजूदगी में उत्तर पुस्तिकाओं को सील करवाकर थाने में जमा कराया है। शिकायतकर्ता भले ही अपने बयानों से मुकर जाएं, लेकिन हमारे पास उच्च कार्यालय से जांच के आदेश हैं। हम विधिवत जांच करेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई तय है।"
​सिस्टम पर 5 तीखे सवाल:
​तीन साल की चुप्पी: अगर यह खेल तीन साल से चल रहा था, तो ब्लॉक और जिला स्तर के उड़नदस्ते अब तक नींद में क्यों थे?
​सेटिंग का नेटवर्क: क्या यह उगाही सिर्फ स्कूल स्तर तक सीमित है या इसका हिस्सा ऊपर तक जा रहा है?
​ओपन स्कूल की साख: उन गरीब और मेहनती छात्रों का क्या, जो अपनी मेहनत से परीक्षा देते हैं? क्या उनके भविष्य का सौदा चंद रुपयों के लिए कर दिया जाएगा?
​शिकायतकर्ताओं का यू-टर्न: जांच एजेंसी यह पता क्यों नहीं लगा रही कि शिकायतकर्ताओं को डराया किसने?
​जिन्न या जंजाल: क्या प्रशासन इस 'नकल के जिन्न' को वापस बोतल में बंद कर पाएगा या यह भ्रष्टाचार का वायरस दूसरे केंद्रों को भी निगल जाएगा?
​साख दांव पर है!
​ओपन स्कूल प्रणाली उन लोगों के लिए 'दूसरा मौका' होती है जो शिक्षा की मुख्यधारा से टूट जाते हैं। लेकिन मोंगरापाली कांड ने साबित कर दिया है कि जहाँ मौका होता है, वहां कुछ लोग 'धोखा' ढूंढ ही लेते हैं। मोंगरापाली का यह मामला अब जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है।
​सावधान! यह तो सिर्फ एक केंद्र की बानगी है। अगले अंक में हम करेंगे एक और ओपन स्कूल का सनसनीखेज पर्दाफाश... जल्द ही!
    user_RISHIKESH MISHRA
    RISHIKESH MISHRA
    Local News Reporter लैलूंगा, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • मैनपाट के सैला रिसॉर्ट पर विधानसभा में उठा सवाल मैनपाट स्थित सैला रिसॉर्ट को लेकर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने विधानसभा में प्रश्न उठाया। उन्होंने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से रिसॉर्ट की भूमि, निर्माण अवधि, लागत और सुविधाओं की जानकारी मांगी। मंत्री ने बताया कि सैला रिसॉर्ट 8.093 हेक्टेयर में फैला है, जिसका निर्माण 2019 से 2021 के बीच 2137.38 लाख रुपये की लागत से हुआ। डीपीआर में ट्रायबल वर्कशॉप, साइकिल ट्रैक, कैफेटेरिया, हर्बल हाट, टूरिस्ट सेंटर सहित कई सुविधाएं शामिल हैं। रिसॉर्ट के मेंटेनेंस के लिए प्रतिमाह ₹67,630 निर्धारित है। विधायक टोप्पो ने कहा कि कुछ कार्य अब भी अधूरे हैं, इसलिए स्थल निरीक्षण जरूरी है। साथ ही मेंटेनेंस कार्यों में स्थानीय समूहों को जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की।
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    मैनपाट के सैला रिसॉर्ट पर विधानसभा में उठा सवाल
मैनपाट स्थित सैला रिसॉर्ट को लेकर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने विधानसभा में प्रश्न उठाया। उन्होंने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से रिसॉर्ट की भूमि, निर्माण अवधि, लागत और सुविधाओं की जानकारी मांगी।
मंत्री ने बताया कि सैला रिसॉर्ट 8.093 हेक्टेयर में फैला है, जिसका निर्माण 2019 से 2021 के बीच 2137.38 लाख रुपये की लागत से हुआ। डीपीआर में ट्रायबल वर्कशॉप, साइकिल ट्रैक, कैफेटेरिया, हर्बल हाट, टूरिस्ट सेंटर सहित कई सुविधाएं शामिल हैं। रिसॉर्ट के मेंटेनेंस के लिए प्रतिमाह ₹67,630 निर्धारित है।
विधायक टोप्पो ने कहा कि कुछ कार्य अब भी अधूरे हैं, इसलिए स्थल निरीक्षण जरूरी है। साथ ही मेंटेनेंस कार्यों में स्थानीय समूहों को जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की।
    user_Sunil Gupta
    Sunil Gupta
    सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • आरोपी के कृत्य को सार्वजनिक कर पुलिस ने दिया संदेश—अब गुंडागर्दी पर सीधे कार्रवाई होगी
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    आरोपी के कृत्य को सार्वजनिक कर पुलिस ने दिया संदेश—अब गुंडागर्दी पर सीधे कार्रवाई होगी
    user_Pooja Jaiswal Journalist
    Pooja Jaiswal Journalist
    Voice of people खरसिया, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • Post by Gautam karsh
    1
    Post by Gautam karsh
    user_Gautam karsh
    Gautam karsh
    Farmer Malkharoda, Sakti•
    2 hrs ago
  • रतनपुर में माँ महामाया मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, माता रानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। बट वृक्ष पर नारियल बांधने की विशेष मान्यता है, देखिए पूरी खबर
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    रतनपुर में माँ महामाया मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, माता रानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। बट वृक्ष पर नारियल बांधने की विशेष मान्यता है, देखिए पूरी खबर
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • दरअसल यहाँ का पुल थोड़ा संकरी है जिसके कारण लापरवाही बरतने पर बड़ी घटना का अंजाम देता है यहां घटना होते ही रहते है #news
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    दरअसल यहाँ का पुल थोड़ा संकरी है जिसके कारण लापरवाही बरतने पर बड़ी घटना का अंजाम देता है यहां घटना होते ही रहते है #news
    user_JASHPUR ZONE
    JASHPUR ZONE
    जशपुर, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    16 hrs ago
  • Post by हमर जशपुर
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    Post by हमर जशपुर
    user_हमर जशपुर
    हमर जशपुर
    Sanna, Jabalpur•
    10 hrs ago
  • Post by Pooja Jaiswal Journalist
    1
    Post by Pooja Jaiswal Journalist
    user_Pooja Jaiswal Journalist
    Pooja Jaiswal Journalist
    Voice of people खरसिया, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
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