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बिहार के अरवल सदर अस्पताल में डॉक्टर और नर्स की लापरवाही से ऑपरेशन के दौरान एक गर्भवती महिला की जान चली गई। इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और सभी स्टाफ ऑपरेशन थिएटर में ताला मारकर मौके से फरार हो गए।
Baban पासवान
बिहार के अरवल सदर अस्पताल में डॉक्टर और नर्स की लापरवाही से ऑपरेशन के दौरान एक गर्भवती महिला की जान चली गई। इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और सभी स्टाफ ऑपरेशन थिएटर में ताला मारकर मौके से फरार हो गए।
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- बिहार के अरवल सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद भड़की घटना को भाकपा–माले ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पार्टी ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। भाकपा-माले का आरोप है कि इस दुखद घटना की आड़ में पूर्व विधायक का. महानंद सिंह को झूठे मुकदमे में फंसाने की राजनीतिक साजिश रची जा रही है, जो पूरी तरह तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण है। पार्टी के अनुसार, महिला की मृत्यु की सूचना मिलने पर पूर्व विधायक का. महानंद सिंह शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने सिविल सर्जन से फोन पर चर्चा के लिए आने का आग्रह किया था, लेकिन सिविल सर्जन अपने कक्ष के बजाय सीधे आक्रोशित भीड़ के बीच पहुंच गए। इसी अफरा-तफरी के दौरान भीड़ में मौजूद कुछ अराजक और असामाजिक तत्वों ने सिविल सर्जन को धक्का दे दिया, जिससे वे गिर पड़े और उन्हें चोटें आईं। भाकपा–माले ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि इस घटना से पूर्व विधायक या उनके समर्थकों का कोई लेना-देना नहीं है। वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि महानंद सिंह भीड़ को शांत कराने और संयम बरतने की अपील कर रहे थे। भाकपा–माले का कहना है कि भाजपा के इशारे पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर जनप्रतिनिधियों और जनआंदोलनों को दबाया जा रहा है। इसके अलावा, पार्टी ने अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर करते हुए बताया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के प्रभारी को 15 दिन पहले कार्यमुक्त कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने अब तक प्रभार नहीं सौंपा था, जिससे समन्वय और चिकित्सकीय व्यवस्था प्रभावित हुई। पार्टी ने महिला की मौत की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अस्पताल कर्मचारियों पर कार्रवाई, पूर्व विधायक पर दर्ज झूठा मुकदमा वापस लेने और सिविल सर्जन को धक्का देने वाले असली आरोपी की पहचान करने की मांग की है। इस संबंध में जल्द ही वामपंथी और महागठबंधन नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रशासन से मुलाकात करेगा। संवाददाता सम्मेलन को पार्टी के जोन प्रभारी कुमार परवेज, पूर्व विधायक का. महानंद सिंह, जिला सचिव जितेंद्र यादव और युवा नेता सुएब आलम ने संबोधित किया।1
- बिहार में कोड़ा गोलीकांड को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने अपनी आवाज उठाई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस मामले के दो आरोपी अब भी फरार हैं।1
- बिहार के कटरा प्रखंड अंतर्गत रतनपुर से लखनपुर पंचायत के वार्ड नंबर 14 के लिए पार्सल जाने वालों के संबंध में बात कही गई है।1
- भोजपुर के चारपोखरी में अनुमंडल प्रशासन ने राशन कार्ड से वंचित गरीब एवं महादलित परिवारों को लाभ दिलाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। एसडीओ कृष्ण कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी विकास मित्रों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र परिवारों की पहचान कर तुरंत ऑनलाइन आवेदन सुनिश्चित कराएं। शनिवार शाम करीब 5:00 बजे एसडीओ ने बैठक में स्पष्ट किया कि जिन पात्र लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है, उनका पहले जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर आधार कार्ड तैयार कराया जाए। नए राशन कार्ड के आवेदन के लिए प्रपत्र ‘क’ का उपयोग करना होगा, जबकि नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए प्रपत्र ‘ख’ में आवेदन करना होगा। इस विशेष अभियान की बेहद सख्त निगरानी की जाएगी, जिसके तहत हर तीन दिन पर प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे आवेदनों की जांच पूरी कर योग्य पाए गए परिवारों को जल्द से जल्द राशन कार्ड जारी करना सुनिश्चित करें।1
- दिल्ली में सोनम वांगचुक के साथ हुए पुलिसिया व्यवहार की तस्वीरों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शांतिपूर्ण आंदोलन करने और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतंत्र की असली पहचान है, लेकिन सत्ता के घमंड में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, जनता की इस आवाज को दबाया जरूर जा सकता है, लेकिन इसे कभी खत्म नहीं किया जा सकता। अब देश में अति हो चुकी है और लोकतंत्र के भीतर सवाल पूछने वालों को दबाने के बजाय उनकी बात को सुना जाना चाहिए। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या अब लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाना भी कोई गुनाह बन गया है?1
- औरंगाबाद के हसपुरा अंचल कार्यालय में जमीनी विवादों के निपटारे को लेकर जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान आयोजित जनता दरबार में सीओ सुनील कुमार, आरओ विनय कृष्ण और दीपक कुमार उपस्थित रहे।1
- बिहार के भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड में सरकार के महत्वाकांक्षी टीबी मुक्त उन्मूलन अभियान को लेकर बेहद चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुशांत कुमार गुप्ता राज्य स्तर से निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस अभियान के तहत विशेष रूप से महादलित बस्तियों में सर्वे करने और डाटा अपलोड करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन हाल ही में अपलोड किए गए आंकड़े बेहद निराशाजनक पाए गए हैं। अधिकारियों ने इसे “चिंताजनक स्थिति” करार दिया है। इस मामले पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह कार्य के प्रति घोर लापरवाही और कर्तव्यहीनता को दर्शाता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य विभाग के इस महत्वपूर्ण अभियान को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। दूसरी ओर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की इस कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण यादव समेत कई स्थानीय नेताओं में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि डॉ. सुशांत कुमार गुप्ता सरकारी अस्पताल से ज्यादा समय अपने प्राइवेट अस्पताल को देते हैं, जिसके कारण सरकारी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। लोगों का कहना है कि महादलित बस्तियों की संवेदनशीलता से परिचित होने के बावजूद इस तरह की अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि “सरकारी योजनाएं कागजों पर चल रही हैं, जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं।”1
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