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नागौर जिला कलेक्ट्रेट पर संतों, सामाजिक संगठनों, गौभक्तों और जनप्रतिनिधियों ने गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए क्योंकि वे सदियों से देश की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का हिस्सा रही हैं। इस मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
प्रदीप कुमार डागा
नागौर जिला कलेक्ट्रेट पर संतों, सामाजिक संगठनों, गौभक्तों और जनप्रतिनिधियों ने गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए क्योंकि वे सदियों से देश की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का हिस्सा रही हैं। इस मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
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- नागौर जिला कलेक्ट्रेट पर संतों, सामाजिक संगठनों, गौभक्तों और जनप्रतिनिधियों ने गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिलना चाहिए क्योंकि वे सदियों से देश की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का हिस्सा रही हैं। इस मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।1
- राजस्थान में रियां बड़ी पंचायत समिति के ग्राम सुरियास में एक सामाजिक परंपरा को नई दिशा देते हुए मिसाल पेश की गई है। सुरियास निवासी कानसिंह राठौड़ के निधन के बाद रविवार को बारहवें की रस्म पर उनकी दस वर्षीय इकलौती पुत्री भाविका कंवर उर्फ बिट्टू का पाग दस्तुर संपन्न कराया गया। आमतौर पर पिता के वैकुण्ठवास के बाद पुत्र या पुत्र न होने की स्थिति में दत्तक पुत्र लेकर उत्तराधिकारी के रूप में पाग दस्तुर की रस्म निभाई जाती है, लेकिन सुरियास में पहली बार बेटी को यह अधिकार देकर पगड़ी पहनाई गई। कानसिंह राठौड़ का 15 जुलाई को गंभीर बीमारी के कारण अल्पायु में निधन हो गया था। रविवार को बारहवें की रस्म के दौरान जब परिवार के पुरुष सदस्य परम्परानुसार किसी निकट संबंधी को दत्तक लेने पर विचार कर रहे थे, तब कानसिंह के मामा शंकरसिंह राजावत और भाविका के मामा महावीरसिंह सिंगोद ने परिवार की महिलाओं से चर्चा की। इस पर मृतक की माता और पत्नी ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता, इसलिए पाग दस्तुर उनकी बेटी का ही किया जाए। परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए पीहर और ससुराल पक्ष सहित सभी परिजनों ने सर्वसम्मति से भाविका के पाग दस्तुर का निर्णय लिया। रस्म के दौरान सामाजिक परंपरा के अनुसार सबसे पहले दादी के पीहर पक्ष से शंकरसिंह राजावत ने पगड़ी बंधवाई, इसके बाद ननिहाल पक्ष से महावीरसिंह सिंगोद ने दूसरी पगड़ी पहनाकर रस्म पूरी कराई। समाज में बेटी को बेटे के समान अधिकार और सम्मान देने की इस पहल की ग्रामीणों ने मुक्तकंठ से सराहना की है। इस परिवार में पिछले चार पीढ़ियों से प्रत्येक पीढ़ी में केवल एक ही पुरुष सदस्य रहा है—पड़दादा भीमसिंह, उनके पुत्र उदयसिंह, फिर भगवानसिंह और उनके बाद कानसिंह। कानसिंह के निधन के बाद अब परिवार की विरासत और उम्मीदों का केंद्र उनकी इकलौती पुत्री भाविका ही हैं। इस अवसर पर कुन्दनसिंह, छोटूसिंह, हड़मानसिंह, गिरवरसिंह, किशोरसिंह, महावीरसिंह, रुघनाथसिंह, गोपालसिंह, रतनसिंह, भंवरसिंह, रविन्द्रसिंह, दशरथसिंह, विक्रमसिंह और श्यामसिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- जब ये युवा हाथों में हिंदुस्तान का तिरंगा लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था, तब इसे पैलेट गन से मारा गया। सरकार कहती है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन सच्चाई आपके सामने है। इनके ऊपर पैलेट गन से हमला किया गया, जिससे इनकी आंख खराब हो गई है, दिखना बंद हो गया है। ऐसे हजारों युवाओं पर पैलेट गन चलाई गई है, इन्हें लाठियों से मारा-पीटा गया है। वो भी इसलिए क्योंकि इन युवाओं का पेपर लीक हुआ है, जिसके खिलाफ ये प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार के दावों के विपरीत, प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की सच्चाई सामने आ गई है। हजारों युवाओं पर पैलेट गन से हमला किया गया, जिससे कई युवाओं की आंखें खराब हो गई हैं और उनका दिखना बंद हो गया है। ये सब इसलिए हुआ क्योंकि इन युवाओं का पेपर लीक हुआ था और वे इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।1
- नागौर जिले में सरकारी विभाग की कार्यशैली एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहाँ बिजली विभाग के एक कर्मचारी ने शराब पीकर फोन पर आम नागरिकों से अभद्रता से बात की और जमकर गाली-गलौच की। सरकारी महकमे के कर्मचारी द्वारा आम जनता के साथ की गई इस तरह की बदसलूकी से विभाग पर सवाल उठ रहे हैं।1