आज के आधुनिक दौर में जब बाज़ार में नई-नई मोटरसाइकिलें आ रही हैं, तब भी पुरानी रॉयल एनफील्ड बुलेट, जिसे 'ओल्ड बुलेट' कहा जाता है, का आकर्षण और लोकप्रियता लोगों के दिलों में कायम है। यह केवल एक साधन नहीं, बल्कि शान, रुतबे और जुनून का प्रतीक मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जब कोई व्यक्ति अपनी ओल्ड बुलेट पर गांव की गलियों और सड़कों से गुजरता है, तो उसकी दमदार आवाज और आकर्षक व्यक्तित्व लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। विशेष संवाददाता सूर्य प्रकाश पाण्डेय के अनुसार, कई बुलेट प्रेमियों को इसकी सवारी करते समय घुड़सवारी का आनंद मिलता है, वहीं इसकी मजबूत बनावट और ऊंची सीट पर बैठकर हाथी की सवारी का एहसास होता है। बच्चे भी बुलेट पर बैठकर गांव घूमने का अनुभव उत्साह और खुशी के साथ यादगार मानते हैं, और रास्ते में मिलने वाले लोग बुलेट तथा उसके सवार को एक नज़र ज़रूर देखते हैं। वाहन प्रेमियों का मानना है कि ओल्ड बुलेट सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, जिसने पीढ़ियों से लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए रखी है। समय के बदलने के बावजूद, 'बुलेट राजा' की लोकप्रियता और सम्मान आज भी उतना ही है, जितना वर्षों पहले था। इस अनुभव को शब्दों में बयां करना आसान नहीं, क्योंकि बुलेट की सवारी महज़ एक सफर नहीं, बल्कि एक अलग ही एहसास है।
आज के आधुनिक दौर में जब बाज़ार में नई-नई मोटरसाइकिलें आ रही हैं, तब भी पुरानी रॉयल एनफील्ड बुलेट, जिसे 'ओल्ड बुलेट' कहा जाता है, का आकर्षण और लोकप्रियता लोगों के दिलों में कायम है। यह केवल एक साधन नहीं, बल्कि शान, रुतबे और जुनून का प्रतीक मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जब कोई व्यक्ति अपनी ओल्ड बुलेट पर गांव की गलियों और सड़कों से गुजरता है, तो उसकी दमदार आवाज और आकर्षक व्यक्तित्व लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। विशेष संवाददाता सूर्य प्रकाश पाण्डेय के अनुसार, कई बुलेट प्रेमियों को इसकी सवारी करते समय घुड़सवारी का आनंद मिलता है, वहीं इसकी मजबूत बनावट और ऊंची सीट पर बैठकर हाथी की सवारी का एहसास होता है। बच्चे भी बुलेट पर बैठकर गांव घूमने का अनुभव उत्साह और खुशी के साथ यादगार मानते हैं, और रास्ते में मिलने वाले लोग बुलेट तथा उसके सवार को एक नज़र ज़रूर देखते हैं। वाहन प्रेमियों का मानना है कि ओल्ड बुलेट सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, जिसने पीढ़ियों से लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए रखी है। समय के बदलने के बावजूद, 'बुलेट राजा' की लोकप्रियता और सम्मान आज भी उतना ही है, जितना वर्षों पहले था। इस अनुभव को शब्दों में बयां करना आसान नहीं, क्योंकि बुलेट की सवारी महज़ एक सफर नहीं, बल्कि एक अलग ही एहसास है।
- आज के आधुनिक दौर में जब बाज़ार में नई-नई मोटरसाइकिलें आ रही हैं, तब भी पुरानी रॉयल एनफील्ड बुलेट, जिसे 'ओल्ड बुलेट' कहा जाता है, का आकर्षण और लोकप्रियता लोगों के दिलों में कायम है। यह केवल एक साधन नहीं, बल्कि शान, रुतबे और जुनून का प्रतीक मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जब कोई व्यक्ति अपनी ओल्ड बुलेट पर गांव की गलियों और सड़कों से गुजरता है, तो उसकी दमदार आवाज और आकर्षक व्यक्तित्व लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। विशेष संवाददाता सूर्य प्रकाश पाण्डेय के अनुसार, कई बुलेट प्रेमियों को इसकी सवारी करते समय घुड़सवारी का आनंद मिलता है, वहीं इसकी मजबूत बनावट और ऊंची सीट पर बैठकर हाथी की सवारी का एहसास होता है। बच्चे भी बुलेट पर बैठकर गांव घूमने का अनुभव उत्साह और खुशी के साथ यादगार मानते हैं, और रास्ते में मिलने वाले लोग बुलेट तथा उसके सवार को एक नज़र ज़रूर देखते हैं। वाहन प्रेमियों का मानना है कि ओल्ड बुलेट सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है, जिसने पीढ़ियों से लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए रखी है। समय के बदलने के बावजूद, 'बुलेट राजा' की लोकप्रियता और सम्मान आज भी उतना ही है, जितना वर्षों पहले था। इस अनुभव को शब्दों में बयां करना आसान नहीं, क्योंकि बुलेट की सवारी महज़ एक सफर नहीं, बल्कि एक अलग ही एहसास है।1
- समाजवादी अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव मो. दानिश सिद्दीकी को भदोही विधानसभा क्षेत्र 392 में एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वाराणसी के सारनाथ स्थित डॉ. अंबेडकर शिक्षा समिति में आयोजित PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) प्रशिक्षण शिविर के दौरान उन्हें यह महत्वपूर्ण पद दिया गया। इस शिविर में संगठन विस्तार और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में समाजवादी अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.एल. भारती, राष्ट्रीय महासचिव सत्यप्रकाश सोनकर और वाराणसी सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव उर्फ लक्कड़ पहलवान सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इसी दौरान मो. दानिश सिद्दीकी को औपचारिक रूप से भदोही विधानसभा 392 का प्रभारी नियुक्त किया गया। अपनी नई भूमिका पर मो. दानिश सिद्दीकी ने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व द्वारा दिए गए इस दायित्व का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि वह समाजवादी पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करेंगे।1
- समाजवादी पार्टी (सपा) की अंबेडकर वाहिनी ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिसके तहत मो. दानिश सिद्दीकी को भदोही 392 क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।1
- मछली शहर तहसील में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक चौपाल का आयोजन किया गया। इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य 'सरकार आपके द्वारा 12 वर्ष बेमिसाल' नारे के तहत, सरकार द्वारा पिछले 12 वर्षों में लाई गई विभिन्न योजनाओं के बारे में लाभार्थियों को विस्तृत जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित लाभार्थियों को खतौनी, राशन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए और वितरित किए गए। उपजिलाधिकारी ने इस अवसर पर बताया कि उन कार्यों को प्राथमिकता पर लिया गया है जिन्हें सरलता से पूरा किया जा सकता है।1
- सतीश पाल का sed #song#love#status#jbj#muick#prjent#up#now#short#vayrl#video#trending#topten goodLook1
- ट्रेन में सफर के दौरान एक यात्री ने बेल्थरा नदी का एक सुंदर वीडियो बनाया। इस वीडियो में नदी का मनोरम दृश्य कैद हुआ है, जिसे यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किया गया। यह वीडियो प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है।1
- जौनपुर के खुटहन स्थित शेख असरखपुर गांव में 18 जून गुरुवार को चकमार्ग निर्माण की मांग को लेकर एक किसान मोबाइल टावर पर चढ़ गया। किसान ने चेतावनी दी थी कि अगर उसी दिन चकमार्ग का काम शुरू नहीं हुआ तो वह टावर से कूदकर अपनी जान दे देगा, जिसके बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। गांव निवासी सतीश कुमार यादव ने आरोप लगाया कि वह एक वर्ष से तहसील और जिले का चक्कर लगा-लगाकर थक गया था, क्योंकि लेखपाल और कानूनगो गलत रिपोर्ट लगाते थे। सतीश के मुताबिक, गांव के मुख्य मार्ग से जुड़ा लगभग 700 मीटर लंबा चकमार्ग राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, लेकिन आसपास के कुछ चकदारों ने उसे जोतकर अपने खेतों में मिला लिया है। उसने पिछले एक वर्ष से ब्लॉक मुख्यालय से लेकर शाहगंज तहसील तक अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि राजस्व कर्मियों ने कई बार आश्वासन दिया, पर मौके पर पैमाइश नहीं की गई और गलत रिपोर्ट लगा दी कि चक मार्ग पर आवागमन चालू है। लेखपाल की रिपोर्ट से आहत होकर गुरुवार सुबह करीब सात बजे सतीश नहर के पास स्थित मोबाइल टावर पर लगभग 50 फीट ऊपर चढ़ गया। सूचना मिलते ही एसडीएम शाहगंज कुणाल गौरव, क्षेत्राधिकारी गिरेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार, लेखपाल, पुलिस बल और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने सुरक्षा के लिए टावर के नीचे जाल और गद्दे बिछाए। लगभग तीन घंटे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन ने चकमार्ग की पैमाइश कराई और जेसीबी से निर्माण कार्य शुरू करवाया। इसके बाद सतीश टावर से सुरक्षित नीचे उतर आया, जिस पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।1