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Awaz of the people :- गरीबों की आवाज को हमेशा दबाया जाता है l डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की हौसला, जज्बा, जुनून ने भारत की कोई भी शक्ति भाग नहीं कर सकी , चाहे, कितना भी नीचा दिखाने का प्रयास किया गया l जैसे ऊंची कॉलेज में दाखिला न देना, क्लास में आगे न बैठना देना, ऊंची लागत के लोगो के साथ बैठ कर खाना नहीं खाने देना, इत्यादी l क्यों की बाबा साहेब की सोच जन हित की थी l
Ramashankar sharma
Awaz of the people :- गरीबों की आवाज को हमेशा दबाया जाता है l डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की हौसला, जज्बा, जुनून ने भारत की कोई भी शक्ति भाग नहीं कर सकी , चाहे, कितना भी नीचा दिखाने का प्रयास किया गया l जैसे ऊंची कॉलेज में दाखिला न देना, क्लास में आगे न बैठना देना, ऊंची लागत के लोगो के साथ बैठ कर खाना नहीं खाने देना, इत्यादी l क्यों की बाबा साहेब की सोच जन हित की थी l
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- 10 से 15 लड़के मिल कर बिच सड़क में बेइज्जती करते हुए, और वीडियो बनते हुए, वायरल किया जा रहा है l वाह जिला बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का गृह जिला बताया जा रहा है l और बिहार में सब से अधिक राज्य करने वाले मुया मंत्री हैं l1
- name dilsad khan kam tiles fiting girnait fiting kontektar mobail number 87669695931
- 🛑धुरकी प्रखंड के भंडार बाजार में मृतक विजय लोहरा के लेकर गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे से भारी संख्या में लोगों ने धुरकी-चिनिया मुख्य पथ को जाम कर दिया। बताया जा रहा है कि करीब 500 लोग सड़क पर उतर आए, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। 🛑जाम के कारण धुरकी, चिनिया, नगर उंटारी तथा आसपास के गांवों से आने-जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों को हुई। कई यात्री सड़क पर ही वाहन खड़ा कर पैदल अपने गंतव्य की ओर जाते दिखे। 🛑स्थानीय लोगों का कहना है कि भंडार बाजार और धुरकी क्षेत्र में पहले से ही सड़क संकरी है। बाजार लगने और सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग होने से अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग एकत्र होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। धुरकी बाजार में लंबे समय से पार्किंग, बस स्टैंड और यातायात व्यवस्था की कमी के कारण अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है। #menofjharkhand #भण्डार_सड़क_जाम #GarhwaPolice1
- पलामू जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत नावाजयपुर थाना क्षेत्र के नावाखास पंचायत में स्थित बिंदा बैंकवेट हॉल के बेसमेंट में संचालित एक अवैध क्लीनिक का भंडाफोड़ करते हुए प्रशासन ने उसे सील कर दिया। यह कार्रवाई प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी पाटन अमित कुमार झा के नेतृत्व में गुप्त सूचना के आधार पर की गई। औचक छापेमारी के दौरान करीब 5 घंटे तक चले निरीक्षण में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में पाया गया कि पंडवा निवासी सेवक मेहता नामक व्यक्ति बिना किसी मान्य चिकित्सा डिग्री के खुद को डॉक्टर बताकर वर्षों से क्लीनिक चला रहा था। निरीक्षण के दौरान भवन के अंदर एक पूर्ण रूप से संचालित प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थिएटर मिला। वहां सामान्य उपयोग के नाम पर कई प्रतिबंधित दवाएं भी रखी गई थीं। ऑपरेशन थिएटर की स्थिति देखकर अधिकारियों को संदेह हुआ कि यहां नियमित रूप से अवैध शल्य चिकित्सा और प्रसव कराए जा रहे थे। इसके अलावा, एक कमरे में एलोपैथिक दवाओं का बड़ा भंडार मिला, जबकि क्लीनिक के बाहर “दिशा आरोग्य धाम जयपुर आयुर्वेद संस्थान” का बोर्ड लगा हुआ था, जो भ्रामक जानकारी देने का प्रयास दर्शाता है। डॉक्टर के ओपीडी कक्ष से गर्भवती महिलाओं की कई अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी बरामद की गईं। मौके पर मौजूद दो अस्पताल कर्मियों से पूछताछ के दौरान उन्होंने शुरू में भ्रामक जानकारी दी, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर स्वीकार किया कि सेवक मेहता ने किसी प्रकार की चिकित्सा शिक्षा प्राप्त नहीं की है। जांच के बाद विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करते हुए प्रशासन ने क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई के दौरान प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित आजाद,अवर पुलिस निरीक्षक वीरेंद्र कुमार मेहता सहित अन्य अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे गौरतलब है कि उपायुक्त पलामू समीरा एस के निर्देश पर जिले में अवैध क्लीनिकों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।1
- बलरामपुर में संगठन सृजन अभियान के तहत गांव चलो अभियान आज से शुरू आज बलरामपुर जिले के ग्राम तातापानी में कांग्रेस का महत्वपूर्ण बैठकआज. आज की आयोजित में मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस प्रभारी शफी अहमद जी और जिला अध्यक्ष लिखना उपस्थित रहेंगे आज बलरामपुर जिले के तातापानी में विशाल बैठक आयोजित कांग्रेस का किया जाएगा.. पूरा मामला बलरामपुर जिले के तातापानी गांव का है1
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- वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र में वनभूमि कब्जे का बड़ा आरोप, वनपाल पर रिश्वत लेकर जमीन दिलाने की चर्चा बलरामपुर. जिले के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां वनभूमि पर अवैध कब्जा कराने को लेकर वन विभाग के ही एक जिम्मेदार कर्मचारी, वनपाल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वनभूमि पर खुलेआम जेसीबी मशीन से समतलीकरण कर कब्जा कराया जा रहा है और इस पूरे मामले में विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। ग्रामीणों ने वर्तमान में पदस्थ वनपाल विजय सिंह पर सीधे तौर पर आरोप लगाए हैं कि वे पैसे लेकर वनभूमि पर कब्जा कराने में सहयोग कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। दिनदहाड़े चल रही जेसीबी, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल ... जानकारी के अनुसार, वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र के कुंदी गांव में दिनदहाड़े जेसीबी मशीन से वनभूमि को समतल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यह काम खुलेआम और बिना किसी रोक-टोक के किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि कब्जा करने वालों को किसी प्रकार का भय नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह कार्य अवैध है, तो प्रशासन और वन विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस चुप्पी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। वनपाल पर रिश्वत लेकर कब्जा कराने का आरोप .. ग्रामीणों ने वर्तमान में पदस्थ वनपाल विजय सिंह पर सीधे तौर पर आरोप लगाए हैं कि वे पैसे लेकर वनभूमि पर कब्जा कराने में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इतने बड़े स्तर पर कब्जा बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी या सहमति के संभव नहीं है, जिससे पूरे मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है। प्लांटेशन क्षेत्र पर कब्जा, पर्यावरण पर खतरा ... ग्रामीणों के मुताबिक जिस भूमि पर कब्जा किया जा रहा है, वह वन विभाग द्वारा पूर्व में विकसित किया गया प्लांटेशन क्षेत्र है। इस भूमि पर नियमित रूप से पौधारोपण किया जाता रहा है और इसे संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इस जमीन को जेसीबी से समतल कर कब्जा करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी सीधा प्रहार माना जा रहा है। इससे वन क्षेत्र के नुकसान के साथ-साथ जैव विविधता पर भी असर पड़ने की आशंका है। मामला सामने आते ही हरकत में वन विभाग ... घटना की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। एसडीओ फॉरेस्ट ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जांच प्रक्रिया पर टिकी उम्मीदें .. मामले के सामने आने के बाद अब जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है। Sdo प्रेमचंद मिश्रा का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों को अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है और वे चाहते हैं कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर भी दिखाई दे। ग्रामीणों में भारी आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग... इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि अभी इस तरह के अवैध कब्जों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में और भी वनभूमि पर कब्जा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि न केवल अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए, बल्कि इसमें शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सबसे बड़ा सवाल: क्या अपने ही कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई... अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वन विभाग अपने ही कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई कर पाएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल जांच तक सीमित रह जाएगा। अक्सर देखा गया है कि ऐसे मामलों में जांच लंबी खिंचती है और कार्रवाई में देरी होती है, जिससे आम लोगों का भरोसा प्रशासन से कमजोर होता है। हालांकि इस बार मामला खुलकर सामने आया है और ग्रामीणों का दबाव भी लगातार बना हुआ है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस पर ठोस और निर्णायक कदम उठाएगा। प्रशासनिक जवाबदेही पर खड़े हुए बड़े सवाल... वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र का यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है और क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती जांच रिपोर्ट और अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें.. फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजरें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अब यह देखना अहम होगा कि वन विभाग इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है। यदि प्रशासन निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करता है, तो न केवल इस मामले का समाधान होगा, बल्कि भविष्य में इस तरह के अवैध कब्जों पर भी रोक लगाई जा सकेगी1