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खालवा; के जंगल में मिली बुजुर्ग की सर कटी लाश. खालवा पुलिस जांच में जुटी.. मर्डर की आशंका खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र के गदडीयाखेड़ा (वनग्राम)में 62 साल के बुजुर्ग का सिर कटा शव मिला है। बुजुर्ग 2 दिन खेत से लापता हो गया था। खेत की टपरी पर खून के निशान मिले थे, वहां से 3 किलोमीटर दूर जंगल में शव मिला है। गांव में सनसनी फैल गई मौके पर पहुंची पुलिस जांच शुरू कर दी है मामला खालवा थाना क्षेत्र के वनग्राम गदड़ियाखेड़ा का है

8 hrs ago
user_Ramchandra Kasde
Ramchandra Kasde
Newspaper distribution खलवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
8 hrs ago

खालवा; के जंगल में मिली बुजुर्ग की सर कटी लाश. खालवा पुलिस जांच में जुटी.. मर्डर की आशंका खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र के गदडीयाखेड़ा (वनग्राम)में 62 साल के बुजुर्ग का सिर कटा शव मिला है। बुजुर्ग 2 दिन खेत से लापता हो गया था। खेत की टपरी पर खून के निशान मिले थे, वहां से 3 किलोमीटर दूर जंगल में शव मिला है। गांव में सनसनी फैल गई मौके पर पहुंची पुलिस जांच शुरू कर दी है मामला खालवा थाना क्षेत्र के वनग्राम गदड़ियाखेड़ा का है

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  • खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र के गदडीयाखेड़ा (वनग्राम)में 62 साल के बुजुर्ग का सिर कटा शव मिला है। बुजुर्ग 2 दिन खेत से लापता हो गया था। खेत की टपरी पर खून के निशान मिले थे, वहां से 3 किलोमीटर दूर जंगल में शव मिला है। गांव में सनसनी फैल गई मौके पर पहुंची पुलिस जांच शुरू कर दी है मामला खालवा थाना क्षेत्र के वनग्राम गदड़ियाखेड़ा का है
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    खंडवा जिले के खालवा थाना क्षेत्र के गदडीयाखेड़ा (वनग्राम)में 62 साल के बुजुर्ग का सिर कटा शव मिला है। बुजुर्ग 2 दिन खेत से लापता हो गया था। खेत की टपरी पर खून के निशान मिले थे, वहां से 3 किलोमीटर दूर जंगल में शव मिला है। गांव में सनसनी फैल गई मौके पर पहुंची पुलिस जांच शुरू कर दी है 
मामला खालवा थाना क्षेत्र के वनग्राम गदड़ियाखेड़ा  का है
    user_Ramchandra Kasde
    Ramchandra Kasde
    Newspaper distribution खलवा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • संगीतमय सुंदरकांड पाठ देवी जागरण भजन संध्या खाटू श्याम कीर्तन आदि के लिए संपर्क करें 8109417931
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    संगीतमय सुंदरकांड पाठ देवी जागरण भजन संध्या खाटू श्याम कीर्तन आदि के लिए संपर्क करें 8109417931
    user_तेजस्वी जी
    तेजस्वी जी
    Artist East Nimar, Madhya Pradesh•
    6 hrs ago
  • आजादी क़े बाद 1947 में जब देश विभाजन हुआ था तब भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय पाकिस्तान से भारत आई एक खास मिठाई आज 79 वर्षों बाद भी लोगों को आकर्षित कर रही है। यह खास व्यंजन जिसकी मिठास होली के त्योहार पर ही घर घर से जब आती है तब लोग मदहोशी में व्यंजन का लुत्फ उठाने बधाई के बहाने अपनों लक़े बीच खींचे चले आते हैं। आज 79 वर्षों बाद भी सिंधी घियर मिठाई सिंधी समाज के लोगों की पसंदीदा बनी हुई है. सिंधी समाज के लोग इस मिठाई को बहन बेटियों को भी भेजते है और यह एक पखवाड़ा तक खराब भी नहीं होती है। मामला क्रिकेट में पाकिस्तान क़े साथ हाथ नहीं मिलाने की अदावत का हो या पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्तों में पीढ़ीयों की तल्खी हो लेकिन सिंध नदी पार से आई एक सिंधी घियर मिठाई भारत में रिश्तों में मिठास घोल रही है। खंडवा के सिंधी कॉलोनी में होली के सप्ताह भर पहले से क्षेत्र के अलग अलग दुकान पर लोगों की भीड़ मिठाई की खरीददारी के लिए हर रोज उमड़ रही है। जहां पर लोग मिठाई को अपने परिवार की बहन बेटियों को भी वितरित करते हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि यह मिठाई सिर्फ होली के त्योहार पर ही बनाई जाती है। सिंधी समाज से जुड़े हजारों परिवार के लोग इस मिठाई को बड़ी तादाद में खरीदते हैं। सिंधी समाज के बीच कई दशकों से इस मिठाई का स्वाद हर बार नए नए लोगों को अपनी और आकर्षित करती है। सिंधी समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी अब इस मिठाई की खुशबू और इसके स्वाद को भी जानने लगे हैं। लिहाजा दूसरे समाज के लोग भी इसे पसंद करने लगे हैं। मिठाई का खास ठिकाना सिंधी बाजार खंडवा में लोकप्रिय सिंधी बाजार में इस खास सिंधी घियर मिठाई क्विंटल में खरीदने वाले शहर में बड़े व्यापारी अनिल आरतानी ने बताया की पाकिस्तान के बंटवारे के समय सिंधी समाज के लोग जब पाकिस्तान से भारत आए थे। तब मिठाई की परंपरा सिंधी घियर भी उनके साथ भारत आ गई। परंपराएं, मान्यताएं हर पीढ़ियों में बदलती चली गई, टूटती गई लेकिन होली के त्योहार पर इस मिठाई का विशेष महत्व है वह कई दशकों बाद भी आज विद्यमान है। पाकिस्तान से भारत आए सिंधी परिवार ने इसका निर्वहन बखूबी किया। तभी यह कई पीढियां में रचा और बसा हुआ है। हर रोज 15 क्विटल खपत होती है घियर खंडवा के सिंधी बाजार में इस घियर की इतनी डिमांड है कि सुनकर आपका भी होश फाख्ता हो जाएंगे। हर रोज 15 क्विंटल घियर की खपत इन दिनों हो रही है। जिसे बनाने के लिए अलग-अलग कारीगर अलग-अलग दुकानों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खंडवा के हीरा स्वीट्स पर पिछले 46 वर्षों से कारीगर के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले मोहन जगताप का कहना है की लोगों के होंठ और जुबान पर हमेशा इसकी रस की मिठास ने इन्हें नई ताकत दी है। आखिर कैसे बनता है यह पकवान आखिरकार यह पकवान कैसे बनता है यह सवाल सब की जुबान पर सवाल के रूप में घूमडता रहता है। हम आपको बताते हैं आखिर यह पकवान बनता कैसे हैं। कारीगरों ने बताया की जलेबी की तरह दिखने वाली इस मिठाई को तैयार करने के लिए मैदा, दूध और केसर का घोल बनाकर दो दिनों तक खटास आने तक रख दी जाती है। दो दिनों बाद शुद्ध घी में इसे छाना जाता है। हर दुकानदार द्वारा बनाने के तरीके अलग-अलग है लेकिन स्वाद सब में एक ही है। 15 दिनों तक खराब नहीं होती है यह मिठाई आज के दौर में नए दोस्तों में भले ही दोस्ती का रिश्ता सप्ताह भर भी ना चले लेकिन इस मिठाई की खासियत यह है कि यह एक बार तैयार हो जाने के बाद 15 दिनों से ज्यादा समय तक या खराब नहीं होती। शुद्ध घी से बनने के कारण इसे लोग अपने रिश्तेदारों को गिफ्ट के तौर पर देने के लिए लंबे समय तक बचा के रखते हैं ताकि रिश्तों की मर्यादा भी बनी रहे। 400 रु किलो से लेकर 800 रु किलो तक बिकती है यह मिठाई खंडवा के सिंधी कॉलोनी में बिकने वाली यह मिठाई हर वर्ग के लोगों के लिए अलग-अलग कीमत लिए बिकती है। निम्न वर्ग हो या उच्च वर्ग हो कोई भी निराश नहीं लौटता है। क्योंकि सब वर्ग के लिए अलग-अलग दामों के रूप में यह व्यंजन दुकान में बेचने के लिए तैयार किया जाता है। शुद्ध घी से बनने वाली इस मिठाई के लिए लोगों को जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ती है वहीं तेल या डालडा में बनी मिठाई के लिए कम मूल्य चुकाना पड़ता है। लेकिन सभी मिठाइयों की मिठास एक जैसी होती है भले ही पाकिस्तान से हमारे रिश्तो में खटास हो।
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    आजादी क़े बाद 1947 में जब देश विभाजन हुआ था तब भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय पाकिस्तान से भारत आई एक खास मिठाई आज 79 वर्षों बाद भी लोगों को आकर्षित कर रही है। यह खास व्यंजन जिसकी मिठास होली के त्योहार पर ही घर घर से जब आती है तब लोग मदहोशी में व्यंजन का लुत्फ उठाने बधाई के बहाने अपनों लक़े बीच खींचे चले आते हैं। आज 79 वर्षों बाद भी सिंधी घियर मिठाई सिंधी समाज के लोगों की पसंदीदा बनी हुई है. सिंधी समाज के लोग इस मिठाई को बहन बेटियों को भी भेजते है और यह एक पखवाड़ा तक खराब भी नहीं होती है।
मामला क्रिकेट में पाकिस्तान क़े साथ हाथ नहीं मिलाने की अदावत का हो या पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्तों में पीढ़ीयों की तल्खी हो लेकिन सिंध नदी पार से आई एक सिंधी घियर मिठाई भारत में रिश्तों में मिठास घोल रही है। खंडवा के सिंधी कॉलोनी में होली के सप्ताह भर पहले से क्षेत्र के अलग अलग दुकान पर लोगों की भीड़ मिठाई की खरीददारी के लिए हर रोज उमड़ रही है। जहां पर लोग मिठाई को अपने परिवार की बहन बेटियों को भी वितरित करते हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि यह मिठाई सिर्फ होली के त्योहार पर ही बनाई जाती है। सिंधी समाज से जुड़े हजारों परिवार के लोग इस मिठाई को बड़ी तादाद में खरीदते हैं। सिंधी समाज के बीच कई दशकों से इस मिठाई का स्वाद हर बार नए नए लोगों को अपनी और आकर्षित करती है। सिंधी समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी अब इस मिठाई की खुशबू और इसके स्वाद को भी जानने लगे हैं। लिहाजा दूसरे समाज के लोग भी इसे पसंद करने लगे हैं।  
मिठाई का खास ठिकाना सिंधी बाजार
खंडवा में लोकप्रिय सिंधी बाजार में इस खास सिंधी घियर मिठाई क्विंटल में खरीदने वाले शहर में बड़े व्यापारी अनिल आरतानी ने बताया की पाकिस्तान के बंटवारे के समय सिंधी समाज के लोग जब पाकिस्तान से भारत आए थे। तब मिठाई की परंपरा सिंधी घियर भी उनके साथ भारत आ गई। परंपराएं, मान्यताएं हर पीढ़ियों में बदलती चली गई, टूटती गई लेकिन होली के त्योहार पर इस मिठाई का विशेष महत्व है वह कई दशकों बाद भी आज विद्यमान है। पाकिस्तान से भारत आए सिंधी परिवार ने इसका निर्वहन बखूबी किया। तभी यह कई पीढियां में रचा और बसा हुआ है।
हर रोज 15 क्विटल खपत होती है घियर 
खंडवा के सिंधी बाजार में इस घियर की इतनी डिमांड है कि सुनकर आपका भी होश फाख्ता हो जाएंगे। हर रोज 15 क्विंटल घियर की खपत इन दिनों हो रही है। जिसे बनाने के लिए अलग-अलग कारीगर अलग-अलग दुकानों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खंडवा के हीरा स्वीट्स पर पिछले 46 वर्षों से कारीगर के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले मोहन जगताप का कहना है की लोगों के होंठ और जुबान पर हमेशा इसकी रस की मिठास ने इन्हें नई ताकत दी है। 
आखिर कैसे बनता है यह पकवान 
आखिरकार यह पकवान कैसे बनता है यह सवाल सब की जुबान पर सवाल के रूप में घूमडता रहता है। हम आपको बताते हैं आखिर यह पकवान बनता कैसे हैं। कारीगरों ने बताया की जलेबी की तरह दिखने वाली इस मिठाई को तैयार करने के लिए मैदा, दूध और केसर का घोल बनाकर दो दिनों तक खटास आने तक रख दी जाती है। दो दिनों बाद शुद्ध घी में इसे छाना जाता है। हर दुकानदार द्वारा बनाने के तरीके अलग-अलग है लेकिन स्वाद सब में एक ही है। 
15 दिनों तक खराब नहीं होती है यह मिठाई 
आज के दौर में नए दोस्तों में भले ही दोस्ती का रिश्ता सप्ताह भर भी ना चले लेकिन इस मिठाई की खासियत यह है कि यह एक बार तैयार हो जाने के बाद 15 दिनों से ज्यादा समय तक या खराब नहीं होती। शुद्ध घी से बनने के कारण इसे लोग अपने रिश्तेदारों को गिफ्ट के तौर पर देने के लिए लंबे समय तक बचा के रखते हैं ताकि रिश्तों की मर्यादा भी बनी रहे।
400 रु किलो से लेकर 800 रु किलो तक बिकती है यह मिठाई
खंडवा के सिंधी कॉलोनी में बिकने वाली यह मिठाई हर वर्ग के लोगों के लिए अलग-अलग कीमत लिए बिकती है। निम्न वर्ग हो या उच्च वर्ग हो कोई भी निराश नहीं लौटता है। क्योंकि सब वर्ग के लिए अलग-अलग दामों के रूप में यह व्यंजन दुकान में बेचने के लिए तैयार किया जाता है। शुद्ध घी से बनने वाली इस मिठाई के लिए लोगों को जेब  थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ती है वहीं तेल या डालडा में बनी मिठाई के लिए कम मूल्य चुकाना पड़ता है। लेकिन सभी मिठाइयों की मिठास एक जैसी होती है भले ही पाकिस्तान से हमारे रिश्तो में खटास हो।
    user_KHANDWA LIVE
    KHANDWA LIVE
    Press Reporter खंडवा नगर, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • खंडवा के बजरंग चौक पर होली के दिन विधायक प्रतिनिधि मुकेश तनवे और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने किया डांस
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    खंडवा के बजरंग चौक पर होली के दिन विधायक प्रतिनिधि मुकेश तनवे और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने किया डांस
    user_Mahesh patel
    Mahesh patel
    खंडवा नगर, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • दोनों बाइक सवारों के परिजनों के बीच अस्पताल में हुआ हंगामा पुलिस ने मामला कराया शांत
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    दोनों बाइक सवारों के परिजनों के बीच अस्पताल में हुआ हंगामा पुलिस ने मामला कराया शांत
    user_Shahrukh mansuri
    Shahrukh mansuri
    पुनासा, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • Post by Raju Singh Rathod
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    Post by Raju Singh Rathod
    user_Raju Singh Rathod
    Raju Singh Rathod
    बुरहानपुर, बुरहानपुर, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • वायरल वीडियो - हरणगांव स्थित मदिरा दुकान पर देशी शराब (प्लेन) की क्वार्टर बोतल (180 मि.ली.) MRP 75 रुपये होने के बावजूद 90 रुपये में बेची जा रही है। यानी उपभोक्ताओं से प्रति बोतल 15 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, दुकान पर रेट लिस्ट भी प्रदर्शित नहीं की गई थी, जो कि नियमों का उल्लंघन है। जब एक ग्राहक ने इस संबंध में विक्रेता से सवाल किया तो पहले उसे अतिरिक्त लिए गए पैसे वापस देने की कोशिश की गई। ग्राहक द्वारा पैसे लेने से मना करने पर उसे पुलिस बुलाने की धमकी दी गई।
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    वायरल वीडियो -
हरणगांव स्थित मदिरा दुकान पर देशी शराब (प्लेन) की क्वार्टर बोतल (180 मि.ली.) MRP 75 रुपये होने के बावजूद 90 रुपये में बेची जा रही है। यानी उपभोक्ताओं से प्रति बोतल 15 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, दुकान पर रेट लिस्ट भी प्रदर्शित नहीं की गई थी, जो कि नियमों का उल्लंघन है। जब एक ग्राहक ने इस संबंध में विक्रेता से सवाल किया तो पहले उसे अतिरिक्त लिए गए पैसे वापस देने की कोशिश की गई। ग्राहक द्वारा पैसे लेने से मना करने पर उसे पुलिस बुलाने की धमकी दी गई।
    user_Journalist Ravi Kumre
    Journalist Ravi Kumre
    Social work खातेगांव, देवास, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • khandwa : खालवा थाना क्षेत्र के गदडियाखेड़ा (वनग्राम) में 62 साल के बुजुर्ग का सिर कटा शव मिला हैं। बुजुर्ग दो दिन पहले खेत से लापता हो गया था। खेत की टपरी पर खून के निशान मिले थे, वहां से 3 किलोमीटर दूर जंगल में शव मिला हैं। गांव में सनसनी फैल गई मौके पर पहुंची पुलिस जांच शुरू कर दी है।
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    khandwa : खालवा थाना क्षेत्र के गदडियाखेड़ा (वनग्राम) में 62 साल के बुजुर्ग का सिर कटा शव मिला हैं। बुजुर्ग दो दिन पहले खेत से लापता हो गया था। खेत की टपरी पर खून के निशान मिले थे, वहां से 3 किलोमीटर दूर जंगल में शव मिला हैं। गांव में सनसनी फैल गई मौके पर पहुंची पुलिस जांच शुरू कर दी है।
    user_Mahesh patel
    Mahesh patel
    खंडवा नगर, पूर्वी निमाड़, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
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