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नेशनल हाईवे 552 पर बाघिन -टी-39 की चहलकदमी, गाय का किया शिकार, लोगों में दहशत, हाईवे पर कुछ समय के लिए वाहनों के थमे पहियें,

2 hrs ago
user_Bhagwan sharma
Bhagwan sharma
खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
2 hrs ago

नेशनल हाईवे 552 पर बाघिन -टी-39 की चहलकदमी, गाय का किया शिकार, लोगों में दहशत, हाईवे पर कुछ समय के लिए वाहनों के थमे पहियें,

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  • Post by Bhagwan sharma
    1
    Post by Bhagwan sharma
    user_Bhagwan sharma
    Bhagwan sharma
    खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    1
    Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    user_राजू काँकोरिया खण्डार
    राजू काँकोरिया खण्डार
    Contractor खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • सवाई माधोपुर एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने जिले के थानों के एचएम (हेड मोहर्रिर) की मीटिंग ली। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य थाना स्तर पर कार्य के दौरान आ रही समस्याओं की समीक्षा करना एवं उनके त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करना रहा। बैठक के दौरान विभिन्न थानों से आए एच. एम ने ड्यूटी के दौरान थाने पर आने वाली प्रशासनिक, तकनीकी एवं संसाधनों से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने रिकॉर्ड संधारण, ऑनलाइन कार्यप्रणाली, स्टाफ की कमी, उपकरणों की उपलब्धता एवं अन्य दैनिक कार्यों में आने वाली बाधाओं को सामने रखा।
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    सवाई माधोपुर एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने जिले के थानों के एचएम (हेड मोहर्रिर) की मीटिंग ली। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य थाना स्तर पर कार्य के दौरान आ रही समस्याओं की समीक्षा करना एवं उनके त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करना रहा।
बैठक के दौरान विभिन्न थानों से आए एच. एम ने ड्यूटी के दौरान थाने पर आने वाली प्रशासनिक, तकनीकी एवं संसाधनों से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने रिकॉर्ड संधारण, ऑनलाइन कार्यप्रणाली, स्टाफ की कमी, उपकरणों की उपलब्धता एवं अन्य दैनिक कार्यों में आने वाली बाधाओं को सामने रखा।
    user_Rakesh Agarwal
    Rakesh Agarwal
    पत्रकारिता Sawai Madhopur, Rajasthan•
    3 hrs ago
  • Post by Noshad ahmad qureshi
    1
    Post by Noshad ahmad qureshi
    user_Noshad ahmad qureshi
    Noshad ahmad qureshi
    INDIA News 28 M.P. Sheopur श्योपुर, श्योपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ।  महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं। विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए  दलित,पिछड़े एवं  महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।
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    वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ। 
महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं।
विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। 
मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए  दलित,पिछड़े एवं  महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।
    user_Uttam Kumar Meena
    Uttam Kumar Meena
    Media and information sciences faculty गंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • दिलीप राणावत आपनेता ने भाजपा नेता के गाय घर बैठकर खाने के बयान पर दिया बयान...
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    दिलीप राणावत आपनेता ने भाजपा नेता के गाय घर बैठकर खाने के बयान पर दिया बयान...
    user_Dilip Ranawat Aap
    Dilip Ranawat Aap
    Local Politician पीपल्दा, कोटा, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ।  महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं। विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए  दलित,पिछड़े एवं  महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।
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    वजीरपुर। राजकीय कन्या महाविद्यालय में आज भारत में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिराव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता कर महात्मा फुले के विचार और जीवन संघर्ष से अच्छे विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा ली। नोडल अधिकारी एवं राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ रमेश बैरवा ने छात्राओं को बताया कि महात्मा फुले का जन्म पुणे में 1827 में हुआ। 
महात्मा जोतिराव फुले,जिन्हें 'जोतिबा फुले' नाम से भी जाना जाता है,एक क्रांतिकारी समाज सुधारक ही नहीं बल्कि एक गम्भीर सामाजिक चिंतक भी थे। फूले ने 'गुलामगिरी' 'सत्यशोधक समाज' 'किसान का कोड़ा' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं लिख कर सामाजिक-राजनैतिक चिंतक के तौर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। विद्यार्थियों को इन रचनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर महात्मा जोतिराव फुले को अपना वैचारिक गुरु मानते थे। फूले के विचार और संघर्ष आज भी प्रेरणा देते हैं।
विश्व के महान चिंतक कार्ल मार्क्स एवं शहीदे आज़म भगतसिंह की तरह महात्मा फुले ने भी मनुष्य के मनुष्य द्वारा किये जाने वाले हर प्रकार के सामाजिक आर्थिक शोषण एवं भेदभाव के अंत का वैचारिक पक्ष लिया। समाज के शोषित,पीड़ित मेहनतकश तबकों की समग्र मुक्ति के लिए आजीवन संघर्ष किया। जाति एवं जेंडर आधारित जुल्म एवं ज्यादती का कड़ा विरोध किया। सामाजिक कुरूतियों एवं धार्मिक पाखण्ड के खिलाफ आमजन को जागरूक किया। 
मजदूर एवं किसान के हक के लिए संघर्ष किया। सबसे बढ़कर महात्मा फुले ने बड़ी यातनाएं झेलते हुए  दलित,पिछड़े एवं  महिला सहित मेहनतकश आमजन के लिए शिक्षा के महत्व का प्रचार प्रसार किया, अशिक्षा एवं अज्ञानता के कारण हुई बड़ी भारी क्षति के प्रति जागरूक किया। महिला शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए तो महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर अनूठा कार्य किया। महिलाओं की शिक्षा के लिए विद्यालय चलाया,जो कि भारत का प्रथम महिला विद्यालय बना।
    user_Bsmeena
    Bsmeena
    Local News Reporter गंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • Post by राजू काँकोरिया खण्डार
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    Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    user_राजू काँकोरिया खण्डार
    राजू काँकोरिया खण्डार
    Contractor खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
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