पोखरी में बना आंगनबाड़ी केंद्र पांच साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए निर्माण और स्वीकृति पर सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता, निर्माण स्थल के चयन और धन के उपयोग की जांच की मांग पडरौना, कुशीनगर। विकासखंड पडरौना की ग्राम पंचायत रहसू खुदरा के टोला खुदरा में प्राथमिक विद्यालय के पीछे पोखरी में निर्मित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित भी नहीं किया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पूर्व ग्राम प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। निर्माण स्थल पोखरी के किनारे होने के कारण तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी ने खंड विकास अधिकारी पडरौना से रिपोर्ट तलब कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। उस समय बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस स्थान को अनुपयुक्त माना गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के कार्यकाल में आखिर किन परिस्थितियों में इस निर्माण को पुनः स्वीकृति प्रदान की गई, यह जांच का विषय है। उनका कहना है कि भवन की छत डाली जा चुकी है और फाटक भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। भवन के एक ओर प्राथमिक विद्यालय, दूसरी ओर सड़क तथा शेष दो ओर पोखरी होने से यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे कराया गया है। यदि केंद्र का संचालन शुरू होता है तो बच्चों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण स्थल के चयन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियर की रिपोर्ट, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मनरेगा के संयुक्त बजट से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन सरकारी धन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है। पोखरी में बना आंगनबाड़ी केंद्र पांच साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए निर्माण और स्वीकृति पर सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता, निर्माण स्थल के चयन और धन के उपयोग की जांच की मांग पडरौना, कुशीनगर। विकासखंड पडरौना की ग्राम पंचायत रहसू खुदरा के टोला खुदरा में प्राथमिक विद्यालय के पीछे पोखरी में निर्मित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित भी नहीं किया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पूर्व ग्राम प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। निर्माण स्थल पोखरी के किनारे होने के कारण तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी ने खंड विकास अधिकारी पडरौना से रिपोर्ट तलब कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। उस समय बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस स्थान को अनुपयुक्त माना गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के कार्यकाल में आखिर किन परिस्थितियों में इस निर्माण को पुनः स्वीकृति प्रदान की गई, यह जांच का विषय है। उनका कहना है कि भवन की छत डाली जा चुकी है और फाटक भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। भवन के एक ओर प्राथमिक विद्यालय, दूसरी ओर सड़क तथा शेष दो ओर पोखरी होने से यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे कराया गया है। यदि केंद्र का संचालन शुरू होता है तो बच्चों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण स्थल के चयन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियर की रिपोर्ट, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मनरेगा के संयुक्त बजट से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन सरकारी धन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है।
पोखरी में बना आंगनबाड़ी केंद्र पांच साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए निर्माण और स्वीकृति पर सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता, निर्माण स्थल के चयन और धन के उपयोग की जांच की मांग पडरौना, कुशीनगर। विकासखंड पडरौना की ग्राम पंचायत रहसू खुदरा के टोला खुदरा में प्राथमिक विद्यालय के पीछे पोखरी में निर्मित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित भी नहीं किया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पूर्व ग्राम प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। निर्माण स्थल पोखरी के किनारे होने के कारण तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी ने खंड विकास अधिकारी पडरौना से रिपोर्ट तलब कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। उस समय बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस स्थान को अनुपयुक्त माना गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के कार्यकाल में आखिर किन परिस्थितियों में इस निर्माण को पुनः स्वीकृति प्रदान की गई, यह जांच का विषय है। उनका कहना है कि भवन की छत डाली जा चुकी है और फाटक भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। भवन के एक ओर प्राथमिक विद्यालय, दूसरी ओर सड़क तथा शेष दो ओर पोखरी होने से यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे कराया गया है। यदि केंद्र का संचालन शुरू होता है तो बच्चों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण स्थल के चयन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियर की रिपोर्ट, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मनरेगा के संयुक्त बजट से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन सरकारी धन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है। पोखरी में बना आंगनबाड़ी केंद्र पांच साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए निर्माण और स्वीकृति पर सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता, निर्माण स्थल के चयन और धन के उपयोग की जांच की मांग पडरौना, कुशीनगर। विकासखंड पडरौना की ग्राम पंचायत रहसू खुदरा के टोला खुदरा में प्राथमिक विद्यालय के पीछे पोखरी में निर्मित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित भी नहीं किया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पूर्व ग्राम प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। निर्माण स्थल पोखरी के किनारे होने के कारण तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी ने खंड विकास अधिकारी पडरौना से रिपोर्ट तलब कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। उस समय बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस स्थान को अनुपयुक्त माना गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के कार्यकाल में आखिर किन परिस्थितियों में इस निर्माण को पुनः स्वीकृति प्रदान की गई, यह जांच का विषय है। उनका कहना है कि भवन की छत डाली जा चुकी है और फाटक भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। भवन के एक ओर प्राथमिक विद्यालय, दूसरी ओर सड़क तथा शेष दो ओर पोखरी होने से यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे कराया गया है। यदि केंद्र का संचालन शुरू होता है तो बच्चों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण स्थल के चयन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियर की रिपोर्ट, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मनरेगा के संयुक्त बजट से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन सरकारी धन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है।
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- खंड शिक्षा अधिकारी देवरिया सदर के नेतृत्व में बच्चों के नामांकन हेतु चला विशेष जागरूकता अभियान खंड शिक्षा अधिकारी देवरिया सदर के नेतृत्व में बच्चों के नामांकन हेतु चला विशेष जागरूकता अभियान नगर क्षेत्र देवरिया सदर के घुमंतू, बेसहारा एवं वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल देवरिया। बेसिक शिक्षा विभाग देवरिया सदर द्वारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचाने के उद्देश्य से आज, दिनांक 05 अगस्त 2026 को देवरिया नगर क्षेत्र में कोतवाली रोड, सब्जी मंडी एवं आस- पास एक विशेष नामांकन व जागरूकता अभियान संचालित किया गया। यह अभियान खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) देवरिया सदर देव मुनि वर्मा के कुशल नेतृत्व में संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य नगर क्षेत्र में निवास करने वाले घुमंतू, बेसहारा, मलिन बस्तियों एवं आर्थिक-सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के बच्चों को चिह्नित कर उनका परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन कराते हुए समावेशी शिक्षा सुनिश्चित कराना है। राजेंद्र प्राथमिक विद्यालय से हुई अभियान की शुरुआत विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत कोतवाली रोड स्थित राजेंद्र प्राथमिक विद्यालय से किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक , ए आर पी अनिल कुमार मणि, जयप्रकाश यादव , चंद्रभूषण सिंह , आफरीन खान, और संयोगिता शर्मा साथ में देवरिया सदर विकासखंड से दुर्गा मान यादव और आलोक पांडेय अभियान में सम्मिलित रहे। अभियान के अंतर्गत शिक्षकों और एआरपी की टीमों ने आसपास के मलिन बस्तियों, घुमंतू परिवारों के आश्रय स्थलों और वंचित क्षेत्रों का भ्रमण कर अभिभावकों से सीधे संवाद स्थापित किया। शिक्षकों ने अभिभावकों को सरकार द्वारा दी जा रही नि:शुल्क शिक्षा, पाठ्य-पुस्तकें, यूनिफॉर्म, मध्याह्न भोजन (MDM), और अन्य डीबीटी (DBT) योजनाओं की जानकारी देते हुए अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। समस्त ए०आर०पी० व शिक्षकों की रही सक्रिय उपस्थिति इस अभियान को सफल बनाने के लिए नगर क्षेत्र के समस्त एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) एवं सेवित क्षेत्र के विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व शिक्षक-शिक्षिकाएँ पूर्ण निष्ठा एवं उत्साह के साथ उपस्थित रहे। खंड शिक्षा अधिकारी, देवरिया सदर का संदेश: कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यही बेसिक शिक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। घुमंतू और बेसहारा परिवार के बच्चों को विद्यालय तक लाना हमारा दायित्व है। इस अभियान के माध्यम से हम हर उस घर तक पहुँच रहे हैं जहाँ बच्चों को मार्गदर्शन और शिक्षा की सख्त आवश्यकता है।1
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