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शहडोल संभाग की कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता ने शहडोल नगर के हेडगेवार पार्क में गंगा दशहरा पर्व के अवसर पर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत आयोजित कलश यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने माँ सरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित करके इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के साथ अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
Durgesh Kumar Gupta
शहडोल संभाग की कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता ने शहडोल नगर के हेडगेवार पार्क में गंगा दशहरा पर्व के अवसर पर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत आयोजित कलश यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने माँ सरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित करके इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के साथ अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
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- कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने शासकीय सांदीपनि उच्चतर छतवई में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को भविष्य के करियर के लिए अभी से तैयार करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने छात्रों को कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) जैसे विषयों का परिचय कराया और उनके विभिन्न उपयोगों के बारे में विस्तार से समझाया।1
- सिंगरौली जिले के सिविल कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं और पक्षकारों के बीच कुर्सी पर बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। यह मामूली कहासुनी देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई। जानकारी के अनुसार, इस घटना की शुरुआत तब हुई जब अधिवक्ता आकेश ने एक व्यक्ति को कुर्सी से उठने के लिए कहा, जिसके बाद दोनों पक्षों में जोरदार हाथापाई हुई और परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरी घटना पर सबसे गंभीर बात यह है कि यह उस स्थान पर घटी जिसे 'न्याय का मंदिर' कहा जाता है, जिससे कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आम लोग पूछ रहे हैं कि यदि न्यायालय परिसर में ही नागरिक सुरक्षित महसूस नहीं करते, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जाए। इस मामले को लेकर अब कई प्रश्न उठ रहे हैं: क्या सिंगरौली पुलिस अधीक्षक इस घटना का संज्ञान लेंगे? क्या बार एसोसिएशन सख्त रुख अपनाएगा? और क्या मारपीट करने वाले आरोपियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ उनके लाइसेंस रद्द करने जैसी सिफारिशें की जाएंगी? घटना के बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था की गरिमा को लगातार क्षति पहुंचाती रहेंगी। सिंगरौली पूछ रहा है कि अगर कोर्ट परिसर के अंदर ही इस तरह की गुंडागर्दी होने लगे, तो एक आम आदमी न्याय के लिए संघर्ष कैसे करेगा।1
- भीषण गर्मी के मद्देनजर यात्रियों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से, एसईसीआर (SECR) ने अपनी एक पहल के तहत प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर मिस्टिंग सिस्टम की शुरुआत की है। इस व्यवस्था के माध्यम से बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और गोंदिया जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर यात्रियों को भीषण गर्मी से राहत और ठंडक मिल रही है।1
- दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने भीषण गर्मी के मौसम में यात्रियों को राहत प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल के तहत, SECR ने अपने प्रमुख स्टेशनों पर मिस्टिंग सिस्टम स्थापित किया है। यह सिस्टम बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और गोंदिया स्टेशनों पर सफलतापूर्वक शुरू किया गया है, जिससे वहाँ यात्रियों को गर्मी से राहत मिल रही है और उन्हें ठंडक का अनुभव हो रहा है।1
- तीन मासूम बच्चों के जलकर भगवान को प्यारे हो जाने और उनकी पूरी गृहस्थी के राख हो जाने की हृदय विदारक घटना के बाद प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक मौके पर पहुँचे। पीड़ित परिवार को ₹18 लाख 60 हजार रुपए की सहायता राशि मिली है, जिस पर प्रभारी मंत्री ने 'बहुत-बहुत बधाई है, धन्यवाद है' जैसे शब्द कहे। हालांकि, इस पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इतनी धनराशि से तीन मासूमों की जिंदगी लौटाई जा सकती है, और इसे 'गजब की राजनीति' बताया गया है। मृतक बच्चों के पिता ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि आज तक उनका बैंक में खाता भी नहीं खुला है और घर में पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। नेताओं द्वारा 'सब हो जाएगा' का आश्वासन दिया गया, लेकिन उनकी मूलभूत ज़रूरतें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। यह भी सामने आया कि उनका आवास भी नहीं बना है, जिससे यह सवाल उठता है कि आवास योजनाओं का लाभ वास्तव में गरीबों तक नहीं पहुँच रहा है। पीड़ित परिवार के अनुसार, 'सिर्फ पैसा ही सब कुछ है' और यह घटना दर्शाती है कि 'आवास का लाभ गरीबों के लिए नहीं है'।1
- मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद, कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही जमकर नारेबाजी की। यह घटना तब हुई जब कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे।1
- शहडोल के ब्यौहारी सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान सात माह की एक मासूम बच्ची की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। गुस्साए परिजनों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर के साथ मारपीट कर दी, जिससे अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। जानकारी के अनुसार, ग्राम पथरेही, थाना पपौंध निवासी मनोज सिंह अपनी सात माह की बेटी दिव्या सिंह को तेज बुखार की शिकायत होने पर ब्यौहारी सिविल अस्पताल लेकर आए थे। चिकित्सकों ने बच्ची की प्राथमिक जांच की और हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे और उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट की। इस घटना से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और अन्य मरीजों तथा उनके परिजनों में भी दहशत फैल गई। ब्यौहारी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों से जानकारी ली। पुलिस ने बच्ची की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं। वहीं, ड्यूटी डॉक्टर विकास गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने मनोज और मुन्ना नामक व्यक्तियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, गाली-गलौज करने और मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी जिया उल हक ने बताया कि विवाद और डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना के बाद दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और मामले की विवेचना जारी है।1
- मैहर सिविल अस्पताल में अव्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब कुछ पत्रकार अस्पताल की व्यवस्थाओं को कवर करने पहुँचे। आरोप है कि वहाँ मौजूद कुछ नर्सों ने पत्रकारों से ठीक ढंग से बात नहीं की, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें वीडियो रिकॉर्डिंग बंद करने की धमकी भी दी। पत्रकारों का कहना है कि जब मीडियाकर्मियों के साथ इस तरह का बर्ताव किया जा रहा है, तो आम मरीजों और उनके परिजनों के साथ किस प्रकार का व्यवहार होता होगा, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोग पहले से ही परेशान रहते हैं, और कर्मचारियों का रूखा व्यवहार उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देता है। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल प्रशासन से कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार लाने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल सेवा का स्थान होता है, जहाँ मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशीलता और सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कर्मचारियों को अनुशासन तथा बेहतर व्यवहार के लिए क्या निर्देश देता है।1
- छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले में जनपद पंचायत भरतपुर क्षेत्र के बहरासी से मारपीट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रमदहा वाटरफॉल पर हुए विवाद के बाद कुछ स्थानीय युवकों ने मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिले से आए एक युवक को बीच सड़क पर घेरकर बेरहमी से पीटा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दबंग युवक खुलेआम कानून-व्यवस्था को चुनौती देते साफ नजर आ रहे हैं। पर्यटन स्थल पर इस तरह की खुली गुंडागर्दी के कारण स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है। लोगों ने मांग की है कि वायरल वीडियो में दिख रहे उपद्रवियों की तुरंत पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।1