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मुरैना के जौरा में सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार अपने गृहनगर पहुंचे देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जितेंद्र माहेश्वरी का शनिवार को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। न्यू बस स्टैंड से लेकर मनकामेश्वर महादेव मंदिर तक हजारों नागरिकों का जनसैलाब उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरे मार्ग में स्वागत द्वार, पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और आतिशबाजी के साथ सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं विभिन्न संगठनों ने उनका माल्यार्पण कर सम्मान किया। स्वागत यात्रा के दौरान पुरानी सब्जी मंडी स्थित मस्जिद के पास मुस्लिम समाज के लोगों ने तिरंगा लहराकर उनका आत्मीय स्वागत किया, जो सामाजिक सद्भाव और जौरा की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए ईमानदारी, निष्ठा और निष्पक्षता के साथ कार्य किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र कर्म के प्रति समर्पण और ईमानदारी है। अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जौरा के शासकीय विद्यालयों में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुरैना से स्नातक और ग्वालियर में अपने गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता लहोटिया जी के मार्गदर्शन में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता और बड़े भाई स्वर्गीय कौशल माहेश्वरी को दिया, जो बिना शुल्क के निर्धनों के मुकदमे लड़ते थे। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने मनकामेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के गठन में सहयोग किया, जिसके माध्यम से आज मंदिर परिसर में बच्चों के लिए आवास सहित निःशुल्क वैदिक पाठशाला संचालित की जा रही है। जौरा के नागरिकों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले इस क्षेत्र के पहले व्यक्ति के रूप में न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने पूरे जौरा और मुरैना जिले का नाम देशभर में गौरवान्वित किया है और नई पीढ़ी के सामने संघर्ष, सादगी और ईमानदारी का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

2 hrs ago
user_Mahesh singh
Mahesh singh
Local News Reporter जौरा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

मुरैना के जौरा में सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार अपने गृहनगर पहुंचे देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जितेंद्र माहेश्वरी का शनिवार को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। न्यू बस स्टैंड से लेकर मनकामेश्वर महादेव मंदिर तक हजारों नागरिकों का जनसैलाब उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरे मार्ग में स्वागत द्वार, पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और आतिशबाजी के साथ सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं विभिन्न संगठनों ने उनका माल्यार्पण कर सम्मान किया। स्वागत यात्रा के दौरान पुरानी सब्जी मंडी स्थित मस्जिद के पास मुस्लिम समाज के लोगों ने तिरंगा लहराकर उनका आत्मीय स्वागत किया, जो सामाजिक सद्भाव और जौरा की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए ईमानदारी, निष्ठा और निष्पक्षता के साथ कार्य किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र कर्म के प्रति समर्पण और ईमानदारी है। अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जौरा के शासकीय विद्यालयों में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुरैना से स्नातक और ग्वालियर में अपने गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता लहोटिया जी के मार्गदर्शन में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता और बड़े भाई स्वर्गीय कौशल माहेश्वरी को दिया, जो बिना शुल्क के निर्धनों के मुकदमे लड़ते थे। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने मनकामेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के गठन में सहयोग किया, जिसके माध्यम से आज मंदिर परिसर में बच्चों के लिए आवास सहित निःशुल्क वैदिक पाठशाला संचालित की जा रही है। जौरा के नागरिकों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले इस क्षेत्र के पहले व्यक्ति के रूप में न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने पूरे जौरा और मुरैना जिले का नाम देशभर में गौरवान्वित किया है और नई पीढ़ी के सामने संघर्ष, सादगी और ईमानदारी का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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  • मुरैना के जौरा में सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार अपने गृहनगर पहुंचे देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जितेंद्र माहेश्वरी का शनिवार को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। न्यू बस स्टैंड से लेकर मनकामेश्वर महादेव मंदिर तक हजारों नागरिकों का जनसैलाब उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरे मार्ग में स्वागत द्वार, पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और आतिशबाजी के साथ सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं विभिन्न संगठनों ने उनका माल्यार्पण कर सम्मान किया। स्वागत यात्रा के दौरान पुरानी सब्जी मंडी स्थित मस्जिद के पास मुस्लिम समाज के लोगों ने तिरंगा लहराकर उनका आत्मीय स्वागत किया, जो सामाजिक सद्भाव और जौरा की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए ईमानदारी, निष्ठा और निष्पक्षता के साथ कार्य किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र कर्म के प्रति समर्पण और ईमानदारी है। अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जौरा के शासकीय विद्यालयों में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुरैना से स्नातक और ग्वालियर में अपने गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता लहोटिया जी के मार्गदर्शन में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता और बड़े भाई स्वर्गीय कौशल माहेश्वरी को दिया, जो बिना शुल्क के निर्धनों के मुकदमे लड़ते थे। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने मनकामेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के गठन में सहयोग किया, जिसके माध्यम से आज मंदिर परिसर में बच्चों के लिए आवास सहित निःशुल्क वैदिक पाठशाला संचालित की जा रही है। जौरा के नागरिकों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले इस क्षेत्र के पहले व्यक्ति के रूप में न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने पूरे जौरा और मुरैना जिले का नाम देशभर में गौरवान्वित किया है और नई पीढ़ी के सामने संघर्ष, सादगी और ईमानदारी का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
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    मुरैना के जौरा में सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार अपने गृहनगर पहुंचे देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जितेंद्र माहेश्वरी का शनिवार को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। न्यू बस स्टैंड से लेकर मनकामेश्वर महादेव मंदिर तक हजारों नागरिकों का जनसैलाब उनके स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ा। इस दौरान पूरे मार्ग में स्वागत द्वार, पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और आतिशबाजी के साथ सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं विभिन्न संगठनों ने उनका माल्यार्पण कर सम्मान किया। स्वागत यात्रा के दौरान पुरानी सब्जी मंडी स्थित मस्जिद के पास मुस्लिम समाज के लोगों ने तिरंगा लहराकर उनका आत्मीय स्वागत किया, जो सामाजिक सद्भाव और जौरा की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि उन्होंने जीवनभर अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए ईमानदारी, निष्ठा और निष्पक्षता के साथ कार्य किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र कर्म के प्रति समर्पण और ईमानदारी है। अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जौरा के शासकीय विद्यालयों में हुई, जिसके बाद उन्होंने मुरैना से स्नातक और ग्वालियर में अपने गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता लहोटिया जी के मार्गदर्शन में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता और बड़े भाई स्वर्गीय कौशल माहेश्वरी को दिया, जो बिना शुल्क के निर्धनों के मुकदमे लड़ते थे।

न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने मनकामेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के गठन में सहयोग किया, जिसके माध्यम से आज मंदिर परिसर में बच्चों के लिए आवास सहित निःशुल्क वैदिक पाठशाला संचालित की जा रही है। जौरा के नागरिकों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले इस क्षेत्र के पहले व्यक्ति के रूप में न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने पूरे जौरा और मुरैना जिले का नाम देशभर में गौरवान्वित किया है और नई पीढ़ी के सामने संघर्ष, सादगी और ईमानदारी का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
    user_Mahesh singh
    Mahesh singh
    Local News Reporter जौरा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • आम धारणा के विपरीत, सहारा दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान नहीं है, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान अंटार्कटिका (Antarctica) है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रेगिस्तान का मतलब सिर्फ रेत से नहीं, बल्कि बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्र से होता है। लोगों से पूछा गया है कि क्या उन्हें यह तथ्य पहले से पता था और उन्हें कमेंट में अपना जवाब (Sahara या Antarctica) देने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही, परीक्षा की तैयारी और ऐसे ही दमदार सामान्य ज्ञान (GK) फैक्ट्स के लिए 'Mahadhurandhar Classes' को फॉलो करने की बात कही गई है।
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    आम धारणा के विपरीत, सहारा दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान नहीं है, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान अंटार्कटिका (Antarctica) है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रेगिस्तान का मतलब सिर्फ रेत से नहीं, बल्कि बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्र से होता है। लोगों से पूछा गया है कि क्या उन्हें यह तथ्य पहले से पता था और उन्हें कमेंट में अपना जवाब (Sahara या Antarctica) देने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही, परीक्षा की तैयारी और ऐसे ही दमदार सामान्य ज्ञान (GK) फैक्ट्स के लिए 'Mahadhurandhar Classes' को फॉलो करने की बात कही गई है।
    user_Vishal vs sharma
    Vishal vs sharma
    Teacher कैलारस, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • धौलपुर के भाजपा पदाधिकारी अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष की शिकायत लेकर जयपुर पहुंचे हैं।
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    धौलपुर के भाजपा पदाधिकारी अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष की शिकायत लेकर जयपुर पहुंचे हैं।
    user_भरत सिंह मीणा सरमथुरा
    भरत सिंह मीणा सरमथुरा
    Voice of people सरमथुरा, धौलपुर, राजस्थान•
    6 min ago
  • धौलपुर के भभूतिपुरा गांव के समीप बाबू महाराज मंदिर पर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में मारे गए जगन गुर्जर की 12वीं की रस्म और पगड़ी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान आयोजित बैठक में जगन गुर्जर हत्याकांड के बाद राज्य सरकार के सामने रखी गई पांच प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रशासन के आश्वासन के बावजूद अब तक इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बैठक को संबोधित करते हुए प्रह्लाद खटाना और रामवीर पोसवाल ने बताया कि 29 जून को जगन गुर्जर की हत्या के बाद अजमेर में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के साथ वार्ता हुई थी। उस समय हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने, अजमेर जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने, जगन के भाई पप्पू गुर्जर को दूसरी जेल में स्थानांतरित करने, जगन को जेल भेजने वाले बाड़ी कोतवाली थाना अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने और जगन के पुत्र आशाराम व परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने सहित पांच मांगें रखी गई थीं। नेताओं का कहना है कि घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा किसी भी मांग पर अमल नहीं किया गया है। प्रशासन की तरफ से केवल जगन गुर्जर के भाई पान सिंह और लाल सिंह को कुछ समय के लिए पैरोल पर गांव भेजा गया है। बैठक में समाज के लोगों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे बड़ा प्रदेशव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसके लिए आने वाले दिनों में व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है।
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    धौलपुर के भभूतिपुरा गांव के समीप बाबू महाराज मंदिर पर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में मारे गए जगन गुर्जर की 12वीं की रस्म और पगड़ी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान आयोजित बैठक में जगन गुर्जर हत्याकांड के बाद राज्य सरकार के सामने रखी गई पांच प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रशासन के आश्वासन के बावजूद अब तक इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रह्लाद खटाना और रामवीर पोसवाल ने बताया कि 29 जून को जगन गुर्जर की हत्या के बाद अजमेर में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के साथ वार्ता हुई थी। उस समय हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने, अजमेर जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने, जगन के भाई पप्पू गुर्जर को दूसरी जेल में स्थानांतरित करने, जगन को जेल भेजने वाले बाड़ी कोतवाली थाना अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने और जगन के पुत्र आशाराम व परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने सहित पांच मांगें रखी गई थीं।

नेताओं का कहना है कि घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा किसी भी मांग पर अमल नहीं किया गया है। प्रशासन की तरफ से केवल जगन गुर्जर के भाई पान सिंह और लाल सिंह को कुछ समय के लिए पैरोल पर गांव भेजा गया है। बैठक में समाज के लोगों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे बड़ा प्रदेशव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और इसके लिए आने वाले दिनों में व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है।
    user_Afaq ahmed
    Afaq ahmed
    Court reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    21 min ago
  • भरततिवारी के फर्जी एनकाउंटर से देश की जनता में भारी आक्रोश है और लोग जगह-जगह कैंडल रैली निकालकर आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। इस घटना को लेकर जनता की पांच प्रमुख मांगें हैं, जिनमें भरततिवारी को शहीद का दर्जा देने, उनके गांव का नाम भरततिवारी रखने, उनके परिवार को आर्थिक सहायता तथा सरकारी नौकरी देने और आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा देने की मांग शामिल है। इसी बीच, कल 11 जुलाई की दोपहर बिहार के हाजीपुर (वैशाली) में एक हैरान करने वाली घटना घटी। सम्राट चौधरी का हेलीकॉप्टर जैसे ही उड़ान भरकर 150 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा, भरततिवारी की आत्मा ने उसे पकड़ लिया, जिसके कारण हेलीकॉप्टर चार मिनट तक हवा में एक ही जगह स्थिर रहा और आगे या ऊपर नहीं बढ़ पाया। इससे घबराए सम्राट चौधरी सोचने लगे कि कहीं यह मौत से सामना तो नहीं है और क्या यह भरततिवारी की आत्मा का ही काम है। उस वक्त नीचे स्टेडियम में मौजूद जनता हेलीकॉप्टर क्रैश होने के डर से भाग खड़ी हुई, जबकि कुछ लोग सोच रहे थे कि पापी का अंत करने के लिए अगर यह हेलीकॉप्टर क्रैश हो जाता तो बढ़िया रहता। आखिरकार चार-पांच मिनट बाद हेलीकॉप्टर आगे बढ़ा, लेकिन सम्राट चौधरी को चेतावनी दी गई है कि किसी और दिन उन्हें हेलीकॉप्टर में ही लपेट दिया जाएगा।
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    भरततिवारी के फर्जी एनकाउंटर से देश की जनता में भारी आक्रोश है और लोग जगह-जगह कैंडल रैली निकालकर आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। इस घटना को लेकर जनता की पांच प्रमुख मांगें हैं, जिनमें भरततिवारी को शहीद का दर्जा देने, उनके गांव का नाम भरततिवारी रखने, उनके परिवार को आर्थिक सहायता तथा सरकारी नौकरी देने और आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा देने की मांग शामिल है।

इसी बीच, कल 11 जुलाई की दोपहर बिहार के हाजीपुर (वैशाली) में एक हैरान करने वाली घटना घटी। सम्राट चौधरी का हेलीकॉप्टर जैसे ही उड़ान भरकर 150 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा, भरततिवारी की आत्मा ने उसे पकड़ लिया, जिसके कारण हेलीकॉप्टर चार मिनट तक हवा में एक ही जगह स्थिर रहा और आगे या ऊपर नहीं बढ़ पाया। इससे घबराए सम्राट चौधरी सोचने लगे कि कहीं यह मौत से सामना तो नहीं है और क्या यह भरततिवारी की आत्मा का ही काम है। उस वक्त नीचे स्टेडियम में मौजूद जनता हेलीकॉप्टर क्रैश होने के डर से भाग खड़ी हुई, जबकि कुछ लोग सोच रहे थे कि पापी का अंत करने के लिए अगर यह हेलीकॉप्टर क्रैश हो जाता तो बढ़िया रहता। आखिरकार चार-पांच मिनट बाद हेलीकॉप्टर आगे बढ़ा, लेकिन सम्राट चौधरी को चेतावनी दी गई है कि किसी और दिन उन्हें हेलीकॉप्टर में ही लपेट दिया जाएगा।
    user_Vimal Kashyap
    Vimal Kashyap
    Artist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    57 min ago
  • धौलपुर जिले के दिहौली थाना क्षेत्र के सुंदरपुर गांव में शनिवार-रविवार की रात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया। अज्ञात चोरों ने एक ही रात में गांव के करण सिंह और वासुदेव शर्मा के दो घरों को निशाना बनाया। चोर इन घरों से लाखों रुपये के कीमती सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेट ले गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब चोरी की यह वारदात हो रही थी, तब दोनों परिवारों के लोग अपने घरों में सो रहे थे, लेकिन किसी को भी चोरों की भनक तक नहीं लगी। सुबह जब पीड़ित परिवारों के सदस्य जागे, तो कमरों का सामान बिखरा देख उनके होश उड़ गए। अलमारियों और बक्सों के ताले टूटे हुए थे और उनमें रखे लाखों के गहने व नकदी गायब थे। ग्रामीणों की सूचना के बाद दिहौली थाने की पुलिस तुरंत दलबल के साथ सुंदरपुर गांव पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर पीड़ितों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर संदिग्धों की धरपकड़ के लिए टीमें गठित कर दी हैं और दावा किया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का माल बरामद कर लिया जाएगा।
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    धौलपुर जिले के दिहौली थाना क्षेत्र के सुंदरपुर गांव में शनिवार-रविवार की रात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया। अज्ञात चोरों ने एक ही रात में गांव के करण सिंह और वासुदेव शर्मा के दो घरों को निशाना बनाया। चोर इन घरों से लाखों रुपये के कीमती सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेट ले गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब चोरी की यह वारदात हो रही थी, तब दोनों परिवारों के लोग अपने घरों में सो रहे थे, लेकिन किसी को भी चोरों की भनक तक नहीं लगी।

सुबह जब पीड़ित परिवारों के सदस्य जागे, तो कमरों का सामान बिखरा देख उनके होश उड़ गए। अलमारियों और बक्सों के ताले टूटे हुए थे और उनमें रखे लाखों के गहने व नकदी गायब थे। ग्रामीणों की सूचना के बाद दिहौली थाने की पुलिस तुरंत दलबल के साथ सुंदरपुर गांव पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर पीड़ितों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर संदिग्धों की धरपकड़ के लिए टीमें गठित कर दी हैं और दावा किया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का माल बरामद कर लिया जाएगा।
    user_ANURAG BAGHEL
    ANURAG BAGHEL
    Local News Reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • जौरा क्षेत्र के प्रसिद्ध पगारा डैम में एक सप्ताह के भीतर डूबने से दूसरी मौत होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में शनिवार को मुरैना के काशीपुरा वार्ड क्रमांक-3 निवासी रामवीर इनदोलिया के 20 वर्षीय पुत्र राहुल इनदोलिया की डैम में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। इससे कुछ दिन पहले संजय नगर, जौरा निवासी मातादीन गुर्जर के पुत्र अनिल गुर्जर की भी इसी डैम में डूबने से जान चली गई थी। बारिश के मौसम में पगारा डैम पर बड़ी संख्या में लोग घूमने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं, जिससे जलस्तर और पानी का बहाव बढ़ने पर हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद लोग गहरे पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। लगातार हो रहे इन हादसों के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से गहरे पानी वाले स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, बैरिकेडिंग करने, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करने और पर्यटकों को खतरनाक क्षेत्रों में जाने से रोकने की मांग की है। एक सप्ताह में हुई इन दो मौतों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही खड़ा होता है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे के बाद ही सुरक्षा के ठोस कदम उठाएगा, या समय रहते कोई प्रभावी व्यवस्था की जाएगी?
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    जौरा क्षेत्र के प्रसिद्ध पगारा डैम में एक सप्ताह के भीतर डूबने से दूसरी मौत होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में शनिवार को मुरैना के काशीपुरा वार्ड क्रमांक-3 निवासी रामवीर इनदोलिया के 20 वर्षीय पुत्र राहुल इनदोलिया की डैम में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। इससे कुछ दिन पहले संजय नगर, जौरा निवासी मातादीन गुर्जर के पुत्र अनिल गुर्जर की भी इसी डैम में डूबने से जान चली गई थी।

बारिश के मौसम में पगारा डैम पर बड़ी संख्या में लोग घूमने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं, जिससे जलस्तर और पानी का बहाव बढ़ने पर हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद लोग गहरे पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। लगातार हो रहे इन हादसों के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से गहरे पानी वाले स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, बैरिकेडिंग करने, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करने और पर्यटकों को खतरनाक क्षेत्रों में जाने से रोकने की मांग की है।

एक सप्ताह में हुई इन दो मौतों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब सबसे बड़ा प्रश्न यही खड़ा होता है कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे के बाद ही सुरक्षा के ठोस कदम उठाएगा, या समय रहते कोई प्रभावी व्यवस्था की जाएगी?
    user_Mahesh singh
    Mahesh singh
    Local News Reporter जौरा, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक पुलिसकर्मी और वकील के बीच मारपीट की घटना हुई है।
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    उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक पुलिसकर्मी और वकील के बीच मारपीट की घटना हुई है।
    user_Tarun Dixit
    Tarun Dixit
    TV News Anchor City Center, Gwalior•
    10 hrs ago
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