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गोंडा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत जायसवाल द्वारा अपनी मां के प्रति व्यक्त किए गए सम्मान और प्रेम भरे शब्दों ने लोगों का दिल जीत लिया है। उन्होंने अपनी मां को अपनी ताकत और विश्वास बताते हुए कहा, "मां मेरी ताकत हैं, मां मेरा विश्वास हैं। इस दुनिया में मां से बढ़कर और कोई नहीं।" एसपी जायसवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने व्यापक चर्चा बटोरी है। लोगों ने इस बयान को मां के प्रति सच्ची श्रद्धा और भारतीय संस्कारों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बताया है, जिसके चलते यह प्रेरणादायक संदेश खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
INDIA NEWS TV REGIONAL BUREAU
गोंडा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत जायसवाल द्वारा अपनी मां के प्रति व्यक्त किए गए सम्मान और प्रेम भरे शब्दों ने लोगों का दिल जीत लिया है। उन्होंने अपनी मां को अपनी ताकत और विश्वास बताते हुए कहा, "मां मेरी ताकत हैं, मां मेरा विश्वास हैं। इस दुनिया में मां से बढ़कर और कोई नहीं।" एसपी जायसवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने व्यापक चर्चा बटोरी है। लोगों ने इस बयान को मां के प्रति सच्ची श्रद्धा और भारतीय संस्कारों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बताया है, जिसके चलते यह प्रेरणादायक संदेश खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
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- गोंडा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विनीत जायसवाल द्वारा अपनी मां के प्रति व्यक्त किए गए सम्मान और प्रेम भरे शब्दों ने लोगों का दिल जीत लिया है। उन्होंने अपनी मां को अपनी ताकत और विश्वास बताते हुए कहा, "मां मेरी ताकत हैं, मां मेरा विश्वास हैं। इस दुनिया में मां से बढ़कर और कोई नहीं।" एसपी जायसवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने व्यापक चर्चा बटोरी है। लोगों ने इस बयान को मां के प्रति सच्ची श्रद्धा और भारतीय संस्कारों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बताया है, जिसके चलते यह प्रेरणादायक संदेश खूब सुर्खियां बटोर रहा है।1
- गोण्डा में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने 30 मई, 2026 को बाबू ईश्वरशरण जिला चिकित्सालय/मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर की विभिन्न व्यवस्थाओं का गहनता से जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मरीजों और तीमारदारों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने सुव्यवस्थित पार्किंग, मरीजों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त व आरामदायक बैठने की व्यवस्था, ओपीडी तथा वेटिंग रूम की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, मरीजों के पर्चों पर लिखी जाने वाली दवाओं का ऑनलाइन कम्प्यूटर अपडेट समयबद्ध और शत-प्रतिशत करने को कहा, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और पूरे परिसर में उच्च स्तर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी विशेष निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि अस्पताल के प्रत्येक फ्लोर पर कम से कम पांच व्हीलचेयर उपलब्ध रहें और डॉक्टरों, नर्सों, कम्पाउंडरों सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती हो, जिससे गुणवत्तापूर्ण और त्वरित चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। इस अवसर पर, जिलाधिकारी ने प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अधीक्षक को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान दिए गए सभी निर्देशों का अनुपालन आगामी 15 दिनों के भीतर पूरी तरह से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। श्रीमती प्रियंका निरंजन ने दोहराया कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज और तीमारदार को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और अधिकारियों को ऐसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जिससे लोगों को सहज एवं सम्मानजनक वातावरण में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों।3
- योगी बाबा की जय हो! अब 'बुलडोजर बाबा' का कहर चलेगा, जिससे माफिया की खैर नहीं होगी और सभी को जेल जाना पड़ेगा। इस बार इंसाफ की जीत होकर रहेगी, क्योंकि 'बुलडोजर बाबा' आ रहे हैं और माफिया को उनके बिलों से ढूंढ निकालेंगे। यह पूरी तरह से इंसाफ का 'योगी मॉडल' है।1
- अयोध्या को मुख्यमंत्री योगी की ओर से एक और नई और बड़ी सौगात मिली है, जहाँ अब एक भव्य "लवकुश पार्क" का निर्माण किया जाएगा। यह पार्क 17.72 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा, जिसमें "वेस्ट टू आर्ट" की थीम पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों को 3D और लाइट-साउंड तकनीक के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। इस "लवकुश पार्क" को अयोध्या के मऊशिवाला क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। इस पहल से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और संस्कृति को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।1
- जनपद अयोध्या के बीकापुर तहसील में किसान मस्त राम वर्मा का चार दिनों से चल रहा अनशन प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर ही तुड़वा दिया। शुक्रवार की रात करीब 11 बजे नायब तहसीलदार राम खेलावन ने तारुन और बीकापुर के कोतवाल के साथ मिलकर शहीद स्मारक पर किसान से वार्ता की। इस वार्ता के बाद किसान मस्त राम वर्मा को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया गया, जिसके बाद किसान अपने गांव लौट गया। किसान का आरोप था कि SDM और नायब उन्हें पुराने घर के स्थान पर नया घर बनाने नहीं दे रहे थे, क्योंकि इस संबंध में कोई मुकदमा चल रहा है। प्रशासन के हरकत में आने से पहले बकरीद के दिन LIU ने भी अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी, जिसके बाद SDM बीकापुर ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया था। इसी पृष्ठभूमि में किसान और प्रशासन के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई, जिसके परिणामस्वरूप यह मामला निपट गया।1
- रानू पाली चौकी से संबंधित एक मामले में, एक किसान की जमीन पर रात करीब 7:30 बजे जबरन कब्जा कर लिया गया है। यह घटना किसान की भूमि पर अवैध अधिकार जमाने से जुड़ी है।1
- अयोध्या के नगर निगम अंतर्गत आचार्य नरेंद्र वार्ड में चल रहा नाली निर्माण कार्य प्रशासनिक लापरवाही और गंभीर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिख रहा है। शासन की स्पष्ट मंशा और जिलाधिकारी व नगर आयुक्त के सख्त आदेशों के बावजूद, निर्माण की जमीनी हकीकत बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है। नियमावली के तहत 4:1 के मसाले और 'अव्वल दर्जे' की ईंटों का उपयोग होना चाहिए, लेकिन मौके पर इन मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय पार्षद अनूप श्रीवास्तव ने भी इन अनियमितताओं की पुष्टि की है। उन्होंने अधिकारियों को मनमानी की जानकारी दी थी, पर इसके बावजूद स्थिति नहीं बदली। जब निर्माण की देखरेख के लिए जिम्मेदार जेई अमित जायसवाल से मानकों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने '4:1 के मसाले और अव्वल ईंट' का रटा-रटाया जवाब दिया। हालांकि, जब उनसे मौके पर मानकों का पालन न होने और वीडियो-फोटो साक्ष्य देखने का आग्रह किया गया, तो वे सवालों का सामना नहीं कर पाए और बात पूरी होने से पहले ही फोन काट दिया। बाद में उन्होंने जवाबदेही से बचने के लिए दोबारा कॉल उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। जेई की यह चुप्पी केवल जवाबदेही से कतराना ही नहीं, बल्कि जानबूझकर अपनी गलतियों को छुपाने और जनता व मीडिया से दूरी बनाने का प्रमाण है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या नाली का निर्माण पुरानी संरचना को खोदकर किया जा रहा है या पुरानी नाली के ऊपर ही नई जुड़ाई हो रही है? यदि नाली के ऊपर नाली बन रही है, तो क्या यह तकनीकी रूप से सफल और टिकाऊ होगी? वार्ड में कुल कितनी नाली नई बननी हैं और कुल कार्य की लंबाई क्या है? क्या स्वीकृत बजट और कार्य की वास्तविक गुणवत्ता में कोई तालमेल है? मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, क्या जेई साहब को इन आदेशों की अनदेखी करने की खुली छूट मिली है? क्या ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए अधिकारियों द्वारा जानबूझकर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है? आखिर नगर निगम का बजट आम जनता की सुविधा के लिए है या ठेकेदारों की जेब भरने के लिए? आचार्य नरेंद्र वार्ड की जनता देख रही है कि आधे से ज्यादा निर्माण पूरा हो चुका है। अब सवाल यह है कि बचे हुए हिस्से में क्या प्रशासन कोई सुधार करेगा या कागजी खानापूर्ति के जरिए भ्रष्टाचार की इस फाइल को भी दबा दिया जाएगा। नगर आयुक्त और डीएम साहब के सख्त आदेशों के बावजूद जेई साहब की यह 'गर्मी' और सवालों से भागने की आदत कहीं न कहीं विकास के दावों की धज्जियां उड़ा रही है। अब देखना यह है कि इस भ्रष्टाचार पर लीपा-पोती होती है या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाती है।1
- गोंडा में 30 मई, 2026 को जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से बाबू ईश्वरशरण जिला चिकित्सालय/मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज परिसर की विभिन्न व्यवस्थाओं का गहनता से जायजा लिया। निरीक्षण में जिलाधिकारी ने मरीजों और तीमारदारों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, आमजन के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग और उनके बैठने के लिए पर्याप्त तथा सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ओपीडी, वेटिंग रूम और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं में सुधार पर जोर दिया। इसके साथ ही, मरीजों के पर्चों पर लिखी जाने वाली दवाओं का ऑनलाइन कम्प्यूटर अपडेट समयबद्ध और शत-प्रतिशत रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि अनावश्यक परेशानी न हो। जिलाधिकारी ने शौचालयों की नियमित साफ-सफाई तथा पूरे अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज परिसर में उच्च स्तर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी विशेष निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रत्येक फ्लोर पर कम से कम पांच-पांच व्हीलचेयर उपलब्ध कराने पर बल दिया, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को असुविधा न हो। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि डॉक्टरों, नर्सों, कम्पाउंडरों और अन्य आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त संख्या में तैनाती हो, जिससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और त्वरित चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। जिलाधिकारी ने इस अवसर पर प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अधीक्षक को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान दिए गए सभी निर्देशों का अनुपालन आगामी 15 दिनों के भीतर पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। श्रीमती प्रियंका निरंजन ने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज और तीमारदार को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उन्हें सहज एवं सम्मानजनक वातावरण में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों।1