डुमरी में बेखौफ बालू माफिया! नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल डुमरी में बेखौफ बालू माफिया! नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल डुमरी थाना क्षेत्र में इन दिनों नदी से बालू की अवैध ढुलाई का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। जानकारी देते हुए शनिवार शाम चार बजे बताया गया कि यह गतिविधि खुलेआम प्रशासन की नजरों के सामने संचालित हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और सरकारी राजस्व प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अहले सुबह से ही बासा नदी, डुमरडांड नदी और शंख नदी सहित कई घाटों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतार देखी जा रही है। बिना किसी वैध अनुमति के नदी से बालू निकालकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि बालू ढुलाई में लगे अधिकांश ट्रैक्टर नाबालिग चालक चला रहे हैं, जिनकी उम्र अठारह वर्ष से कम बताई जा रही है। इनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी। ऐसे में नाबालिगों की जान के साथ-साथ आम राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नई और पुरानी गाड़ियों में गिने-चुने वाहनों को छोड़कर अधिकतर बिना पंजीकरण पहचान के संचालित हो रहे हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार प्रशासन और बालू माफियाओं की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निगरानी सख्त होती, तो इतनी बड़ी संख्या में खुलेआम अवैध खनन और ढुलाई संभव नहीं होती। समय-समय पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अवैध खनन के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। जहां वैध खनन से सरकारी आय बढ़ सकती थी, वहीं अवैध ढुलाई से यह पैसा माफियाओं की जेब में जा रहा है। अनियंत्रित बालू उठाव से पर्यावरणीय संतुलन पर भी खतरा मंडराने लगा है और नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने, नाबालिग चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
डुमरी में बेखौफ बालू माफिया! नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल डुमरी में बेखौफ बालू माफिया! नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल डुमरी थाना क्षेत्र में इन दिनों नदी से बालू की अवैध ढुलाई का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। जानकारी देते हुए शनिवार शाम चार बजे बताया गया कि यह गतिविधि खुलेआम प्रशासन की नजरों के सामने संचालित हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और सरकारी राजस्व प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अहले सुबह से ही बासा नदी, डुमरडांड नदी और शंख नदी सहित कई घाटों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतार देखी जा रही है। बिना किसी वैध अनुमति के नदी से बालू निकालकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि बालू ढुलाई में लगे अधिकांश ट्रैक्टर नाबालिग चालक चला रहे हैं, जिनकी उम्र अठारह वर्ष से कम बताई जा रही है। इनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी। ऐसे में नाबालिगों की जान के साथ-साथ आम राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नई और पुरानी गाड़ियों में गिने-चुने वाहनों को छोड़कर अधिकतर बिना पंजीकरण पहचान के संचालित हो रहे हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार प्रशासन और बालू माफियाओं की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निगरानी सख्त होती, तो इतनी बड़ी संख्या में खुलेआम अवैध खनन और ढुलाई संभव नहीं होती। समय-समय पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अवैध खनन के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। जहां वैध खनन से सरकारी आय बढ़ सकती थी, वहीं अवैध ढुलाई से यह पैसा माफियाओं की जेब में जा रहा है। अनियंत्रित बालू उठाव से पर्यावरणीय संतुलन पर भी खतरा मंडराने लगा है और नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने, नाबालिग चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
- जंगल में आग की बढ़ती घटनाओं से पर्यावरण पर खतरा, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल जारी प्रखंड अंतर्गत जरडा गांव स्थित वन क्षेत्र में इन दिनों लगातार जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले कई दिनों से जंगल के अलग-अलग हिस्सों में आग फैल रही है, लेकिन समय पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। जानकारी देते हुए शनिवार शाम पांच बजे बताया गया कि जंगल में लगी आग लगातार फैलती जा रही है और अब कई हिस्सों की हरियाली आग की चपेट में आ चुकी है। पेड़-पौधों के साथ वन्य जीव-जंतुओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। आग से उठ रहे धुएं के कारण आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होने की शिकायत भी सामने आ रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं, इसके बावजूद वन विभाग की ओर से आग रोकथाम के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की जाती। आग लगने की सूचना देने के बाद भी मौके पर त्वरित कार्रवाई नहीं होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि समय रहते फायर लाइन निर्माण, नियमित गश्ती व्यवस्था और जनजागरूकता अभियान चलाया जाता तो आग की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता था। लगातार फैल रही आग से वन क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं वन विभाग से मांग की है कि जंगल में लगी आग पर तत्काल नियंत्रण के लिए विशेष टीम तैनात की जाए, आग लगने के कारणों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस योजना बनाई जाए। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर पर्यावरण के साथ-साथ मानव जीवन पर भी पड़ सकता है।1
- गुमला: कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या 1/पी०-105/2022 का०-2299, दिनांक 17.04.2026 के आलोक में, भा०प्र०से० (झा0-2015) के अधिकारी दिलेश्वर महत्तो ने आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 के पूर्वाह्न में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, गुमला के पद का प्रभार स्वतः ग्रहण किया।पदभार ग्रहण करने के उपरांत उपायुक्त ने कहा कि जिले में संचालित विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना उनकी प्राथमिकता होगी।उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।उपायुक्त ने यह भी कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु सभी स्तरों पर समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा।1
- एटा बाटा#1
- गुमला: कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या 1/पी०-105/2022 का०-2299, दिनांक 17.04.2026 के आलोक में, भा०प्र०से० (झा0-2015) के अधिकारी दिलेश्वर महत्तो ने आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 के पूर्वाह्न में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, गुमला के पद का प्रभार स्वतः ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के उपरांत उपायुक्त ने कहा कि जिले में संचालित विकास योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। उपायुक्त ने यह भी कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु सभी स्तरों पर समन्वय के साथ कार्य किया जाएगा।1
- Post by Chand raja2
- चैनपुर: अनुमंडल मुख्यालय में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अनुमंडल स्तरीय अस्पताल के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला गरमा गया है। समाचार पत्रों में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद मंगलवार को भवन निर्माण विभाग के सहायक अभियंता नंदू कुमार जांच के लिए चैनपुर पहुंचे।1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ग्राम सेमरबुढ़नी में प्रस्तावित नए अस्पताल निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। भूमि सीमांकन के लिए पहुंचे विभागीय जेई को ग्रामीणों के विरोध के कारण बिना काम किए ही वापस लौटना पड़ा। ग्राम प्रधान विजय खलखो ने बताया कि गांव में कुछ वर्ष पूर्व ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन बनाया गया था, लेकिन आज तक वहां से ग्रामीणों को कोई भी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस कारण लोगों में सरकार की योजनाओं के प्रति विश्वास लगातार कम होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पहले से निर्मित स्वास्थ्य केंद्र ही निष्क्रिय पड़ा है, तो नए अस्पताल के निर्माण का कोई औचित्य नहीं है। उनका आरोप है कि केवल भवन निर्माण के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं तक नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की कि पहले से बने उप स्वास्थ्य केंद्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) को चालू कर उसमें डॉक्टर, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद ही नए स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण पर विचार किया जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं की जाती, तब तक वे नए अस्पताल निर्माण कार्य का विरोध जारी रखेंगे। मौके पर बिनोद प्रसाद, भुषण तिर्की, बिनोद महली, मिखाईल लकड़ा समेत अन्य कई ग्रामीण उपस्थित थे।2
- डुमरी में बेखौफ बालू माफिया! नाबालिग चला रहे ट्रैक्टर, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल डुमरी थाना क्षेत्र में इन दिनों नदी से बालू की अवैध ढुलाई का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। जानकारी देते हुए शनिवार शाम चार बजे बताया गया कि यह गतिविधि खुलेआम प्रशासन की नजरों के सामने संचालित हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और सरकारी राजस्व प्रणाली दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अहले सुबह से ही बासा नदी, डुमरडांड नदी और शंख नदी सहित कई घाटों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतार देखी जा रही है। बिना किसी वैध अनुमति के नदी से बालू निकालकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि बालू ढुलाई में लगे अधिकांश ट्रैक्टर नाबालिग चालक चला रहे हैं, जिनकी उम्र अठारह वर्ष से कम बताई जा रही है। इनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी। ऐसे में नाबालिगों की जान के साथ-साथ आम राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नई और पुरानी गाड़ियों में गिने-चुने वाहनों को छोड़कर अधिकतर बिना पंजीकरण पहचान के संचालित हो रहे हैं, जो मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार प्रशासन और बालू माफियाओं की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निगरानी सख्त होती, तो इतनी बड़ी संख्या में खुलेआम अवैध खनन और ढुलाई संभव नहीं होती। समय-समय पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अवैध खनन के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। जहां वैध खनन से सरकारी आय बढ़ सकती थी, वहीं अवैध ढुलाई से यह पैसा माफियाओं की जेब में जा रहा है। अनियंत्रित बालू उठाव से पर्यावरणीय संतुलन पर भी खतरा मंडराने लगा है और नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने, नाबालिग चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।1