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Jhansi 03 डंफर और 02 बुलेट सीज.. काटा 123000 का चालान.....आज टी आई देवेन्द्र शर्मा ने बिजौली में 03 डंफर सीज किए और सदर बाजार में 02 बुलेट मॉडिफाई साइलेंसर में सीज की गई तथा 01 कार का स्टंट में चालान काटा और 01 बस का प्रेशर हॉर्न में चालान काटा तथा 03 बुलेट मोटरसाइकिल का भिन्न भिन्न स्थान पर मोडीफाई साइलेंसर में चालान काटा।।

2 hrs ago
user_Mohammad Irshad
Mohammad Irshad
झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

Jhansi 03 डंफर और 02 बुलेट सीज.. काटा 123000 का चालान.....आज टी आई देवेन्द्र शर्मा ने बिजौली में 03 डंफर सीज किए और सदर बाजार में 02 बुलेट मॉडिफाई साइलेंसर में सीज की गई तथा 01 कार का स्टंट में चालान काटा और 01 बस का प्रेशर हॉर्न में चालान काटा तथा 03 बुलेट मोटरसाइकिल का भिन्न भिन्न स्थान पर मोडीफाई साइलेंसर में चालान काटा।।

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  • खूंखार सांड ने तीन लोगों को किया घायल दो झांसी रेफर ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर पकड़ा झांसी पूंछ पूंछ नगर में करीब 15 दिनों से एक खूंखार सांड राहगीरो को दौड़ा-दौड़ा कर मार रहा था आज सुबह पूछ निवासी संतोष साहू मुन्ना यादव एवं मानसिंह कुशवाहा को गंभीर रूप से मारकर घायल कर दिया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें झांसी रेफर कर दिया गया कई दिनों से ग्रामीण वन विभाग एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों को दूरभाष पर सूचना देकर सांड को रेस्क्यू करने की बात कर रहे थे लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की बात को अनसुना कर दिया और आज इस खूंखार सांड ने तीन राहगीरों को गंभीर रूप से घायल कर दिया स्थानीय पुलिस एवं पूँछ के ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाकर बड़ी मशक्कत के बाद खूंखार सांड को पकड़ कर एक पेड़ से बांध दिया प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम भी पहुंच चुकी हैं
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    खूंखार सांड ने तीन लोगों को किया घायल दो झांसी रेफर  ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर पकड़ा
झांसी पूंछ 
पूंछ नगर में करीब 15 दिनों से एक खूंखार सांड राहगीरो को दौड़ा-दौड़ा कर मार रहा था आज सुबह पूछ निवासी संतोष साहू मुन्ना यादव एवं मानसिंह कुशवाहा को गंभीर रूप से मारकर घायल कर दिया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें झांसी रेफर कर दिया गया कई दिनों से ग्रामीण वन विभाग एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों को दूरभाष पर सूचना देकर सांड को रेस्क्यू करने की बात कर रहे थे लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की बात को अनसुना कर दिया और आज इस खूंखार सांड ने तीन राहगीरों को गंभीर रूप से घायल कर दिया स्थानीय पुलिस एवं पूँछ के ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाकर बड़ी मशक्कत के बाद खूंखार सांड को पकड़ कर एक पेड़ से बांध दिया प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम भी पहुंच चुकी हैं
    user_प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना
    प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना
    Local News Reporter झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    17 min ago
  • झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4- 5 पर लगी रेलवे लिफ्ट में 6 लोग फंस गए जिसमें दो बच्चे भी थे।, आधे घंटे बाद मौके पहुंचे रेलवे का स्टाफ और लिफ्ट टेक्नीशियन ने रेस्क्यू कर लेट में फंसे सभी लोगों को एक-एक करके सीढ़ी की मदद से नीचे उतारा, बताया जा रहा है जैसे ही यात्री अंदर लिफ्ट के अंदर गया तभी उस यात्री का बैग फस गया जिस वजह से चलती लिफ्ट बीच में फस गई, अंदर मौजूद टी टी ई स्टाफ ने इनफॉरमेशन रेलवे के अधिकारियों को दी, इसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पहुंची और बीच में फांसी लिफ्ट की चादर को काटकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, फिर डॉक्टर की टीम ने घबराये यात्री और रेलवे कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण किया गया और उन्हें जरूरत के हिसाब से दवाइयां देकर सभी को जाने दिया गया। वही लिफ्ट में फंसी महिला यात्री मंजू ने बताया कि जब हम लोगों की लिफ्ट चलती हुई बंद हो गई और बार-बार पंखा चालू बंद हो रहा था जिससे घबराहट हो गई और आधे घंटे ज्यादा लिफ्ट में फंसे रहे।
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    झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4- 5 पर लगी रेलवे लिफ्ट में 6 लोग फंस गए जिसमें दो बच्चे भी थे।, आधे घंटे बाद मौके पहुंचे रेलवे का स्टाफ और लिफ्ट टेक्नीशियन ने रेस्क्यू कर लेट में फंसे सभी लोगों को एक-एक करके सीढ़ी की मदद से नीचे उतारा, बताया जा रहा है जैसे ही यात्री अंदर लिफ्ट के अंदर गया तभी उस यात्री का बैग फस गया जिस वजह से चलती लिफ्ट बीच में फस गई, अंदर मौजूद टी टी ई स्टाफ ने इनफॉरमेशन रेलवे के अधिकारियों को दी, इसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पहुंची और बीच में फांसी लिफ्ट की चादर को काटकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, फिर डॉक्टर की टीम ने घबराये यात्री और रेलवे कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण किया गया और उन्हें जरूरत के हिसाब से दवाइयां देकर सभी को जाने दिया गया। वही लिफ्ट में फंसी महिला यात्री मंजू ने बताया कि जब हम लोगों की लिफ्ट चलती हुई बंद हो गई और बार-बार पंखा चालू बंद हो रहा था जिससे घबराहट हो गई और आधे घंटे ज्यादा लिफ्ट में फंसे रहे।
    user_Amir Sohail
    Amir Sohail
    झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Mohammad Irshad
    2
    Post by Mohammad Irshad
    user_Mohammad Irshad
    Mohammad Irshad
    झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • संघर्ष सेवा समिति कार्यालय पर धूमधाम से मना भाजपा मीडिया प्रभारी का जन्मदिन झाँसी। संघर्ष सेवा समिति के कार्यालय में आज भारतीय जनता पार्टी (सदर कैंट मंडल) के मीडिया प्रभारी किशन त्रिपाठी का जन्मदिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी ने किशन का तिलक लगाकर और माल्यार्पण कर स्वागत किया, जिसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर केक काटा।  कार्यक्रमके दौरान डॉ. संदीप सरावगी ने किशन त्रिपाठी को आशीर्वाद देते हुए कहा, "किशन न केवल भारतीय जनता पार्टी के एक ऊर्जावान मीडिया प्रभारी हैं, बल्कि वे समाज के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील युवा हैं। एक जागरूक मीडिया प्रभारी के रूप में वे जनता और संगठन के बीच सेतु का कार्य बखूबी कर रहे हैं। ईश्वर उन्हें दीर्घायु प्रदान करें और वे इसी तरह सेवा भाव के साथ उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।"  इस दौरान मुख्य रूप से अमन कान्त, मोहित मिश्रा, कुंज बिहारी श्रीवास, राघवेन्द्र गुप्ता, चार्ली, आकाश रॉबट, संदीप नामदेव, अनुज प्रताप सिंह, राजू सेन, राकेश अहिरवार, सिद्धांत गुप्ता, सुशांत गैंडा, बसंत गुप्ता, शुभांशु वर्मा, प्रवेंद्र सिंह, साहिल कुशवाहा आदि उपस्थित रहे। सभी ने किशन त्रिपाठी को मिठाई खिलाकर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
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    संघर्ष सेवा समिति कार्यालय पर धूमधाम से मना भाजपा मीडिया प्रभारी का जन्मदिन
झाँसी। संघर्ष सेवा समिति के कार्यालय में आज भारतीय जनता पार्टी (सदर कैंट मंडल) के मीडिया प्रभारी किशन त्रिपाठी का जन्मदिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी ने किशन का तिलक लगाकर और माल्यार्पण कर स्वागत किया, जिसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर केक काटा। 
कार्यक्रमके दौरान डॉ. संदीप सरावगी ने किशन त्रिपाठी को आशीर्वाद देते हुए कहा, "किशन न केवल भारतीय जनता पार्टी के एक ऊर्जावान मीडिया प्रभारी हैं, बल्कि वे समाज के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील युवा हैं। एक जागरूक मीडिया प्रभारी के रूप में वे जनता और संगठन के बीच सेतु का कार्य बखूबी कर रहे हैं। ईश्वर उन्हें दीर्घायु प्रदान करें और वे इसी तरह सेवा भाव के साथ उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।" 
इस दौरान मुख्य रूप से अमन कान्त, मोहित मिश्रा, कुंज बिहारी श्रीवास, राघवेन्द्र गुप्ता, चार्ली, आकाश रॉबट, संदीप नामदेव, अनुज प्रताप सिंह, राजू सेन, राकेश अहिरवार, सिद्धांत गुप्ता, सुशांत गैंडा, बसंत गुप्ता, शुभांशु वर्मा, प्रवेंद्र सिंह, साहिल कुशवाहा आदि उपस्थित रहे। सभी ने किशन त्रिपाठी को मिठाई खिलाकर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
    user_Pramendra kumar singh
    Pramendra kumar singh
    झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
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    Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Jhansi, Uttar Pradesh•
    4 hrs ago
  • Post by Bablu Ramaiya
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    Post by Bablu Ramaiya
    user_Bablu Ramaiya
    Bablu Ramaiya
    Photographer झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • झाँसी। महानगर के एक मुख्य रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र में इन दिनों नियमों को दरकिनार कर की जा रही गहरी खुदाई चर्चा और भय का विषय बनी हुई है। चार सितारा होटल, पेट्रोल पंप और बहुमंजिला कमर्शियल बिल्डिंगों से घिरे इस संवेदनशील इलाके में लगभग 45 से 50 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के उजाले में तो काम चलता ही है, लेकिन रात के अंधेरे में बड़ी-बड़ी मशीनें और दर्जनों डम्फर मिट्टी व पत्थर ढोने में लग जाते हैं, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका प्रबल हो गई है। नियमों की अनदेखी: क्या हैं खुदाई के मानक? किसी भी निर्माण कार्य के लिए की जाने वाली खुदाई के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) और स्थानीय विकास प्राधिकरण के सख्त नियम हैं।  मुख्य मानक निम्नलिखित हैं: सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी की जांच): खुदाई से पहले मिट्टी की भार वहन क्षमता जांची जाती है। यदि मिट्टी भुरभुरी है, तो गहरी खुदाई आसपास की इमारतों की नींव को हिला सकती है।  शॉरिंग और रिटेनिंग वॉल: यदि खुदाई 5-10 फीट से अधिक गहरी है, तो बगल की जमीन को धंसने से रोकने के लिए लोहे की शीट या कंक्रीट की रिटेनिंग वॉल बनाना अनिवार्य है। इस साइट पर सुरक्षा के ऐसे इंतजाम नगण्य दिख रहे हैं।  बफर जोन: पेट्रोल पंप और पहले से निर्मित बहुमंजिला इमारतों के एकदम करीब इतनी गहरी खुदाई करना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। बहुमंजिला इमारत के लिए नींव की गहराई आमतौर पर एक बहुमंजिला इमारत के लिए खुदाई इस बात पर निर्भर करती है कि वहां कितने फ्लोर का बेसमेंट बनना है: सिंगल बेसमेंट: 10 से 12 फीट। डबल बेसमेंट: 20 से 25 फीट। ट्रिपल बेसमेंट: 30 से 35 फीट। 45 से 50 फीट की खुदाई का मतलब है कि वहां 4 से 5 स्तर का बेसमेंट प्रस्तावित है या फिर वहां से अवैध रूप से खनिज (मिट्टी/पत्थर) निकाला जा रहा है। इतनी गहराई पर जाने के लिए विशेष इंजीनियरिंग अनुमति और स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। प्रशासन और विभाग की भूमिका पर सवाल इतने बड़े पैमाने पर हो रही खुदाई ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं: विकास प्राधिकरण: क्या मानचित्र में इतनी गहरी खुदाई और बहु-स्तरीय बेसमेंट की अनुमति दी गई है? क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा जाली और बोर्ड लगाया गया है? खनिज विभाग: शहरी क्षेत्र में 50 फीट खुदाई का मतलब है भारी मात्रा में पत्थर और मिट्टी का निकलना। क्या इन डम्फरों के पास 'रॉयल्टी' या खनिज परिवहन का वैध परमिट है? रात में मशीनों का चलना अक्सर अवैध खनन की ओर इशारा करता है। जिला प्रशासन: रिहायशी इलाके में भारी मशीनों के कारण होने वाले ध्वनि प्रदूषण और पेट्रोल पंप जैसी संवेदनशील जगह के पास सुरक्षा ऑडिट की जिम्मेदारी प्रशासन की है। हादसे को न्यौता: आसपास की इमारतों में रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि बारिश होती है या जमीन के अंदर जलस्तर में बदलाव आता है, तो 50 फीट गहरा यह गड्ढा बगल के पेट्रोल पंप और कमर्शियल बिल्डिंगों के लिए काल बन सकता है। क्या वाकई है 45 फीट की अनुमति? जब इस मामले में निर्माण कार्य करा रहे उत्तरदायी व्यक्तियों और ठेकेदारों से बात की गई, तो उनका दावा है कि यह खुदाई अवैध नहीं है। कार्यस्थल पर मौजूद प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके पास प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से 45 फीट गहराई तक खुदाई करने की विधिवत अनुमति मौजूद है। उनका तर्क है कि भविष्य की बड़ी परियोजना और बहुमंजिला ढांचे की मजबूती के लिए इतनी गहराई तक जाना तकनीकी रूप से आवश्यक है। हालाँकि, निर्माण पक्ष के इस दावे ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं: सुरक्षा ऑडिट: यदि 45 फीट की अनुमति मिली भी है, तो क्या इतनी गहराई के लिए जरूरी 'रिटेनिंग वॉल' और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है? खनिज निकासी: क्या प्रशासन ने केवल खुदाई की अनुमति दी है या वहां से निकलने वाले बेशकीमती पत्थरों और मिट्टी के व्यावसायिक परिवहन की भी मंजूरी दी है? पड़ोसी इमारतों की सुरक्षा: 45 फीट का गड्ढा पास में स्थित पेट्रोल पंप और अन्य कमर्शियल बिल्डिंगों की 'सॉइल स्टेबिलिटी' (मिट्टी की स्थिरता) को प्रभावित कर सकता है। क्या अनुमति देने से पहले इन जोखिमों का आकलन किया गया था? प्रशासनिक अनुमति का दावा अपनी जगह है, लेकिन धरातल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना और रात के अंधेरे में मशीनों का भारी शोर स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा रहा है। जिला प्रशासन को आवश्यक रूप से इन दावों की सत्यता की जांच करना चाहिए।
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    झाँसी। महानगर के एक मुख्य रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र में इन दिनों नियमों को दरकिनार कर की जा रही गहरी खुदाई चर्चा और भय का विषय बनी हुई है। चार सितारा होटल, पेट्रोल पंप और बहुमंजिला कमर्शियल बिल्डिंगों से घिरे इस संवेदनशील इलाके में लगभग 45 से 50 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के उजाले में तो काम चलता ही है, लेकिन रात के अंधेरे में बड़ी-बड़ी मशीनें और दर्जनों डम्फर मिट्टी व पत्थर ढोने में लग जाते हैं, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका प्रबल हो गई है।
नियमों की अनदेखी: क्या हैं खुदाई के मानक?
किसी भी निर्माण कार्य के लिए की जाने वाली खुदाई के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) और स्थानीय विकास प्राधिकरण के सख्त नियम हैं। 
मुख्य मानक निम्नलिखित हैं:
सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी की जांच): खुदाई से पहले मिट्टी की भार वहन क्षमता जांची जाती है। यदि मिट्टी भुरभुरी है, तो गहरी खुदाई आसपास की इमारतों की नींव को हिला सकती है। 
शॉरिंग और रिटेनिंग वॉल: यदि खुदाई 5-10 फीट से अधिक गहरी है, तो बगल की जमीन को धंसने से रोकने के लिए लोहे की शीट या कंक्रीट की रिटेनिंग वॉल बनाना अनिवार्य है। इस साइट पर सुरक्षा के ऐसे इंतजाम नगण्य दिख रहे हैं। 
बफर जोन: पेट्रोल पंप और पहले से निर्मित बहुमंजिला इमारतों के एकदम करीब इतनी गहरी खुदाई करना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
बहुमंजिला इमारत के लिए नींव की गहराई
आमतौर पर एक बहुमंजिला इमारत के लिए खुदाई इस बात पर निर्भर करती है कि वहां कितने फ्लोर का बेसमेंट बनना है:
सिंगल बेसमेंट: 10 से 12 फीट।
डबल बेसमेंट: 20 से 25 फीट।
ट्रिपल बेसमेंट: 30 से 35 फीट।
45 से 50 फीट की खुदाई का मतलब है कि वहां 4 से 5 स्तर का बेसमेंट प्रस्तावित है या फिर वहां से अवैध रूप से खनिज (मिट्टी/पत्थर) निकाला जा रहा है। इतनी गहराई पर जाने के लिए विशेष इंजीनियरिंग अनुमति और स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है।
प्रशासन और विभाग की भूमिका पर सवाल
इतने बड़े पैमाने पर हो रही खुदाई ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं:
विकास प्राधिकरण: क्या मानचित्र में इतनी गहरी खुदाई और बहु-स्तरीय बेसमेंट की अनुमति दी गई है? क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा जाली और बोर्ड लगाया गया है?
खनिज विभाग: शहरी क्षेत्र में 50 फीट खुदाई का मतलब है भारी मात्रा में पत्थर और मिट्टी का निकलना। क्या इन डम्फरों के पास 'रॉयल्टी' या खनिज परिवहन का वैध परमिट है? रात में मशीनों का चलना अक्सर अवैध खनन की ओर इशारा करता है।
जिला प्रशासन: रिहायशी इलाके में भारी मशीनों के कारण होने वाले ध्वनि प्रदूषण और पेट्रोल पंप जैसी संवेदनशील जगह के पास सुरक्षा ऑडिट की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
हादसे को न्यौता: आसपास की इमारतों में रहने वाले लोगों का कहना है कि यदि बारिश होती है या जमीन के अंदर जलस्तर में बदलाव आता है, तो 50 फीट गहरा यह गड्ढा बगल के पेट्रोल पंप और कमर्शियल बिल्डिंगों के लिए काल बन सकता है। 
क्या वाकई है 45 फीट की अनुमति?
जब इस मामले में निर्माण कार्य करा रहे उत्तरदायी व्यक्तियों और ठेकेदारों से बात की गई, तो उनका दावा है कि यह खुदाई अवैध नहीं है। कार्यस्थल पर मौजूद प्रतिनिधियों का कहना है कि उनके पास प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से 45 फीट गहराई तक खुदाई करने की विधिवत अनुमति मौजूद है। उनका तर्क है कि भविष्य की बड़ी परियोजना और बहुमंजिला ढांचे की मजबूती के लिए इतनी गहराई तक जाना तकनीकी रूप से आवश्यक है।
हालाँकि, निर्माण पक्ष के इस दावे ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं:
सुरक्षा ऑडिट: यदि 45 फीट की अनुमति मिली भी है, तो क्या इतनी गहराई के लिए जरूरी 'रिटेनिंग वॉल' और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है?
खनिज निकासी: क्या प्रशासन ने केवल खुदाई की अनुमति दी है या वहां से निकलने वाले बेशकीमती पत्थरों और मिट्टी के व्यावसायिक परिवहन की भी मंजूरी दी है?
पड़ोसी इमारतों की सुरक्षा: 45 फीट का गड्ढा पास में स्थित पेट्रोल पंप और अन्य कमर्शियल बिल्डिंगों की 'सॉइल स्टेबिलिटी' (मिट्टी की स्थिरता) को प्रभावित कर सकता है। क्या अनुमति देने से पहले इन जोखिमों का आकलन किया गया था?
प्रशासनिक अनुमति का दावा अपनी जगह है, लेकिन धरातल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना और रात के अंधेरे में मशीनों का भारी शोर स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा रहा है। जिला प्रशासन को आवश्यक रूप से इन दावों की सत्यता की जांच करना चाहिए।
    user_अतुल वर्मा
    अतुल वर्मा
    झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by Mohammad Irshad
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    Post by Mohammad Irshad
    user_Mohammad Irshad
    Mohammad Irshad
    झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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