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Rohini sector 25 jay jay colony North West Delhi Rohini Delhi yah J Jcolony D block ka parik ki khabar hai
RajaBabu
Rohini sector 25 jay jay colony North West Delhi Rohini Delhi yah J Jcolony D block ka parik ki khabar hai
More news from North West Delhi and nearby areas
- महाराष्ट्र जलगांव, नसीराबाद पुलिस ने 3.538 किलो गांजे के साथ दो आरोपियों को किया गिरफतार।1
- हिसार में सफाई कर्मचारियों का हल्ला बोल! मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, पुलिस ने किया लाठीचार्जआखिर कब तक लाठियां खाएगा सफाई कर्मचारी? हिसार में हक-अधिकार की लड़ाई तेज हिसार से सफाई कर्मचारियों के आंदोलन की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो सरकार और प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल खड़े करती हैं। अपने हक, अधिकार और मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी कई दिनों से प्रदर्शन और हड़ताल पर हैं। लेकिन आरोप है कि लगातार आवाज उठाने के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। वीओ: जब बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो सफाई कर्मचारियों ने अपना विरोध और तेज कर दिया। शहर की सड़कों पर कूड़ा डालकर सफाई व्यवस्था को प्रभावित किया गया, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। लेकिन इसके बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग वर्षों से शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनकी मांगों को सुनने के बजाय उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? एक तरफ सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये है— आखिर सफाई कर्मचारियों को अपने हक और अधिकार के लिए बार-बार सड़कों पर क्यों उतरना पड़ता है? कब तक अपनी मांगों को मनवाने के लिए उन्हें आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना इतना बड़ा गुनाह है कि उसके बदले कर्मचारियों को पुलिस की लाठियां और हिरासत झेलनी पड़े? सफाई कर्मचारी सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वही लोग हैं जो रोज हमारे शहरों को साफ रखने के लिए सड़कों पर उतरते हैं। अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाले और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे। क्योंकि सवाल सिर्फ हिसार के सफाई कर्मचारियों का नहीं है… सवाल उन तमाम सफाई सैनिकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य का है, जो हर दिन हमारे शहरों को स्वच्छ रखने के लिए अपना पसीना बहाते हैं।1
- परमपुज्य संत श्री बाबा बाल जी महाराज द्वारा जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर आयोजित सत्संग व रास लीला। आश्रम कोटलां कलां ऊना हि० प्र० से। (BC) कहलूर।1
- आम आदमी पार्षदों ने महापौर कार्यालय के दरवाजे तोड़े और जबरदस्त हंगामा किया एमडी मुख्यालय में आम आदमी पार्टी पार्षदों ने महापौर कार्यालय के दरवाजे तोड़कर अंदर घुसे और जबरदस्त हंगामा किया और कपड़े उतार कर प्रदर्शन करने लगे यह हमारे जन्म प्रतिनिधि हैं1
- आप सभी को #_जगत_न्यूज़_24 परिवार की तरफ से श्री कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।1
- दिल्ली: TMC ऑफिस में हुई कथित तोड़फोड़ पर, TMC MP महुआ मोइत्रा ने कहा, "सुबह 4:30 बजे लिफ्ट के CCTV फुटेज में दिख रहा है कि करीब 20 से 25 BJP कार्यकर्ता आए। दिल्ली: TMC ऑफिस में हुई कथित तोड़फोड़ पर, TMC MP महुआ मोइत्रा ने कहा, "सुबह 4:30 बजे लिफ्ट के CCTV फुटेज में दिख रहा है कि करीब 20 से 25 BJP कार्यकर्ता आए। उन्होंने पहले सिक्योरिटी गार्ड से मोबाइल फोन छीने और लंबी मेटल रॉड से उनके सिर फोड़ने की धमकी दी। फिर घुसपैठिए छठी और सातवीं मंजिल पर गए और ऑफिस में घुस गए...आप उन्हें मास्क से चेहरा ढके हुए देख सकते हैं। अंदर घुसते ही, उन्होंने तबाही मचा दी...हमने पुलिस को अनगिनत कॉल किए...हमारे लोग असल में उनमें से छह को पकड़कर पुलिस को सौंपने में कामयाब रहे थे। अब पुलिस का दावा है कि उन्होंने छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है—हालांकि हमें नहीं पता कि वे कौन हैं—और वे बहुत एक्टिव तरीके से काम कर रहे हैं, जगह को सील कर रहे हैं और हमें हिरासत में ले रहे हैं। यह पुलिस और BJP का मिला-जुला मिशन है..."1
- दिल्ली के नरेला में सुबह करीब 6 बजे मुकुल प्रॉपर्टीज के मालिक प्रमोद कुमार जैसे ही जिम से बाहर निकले, स्कूटर सवार 3 नकाबपोश बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। दिल्ली के नरेला में सुबह करीब 6 बजे मुकुल प्रॉपर्टीज के मालिक प्रमोद कुमार जैसे ही जिम से बाहर निकले, स्कूटर सवार 3 नकाबपोश बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गंभीर रूप से घायल प्रमोद की मौके पर ही मौत हो गई। शुरुआती जांच में मामला गैंगस्टर्स द्वारा मांगी जा रही रंगदारी और रंजिश से जुड़ा माना जा रहा है। घटना के बाद परिजनों व स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। दिल्ली पुलिस की क्राइम टीम और स्पेशल सेल आसपास के CCTV कैमरों के जरिए हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। Via1
- *हत्या के बाद 20 दिन तक 'जिंदा' रहा फोटोग्राफर:* प्रयागराज में मर्डर करने वाला दोस्त गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा; शव के हाथ-पैर तोड़े थे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 27 वर्षीय फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की उसके दोस्तों द्वारा बेरहमी से हत्या किए जाने का मामला सामने आया है, जहां मुख्य आरोपी ने हत्या के बाद 20 दिनों तक मृतक का फोन इस्तेमाल कर उसकी गर्लफ्रेंड से चैटिंग जारी रखी. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल के आधार पर मुख्य आरोपी शुभम तिवारी और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा दैनिक समाचार पत्र1
- मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो मिली पिटाई? महिला पत्रकार शाहीन के आरोपों ने दिल्ली पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा किया! महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार के साथ कथित पुलिसिया ज्यादती—4PM की पत्रकार शाहीन का आरोप: सवाल पूछने गई थी, पकड़कर पीटा और थाने ले गई police नई दिल्ली। क्या अब मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध हो गया है? क्या लोकतंत्र में सत्ता से जवाब मांगने वाले पत्रकार को पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा? और अगर एक महिला पत्रकार आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पकड़कर कथित तौर पर बेरहमी से पीटा गया और थाने ले जाया गया, तो आखिर जवाब कौन देगा? दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ हुई कथित घटना ने पत्रकारिता की आज़ादी, महिला सम्मान और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहीन का आरोप है कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान, उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर मारपीट करते हुए थाने ले गई। लेकिन शाहीन के आरोप यहीं खत्म नहीं होते। उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ होने की जानकारी मिली, तो उनके साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार बढ़ गया। महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार का यह आरोप क्या मिलेगा जवाब? दिल्ली की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हैं। ऐसे में राजधानी में एक महिला पत्रकार के साथ कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई के आरोप सामने आना बेहद गंभीर मामला है। क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब अपराध है? क्या पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सत्ता की तारीफ करना रह गया है? क्या सरकार से जवाब मांगने वाली महिला पत्रकार को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा? और अगर पुलिस पर लगे आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कौन करेगा? 4PM सवाल पूछ रहा था... क्या सवाल पूछना ही बन गया वजह? पिछले दिनों 4PM दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े विभिन्न मामलों पर लगातार सवाल उठा रहा था और खबरें प्रकाशित कर रहा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज की कथित कार्रवाई का उन खबरों और सरकार से पूछे जा रहे सवालों से कोई संबंध है? हालांकि इस संबंध में सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना किसी पत्रकार का अपराध नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी है। आज अगर एक महिला पत्रकार यह आरोप लगा रही है कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पुलिस ने पकड़कर पीटा, तो यह मामला केवल शाहीन या 4PM तक सीमित नहीं रह जाता। यह सवाल हर उस पत्रकार का है जो कैमरा लेकर सड़क पर निकलता है। हर उस रिपोर्टर का है जो सत्ता के सामने खड़ा होकर पूछता है “जनता के सवालों का जवाब कब मिलेगा?” पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश, सवालों को रोकने की कोशिश और कैमरे के सामने खड़े रिपोर्टर को डराने का आरोप अगर यह सब सच है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर है। सवाल मुख्यमंत्री से था... जवाब पुलिस की कार्रवाई से क्यों? अब दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर पूरा घटनाक्रम क्या था। मांग है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। घटनास्थल और संबंधित थाने के CCTV कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य सभी उपलब्ध रिकॉर्डिंग को तत्काल सुरक्षित किया जाए। यदि जांच में पत्रकार शाहीन के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार या उनकी पहचान के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकार का काम सवाल पूछना है, सत्ता का काम जवाब देना है! 4PM सवाल पूछता रहा है और सवाल पूछता रहेगा। क्योंकि सवालों को दबाकर सच नहीं बदला जा सकता। और अगर लोकतंत्र में मुख्यमंत्री से सवाल पूछना ही इतना बड़ा अपराध बना दिया जाएगा कि एक महिला पत्रकार को कथित तौर पर पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़े तो फिर सवाल सिर्फ शाहीन का नहीं... सवाल पूरे लोकतंत्र का है! “सवाल पूछेंगे, जवाब मांगेंगे—कलम और कैमरे की आवाज दबने नहीं देंगे!”2