मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो मिली पिटाई? महिला पत्रकार शाहीन के आरोपों ने दिल्ली पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा किया! महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार के साथ कथित पुलिसिया ज्यादती—4PM की पत्रकार शाहीन का आरोप: सवाल पूछने गई थी, पकड़कर पीटा और थाने ले गई police नई दिल्ली। क्या अब मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध हो गया है? क्या लोकतंत्र में सत्ता से जवाब मांगने वाले पत्रकार को पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा? और अगर एक महिला पत्रकार आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पकड़कर कथित तौर पर बेरहमी से पीटा गया और थाने ले जाया गया, तो आखिर जवाब कौन देगा? दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ हुई कथित घटना ने पत्रकारिता की आज़ादी, महिला सम्मान और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहीन का आरोप है कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान, उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर मारपीट करते हुए थाने ले गई। लेकिन शाहीन के आरोप यहीं खत्म नहीं होते। उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ होने की जानकारी मिली, तो उनके साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार बढ़ गया। महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार का यह आरोप क्या मिलेगा जवाब? दिल्ली की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हैं। ऐसे में राजधानी में एक महिला पत्रकार के साथ कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई के आरोप सामने आना बेहद गंभीर मामला है। क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब अपराध है? क्या पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सत्ता की तारीफ करना रह गया है? क्या सरकार से जवाब मांगने वाली महिला पत्रकार को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा? और अगर पुलिस पर लगे आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कौन करेगा? 4PM सवाल पूछ रहा था... क्या सवाल पूछना ही बन गया वजह? पिछले दिनों 4PM दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े विभिन्न मामलों पर लगातार सवाल उठा रहा था और खबरें प्रकाशित कर रहा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज की कथित कार्रवाई का उन खबरों और सरकार से पूछे जा रहे सवालों से कोई संबंध है? हालांकि इस संबंध में सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना किसी पत्रकार का अपराध नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी है। आज अगर एक महिला पत्रकार यह आरोप लगा रही है कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पुलिस ने पकड़कर पीटा, तो यह मामला केवल शाहीन या 4PM तक सीमित नहीं रह जाता। यह सवाल हर उस पत्रकार का है जो कैमरा लेकर सड़क पर निकलता है। हर उस रिपोर्टर का है जो सत्ता के सामने खड़ा होकर पूछता है “जनता के सवालों का जवाब कब मिलेगा?” पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश, सवालों को रोकने की कोशिश और कैमरे के सामने खड़े रिपोर्टर को डराने का आरोप अगर यह सब सच है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर है। सवाल मुख्यमंत्री से था... जवाब पुलिस की कार्रवाई से क्यों? अब दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर पूरा घटनाक्रम क्या था। मांग है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। घटनास्थल और संबंधित थाने के CCTV कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य सभी उपलब्ध रिकॉर्डिंग को तत्काल सुरक्षित किया जाए। यदि जांच में पत्रकार शाहीन के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार या उनकी पहचान के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकार का काम सवाल पूछना है, सत्ता का काम जवाब देना है! 4PM सवाल पूछता रहा है और सवाल पूछता रहेगा। क्योंकि सवालों को दबाकर सच नहीं बदला जा सकता। और अगर लोकतंत्र में मुख्यमंत्री से सवाल पूछना ही इतना बड़ा अपराध बना दिया जाएगा कि एक महिला पत्रकार को कथित तौर पर पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़े तो फिर सवाल सिर्फ शाहीन का नहीं... सवाल पूरे लोकतंत्र का है! “सवाल पूछेंगे, जवाब मांगेंगे—कलम और कैमरे की आवाज दबने नहीं देंगे!”
मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो मिली पिटाई? महिला पत्रकार शाहीन के आरोपों ने दिल्ली पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा किया! महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार के साथ कथित पुलिसिया ज्यादती—4PM की पत्रकार शाहीन का आरोप: सवाल पूछने गई थी, पकड़कर पीटा और थाने ले गई police नई दिल्ली। क्या अब मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध हो गया है? क्या लोकतंत्र में सत्ता से जवाब मांगने वाले पत्रकार को पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा? और अगर एक महिला पत्रकार आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पकड़कर कथित तौर पर बेरहमी से पीटा गया और थाने ले जाया गया, तो आखिर जवाब कौन देगा? दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ हुई कथित घटना ने पत्रकारिता की आज़ादी, महिला सम्मान और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहीन का आरोप है कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान, उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर मारपीट करते हुए थाने ले गई। लेकिन शाहीन के आरोप यहीं खत्म नहीं होते। उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ होने की जानकारी मिली, तो उनके साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार बढ़ गया। महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार का यह आरोप क्या मिलेगा जवाब? दिल्ली की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हैं। ऐसे में राजधानी में एक महिला पत्रकार के साथ कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई के आरोप सामने आना बेहद गंभीर मामला है। क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब अपराध है? क्या पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सत्ता की तारीफ करना रह गया है? क्या सरकार से जवाब मांगने वाली महिला पत्रकार को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा? और अगर पुलिस पर लगे आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कौन करेगा? 4PM सवाल पूछ रहा था... क्या सवाल पूछना ही बन गया वजह? पिछले दिनों 4PM दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े विभिन्न मामलों पर लगातार सवाल उठा रहा
था और खबरें प्रकाशित कर रहा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज की कथित कार्रवाई का उन खबरों और सरकार से पूछे जा रहे सवालों से कोई संबंध है? हालांकि इस संबंध में सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना किसी पत्रकार का अपराध नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी है। आज अगर एक महिला पत्रकार यह आरोप लगा रही है कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पुलिस ने पकड़कर पीटा, तो यह मामला केवल शाहीन या 4PM तक सीमित नहीं रह जाता। यह सवाल हर उस पत्रकार का है जो कैमरा लेकर सड़क पर निकलता है। हर उस रिपोर्टर का है जो सत्ता के सामने खड़ा होकर पूछता है “जनता के सवालों का जवाब कब मिलेगा?” पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश, सवालों को रोकने की कोशिश और कैमरे के सामने खड़े रिपोर्टर को डराने का आरोप अगर यह सब सच है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर है। सवाल मुख्यमंत्री से था... जवाब पुलिस की कार्रवाई से क्यों? अब दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर पूरा घटनाक्रम क्या था। मांग है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। घटनास्थल और संबंधित थाने के CCTV कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य सभी उपलब्ध रिकॉर्डिंग को तत्काल सुरक्षित किया जाए। यदि जांच में पत्रकार शाहीन के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार या उनकी पहचान के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकार का काम सवाल पूछना है, सत्ता का काम जवाब देना है! 4PM सवाल पूछता रहा है और सवाल पूछता रहेगा। क्योंकि सवालों को दबाकर सच नहीं बदला जा सकता। और अगर लोकतंत्र में मुख्यमंत्री से सवाल पूछना ही इतना बड़ा अपराध बना दिया जाएगा कि एक महिला पत्रकार को कथित तौर पर पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़े तो फिर सवाल सिर्फ शाहीन का नहीं... सवाल पूरे लोकतंत्र का है! “सवाल पूछेंगे, जवाब मांगेंगे—कलम और कैमरे की आवाज दबने नहीं देंगे!”
- हिसार में सफाई कर्मचारियों का हल्ला बोल! मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, पुलिस ने किया लाठीचार्जआखिर कब तक लाठियां खाएगा सफाई कर्मचारी? हिसार में हक-अधिकार की लड़ाई तेज हिसार से सफाई कर्मचारियों के आंदोलन की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जो सरकार और प्रशासन के सामने कई बड़े सवाल खड़े करती हैं। अपने हक, अधिकार और मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी कई दिनों से प्रदर्शन और हड़ताल पर हैं। लेकिन आरोप है कि लगातार आवाज उठाने के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। वीओ: जब बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो सफाई कर्मचारियों ने अपना विरोध और तेज कर दिया। शहर की सड़कों पर कूड़ा डालकर सफाई व्यवस्था को प्रभावित किया गया, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। लेकिन इसके बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग वर्षों से शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनकी मांगों को सुनने के बजाय उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? एक तरफ सफाई कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये है— आखिर सफाई कर्मचारियों को अपने हक और अधिकार के लिए बार-बार सड़कों पर क्यों उतरना पड़ता है? कब तक अपनी मांगों को मनवाने के लिए उन्हें आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना इतना बड़ा गुनाह है कि उसके बदले कर्मचारियों को पुलिस की लाठियां और हिरासत झेलनी पड़े? सफाई कर्मचारी सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वही लोग हैं जो रोज हमारे शहरों को साफ रखने के लिए सड़कों पर उतरते हैं। अब जरूरत है कि सरकार और प्रशासन बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाले और सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करे। क्योंकि सवाल सिर्फ हिसार के सफाई कर्मचारियों का नहीं है… सवाल उन तमाम सफाई सैनिकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य का है, जो हर दिन हमारे शहरों को स्वच्छ रखने के लिए अपना पसीना बहाते हैं।1
- यह बच्चे सुन बोल नहीं सकते आज मैं उनके स्कूल आई थी तो यह बच्चे आपस में कैसे बात करते हैं आप समझ सकते हो क्या बात कर रहे हैं इन बच्चों की मदद कीजिए प्लीज1
- परमपुज्य संत श्री बाबा बाल जी महाराज द्वारा जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर आयोजित सत्संग व रास लीला। आश्रम कोटलां कलां ऊना हि० प्र० से। (BC) कहलूर।1
- आप सभी को #_जगत_न्यूज़_24 परिवार की तरफ से पवित्र व्रत शीतला सातम की हार्दिक शुभकामनाएं।1
- “नल-जल अनुरक्षकों का हल्ला बोल! 6 सूत्रीय मांगों को लेकर गर्दनीबाग में आमरण अनशन” | Bihar News | Bihar Government “नल-जल अनुरक्षकों का हल्ला बोल! 6 सूत्रीय मांगों को लेकर गर्दनीबाग में आमरण अनशन” | Bihar News | Bihar Government पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर बिहार प्रदेश नल-जल अनुरक्षक संघ द्वारा अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन और आमरण अनशन किया जा रहा है। अनुरक्षकों की मांगों में नई नियमावली लागू करने, PHED ठेकेदार एवं PRD वार्ड सदस्य के नियंत्रण से मुक्त करने, भूमिदाता को अनुरक्षक बनाने, ₹18,000 मासिक वेतन देने, मरम्मत कार्य की राशि सीधे अनुरक्षकों को देने, ₹50 लाख दुर्घटना बीमा एवं सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने जैसी मांगें शामिल हैं। आखिर नल-जल अनुरक्षक सरकार से क्या चाहते हैं? उनकी समस्याएं क्या हैं और सरकार की ओर से इस आंदोलन पर क्या प्रतिक्रिया है? देखिए VS NEWS 48 DELHI की ग्राउंड रिपोर्ट, सीधे गर्दनीबाग, पटना से। 📍 स्थान: गर्दनीबाग धरना स्थल, पटना, बिहार 📢 मुद्दा: नल-जल अनुरक्षकों की 6 सूत्रीय मांगें ✊ आंदोलन: आमरण अनशन / भूख हड़ताल वीडियो पसंद आए तो Like 👍 | Share 🔄 | Subscribe 🔔 जरूर करें।1
- कृष्ण जन्माष्टमी पर पटेल नगर में भव्य शोभायात्रा, आकर्षक झांकियों ने जीता दिल *दिल्ली से महेश शर्मा की रिपोर्ट* कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर पटेल नगर में निकाली गई भव्य शोभायात्रा सेंट्रल दिल्ली के पटेल नगर में कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। सनातन धर्म सभा लाल मंदिर से शुरू हुई यह शोभायात्रा पटेल नगर और बलजीत नगर के विभिन्न इलाकों से होते हुए वापस लाल मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी, श्री हरि विष्णु और भगवान शंकर समेत कई देवी-देवताओं की मनमोहक झांकियां लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पटेल नगर का माहौल भक्तिमय नजर आया। सनातन धर्म सभा लाल मंदिर से निकली इस शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने भी शोभायात्रा में हिस्सा लिया। बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी और विभिन्न देवी देवताओं का स्वरूप धारण कर आकर्षक झांकियां प्रस्तुत कीं। शोभायात्रा पटेल नगर के अलग-अलग इलाकों से होते हुए बलजीत नगर पहुंची और इसके बाद वापस लाल मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान स्थानीय विधायक, निगम पार्षद और मंदिर के तमाम पदाधिकारी भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं में शोभायात्रा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं, बच्चे और पुरुष बड़ी संख्या में शोभायात्रा में शामिल हुए और पूरे रास्ते भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर निकली इस भव्य शोभायात्रा ने पटेल नगर को भक्तिमय रंग में रंग दिया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग से शोभायात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।1
- यह बच्चे सुनते बोलते नहीं है देखिए सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं उनके बच्चे क्या हालत बना देते हैं1
- मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो मिली पिटाई? महिला पत्रकार शाहीन के आरोपों ने दिल्ली पुलिस और सरकार को कटघरे में खड़ा किया! महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार के साथ कथित पुलिसिया ज्यादती—4PM की पत्रकार शाहीन का आरोप: सवाल पूछने गई थी, पकड़कर पीटा और थाने ले गई police नई दिल्ली। क्या अब मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध हो गया है? क्या लोकतंत्र में सत्ता से जवाब मांगने वाले पत्रकार को पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा? और अगर एक महिला पत्रकार आरोप लगाए कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पकड़कर कथित तौर पर बेरहमी से पीटा गया और थाने ले जाया गया, तो आखिर जवाब कौन देगा? दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ हुई कथित घटना ने पत्रकारिता की आज़ादी, महिला सम्मान और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शाहीन का आरोप है कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान, उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर मारपीट करते हुए थाने ले गई। लेकिन शाहीन के आरोप यहीं खत्म नहीं होते। उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ होने की जानकारी मिली, तो उनके साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार बढ़ गया। महिला मुख्यमंत्री की दिल्ली में महिला पत्रकार का यह आरोप क्या मिलेगा जवाब? दिल्ली की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हैं। ऐसे में राजधानी में एक महिला पत्रकार के साथ कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई के आरोप सामने आना बेहद गंभीर मामला है। क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब अपराध है? क्या पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सत्ता की तारीफ करना रह गया है? क्या सरकार से जवाब मांगने वाली महिला पत्रकार को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलेगा? और अगर पुलिस पर लगे आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कौन करेगा? 4PM सवाल पूछ रहा था... क्या सवाल पूछना ही बन गया वजह? पिछले दिनों 4PM दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े विभिन्न मामलों पर लगातार सवाल उठा रहा था और खबरें प्रकाशित कर रहा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज की कथित कार्रवाई का उन खबरों और सरकार से पूछे जा रहे सवालों से कोई संबंध है? हालांकि इस संबंध में सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना किसी पत्रकार का अपराध नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी है। आज अगर एक महिला पत्रकार यह आरोप लगा रही है कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के दौरान उसे पुलिस ने पकड़कर पीटा, तो यह मामला केवल शाहीन या 4PM तक सीमित नहीं रह जाता। यह सवाल हर उस पत्रकार का है जो कैमरा लेकर सड़क पर निकलता है। हर उस रिपोर्टर का है जो सत्ता के सामने खड़ा होकर पूछता है “जनता के सवालों का जवाब कब मिलेगा?” पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश, सवालों को रोकने की कोशिश और कैमरे के सामने खड़े रिपोर्टर को डराने का आरोप अगर यह सब सच है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक तस्वीर है। सवाल मुख्यमंत्री से था... जवाब पुलिस की कार्रवाई से क्यों? अब दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर पूरा घटनाक्रम क्या था। मांग है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। घटनास्थल और संबंधित थाने के CCTV कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य सभी उपलब्ध रिकॉर्डिंग को तत्काल सुरक्षित किया जाए। यदि जांच में पत्रकार शाहीन के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार या उनकी पहचान के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकार का काम सवाल पूछना है, सत्ता का काम जवाब देना है! 4PM सवाल पूछता रहा है और सवाल पूछता रहेगा। क्योंकि सवालों को दबाकर सच नहीं बदला जा सकता। और अगर लोकतंत्र में मुख्यमंत्री से सवाल पूछना ही इतना बड़ा अपराध बना दिया जाएगा कि एक महिला पत्रकार को कथित तौर पर पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़े तो फिर सवाल सिर्फ शाहीन का नहीं... सवाल पूरे लोकतंत्र का है! “सवाल पूछेंगे, जवाब मांगेंगे—कलम और कैमरे की आवाज दबने नहीं देंगे!”2