मधुबनी जिले के एक व्यक्ति ने बताया है कि वह अपनी पत्नी को साथ रखने और अपने परिवार को बचाने के लिए चार बार उसके मायके गया। हर बार उसने सम्मानपूर्वक अपनी पत्नी से साथ चलने का अनुरोध किया, लेकिन पत्नी ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया। व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि उसके पास उस दिन का वीडियो मौजूद है, जो उसकी स्थिति को स्पष्ट करता है। उसने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह आज भी अपना घर-परिवार बचाना चाहता है और अपनी पत्नी को सम्मान के साथ अपने साथ रखना चाहता है, लेकिन जब कोई साथ रहने को तैयार ही न हो तो एक पति क्या करे। व्यक्ति ने स्पष्ट किया कि उसकी यह पोस्ट किसी की बदनामी के लिए नहीं है, बल्कि समाज के सामने अपनी स्थिति रखने के लिए है, क्योंकि उसके लिए आत्मसम्मान और न्याय दोनों आवश्यक हैं। उसने सभी से निवेदन किया है कि वे इस स्थिति में उसे क्या करना चाहिए, इस पर अपनी राय कमेंट में अवश्य दें।
मधुबनी जिले के एक व्यक्ति ने बताया है कि वह अपनी पत्नी को साथ रखने और अपने परिवार को बचाने के लिए चार बार उसके मायके गया। हर बार उसने सम्मानपूर्वक अपनी पत्नी से साथ चलने का अनुरोध किया, लेकिन पत्नी ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया। व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि उसके पास उस दिन का वीडियो मौजूद है, जो उसकी स्थिति को स्पष्ट करता है। उसने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह आज भी अपना घर-परिवार बचाना चाहता है और अपनी पत्नी को सम्मान के साथ अपने साथ रखना चाहता है, लेकिन जब कोई साथ रहने को तैयार ही न हो तो एक पति क्या करे। व्यक्ति ने स्पष्ट किया कि उसकी यह पोस्ट किसी की बदनामी के लिए नहीं है, बल्कि समाज के सामने अपनी स्थिति रखने के लिए है, क्योंकि उसके लिए आत्मसम्मान और न्याय दोनों आवश्यक हैं। उसने सभी से निवेदन किया है कि वे इस स्थिति में उसे क्या करना चाहिए, इस पर अपनी राय कमेंट में अवश्य दें।
- मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड के बेलदारी गांव निवासी एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को वापस घर लाने और अपने परिवार को बचाने के लिए कई बार उसके मायके का दौरा किया, लेकिन उसकी पत्नी उसके साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुई। इस निजी समस्या के समाधान हेतु, उसने संबंधित विभागों और पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी है और आवश्यक आवेदन प्रस्तुत किए हैं। व्यक्ति का स्पष्टीकरण है कि उसका उद्देश्य किसी की बदनामी करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्या का शांतिपूर्ण और कानूनी समाधान प्राप्त करना है। इसी उद्देश्य से उसने एक वीडियो के माध्यम से समाज और प्रशासन के सामने अपनी स्थिति रखी है, जिसमें वह न्याय और मामले के निष्पक्ष समाधान की मांग कर रहा है। यह घटना बेलदारी गांव, वार्ड 05, पंचायत जीरोगा, थाना आंध्रमठ, पोस्ट ऑफिस भरफोरी, प्रखंड लौकही, जिला मधुबनी, बिहार से संबंधित है।1
- मधुबनी जिले के फूलपरास थाने के तहत सैनी पंचायत का वार्ड 02 स्थित है।3
- मधुबनी पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 419 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। इस मामले में डायल-112 के एक चालक सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई के बाद, लापरवाही और संदिग्ध भूमिका के कारण बासोपट्टी थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, डायल-112 में तैनात एक एसआई को भी सस्पेंड किया गया है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच अभी जारी है।1
- रविवार को सुपौल नगर परिषद क्षेत्र के धोबी टोला में नवयुवक मोहर्रम कमिटी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। स्थानीय युवाओं और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में कमिटी के पदाधिकारियों का चयन हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य मोहर्रम के पर्व को शांतिपूर्ण, अनुशासित और भाईचारे के माहौल में संपन्न कराना है, साथ ही समाज में धार्मिक एवं सामाजिक एकता का संदेश फैलाना है। इस दौरान आलम साफी को कमिटी का अध्यक्ष, मो. शमसाद को उपाध्यक्ष, मो. सोनू आजाद को सचिव, मोनू नवाब को उप सचिव तथा मो. बिक्की को कोषाध्यक्ष चुना गया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष आलम साफी ने बताया कि कमिटी मोहर्रम पर मजहबी और इस्लामिक शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। कमिटी के सदस्यों ने मोहर्रम के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन का भी निर्णय लिया। बैठक में उपस्थित बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।1
- महथौर पंचायत के वार्ड संख्या-8 से एक हृदयविदारक कहानी सामने आई है, जहाँ एक व्यक्ति बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चों के साथ जीवन जीने को विवश है। उनका घर अत्यधिक जर्जर हालत में है, और हाल ही में आई आंधी के दौरान उस पर एक विशाल पेड़ गिर जाने से स्थिति और भी खराब हो गई है। इस व्यक्ति का कहना है कि उन्होंने सहायता के लिए मुखिया, बीडीओ और विभिन्न जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली है। उनकी पत्नी का निधन हो चुका है, और वे अकेले ही अपने दो छोटे बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। ड्राइवर के रूप में काम करने की उनकी मजबूरी ऐसी है कि उन्हें अपने बच्चों को भी अक्सर साथ लेकर जाना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, लोगों से छोटी सी सहायता की अपील की गई है, चाहे वह ₹10, ₹20, ₹50 हो या उनकी क्षमतानुसार कोई अन्य राशि। आयोजकों का मानना है कि आपकी थोड़ी सी मदद किसी का जीवन बदल सकती है। इच्छुक दानदाताओं के संपर्क करने पर पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है।1
- बिहार के मधुबनी जिले के बासोपट्टी से भारी मात्रा में 419 किलो गांजा की बरामदगी के बाद बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है। इस मामले में डायल 112 के एक चालक सहित कुल चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना के सीधे परिणाम के तौर पर संबंधित थाना प्रभारी को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पूर्व विधायक प्रत्याशी ब्रज किशोर यादव ने इस पूरे प्रकरण पर तीखे सवाल उठाते हुए व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाया है, पूछा है कि “क्या सिस्टम की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव है?”1
- सुपौल जिला एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राघोपुर प्रखंड के त्रिलोकधाम गोसपुर ग्राम में 15वीं शताब्दी का एक अत्यंत दुर्लभ काव्य-अलंकार ग्रंथ "कुवलयानंद" और देश में उपलब्ध एकमात्र हस्तलिखित "भृगुसंहिता" के संरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। इस महत्वपूर्ण धरोहर की जानकारी मिलने पर सावन कुमार एवं शरथ आर. एस. ने स्वयं गोसपुर पहुंचकर इन दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 600 वर्ष पुरानी ये पांडुलिपियाँ संस्कृत, हिंदी और मिथिलाक्षर लिपि में लिखी गई हैं। यह खोज इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण है कि सुपौल और समूचा मिथिलांचल सदियों से ज्ञान, न्याय, व्याकरण और शास्त्रीय अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यह दुर्लभ धरोहर महान विद्वान और दरभंगा महाराज के राजपंडित रहे त्रिलोकनाथ मिश्रा की ज्ञान परंपरा से जुड़ी हुई है। उनके पौत्र शचींद्रनाथ मिश्रा एवं प्रपौत्र धर्मेंद्रनाथ मिश्रा ने इन अमूल्य पांडुलिपियों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखकर भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य सेवा की है। यह ऐतिहासिक खोज न केवल सुपौल जिले के लिए, बल्कि पूरे बिहार और भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण तथा प्रशासनिक पहल की सराहना करते हुए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।1
- मधुबनी जिले के एक व्यक्ति ने बताया है कि वह अपनी पत्नी को साथ रखने और अपने परिवार को बचाने के लिए चार बार उसके मायके गया। हर बार उसने सम्मानपूर्वक अपनी पत्नी से साथ चलने का अनुरोध किया, लेकिन पत्नी ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया। व्यक्ति ने यह भी दावा किया कि उसके पास उस दिन का वीडियो मौजूद है, जो उसकी स्थिति को स्पष्ट करता है। उसने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह आज भी अपना घर-परिवार बचाना चाहता है और अपनी पत्नी को सम्मान के साथ अपने साथ रखना चाहता है, लेकिन जब कोई साथ रहने को तैयार ही न हो तो एक पति क्या करे। व्यक्ति ने स्पष्ट किया कि उसकी यह पोस्ट किसी की बदनामी के लिए नहीं है, बल्कि समाज के सामने अपनी स्थिति रखने के लिए है, क्योंकि उसके लिए आत्मसम्मान और न्याय दोनों आवश्यक हैं। उसने सभी से निवेदन किया है कि वे इस स्थिति में उसे क्या करना चाहिए, इस पर अपनी राय कमेंट में अवश्य दें।1