जनपद सीतापुर के सिधौली कोतवाली क्षेत्र में अटरिया इलाके के बेड़सापुर गांव के समीप स्थित प्राचीन श्री बालेश्वर महादेव धाम इन दिनों एक गंभीर समस्या को लेकर चर्चा में है। मां आदि गंगा गोमती के पावन तट पर विराजमान यह पौराणिक देवस्थान, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान मिली है, पास में संचालित एक अंडा फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध के कारण श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी का सामना कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पुराने इस धार्मिक स्थल पर दूर-दराज के जिलों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, खासकर सावन माह और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर। ग्रामीणों का आरोप है कि बालेश्वर मार्ग पर मंदिर से कुछ दूरी पर एक बड़ी अंडा उत्पादन इकाई चल रही है, जहाँ बड़ी संख्या में मुर्गियां पाली जाती हैं और प्रतिदिन लाखों अंडों का उत्पादन होता है। इस फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को सांस संबंधी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पवित्र देवस्थान के निकट ऐसे व्यवसाय के संचालन से धार्मिक वातावरण भी दूषित हो रहा है। उनका मानना है कि एक ओर जहाँ सरकार धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे संवेदनशील स्थानों के आसपास प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पर्यावरण और स्वास्थ्य मानकों का परीक्षण कराने की मांग की है। उनका आग्रह है कि यदि फैक्ट्री से प्रदूषण और दुर्गंध फैलने की पुष्टि होती है, तो आवश्यक कार्रवाई कर धार्मिक स्थल की गरिमा और क्षेत्रवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पर्यावरणीय मानकों की जांच, दुर्गंध व प्रदूषण की शिकायतों का सत्यापन, स्वास्थ्य सुरक्षा के कदम और क्षेत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था शामिल है।
जनपद सीतापुर के सिधौली कोतवाली क्षेत्र में अटरिया इलाके के बेड़सापुर गांव के समीप स्थित प्राचीन श्री बालेश्वर महादेव धाम इन दिनों एक गंभीर समस्या को लेकर चर्चा में है। मां आदि गंगा गोमती के पावन तट पर विराजमान यह पौराणिक देवस्थान, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान मिली है, पास में संचालित एक अंडा फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध के कारण श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी का सामना कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पुराने इस धार्मिक स्थल पर दूर-दराज के जिलों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, खासकर सावन माह और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर। ग्रामीणों का आरोप है कि बालेश्वर मार्ग पर मंदिर से कुछ दूरी पर एक बड़ी अंडा उत्पादन इकाई चल रही है, जहाँ बड़ी संख्या में मुर्गियां पाली जाती हैं और प्रतिदिन लाखों अंडों का उत्पादन होता है। इस फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को सांस संबंधी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पवित्र देवस्थान के निकट ऐसे व्यवसाय के संचालन से धार्मिक वातावरण भी दूषित हो रहा है। उनका मानना है कि एक ओर जहाँ सरकार धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे संवेदनशील स्थानों के आसपास प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पर्यावरण और स्वास्थ्य मानकों का परीक्षण कराने की मांग की है। उनका आग्रह है कि यदि फैक्ट्री से प्रदूषण और दुर्गंध फैलने की पुष्टि होती है, तो आवश्यक कार्रवाई कर धार्मिक स्थल की गरिमा और क्षेत्रवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पर्यावरणीय मानकों की जांच, दुर्गंध व प्रदूषण की शिकायतों का सत्यापन, स्वास्थ्य सुरक्षा के कदम और क्षेत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था शामिल है।
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम कचनार में तालाब की सरकारी जमीन पर पिछले 15 साल से बने एक अवैध मदरसे 'जामिया अब्दुल्लाह बिन मसऊद' को उसके संचालकों ने बुलडोजर कार्रवाई और भारी जुर्माने के डर से खुद ही ढहाना शुरू कर दिया है। यह स्वैच्छिक ध्वस्तीकरण पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला ग्राम कचनार का है, जहां करीब चार बीघा तालाब की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मदरसे का निर्माण किया गया था। ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसील प्रशासन की जांच में यह अवैध कब्जा उजागर हुआ। इस पर जिलाधिकारी न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए 8 जून को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने न केवल मदरसा खाली कर तालाब की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का निर्देश दिया, बल्कि अवैध निर्माण कराने वाले भू-माफियाओं और संचालकों पर 10.50 लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया। निर्माण हटाने के लिए महज 15 दिन की समय सीमा तय की गई थी। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मदरसा संचालकों को डर था कि यदि तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) चलेगा और उसका अतिरिक्त खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। इसी संभावित कार्रवाई और कानूनी अड़चनों से बचने के लिए उन्होंने खुद ही मजदूर बुलाकर भवन को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में हैमर, हथौड़े और आधुनिक उपकरणों की मदद से यह अवैध निर्माण तेजी से ढहाया जा रहा है, जिस पर तहसील प्रशासन की टीम मौके पर रहकर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का साफ कहना है कि योगी सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन का पूरा फोकस अब जल स्रोतों और तालाबों की जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर है और सरकारी जमीन पूरी तरह मुक्त होने के बाद तालाब को उसके पुराने और प्राकृतिक स्वरूप में वापस लाया जाएगा।1
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी उचित कारण के जेल भेजा जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अफ़सरों को हर्ज़ाना भरना होगा।1
- जंतर मंतर पर 'कॉकराच जनता पार्टी' के पहले प्रदर्शन को लेकर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि इसमें कितने लोग शामिल हुए, या विशेष रूप से कितने 'कॉकराच' आए। इस सवाल के पीछे की वजहों को एक वीडियो के माध्यम से तलाशने का दावा किया गया है। वीडियो के अनुसार, अभिजीत दीपके ने अमेरिका से दिल्ली आकर उस भय के आवरण को भेदा है, जो पूरे भारत पर फैला दिया गया था, जिसके चलते लोगों के मन में प्रदर्शन का विचार तक नहीं आता था। इस प्रदर्शन ने ऐसे डर को दूर करने में भूमिका निभाई है। वर्तमान में, कौन इसके पीछे है या कितने लोग इसमें शामिल हैं, यह महत्व नहीं रखता। हालांकि, जब यह पार्टी एक राजनीतिक दल का रूप लेगी, तब उसे इन सवालों का सामना करना होगा और ऐसा होना भी चाहिए। दर्शकों से आग्रह किया गया है कि वे वीडियो को पूरा देखें।1
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 'संविधान बचाओ संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सांसद राकेश राठौर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर एक बड़ा हमला बोला। उन्होंने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी एक महत्वपूर्ण बयान दिया।1
- राजधानी लखनऊ पुलिस ने खोए हुए मोबाइल फोन बरामद करके उनके धारकों को सौंप दिए। डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद ने स्वयं मोबाइल धारकों को उनके फोन वापस किए, जिसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया गया। इस पहल के बाद, मोबाइल धारकों ने लखनऊ पुलिस के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।1
- जनपद सीतापुर के सिधौली कोतवाली क्षेत्र में अटरिया इलाके के बेड़सापुर गांव के समीप स्थित प्राचीन श्री बालेश्वर महादेव धाम इन दिनों एक गंभीर समस्या को लेकर चर्चा में है। मां आदि गंगा गोमती के पावन तट पर विराजमान यह पौराणिक देवस्थान, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान मिली है, पास में संचालित एक अंडा फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध के कारण श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में भारी नाराजगी का सामना कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पुराने इस धार्मिक स्थल पर दूर-दराज के जिलों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, खासकर सावन माह और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर। ग्रामीणों का आरोप है कि बालेश्वर मार्ग पर मंदिर से कुछ दूरी पर एक बड़ी अंडा उत्पादन इकाई चल रही है, जहाँ बड़ी संख्या में मुर्गियां पाली जाती हैं और प्रतिदिन लाखों अंडों का उत्पादन होता है। इस फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को सांस संबंधी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पवित्र देवस्थान के निकट ऐसे व्यवसाय के संचालन से धार्मिक वातावरण भी दूषित हो रहा है। उनका मानना है कि एक ओर जहाँ सरकार धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे संवेदनशील स्थानों के आसपास प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पर्यावरण और स्वास्थ्य मानकों का परीक्षण कराने की मांग की है। उनका आग्रह है कि यदि फैक्ट्री से प्रदूषण और दुर्गंध फैलने की पुष्टि होती है, तो आवश्यक कार्रवाई कर धार्मिक स्थल की गरिमा और क्षेत्रवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पर्यावरणीय मानकों की जांच, दुर्गंध व प्रदूषण की शिकायतों का सत्यापन, स्वास्थ्य सुरक्षा के कदम और क्षेत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था शामिल है।1
- सीतापुर रोड पर लहरपुर में भूसे से लदी एक भारी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के कारण एक हादसा हो गया। बताया गया है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली ओवरलोड होने और साइड न मिलने के कारण सामने से आ रहा एक ट्रक पलट गया। इस घटना में किसी को कोई बड़ी चोट नहीं लगी, लेकिन जो लोग मामूली रूप से घायल हुए, उन्हें इलाज के लिए लहरपुर के स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया है। इस हादसे में भूसे से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ-साथ ट्रक भी शामिल था, जिससे दोनों के ट्रॉली, ट्रैक्टर और ट्रक क्षतिग्रस्त हुए।1