ग्राम पंचायत कल्याणपुर के अंतर्गत आने वाले देमो ढाणी गांव में पिछले कई महीनों से गहरा जल संकट बना हुआ है। गांव में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन हजार-हजार रुपये खर्च कर निजी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत करवाया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। पंचायत स्तर पर प्रत्येक गांव के लिए सप्ताह में एक दिन पानी आपूर्ति का समय निर्धारित है, परंतु वह भी तय समय पर नहीं हो रहा। कई बार पानी की सप्लाई या तो देर से आती है या फिर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती। गांववासियों ने बताया कि वे किसी तरह पैसे देकर अपने परिवार के लिए पानी की व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन आवारा पशुओं के लिए पानी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच पशु प्यास से इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि अभी यह हाल है तो जून और जुलाई की तेज गर्मी में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि देमो ढाणी में नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, अस्थायी राहत के रूप में सरकारी टैंकरों की व्यवस्था की जाए ताकि ग्रामीणों और पशुओं को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देता है।
ग्राम पंचायत कल्याणपुर के अंतर्गत आने वाले देमो ढाणी गांव में पिछले कई महीनों से गहरा जल संकट बना हुआ है। गांव में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन हजार-हजार
रुपये खर्च कर निजी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत करवाया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला
गया। पंचायत स्तर पर प्रत्येक गांव के लिए सप्ताह में एक दिन पानी आपूर्ति का समय निर्धारित है, परंतु वह भी तय समय पर नहीं हो रहा। कई बार पानी की सप्लाई या
तो देर से आती है या फिर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती। गांववासियों ने बताया कि वे किसी तरह पैसे देकर अपने परिवार के लिए पानी की व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन आवारा पशुओं
के लिए पानी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच पशु प्यास से इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि अभी यह हाल है तो जून
और जुलाई की तेज गर्मी में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि देमो ढाणी में नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही,
अस्थायी राहत के रूप में सरकारी टैंकरों की व्यवस्था की जाए ताकि ग्रामीणों और पशुओं को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक
रूप से उच्च अधिकारियों के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देता है।
- ग्राम पंचायत कल्याणपुर के अंतर्गत आने वाले देमो ढाणी गांव में पिछले कई महीनों से गहरा जल संकट बना हुआ है। गांव में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन हजार-हजार रुपये खर्च कर निजी टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत करवाया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। पंचायत स्तर पर प्रत्येक गांव के लिए सप्ताह में एक दिन पानी आपूर्ति का समय निर्धारित है, परंतु वह भी तय समय पर नहीं हो रहा। कई बार पानी की सप्लाई या तो देर से आती है या फिर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती। गांववासियों ने बताया कि वे किसी तरह पैसे देकर अपने परिवार के लिए पानी की व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन आवारा पशुओं के लिए पानी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भीषण गर्मी के बीच पशु प्यास से इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि अभी यह हाल है तो जून और जुलाई की तेज गर्मी में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि देमो ढाणी में नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, अस्थायी राहत के रूप में सरकारी टैंकरों की व्यवस्था की जाए ताकि ग्रामीणों और पशुओं को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से उच्च अधिकारियों के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान देता है।8
- आज सिवाना में अपने फार्म हाउस पर पूर्व रिको निर्देशक स्वतंत्र प्रभार मंत्री सुनिल परिहार पुर्व राजस्थान सरकार मे रहे पूर्व मंत्री के कूर्षि फार्म हाउस सिवाना में होली स्नेह मिलन कार्यक्रम हर्षोल्लास एंव रंग बिरंगे रंग लगाकर मिठाई खिलाकर मुह मीठा करवाकर पर्व मनाया1
- बालोतरा जिले के विभिन्न गांव में होली के बाद गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है जिसमें ग्रामीण बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं ऐसे ही आयोजन लगातार हो रहे हैं। ग्रामीण लोग इस गैर नृत्य का आनंद उठा रहे हैं।1
- बालोतरा पूर्व विधायक मदन प्रजापत के आवास पर होली को बड़ी तादाद मे लोगो की भीड़ उमड़ी। पूर्व विधायक ने चंग पर फाग गाकर लोगो को होली की शुभ कामनाएं दी।1
- मारवाड़ योद्धा जोन की एयू बनो चैम्पियन की सभी खेल लोकेशनों पर होली का पर्व धूमधाम व हर्षोल्लास से मनाया गया। जोन खेल सुपर कोच कन्हैयालाल मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि एथलेटिक्स कोच पूजा सिंह के सानिध्य में आहोर लोकेशन पर,फुटबॉल कोच उत्तम काबावत के सानिध्य में भीनमाल लोकेशन पर, फुटबॉल कोच प्रदीप कुमार के सानिध्य में सुमेरपुर लोकेशन पर,थ्रोबाल कोच कैलाशचंद्र के सानिध्य में बादनवाड़ी लोकेशन पर, एथलेटिक्स कोच झालाराम राणा के सानिध्य में सायला लोकेशन पर,एथलेटिक्स कोच पारती चौहान के सानिध्य में सिरोही लोकेशन पर व मुक्केबाजी वुशू खिलाड़ियों ने जालोर लोकेशन पर अबीर व गुलाल के साथ होली के पर्व का आनन्द लिया।मारवाड़ योद्धा जोन के सुपरकोच कन्हैयालाल मिश्रा ने फाल्गुली मस्ती व देशभक्ति से सराबोर गीत, थे खेलो लाल गुलाल,होली नित आवे व हां रे होली आई रे गीतों की खिलाड़ियों के साथ सामूहिक प्रस्तुति दी।कार्यक्रम के दौरान मुक्केबाज खिलाड़ी अनिता कुमारी, भावेश कुमार, चेतन कुमार व उत्कर्ष मिश्रा ने होली पर्व के बारे में अपने विचार प्रकट किये।होली गीतों की मिठास के बाद सभी खिलाड़ियों ने जमकर होली खेली।उसके बाद उपस्थित सभी खिलाड़ियों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर होली की शुभकामनाएं दी।2
- शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने रंगो का त्यौहार होली बड़े धूमधाम के साथ जवानों के साथ मनाई1
- आहोर होली पर बच्चे बने दूल्हे, मामा- काका ने करवाएं फेरे: रोडला में निभाई गई परंपरा, होलिका दहन के दौरान की गई पूजा -अर्चना: महिलाओं ने गाएं फागुन के गीत:- जालोर जिले के आहोर उपखंड क्षेत्र के रोडला, भूती,कवलां , गुड़ा इन्द्रपुरा , वलदरा,कवराडा गांव में सोमवार की शाम शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। वहीं रोडला गांव के आंखरिया चौक में होलिका दहन किया गया।रोडला में रजतप्रताप सिंह ने गांव के फलां हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर होलिका दहन स्थल पहुंचकर विधि-विधान से पूजा अर्चना कर होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन के साथ होलिका स्थल से नाचते गाते फागुन के गीतों के साथ रंगों का पर्व का शुभारंभ हुआ। वहीं होली के पर्व पर बच्चों को दूल्हे के रूप में तैयार कर होलिका दहन स्थल पर कई परिवार वीआईपी कल्चर की गाड़ी व ढोल और बैंडबाजों पर नाचते हुए होलिका दहन स्थल पहुंचे। फिर इन दूल्हों को उनके काका व मामा एवं भाई ने गोंद में उठाकर होली के फेरे लगवाने की परंपरा निभाई। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चा बुरी नजर से बचा रहता है। वहीं होली दहन के बाद युवा चंग की थाप पर फाग गीत गाते, डांस करते हुए नजर आए। वहीं डीजे की धून पर युवाओं ने डांस किया। होली के अवसर पर महिलाओं ने भी परंपरा निभाई और विधिवत रूप से पूजा अर्चना की ।कई जने होलिका दहन की आग में गेहूं की बालियां सेंकते नजर आए। रोडला में शाम के श्रेष्ठ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन के दूसरे दिन रंग-बिरंगी पिचकारी के साथ एवं मस्ती का गुलाल के साथ रंगों का पर्व होली उमंग व उत्साह के साथ धूलण्डी का पर्व मनाया। जिसमें फागुन की मस्ती और रंगों की फुहार के साथ धुलंडी का त्योहार मनाया गया। वहीं दूसरे दिन परंपरा के अनुसार ठाकुर परिवार के नेतृत्व गांव के प्रबुद्धजनों के साथ कलश निकासी के माध्यम से ग्रामीणों द्वारा वर्ष के खुशहाली के लिए कलश में रखे सात धान की परंपरा निभाई गई जिसमें धान के माध्यम से सगुन देखने की परंपरा निभाई गई। वहीं कलश सगुन के साथ शीतला सप्तमी तक आयोजित होने वाले गैर नृत्य का आगाज के फागुन महोत्सव का शुभारंभ हुआ। वहीं शीतला सप्तमी पर रोडला में आखरियां चौक पर गैर नृत्य का आयोजन होगा।2
- मोतीसरा में होलिका दहन के बाद धूमधाम से मनाया गया ‘ढूंढो उत्सव’, फागुनी गीतों और गैर नृत्य से गूंजा गांव मोतीसरा रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर मोतीसरा गांव में होलिका दहन के अगले दिन प्रातःकाल पारंपरिक ‘ढूंढो उत्सव’ महोत्सव बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया सुबह से ही गांव की समस्त गलियों में ग्रामवासी एकत्र होकर छोटे बच्चों को ढूंढने” की परंपरा निभाते हैं। जिस परिवार में छोटे बच्चे को ढूंढा जाता है, वहां सभा का आयोजन किया जाता है। परिवारजन सभी उपस्थित लोगों का गुड़-मिठाई खिलाकर मुंह मीठा करवाते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। इस अवसर पर महिलाएं और बालिकाएं फागुन के पारंपरिक गीत गाते हुए लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत करती हैं। फागुनी गीतों पर लूर लेकर गीत गाती है और गांव के आम चौवटा ठाकुर जी मंदिर एवं हनुमान जी मंदिर के प्रांगण में गैरियों द्वारा ढोल-थाली और चंग की थाप पर पारंपरिक गैर नृत्य प्रस्तुत किया गया। ढोल-थाली की खनक और चंग की गूंज से पूरा गांव फागुनी रंग में सराबोर हो जाता है गैरिया जोश, उमंग और उत्साह के साथ फागुन के गीत गाते हुए जबरदस्त गैर नृत्य करते नजर आए। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं आसपास के लोग गैर नृत्य देखने पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान सभी को प्रसाद का वितरण भी किया गया। इस पारंपरिक आयोजन ने गांव में आपसी प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया जाता है1