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झारखंड के रामगढ़ जिले में आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा द्वारा एक सदस्यता अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के दौरान, सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।

1 hr ago
user_Umesh Kumar
Umesh Kumar
Local News Reporter मांडू, रामगढ़, झारखंड•
1 hr ago

झारखंड के रामगढ़ जिले में आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा द्वारा एक सदस्यता अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के दौरान, सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।

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  • झारखंड के रामगढ़ जिले में आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा द्वारा एक सदस्यता अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के दौरान, सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।
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    झारखंड के रामगढ़ जिले में आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा द्वारा एक सदस्यता अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के दौरान, सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण की।
    user_Umesh Kumar
    Umesh Kumar
    Local News Reporter मांडू, रामगढ़, झारखंड•
    1 hr ago
  • झारखंड के रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत कुजू स्थित अक्षत बैंक्वेट हॉल के सभागार में संथाल समाज दिशोम माँझी परगना का 30वां स्थापना दिवस समारोह पारंपरिक संथाली संस्कृति और गौरवशाली विरासत के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस समारोह में झारखंड सरकार समन्वय समिति के सदस्य दर्जा प्राप्त मंत्री एवं संथाल समाज दिशोम माँझी परगना के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार से बड़ी संख्या में समाज की महिला-पुरुष पारंपरिक संथाली वेशभूषा में शामिल हुए। समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के पारंपरिक संथाली रीति-रिवाज, ढोल-मांदर की थाप और उत्साहपूर्ण स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद उन्हें पगड़ी, अंगवस्त्र, पुष्पमाला, बैज और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता एवं दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने अपने संबोधन में बताया कि संथाल समाज दिशोम माँझी परगना संथाल समुदाय का एक सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना 30-31 मई 1997 को हुई थी। उन्होंने पूर्वजों द्वारा सौंपी गई सामाजिक व्यवस्था, स्वशासन, ग्राम सभा, संस्कृति, परंपरा, न्याय व्यवस्था, प्रकृति पूजा और सामाजिक मूल्यों की विरासत को संरक्षित रखने को सभी की जिम्मेदारी बताया। बेसरा ने संथाली भाषा, संस्कृति और धर्म की रक्षा के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन तथा संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान किया। कार्यक्रम को केंद्रीय महासचिव सोनाराम हेंब्रम और केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो वास्के ने भी संबोधित करते हुए समाज की एकता, संगठन की मजबूती और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। इस अवसर पर केंद्रीय मांझी बुढ़ी लीलमुनी देवी, मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति के केंद्रीय महासचिव हिरालाल मांझी, केंद्रीय उपाध्यक्ष अलख कुमार मांझी, सोनोत संथाल समाज के केंद्रीय सचिव अनिल टुडू, केंद्रीय कोषाध्यक्ष रतीलाल टुडू, डाड़ी प्रखंड प्रमुख सह केंद्रीय सचिव महिला सेल दीपा देवी, बड़कागांव प्रखंड अध्यक्ष सुरज बेसरा, चुरचू प्रखंड अध्यक्ष सहदेव किस्कू, पतरातू प्रखंड अध्यक्ष शंकर मुर्मू सहित टीरु मांझी, पन्नालाल मुर्मू, मनोहर मुर्मू, बिरजू सोरेन, अशोक मुर्मू, विनोद हेंब्रम और रामचंद्र टुडू समेत समाज के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने की, जबकि संचालन केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो वास्के ने किया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र, बैज एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
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    झारखंड के रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत कुजू स्थित अक्षत बैंक्वेट हॉल के सभागार में संथाल समाज दिशोम माँझी परगना का 30वां स्थापना दिवस समारोह पारंपरिक संथाली संस्कृति और गौरवशाली विरासत के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस समारोह में झारखंड सरकार समन्वय समिति के सदस्य दर्जा प्राप्त मंत्री एवं संथाल समाज दिशोम माँझी परगना के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार से बड़ी संख्या में समाज की महिला-पुरुष पारंपरिक संथाली वेशभूषा में शामिल हुए। समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के पारंपरिक संथाली रीति-रिवाज, ढोल-मांदर की थाप और उत्साहपूर्ण स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद उन्हें पगड़ी, अंगवस्त्र, पुष्पमाला, बैज और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

समारोह के दौरान भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता एवं दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने अपने संबोधन में बताया कि संथाल समाज दिशोम माँझी परगना संथाल समुदाय का एक सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना 30-31 मई 1997 को हुई थी। उन्होंने पूर्वजों द्वारा सौंपी गई सामाजिक व्यवस्था, स्वशासन, ग्राम सभा, संस्कृति, परंपरा, न्याय व्यवस्था, प्रकृति पूजा और सामाजिक मूल्यों की विरासत को संरक्षित रखने को सभी की जिम्मेदारी बताया। बेसरा ने संथाली भाषा, संस्कृति और धर्म की रक्षा के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन तथा संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को केंद्रीय महासचिव सोनाराम हेंब्रम और केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो वास्के ने भी संबोधित करते हुए समाज की एकता, संगठन की मजबूती और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। इस अवसर पर केंद्रीय मांझी बुढ़ी लीलमुनी देवी, मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति के केंद्रीय महासचिव हिरालाल मांझी, केंद्रीय उपाध्यक्ष अलख कुमार मांझी, सोनोत संथाल समाज के केंद्रीय सचिव अनिल टुडू, केंद्रीय कोषाध्यक्ष रतीलाल टुडू, डाड़ी प्रखंड प्रमुख सह केंद्रीय सचिव महिला सेल दीपा देवी, बड़कागांव प्रखंड अध्यक्ष सुरज बेसरा, चुरचू प्रखंड अध्यक्ष सहदेव किस्कू, पतरातू प्रखंड अध्यक्ष शंकर मुर्मू सहित टीरु मांझी, पन्नालाल मुर्मू, मनोहर मुर्मू, बिरजू सोरेन, अशोक मुर्मू, विनोद हेंब्रम और रामचंद्र टुडू समेत समाज के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने की, जबकि संचालन केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो वास्के ने किया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र, बैज एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
    user_Md sabir
    Md sabir
    Local News Reporter मांडू, रामगढ़, झारखंड•
    18 hrs ago
  • रामगढ़ के कुजू में संथाल समाज ने अपने 30वें स्थापना दिवस के अवसर पर जोरदार एकजुटता प्रदर्शित की, जहाँ उन्होंने अपनी पैतृक 'जल-जंगल-जमीन' की रक्षा के लिए प्रबल आह्वान किया। यह आयोजन संथाल संस्कृति और आदिवासी पहचान को सुरक्षित रखने के महत्व पर केंद्रित रहा। दिशोम मांझी परगना के बैनर तले, संथाल समाज ने अपने संवैधानिक अधिकारों और आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर, समाज ने अपनी अनूठी विरासत और परंपरागत जीवनशैली को बनाए रखने के लिए संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि उनके समुदाय के अधिकारों को सशक्त किया जा सके।
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    रामगढ़ के कुजू में संथाल समाज ने अपने 30वें स्थापना दिवस के अवसर पर जोरदार एकजुटता प्रदर्शित की, जहाँ उन्होंने अपनी पैतृक 'जल-जंगल-जमीन' की रक्षा के लिए प्रबल आह्वान किया। यह आयोजन संथाल संस्कृति और आदिवासी पहचान को सुरक्षित रखने के महत्व पर केंद्रित रहा।

दिशोम मांझी परगना के बैनर तले, संथाल समाज ने अपने संवैधानिक अधिकारों और आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर, समाज ने अपनी अनूठी विरासत और परंपरागत जीवनशैली को बनाए रखने के लिए संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि उनके समुदाय के अधिकारों को सशक्त किया जा सके।
    user_News10Explained
    News10Explained
    Local News Reporter मांडू, रामगढ़, झारखंड•
    19 hrs ago
  • संथाल समाज दिशोम मांझी परगना का तीसरा स्थापना दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो संस्था के स्थापना के महत्व को दर्शाते हैं।
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    संथाल समाज दिशोम मांझी परगना का तीसरा स्थापना दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो संस्था के स्थापना के महत्व को दर्शाते हैं।
    user_आशीष कुमार मुखर्जी
    आशीष कुमार मुखर्जी
    रिपोर्टर रामगढ़, रामगढ़, झारखंड•
    4 hrs ago
  • इस संदेश में कहा गया है कि जिस दिन स्वच्छता लोगों की आदत का हिस्सा बन जाएगी, उस दिन अपने आप ही विकसित भारत की कल्पना साकार हो उठेगी। यह बात स्पष्ट रूप से बताती है कि स्वच्छता को आदत बनाना ही विकसित राष्ट्र के निर्माण की कुंजी है।
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    इस संदेश में कहा गया है कि जिस दिन स्वच्छता लोगों की आदत का हिस्सा बन जाएगी, उस दिन अपने आप ही विकसित भारत की कल्पना साकार हो उठेगी। यह बात स्पष्ट रूप से बताती है कि स्वच्छता को आदत बनाना ही विकसित राष्ट्र के निर्माण की कुंजी है।
    user_Ravindra rana
    Ravindra rana
    Court reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    2 hrs ago
  • हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र में स्थित बिशाय जंगल की एक चट्टान पर एक अनोखी नाग के फन जैसी आकृति उभरी है, जो इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस अद्भुत आकृति को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और इसे नाग देवता का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में यह नाग के फन जैसी आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। क्षेत्र में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं, जहाँ कई श्रद्धालु इसे एक दिव्य संकेत और नाग देवता का आशीर्वाद मान रहे हैं। लोग आकृति के पास पूजा-पाठ कर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम भी हो सकता है, जहाँ चट्टानों पर वर्षों तक मौसम, पानी, हवा और प्राकृतिक कटाव के प्रभाव से ऐसी आकृतियाँ बन जाना असामान्य नहीं है, जो कई बार किसी जीव-जंतु या वस्तु जैसी प्रतीत होती हैं और लोगों में कौतूहल पैदा करती हैं। इस नाग आकृति की चर्चा फैलने के बाद से बिशाय जंगल में लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं और इसे आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी वैज्ञानिक संस्था या प्रशासनिक विभाग ने इस आकृति के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या निष्कर्ष जारी नहीं किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चाहे इसे प्राकृतिक संयोग माना जाए या आस्था का प्रतीक, यह आकृति अब लोगों के बीच आकर्षण, जिज्ञासा और श्रद्धा का केंद्र बन गई है।
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    हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र में स्थित बिशाय जंगल की एक चट्टान पर एक अनोखी नाग के फन जैसी आकृति उभरी है, जो इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस अद्भुत आकृति को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और इसे नाग देवता का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में यह नाग के फन जैसी आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। क्षेत्र में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं, जहाँ कई श्रद्धालु इसे एक दिव्य संकेत और नाग देवता का आशीर्वाद मान रहे हैं। लोग आकृति के पास पूजा-पाठ कर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम भी हो सकता है, जहाँ चट्टानों पर वर्षों तक मौसम, पानी, हवा और प्राकृतिक कटाव के प्रभाव से ऐसी आकृतियाँ बन जाना असामान्य नहीं है, जो कई बार किसी जीव-जंतु या वस्तु जैसी प्रतीत होती हैं और लोगों में कौतूहल पैदा करती हैं।

इस नाग आकृति की चर्चा फैलने के बाद से बिशाय जंगल में लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं और इसे आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी वैज्ञानिक संस्था या प्रशासनिक विभाग ने इस आकृति के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या निष्कर्ष जारी नहीं किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चाहे इसे प्राकृतिक संयोग माना जाए या आस्था का प्रतीक, यह आकृति अब लोगों के बीच आकर्षण, जिज्ञासा और श्रद्धा का केंद्र बन गई है।
    user_झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    6 hrs ago
  • झारखंड के रामगढ़ में जदयू की प्रमंडलीय बैठक संपन्न हो गई है। इस बैठक में आगामी आने वाले चुनावों को लेकर गहन रणनीति तैयार की गई।
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    झारखंड के रामगढ़ में जदयू की प्रमंडलीय बैठक संपन्न हो गई है। इस बैठक में आगामी आने वाले चुनावों को लेकर गहन रणनीति तैयार की गई।
    user_आशीष कुमार मुखर्जी
    आशीष कुमार मुखर्जी
    रिपोर्टर रामगढ़, रामगढ़, झारखंड•
    4 hrs ago
  • झारखंड के सिंदूर स्थित एक तालाब से उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक बच्ची तमन्ना का शव बरामद किया गया है। सिंदूर पंचायत भवन के पास युवती का शव मिलने के बाद आस-पास के इलाकों में हड़कंप मच गया है।
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    झारखंड के सिंदूर स्थित एक तालाब से उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक बच्ची तमन्ना का शव बरामद किया गया है। सिंदूर पंचायत भवन के पास युवती का शव मिलने के बाद आस-पास के इलाकों में हड़कंप मच गया है।
    user_Shashikant
    Shashikant
    Court reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
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