बड़ी खबर राजधानी जयपुर से है आज बात सिर्फ एक कॉलोनी की नहीं… बात है 350 परिवारों की जिंदगी की। उन लोगों की, जिन्होंने साल 2000 से 2010 के बीच अपनी खून-पसीने की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदे, मकान बनाए और सपनों का घर बसाया।,लेकिन अब आरोप है कि उन्हीं प्लॉट्स के नंबर बदले गए, साइज बदले गए और जहाँ मकान खड़े हैं, वहाँ 60 फीट सड़क दिखा दी गई ये सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, ये 350 परिवारों की जिंदगी, उनकी जमा-पूंजी और उनके सपनों का सवाल है! साल 2002… पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर कॉलोनी विकसित हुई। 90B की वैधानिक प्रक्रिया पूरी हुई। 2000 से 2010 के बीच 350 से ज्यादा लोगों ने अपने खून-पसीने की कमाई से प्लॉट खरीदे। मकान बने, परिवार बसे, बुजुर्गों ने जीवन की आखिरी पूंजी यहाँ लगा दी। लेकिन… जैसे ही जमीन के दाम बढ़े, नीयत बदल गई! जिस 90B को पहले फर्जी बताकर चुनौती दी गई, वही मामला संभागीय कार्यालय, राजस्व बोर्ड और हाईकोर्ट तक गया — और हर जगह राहत नहीं मिली। बाद में हाईकोर्ट से याचिका वापस ले ली गई। सवाल उठता है — अगर 90B फर्जी थी, तो उसे वापस क्यों लिया गया? और असली खेल यहीं से शुरू होता है! उसी 2002 की 90B को मानते हुए 8 अक्टूबर 2024 को जेडीए में नया नक्शा पेश किया जाता है। कॉलोनी के भूखंडों के नंबर बदले जाते हैं, साइज बदले जाते हैं, जहाँ मकान खड़े हैं वहाँ 60 फीट की सड़क दिखा दी जाती है! प्लॉटधारियों ने आपत्तियाँ दीं… सैकड़ों आपत्तियाँ। लेकिन जेडीए के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जब अखबार में जोन-12 कार्यालय में कैंप की विज्ञप्ति आई, तो 100 से ज्यादा लोग मौके पर पहुँच गए। डीसी से मिले, एडिशनल कमिश्नर से मिले। आश्वासन मिला… लेकिन कार्रवाई नहीं। आरोप यह भी कि पूर्व डीसी राकेश मेहता के कार्यकाल में फाइलें तैयार हुईं और ट्रांसफर होते ही फाइलें सरपट दौड़ गईं। क्या यह महज संयोग है या सुनियोजित साजिश? एफआईआर दर्ज हुई। जनसुनवाई में निर्देश भी दिए गए। लेकिन आज तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं। फोरेंसिक जांच हुई — निजी लैब में। रिपोर्ट में सामान्य अंतर बताया गया। लेकिन मामला वहीं ठंडा पड़ गया। और आज स्थिति क्या है? जमीन कागजों में प्लॉटधारियों की… लेकिन कब्जा लेने नहीं दिया जा रहा! विरोध करने पर धक्का-मुक्की के आरोप… यहाँ तक कहा गया — “आधी जमीन ले लो!” क्या 50 प्रतिशत हड़पने का कोई नया कानून आ गया है? 350 परिवार… 80-85 साल के बुजुर्ग… 20 साल से दर-दर भटक रहे हैं। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा से मिले। स्थानीय विधायक राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से मिलने का प्रयास किया। सरकार से गुहार लगाई। अब कॉलोनीवासियों ने साफ ऐलान कर दिया है — यह लोकतंत्र है या जमीन माफिया का राज? यह प्रशासन है या आंख मूंदकर फाइलें पास करने की मशीन? 350 परिवार पूछ रहे हैं — अगर 90B फर्जी थी तो 2024 में उसी के आधार पर नक्शा कैसे पास हुआ? अगर वैध थी तो 20 साल तक उन्हें क्यों भटकाया गया? अब सवाल सीधे मुख्यमंत्री से है — क्या इन परिवारों को न्याय मिलेगा? या 20 साल की पीड़ा यूं ही फाइलों में दफन कर दी जाएगी?
बड़ी खबर राजधानी जयपुर से है आज बात सिर्फ एक कॉलोनी की नहीं… बात है 350 परिवारों की जिंदगी की। उन लोगों की, जिन्होंने साल 2000 से 2010 के बीच अपनी खून-पसीने की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदे, मकान बनाए और सपनों का घर बसाया।,लेकिन अब आरोप है कि उन्हीं प्लॉट्स के नंबर बदले गए, साइज बदले गए और जहाँ मकान खड़े हैं, वहाँ 60 फीट सड़क दिखा दी गई ये सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, ये 350 परिवारों की जिंदगी, उनकी जमा-पूंजी और उनके सपनों का सवाल है! साल 2002… पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर कॉलोनी विकसित हुई। 90B की वैधानिक प्रक्रिया पूरी हुई। 2000 से 2010 के बीच 350 से ज्यादा लोगों ने अपने खून-पसीने की कमाई से प्लॉट खरीदे। मकान बने,
परिवार बसे, बुजुर्गों ने जीवन की आखिरी पूंजी यहाँ लगा दी। लेकिन… जैसे ही जमीन के दाम बढ़े, नीयत बदल गई! जिस 90B को पहले फर्जी बताकर चुनौती दी गई, वही मामला संभागीय कार्यालय, राजस्व बोर्ड और हाईकोर्ट तक गया — और हर जगह राहत नहीं मिली। बाद में हाईकोर्ट से याचिका वापस ले ली गई। सवाल उठता है — अगर 90B फर्जी थी, तो उसे वापस क्यों लिया गया? और असली खेल यहीं से शुरू होता है! उसी 2002 की 90B को मानते हुए 8 अक्टूबर 2024 को जेडीए में नया नक्शा पेश किया जाता है। कॉलोनी के भूखंडों के नंबर बदले जाते हैं, साइज बदले जाते हैं, जहाँ मकान खड़े हैं वहाँ 60 फीट की सड़क दिखा दी जाती है! प्लॉटधारियों ने आपत्तियाँ दीं… सैकड़ों
आपत्तियाँ। लेकिन जेडीए के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। जब अखबार में जोन-12 कार्यालय में कैंप की विज्ञप्ति आई, तो 100 से ज्यादा लोग मौके पर पहुँच गए। डीसी से मिले, एडिशनल कमिश्नर से मिले। आश्वासन मिला… लेकिन कार्रवाई नहीं। आरोप यह भी कि पूर्व डीसी राकेश मेहता के कार्यकाल में फाइलें तैयार हुईं और ट्रांसफर होते ही फाइलें सरपट दौड़ गईं। क्या यह महज संयोग है या सुनियोजित साजिश? एफआईआर दर्ज हुई। जनसुनवाई में निर्देश भी दिए गए। लेकिन आज तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं। फोरेंसिक जांच हुई — निजी लैब में। रिपोर्ट में सामान्य अंतर बताया गया। लेकिन मामला वहीं ठंडा पड़ गया। और आज स्थिति क्या है? जमीन कागजों में प्लॉटधारियों की… लेकिन कब्जा लेने नहीं दिया जा रहा! विरोध करने पर धक्का-मुक्की के आरोप… यहाँ तक
कहा गया — “आधी जमीन ले लो!” क्या 50 प्रतिशत हड़पने का कोई नया कानून आ गया है? 350 परिवार… 80-85 साल के बुजुर्ग… 20 साल से दर-दर भटक रहे हैं। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा से मिले। स्थानीय विधायक राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से मिलने का प्रयास किया। सरकार से गुहार लगाई। अब कॉलोनीवासियों ने साफ ऐलान कर दिया है — यह लोकतंत्र है या जमीन माफिया का राज? यह प्रशासन है या आंख मूंदकर फाइलें पास करने की मशीन? 350 परिवार पूछ रहे हैं — अगर 90B फर्जी थी तो 2024 में उसी के आधार पर नक्शा कैसे पास हुआ? अगर वैध थी तो 20 साल तक उन्हें क्यों भटकाया गया? अब सवाल सीधे मुख्यमंत्री से है — क्या इन परिवारों को न्याय मिलेगा? या 20 साल की पीड़ा यूं ही फाइलों में दफन कर दी जाएगी?
- UGC कानून के विरोध में सवर्ण समाज कि ओर से आगामी 1 मार्च को दौसा में आयोजित होने वाली को लेकर प्रचार प्रसार जोरों पर है , रैली को लेकर सवर्ण समाज के लोग गांव - गांव ढाणी - ढाणी जाकर प्रचार - प्रसार कर अधिक से अधिक संख्या में रैली में शामिल होने की अपील करने लगे हैं । प्रचार कर रहे लोगों ने बताया कि सवर्ण समाज के लोगों को घर-घर जाकर पीले चांवल देकर रैली में आने का न्योता दिया जा रहा है2
- Post by Janta Seva841
- खुशखेड़ा स्थित केमिकल पटाखा फैक्ट्री हादसे के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री मालिक हेमंत सचदेवा, संचालक हेमंत शर्मा और सुपरवाइजर अभिनंदन तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को तिजारा न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 5 दिन की पुलिस कस्टडी (पीसी) में भेजने के आदेश दिए। पुलिस अब रिमांड के दौरान हादसे के कारणों, सुरक्षा मानकों में लापरवाही, विस्फोटक सामग्री के भंडारण और फैक्ट्री संचालन की वैधता को लेकर गहन पूछताछ करेगी। सूत्रों के अनुसार, जांच में कई अहम खुलासे होने की संभावना है।1
- विराटनगर विधानसभा क्षेत्र केचिमनपुरा कॉलेज शाहपुरा में ब्रह्मलीन पद्मश्री बाबा नारायणदास महाराज की ओर से 45 वर्ष पूर्व स्थापित बाबा भगवान दास राजकीय महाविद्यालय को बीबीडी और बीएनडी नाम से अलग-अलग स्थानों पर संचालित करने तथा कला संकाय को दूर स्थानांतरित करने के आदेशों के विरोध में 4 वें दिन से विद्यार्थियों के साथ ग्रामीण कॉलेज के मुख्यद्वार पर टैंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना जारी,छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल कुमार बुनकर ने बताया कि ढाई साल पहले बाबा नारायणदास एवं बाबा भगवानदास दोनों कॉलेजों को एकीकृत कर एक ही परिसर में संचालित करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन हाल ही में बीएनडी कॉलेज के कला संकाय को अलग कर दूसरी जगह स्थानांतरित करने सघर्ष समिति के आदेश जारी किए गए हैं। इस निर्णय का ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने विरोध जताते हुए गत दिनों उपखंड अधिकारी के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर एकीकरण बनाए रखने की मांग की थी। इस पर सुनवाई नहीं होने और कला संकाय के स्थानांतरण आदेश पर रोक नहीं लगाए जाने से आक्रोशित ग्रामीणों एवं छात्रों ने कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर टैट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना जारी, धरना स्थल पर छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल कुमार बुनकर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र यादव, एनएसयूआई ज़िलाध्यक्ष निहाल पलसानिया , पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजेंद्र सिसोटिया, रोहिताश यादव एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष हनुल चौधरी, महासचिव राहुल बागड़ी, मनिन्द्र वर्मा, प्रभु अटल, हंसराज गुर्जर, सुभाष भड़ाना, जयराम वर्मा ,रवि यादव सहित सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे1
- Post by Kishori priya Ji Maharaj1
- Post by Baba tillu Gurjar1
- खनन माफियाओं द्वारा काली मिट्टी की तस्करी । भादसोड़ा , भदेसर उपखंड क्षेत्र में खनन माफियाओं द्वारा अवैध रूप से तालाबों के पेटे से उपजाऊ काली मिट्टी खोदकर खुलेआम कृषि में रजिस्टर्ड ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर काली मिट्टी की तस्करी की जा रही है खनन माफिया आए दिन सरकारी जमीनों, गोचरनोट भुमि , और तालाबों के पेटों से अवैध रूप से मिट्टी खोदकर महंगे दामों में बेच रहे हैं खननमाफिया दिन के उजाले में जेसीबी से खुदाई कर ट्रेक्टर ट्राली में भरकर काली मिट्टी कि तस्करी कर रहे हैं आये दिन उपतहसील भादसोड़ा के बाहर से सैकड़ो ट्रैक्टर ट्रॉली मिट्टी काली मिट्टी के देखे जा सकते हैं, लेकिन प्रशासन की कान में जूं तक नहीं रेंग रही है इससे लगता है कि कहीं ना कहीं मिली-भगत से यह खेल काफी लंबे समय से चल रहा है।3
- आशिकी का सिर पर जब हो भूत सवार तो भला जान की परवाह क्या चीज़ है , कुछ ऐसा ही बयां कर रहा है यह वायरल वीडियो जिसमें लड़का एक लड़की को अपने सामने मोटरसाइकिल की टंकी पर बैठाकर बाइक को सरपट दौड़ा रहा है आखिर क्यों नहीं दोनों को अपनी जिंदगी की परवाह, यही लापरवाही जिंदगी पर भी भारी पड़ सकती है । अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है1
- मोबाइल दुकान से बच्चों द्वारा शीशे तोड़कर मोबाइल दुकान से मोबाइल चोरी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें पांच बच्चे दुकान पर रखें मोबाइलों पर हाथ साफ कर दिया जिन्हें लोगों ने पड़कर वीडियो बनाया और अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है1