सुपौल में बीडीओ का औचक निरीक्षण: तीन विद्यालयों में लापरवाही उजागर, प्रधान शिक्षक मिले अनुपस्थित सुपौल प्रखंड क्षेत्र के तीन विद्यालयों में औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। कृष्णा कुमारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, सुपौल द्वारा किए गए इस निरीक्षण में विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण की सूचना सुपौल प्रखंड के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से बृहस्पतिवार शाम 5:00 बजे साझा की गई। बीडीओ ने उर्दू प्राथमिक विद्यालय, चैनसिंह पट्टी, प्राथमिक विद्यालय, खरेल कर्णपुर तथा प्राथमिक विद्यालय, बरेल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तीनों विद्यालयों में प्रधान शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जबकि अन्य शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज थी। प्रधान शिक्षकों की गैरमौजूदगी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि किसी भी विद्यालय में विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाले बैग एवं पाठ्य सामग्री की प्राप्ति और वितरण से संबंधित अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं थी। इससे विद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति उर्दू प्राथमिक विद्यालय, चैनसिंह पट्टी में देखने को मिली, जहां दोपहर 2:30 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। वहीं प्राथमिक विद्यालय, बरेल में 3:30 बजे बच्चे विद्यालय से बाहर जाते हुए पाए गए, जिससे निर्धारित समय-सारिणी के पालन पर भी सवाल उठे हैं। इस औचक निरीक्षण ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। अब निगाहें संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि इन अनियमितताओं के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।
सुपौल में बीडीओ का औचक निरीक्षण: तीन विद्यालयों में लापरवाही उजागर, प्रधान शिक्षक मिले अनुपस्थित सुपौल प्रखंड क्षेत्र के तीन विद्यालयों में औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। कृष्णा कुमारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, सुपौल द्वारा किए गए इस निरीक्षण में विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण की सूचना सुपौल प्रखंड के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से बृहस्पतिवार शाम 5:00 बजे साझा की गई। बीडीओ ने उर्दू प्राथमिक विद्यालय, चैनसिंह पट्टी, प्राथमिक विद्यालय, खरेल कर्णपुर तथा प्राथमिक विद्यालय, बरेल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तीनों विद्यालयों में प्रधान शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जबकि अन्य शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज थी। प्रधान शिक्षकों की गैरमौजूदगी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि किसी भी विद्यालय में विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाले बैग एवं पाठ्य सामग्री की प्राप्ति और वितरण से संबंधित अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं थी। इससे विद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति उर्दू प्राथमिक विद्यालय, चैनसिंह पट्टी में देखने को मिली, जहां दोपहर 2:30 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। वहीं प्राथमिक विद्यालय, बरेल में 3:30 बजे बच्चे विद्यालय से बाहर जाते हुए पाए गए, जिससे निर्धारित समय-सारिणी के पालन पर भी सवाल उठे हैं। इस औचक निरीक्षण ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। अब निगाहें संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि इन अनियमितताओं के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।
- सुपौल में “भ्रष्टाचार मुक्त कोसी जागरूकता बैनर” के तले आज आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल कुमार सिंह ने अपने निजी आवास पर प्रेस वार्ता आयोजित कर अंचल अधिकारी आनंद मंडल पर गंभीर आरोप लगाए। प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सुपौल अंचल कार्यालय में आम जनता के कार्य बिना दलालों के माध्यम से पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अनिल कुमार सिंह ने कहा कि दाखिल-खारिज, जाति, आय एवं आवासीय प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व संबंधी कार्यों के लिए लोगों से अवैध वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उनका कहना था कि कार्यालय परिसर में सक्रिय दलालों की भूमिका संदिग्ध है और बिना पैसे के फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जातीं। उन्होंने अंचल अधिकारी आनंद मंडल पर प्रशासनिक शिथिलता और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि उनका अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक अंचल कार्यालय को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं किया जाता। वही मामले को लेकर सुपौल अंचल अधिकारी आनंद कुमार मंडल से जब संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया है1
- विनय बिहारी निजी सचिव पूर्व पुलिस महानिदेशक गुजरात ने किया मीटिंग के लिए दौरा...1
- बलिया दुद्घ डेरी फ्रॉम खैरी 🐄🐄 को खाना खाते हैं और न्यू फ्रॉम पर वेलकम हैं और किशि वि शुभ दुद्घ ओडर दे1
- मछली जल कि रानी हो सकती है लेकिन बाहर वो कुछ नहीं1
- #बिहार #गोपालगंज : ▶️प्रिसिद्ध सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर से पिछले दिनों चोरी हुए आभूषण और मुकुट आज मंदिर प्रबंधन को सौंप दिये गये। ▶️पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने बताया कि न्यायालय के रिलीज ऑडर के बाद सभी आभूषण मंदिर प्रबंधन को सौंप दिया गया है।1
- रात के समय दिल्ली का नजारा देखें2
- बिहार के मधेपुरा जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “हर घर नल का जल” पर अब सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नल सूखे पड़े हैं। लोगों को आज भी पीने के पानी के लिए चापाकल और हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है। आखिर जमीनी हकीकत क्या है दरअसल मधेपुरा जिले के कई प्रखंड में जमीनी हकीकत कुछ और है। ताजा मामला मधेपुरा सदर प्रखंड के मठाही, मुरलीगंज प्रखंड के गंगापुर, मुरलीगंज नगर पंचायत,रमनी, भलनी, रघुनाथपुर और घैलाढ़ प्रखंड के भान टेकती सहित कई इलाकों में “हर घर नल का जल” योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। कहीं नल लगे ही नहीं हैं, और जहां लगे हैं वहां महीनों से पानी नहीं आया। कई जगहों पर जलमीनारें खड़ी हैं, लेकिन मोटर खराब है। कहीं बिजली कनेक्शन नहीं है तो कहीं पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है। पानी की टंकियां सूखी पड़ी हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही परेशानी भी बढ़ रही है। ग्रामीणों को सुबह-शाम पानी के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। महिलाओं को दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना की शुरुआत में कुछ दिन पानी मिला, लेकिन उसके बाद सप्लाई बंद हो गई। कई बार शिकायत के बावजूद न तो मरम्मत हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। बाइट – अशोक कुमार, स्थानीय निवासी सरकार ने नल तो लगा दिया, लेकिन पानी नहीं आता। शुरुआत में दो-चार दिन पानी आया था, उसके बाद सब बंद हो गया। हमलोग आज भी हैंडपंप का पानी पी रहे हैं। बाइट – कृष्णा मुखर्जी, स्थानीय निवासी सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। दूर से पानी लाना पड़ता है। गर्मी में हालात और खराब हो जाते हैं। अगर नल-जल योजना ठीक से चले तो बहुत राहत मिले।” ग्राउंड पर हालात यह हैं कि टावर तो खड़े हैं, लेकिन नलों में पानी नहीं बह रहा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही कब तय होगी? खराब पड़ी जलमीनारों और पाइपलाइन की मरम्मत कब होगी? और क्या मधेपुरा के घरों तक वाकई साफ पानी पहुंच पाएगा?4
- सुपौल प्रखंड क्षेत्र के तीन विद्यालयों में औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। कृष्णा कुमारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, सुपौल द्वारा किए गए इस निरीक्षण में विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण की सूचना सुपौल प्रखंड के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से बृहस्पतिवार शाम 5:00 बजे साझा की गई। बीडीओ ने उर्दू प्राथमिक विद्यालय, चैनसिंह पट्टी, प्राथमिक विद्यालय, खरेल कर्णपुर तथा प्राथमिक विद्यालय, बरेल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तीनों विद्यालयों में प्रधान शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जबकि अन्य शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज थी। प्रधान शिक्षकों की गैरमौजूदगी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि किसी भी विद्यालय में विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाले बैग एवं पाठ्य सामग्री की प्राप्ति और वितरण से संबंधित अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं थी। इससे विद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। सबसे चौंकाने वाली स्थिति उर्दू प्राथमिक विद्यालय, चैनसिंह पट्टी में देखने को मिली, जहां दोपहर 2:30 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। वहीं प्राथमिक विद्यालय, बरेल में 3:30 बजे बच्चे विद्यालय से बाहर जाते हुए पाए गए, जिससे निर्धारित समय-सारिणी के पालन पर भी सवाल उठे हैं। इस औचक निरीक्षण ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। अब निगाहें संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि इन अनियमितताओं के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।1