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- जयपुर जिले की नगर परिषद शाहपुरा में वाल्मीकि सेना ने 23 जुलाई को जयपुर में एक विशाल महाआंदोलन और उग्र प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस आंदोलन में वाल्मीकि समाज द्वारा कार्य बहिष्कार करने का संकल्प लिया गया है। इस आंदोलन में वाल्मीकि समाज की वाल्मीकि बस्ती, कोटपूतली-बहरोड़ और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से हजारों समाजबंधुओं के जयपुर पहुंचने का संकल्प लिया गया है। संगठन का स्पष्ट रूप से कहना है कि धरातल पर वास्तविक सफाई का कार्य केवल वाल्मीकि समाज ही करता है, इसलिए उनकी स्थायी नियुक्ति ही होनी चाहिए।1
- मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की नामवार लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एएनएम (ANM) तथा सीएचओ (CHO) को प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला के साथ नियमित मॉनिटरिंग के लिए अटैच करने और जरूरत पड़ने पर रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने प्रदेशभर के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारियों को सोमवार सुबह एएनएम की बैठक लेकर लाईनलिस्ट और उसके कारणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं ताकि समय रहते आवश्यक हस्तक्षेप किया जा सके। मुख्य सचिव ने रविवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य गतिविधियों की विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और गायनी विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटों में हुए सामान्य व सिजेरियन प्रसव और उनकी वर्तमान हालत के बारे में भी फीडबैक लिया। उन्होंने विशेष रूप से निर्देशित किया कि प्रसव के बाद अगले 24 घंटे तक धात्री महिला की गहन निगरानी की जाए।1
- दौसा के सैंथल थाने पर नवनियुक्त थाना अधिकारी रजत खींची के नेतृत्व में सीएलजी और शांति समिति के सदस्यों के साथ एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सर्व समाज के ग्रामीणों और गणमान्य लोगों के साथ क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान थाना अधिकारी ने सैंथल मंडल के सभी कार्यकर्ताओं से सुझाव मांगे और उन सुझावों पर पूरी तरह खरा उतरने का भरोसा दिया। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने नवनियुक्त थाना अधिकारी का माला पहनाकर और साफा बांधकर स्वागत भी किया। बैठक में ग्रामीणों ने थाना अधिकारी के सामने कई गंभीर मुद्दे रखे। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूलों की छुट्टी के समय छात्राओं पर कुछ लोगों द्वारा फब्तियां कसी जाती हैं, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, इसलिए स्कूलों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। इसके साथ ही, क्षेत्र में बढ़ रही चोरी और नकबजनी की वारदातों को रोकने के लिए रात्रि गश्त बढ़ाने, गांजा व स्मैक जैसे अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने और आवारा व गुंडा प्रवृत्ति के लोगों पर शिकंजा कसने की मांग की गई। कुछ ग्रामीणों ने एक-दूसरे के प्लाटों पर अवैध कब्जे और गाली-गलौज की शिकायत भी पुलिस से की। ग्रामीणों की शिकायतों पर सैंथल थाना अधिकारी रजत खींची ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि उनके रहते हुए क्षेत्र में समय रहते कोई भी अप्रिय घटना नहीं होने दी जाएगी और यदि कोई घटना घटती है तो पुलिस द्वारा सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस बैठक में विभिन्न ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों के साथ सैंथल के समाजसेवी अशोक ममोडिया, किन्नर बिजली बाई, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष अशोक शर्मा, सुरेश सोती, अजीज खान, सूरज महावर, महेश सैनी, प्रदीप शर्मा, विनोद बयाडवाल, कैलाश सैनी, सुमित भट्ट, नरसिंह लाल सैनी, उमाशंकर शर्मा होदायली, कमसिंह मीणा और लोकेश शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।2
- NEET परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि ओएमआर (OMR) शीट के मिलान के अनुसार उसके 609 अंक बन रहे थे, लेकिन NTA की वेबसाइट पर महज कुछ ही घंटों के भीतर उसका परिणाम बदलकर सिर्फ 167 अंक दिखा दिया गया। छात्रा का दृढ़ता से कहना है कि यह केवल उसके साथ हुई कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रा ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से गुहार लगाते हुए अपील की है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे गंभीर मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली में युवाओं का विश्वास दोबारा से कायम हो सके। गौरतलब है कि छात्रा के इन आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इस पूरे मामले पर फिलहाल NTA की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।1
- उत्तराखंड में 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के फैसले के खिलाफ पेड़ों को बचाने की एक अनोखी मुहिम देखने को मिली है। इस फैसले के विरोध में एक महिला ने मुंडन कराकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महिला का कहना है कि यह आंदोलन पर्यावरण और जंगलों की रक्षा के लिए है। इस अनोखे कदम के बाद अब यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पेड़ों को बचाने के लिए इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन सचमुच ज़रूरी हैं।1
- राजस्थान के अलवर स्थित राजकीय कला महाविद्यालय में पिछले दिनों हुए पेपर लीक और सामूहिक नकल के मामले को लेकर 'शिक्षा बचाओ आंदोलन' ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। आंदोलन की ओर से प्रोफेसर रमेश बैरवा ने होटल स्वरूप विलास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर परीक्षा में हुई इस भारी अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने मामले के मुख्य दोषियों, जिनमें प्राचार्य डॉ. अशोक आर्य, परीक्षा समिति और अन्य शिक्षक शामिल हैं, के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। शिक्षा बचाओ आंदोलन ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा सचिव और कॉलेज शिक्षा आयुक्त को एक ज्ञापन भेजा है। इस ज्ञापन में दोषी प्राचार्य डॉ. अशोक आर्य और परीक्षा समिति के सदस्यों को तुरंत निलंबित करने तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कॉलेज के सभी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। आंदोलन ने राज्य के सभी सरकारी और निजी महाविद्यालयों में मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने, सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य करने और नियमित कक्षाएं संचालित करने की भी वकालत की है ताकि छात्र नकल के लालच में न आएं। आंदोलन के अनुसार, राज ऋषि भर्तृहरी मत्स्य विश्वविद्यालय की मिड टर्म सेमेस्टर परीक्षाओं के दौरान मोबाइल के जरिए सामूहिक नकल कराने और गोपनीयता भंग करने का यह गंभीर मामला सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से सामने आया है। सेमेस्टर परीक्षा में मिड टर्म के अंक बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इसमें कुल अंकों का 20 प्रतिशत हिस्सा शामिल होता है। प्रोफेसर बैरवा ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने के लिए खुद दोषी केंद्राधीक्षक डॉ. अशोक आर्य ने एक आंतरिक जांच समिति बनाई, जिसमें सह-आरोपी परीक्षा समिति के संयोजक डॉ. सुरेन्द्र वेदवान, सदस्य डॉ. महेंद्र प्रताप बाँयला और डॉ. राजकुमार गोयल को ही शामिल कर लिया गया। इतना ही नहीं, आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा द्वारा गठित जांच दल पर भी मामले की लीपापोती करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। बताया गया कि जांच दल 8 जुलाई को दोपहर बाद करीब 3 बजे कॉलेज पहुंचा, जब अधिकांश छात्र और शिक्षक जा चुके थे, और वहां जांच करने के बजाय दोषी प्राचार्य व शिक्षकों के साथ ड्राई फ्रूट और काजू कतली का नाश्ता कर एकतरफा औपचारिकता पूरी करके लौट गया। अंत में, अलवर में सोनम वांगचुक के समर्थन के साथ इस आंदोलन ने उच्च शिक्षा की गरिमा और छात्रों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।1
- राजस्थान के अलवर जिले के राजगढ़ में श्री जगन्नाथ जी मेले के पावन अवसर पर एक भव्य 'लोक संगीत संध्या' का आयोजन किया गया। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर के तत्वावधान में पंचायती पुस्तकालय, कला संगम एवं नगर पालिका राजगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय और ख्यातिप्राप्त लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से देर रात तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखा और समृद्ध लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डीवाईएसपी देशराज कुलदीप, कार्यक्रम अध्यक्ष महंत प्रकाशदास जी महाराज तथा संस्था अध्यक्ष एडवोकेट भूपेन्द्र शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद जोधपुर के प्रसिद्ध लोक कलाकार सुरमनाथ और उनकी टीम ने भावपूर्ण गणेश वंदना से संध्या की शुरुआत की। अजमेर से आईं लोक कलाकार राधा ने भवाई, घूमर और चरी नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देकर खूब वाहवाही लूटी, जबकि सुरमनाथ ने लोक गायन और कालबेलिया नृत्य से समां बांध दिया। वहीं, अलवर के प्रसिद्ध भपंग वादक महमूद खां और यूसुफ ने अपनी विश्वप्रसिद्ध जुगलबंदी से पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजा दिया। कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में एडवोकेट भूपेन्द्र शर्मा ने पंचायती पुस्तकालय सभागार को भविष्य में सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस दौरान सभी अतिथियों और कलाकारों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। खेम सिंह आर्य और अशोक पालीवाल द्वारा प्रभावी रूप से संचालित इस कार्यक्रम में कला संगम अध्यक्ष दीनदयाल बंसल सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। दर्शकों से खचाखच भरा यह सभागार राजगढ़ में लोक कला और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में एक यादगार आयोजन साबित हुआ।2
- राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सामने आई है, जहां छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। यह दृश्य न केवल व्यवस्था की कमी को उजागर करता है, बल्कि इस बात का भी साफ संकेत है कि आज भी कई इलाकों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर इन बच्चों का यह सफर वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।1