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“पानी ने छीनी हंसी… और छोड़ गया चीखों का सन्नाटा” आपकी जंग मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर हुआ वो खौफनाक हादसा आज भी लोगों की रूह कंपा रहा है। खुशियों से भरी नाव अचानक मौत की गोद में समा गई… और देखते ही देखते चीख-पुकार में बदल गई हर मुस्कान। इस दर्दनाक मंजर के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रदेश के सभी नाव घाटों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। यह कदम भले सुरक्षा के लिए हो, लेकिन उन परिवारों के जख्म कैसे भरेंगे जिन्होंने अपने अपनों को इसी पानी में खो दिया…? घाटों पर अब सन्नाटा पसरा है… वही जगह जहां कभी हंसी गूंजती थी, आज मातम बिछा है। हर लहर जैसे एक सवाल पूछ रही है— क्या ये हादसा टल सकता था…? प्रशासन जांच की बात कर रहा है, लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए… उनके लिए हर रात अब एक नई सजा बन चुकी है। 😢
MUNNA MIYAN
“पानी ने छीनी हंसी… और छोड़ गया चीखों का सन्नाटा” आपकी जंग मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर हुआ वो खौफनाक हादसा आज भी लोगों की रूह कंपा रहा है। खुशियों से भरी नाव अचानक मौत की गोद में समा गई… और देखते ही देखते चीख-पुकार में बदल गई हर मुस्कान। इस दर्दनाक मंजर के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रदेश के सभी नाव घाटों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। यह कदम भले सुरक्षा के लिए हो, लेकिन उन परिवारों के जख्म कैसे भरेंगे जिन्होंने अपने अपनों को इसी पानी में खो दिया…? घाटों पर अब सन्नाटा पसरा है… वही जगह जहां कभी हंसी गूंजती थी, आज मातम बिछा है। हर लहर जैसे एक सवाल पूछ रही है— क्या ये हादसा टल सकता था…? प्रशासन जांच की बात कर रहा है, लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए… उनके लिए हर रात अब एक नई सजा बन चुकी है। 😢
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- अंबरनाथ शहरात प्रशासनाच्या वागणुकीवर गंभीर प्रश्नचिन्ह निर्माण झाले आहे. दिनांक 01 एप्रिल 2026 रोजी उपमुख्य अधिकारी उमेश राऊत यांनी नागरिकांशी अत्यंत उद्धट भाषेत संवाद साधत, “तुम्हाला करायचं काय ते करा” अशी धमकीवजा भाषा वापरल्याचा आरोप समोर आला आहे. या घटनेमुळे सामान्य नागरिकांमध्ये संतापाची लाट उसळली आहे. तक्रारीनुसार, संबंधित अधिकाऱ्यांनी शासनाच्या नियमांचे उघड उल्लंघन करत ओळखपत्र (I-Card) परिधान केले नव्हते. याशिवाय नागरिकांच्या तक्रारींकडे वारंवार दुर्लक्ष केले जात असल्याचीही बाब समोर आली आहे. 14 एप्रिल 2026 रोजी ई-मेलद्वारे तक्रार करूनही आजपर्यंत अंबरनाथ महानगरपालिकेकडून कोणताही प्रतिसाद मिळालेला नाही. या संपूर्ण प्रकाराचा व्हिडिओ पुरावा देखील समोर आला असून, त्यामुळे प्रकरण अधिकच गंभीर बनले आहे. नागरिकांचा सवाल आहे — “अधिकारीच जर नियम मोडणार असतील, तर सामान्य माणसाने न्याय कुणाकडे मागायचा?” संतप्त नागरिकांनी संबंधित अधिकाऱ्यावर तात्काळ निलंबन व कठोर कारवाई करण्याची मागणी केली आहे. प्रशासन आता या प्रकरणावर काय पावले उचलते, याकडे संपूर्ण अंबरनाथचे लक्ष लागले आहे.1
- শিলিগুড়ির সেবক রোড 'হিট অ্যান্ড রান ' মামলায় শংকরের মৃত্যুর বিচারের দাবিতে ফের পথে শংকরের পরিবার সহ গ্ৰামবাসীরা ! গত ১৮ ফ্রেব্রুয়ারি শিলিগুড়ির সেবক রোডে একটি দ্রুত গতির চারচাক্কা গাড়ির ধাক্কায় প্রাণ হারান পানিট্যাঙ্কি যুবক শঙ্কর ছেত্রী! ঘটনার ৪ দিন পর গ্ৰেফতার হয় অভিযুক্ত চালক দেবাংশু পাল চৌধুরী ।সেই ঘটনা দোষীর শাস্তি দাবিতে দফার দফায় আন্দোলন চলে শিলিগুড়ি মহকুমা আদালতে চত্বরে । সেই মামলা বর্তমানে শিলিগুড়ি মহকুমা আদালতে বিচারাধীন ও অভিযুক্ত জেল হেফাজতে থাকায় হাইকোর্টে জামিনে আর্জি জানিয়ে মামলা হাইকোর্টে হস্তান্তর করেছে অভিযুক্ত পরিবার।এতেই আইনে ফাঁকে কোনো রকম ভাবে যাতে অভিযুক্ত রেহাই না পায় সেই দাবিতে এদিন খড়িবাড়ির পানিট্যাঙ্কিতে বিচারের দাবিতে পথে নামেন নিহত শংকর ছেত্রী পরিবার ও গ্ৰামবাসীরা । হাতে প্ল্যাকার্ড নিয়ে অভিযুক্ত চালকের শাস্তি দাবি জানান তারা । পরিবারের পক্ষ থেকে কলকাতা হাইকোর্টে মামলা হস্তান্তর করা হয়েছে। আমাদের পক্ষে কলকাতা গিয়ে লড়াই করা সাধ্য বাইরে ।এই মামলা শিলিগুড়ি মহকুমা আদালতে থেকে অভিযুক্তকে শাস্তি দেওয়া হোক বলে জানান নিহত শংকরের দিদি মনু ছেত্রী । এদিন মিছিলটি পানিট্যাঙ্কি বাসস্ট্যান্ড থেকে শুরু হয়ে পানিট্যাঙ্কি বাজার ঘুরে ফের বাসস্ট্যান্ড গিয়ে শেষ হয়।1
- Post by Panitanki Times1
- সাত সকালে ঝুলন্ত দেহ উদ্ধারকে কেন্দ্র করে তীব্র চাঞ্চল্য ছড়ালো মালবাজার শহরের ৯ নম্বর ওয়ার্ডের পুরানো আদালত এলাকায়। বাড়ির ভেতর থেকে উদ্ধার হলো ৪৫ বছর বয়সী গোপাল বণিকের নিথর দেহ1
- ময়নাগুড়ি ব্লকের মাধবডাঙ্গার বটতলা পুরানবাড়ি এলাকায় প্রতি বছরের মতো এবছরও অনুষ্ঠিত হলো ঐতিহ্যবাহী চড়ক পূজা ও মেলা। বৈশাখ মাসের এই প্রাচীন লোকউৎসবকে ঘিরে সকাল থেকেই এলাকায় ভিড় জমায় বহু মানুষ। দূরদূরান্ত থেকে দর্শনার্থীরা হাজির হন উৎসবের এই বিশেষ মুহূর্ত প্রত্যক্ষ করতে। পূজার অন্যতম প্রধান আকর্ষণ ছিল চড়ক গাছ ঘোরানো। এ বছর সেই রীতিতে প্রথমবার অংশ নেন মালা রায় নামে এক মহিলা ভক্ত। জানা গিয়েছে, মালা রায় পুরানবাড়ি এলাকার বাসিন্দা হলেও বর্তমানে বিয়ের পর মেহেরি পাড়ায় থাকেন। ভক্তি ও আস্থার নিদর্শন হিসেবে তিনি নিজের পিঠে কাঁটা প্রবেশ করিয়ে চড়ক গাছে ঝুলে ঘোরেন। এই দৃশ্য দেখে উপস্থিত দর্শনার্থীরা বিস্মিত হয়ে পড়েন। স্থানীয় ভক্তদের বিশ্বাস, এই ধরনের কঠোর সাধনা ও তপস্যার মাধ্যমে দেবতার আশীর্বাদ লাভ করা যায় এবং জীবনের নানা বাধা-বিপত্তি দূর হয়। এছাড়াও মেলাকে কেন্দ্র করে বসে নানা ধরনের দোকানপাট, খেলনা, মিষ্টি ও খাবারের স্টল, যা উৎসবের আমেজকে আরও বাড়িয়ে তোলে। প্রতি বছরের মতো এবছরও মাধবডাঙ্গার চড়ক পূজা ও মেলা এলাকাবাসীর কাছে বিশেষ আকর্ষণের কেন্দ্রবিন্দু হয়ে উঠেছে।1
- যখন কোনো কাজ মানুষের সাধ্যের বাইরে চলে যায়, তখন দৃঢ় বিশ্বাসের সাথে এই বাক্যটি স্মরণ করলে আল্লাহ তাঁর কুদরতে পথ খুলে দেন ইনশাআল্লাহ 🤲🤲🤲🤲🤲🤲💞1
- বারাসাতে স্ট্রং রুমের উপর আচমকাই একটি লোক উঠে পড়ে ছাদে। বিরোধীদের অভিযোগ স্টং রুমের ভেতর থেকে দীর্ঘক্ষণ ধরে চলে এক অজানা শব্দ।1
- सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो दिल को चीर कर रख देता है। एक बेगुनाह, लाचार इंसान पर जिस तरह से जुल्म ढाया जा रहा है, उसे देखकर रूह कांप उठती है। चीखें गूंजती रहीं… मगर मदद के लिए कोई हाथ आगे नहीं बढ़ा। क्या कसूर था उसका? सिर्फ इतना कि वो कमजोर था… या अकेला? कुछ दरिंदे इंसानियत को कुचलते रहे और तमाशबीन खामोशी से देखते रहे। यह सिर्फ एक शख्स पर हमला नहीं, बल्कि हमारे समाज के मरते हुए ज़मीर की कहानी है। आज अगर हम खामोश रहे… तो कल यही आग हमारे घरों तक पहुंचेगी। आपकी जंग ” पूछता है — आखिर कब जागेगा समाज? कब रुकेगा ये जुल्म?” 👉 इंसानियत किसी मजहब की मोहताज नहीं होती… और आज इंसानियत ही सबसे ज्यादा घायल है।1