सांसद राजकुमार रोत ने डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा रेल परियोजना में देरी पर उठाए सवाल वंदे भारत का किराया कम करने और डूंगरपुर को दिल्ली-मुंबई से जोड़ने की सदन में रखी मांग संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने क्षेत्र की रेल समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि आदिवासी अंचल की जनता ने 2014 और 2019 में भाजपा को एकतरफा भारी जनादेश दिया, लेकिन बदले में इस क्षेत्र को केवल उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने वर्ष 2012 में स्वीकृत हुई डूंगरपुर–बांसवाड़ा–रतलाम रेल परियोजना के 14 वर्षों बाद भी अधूरा रहने पर गंभीर सवाल खड़े किए। सांसद रोत ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि राजस्थान के 41 जिलों में बांसवाड़ा आज भी एकमात्र ऐसा जिला है, जो रेल मानचित्र से पूरी तरह कटा हुआ है। उन्होंने सरकार की नई घोषणाओं को मजाक करार देते हुए कहा कि जब एक दशक पुरानी स्वीकृत परियोजनाएं ही धूल फांक रही हैं, तो नई लाइनों का क्या भरोसा? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नई प्रस्तावित रेल लाइनों (जैसे नीमच-प्रतापगढ़-बांसवाड़ा) का उद्देश्य केवल इस क्षेत्र की खनिज संपदा को लूटना है, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। रेलवे की नीतियों पर तंज कसते हुए रोत ने कहा कि डूंगरपुर से अहमदाबाद के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया 690 रुपये है, जबकि सामान्य ट्रेन में यह सफर मात्र 60-70 रुपये में तय होता है। उन्होंने सवाल किया कि एक गरीब, आदिवासी और मजदूर इतना महंगा किराया कैसे वहन करेगा? उन्होंने मांग की कि वंदे भारत का किराया कम किया जाए और इसके रूट को सूरत तक बढ़ाया जाए ताकि स्थानीय व्यापारियों और श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिल सके। - दिल्ली-मुंबई सीधी ट्रेन की पुरजोर मांग सांसद ने डूंगरपुर को देश के बड़े महानगरों से जोड़ने के लिए व्यावहारिक समाधान पेश किए। उन्होंने कहा कि उदयपुर में मेवाड़ और चेतक एक्सप्रेस घंटों खड़ी रहती हैं यदि सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इन्हें डूंगरपुर तक आसानी से बढ़ाया जा सकता है। वहीं, उदयपुर-बांद्रा ट्रेन के लंबे और घुमावदार रूट पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने इसे डूंगरपुर के रास्ते चलाने की मांग की, जिससे यात्रियों के 8 से 10 घंटे बच सकेंगे। वहीं, राजकुमार रोत ने डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का नाम भील राजा डूंगर बरंडा के नाम पर रखने की मांग प्रमुखता से रखी। इसके अलावा, उन्होंने बिछीवाड़ा स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव, असारवा-जयपुर एक्सप्रेस में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और भूमि अधिग्रहण के बदले आदिवासियों को उचित मुआवजा दिलाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता अब केवल घोषणाओं से संतुष्ट होने वाली नहीं है, उसे धरातल पर काम चाहिए।
सांसद राजकुमार रोत ने डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा रेल परियोजना में देरी पर उठाए सवाल वंदे भारत का किराया कम करने और डूंगरपुर को दिल्ली-मुंबई से जोड़ने की सदन में रखी मांग संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने क्षेत्र की रेल समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि आदिवासी अंचल की जनता ने 2014 और 2019 में भाजपा को एकतरफा भारी जनादेश दिया, लेकिन बदले में इस क्षेत्र को केवल उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने वर्ष 2012 में स्वीकृत हुई डूंगरपुर–बांसवाड़ा–रतलाम रेल परियोजना के 14 वर्षों बाद भी अधूरा रहने पर गंभीर सवाल खड़े किए। सांसद रोत ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि राजस्थान के 41 जिलों में बांसवाड़ा आज भी एकमात्र ऐसा जिला है, जो रेल मानचित्र से पूरी तरह कटा हुआ है। उन्होंने सरकार की नई घोषणाओं को मजाक करार देते हुए कहा कि जब एक दशक पुरानी स्वीकृत परियोजनाएं ही धूल फांक रही हैं, तो नई लाइनों का क्या भरोसा? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नई प्रस्तावित रेल लाइनों (जैसे नीमच-प्रतापगढ़-बांसवाड़ा) का उद्देश्य केवल इस क्षेत्र की खनिज संपदा को लूटना है, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। रेलवे की नीतियों पर तंज कसते हुए रोत ने कहा कि डूंगरपुर से अहमदाबाद के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया 690 रुपये है, जबकि सामान्य ट्रेन में यह सफर मात्र 60-70 रुपये में तय होता है। उन्होंने सवाल किया कि एक गरीब, आदिवासी और मजदूर इतना महंगा किराया कैसे वहन करेगा? उन्होंने मांग की कि वंदे भारत का किराया कम किया जाए और इसके रूट को सूरत तक बढ़ाया जाए ताकि स्थानीय व्यापारियों और श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिल सके। - दिल्ली-मुंबई सीधी ट्रेन की पुरजोर मांग सांसद ने डूंगरपुर को देश के बड़े महानगरों से जोड़ने के लिए व्यावहारिक समाधान पेश किए। उन्होंने कहा कि उदयपुर में मेवाड़ और चेतक एक्सप्रेस घंटों खड़ी रहती हैं यदि सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इन्हें डूंगरपुर तक आसानी से बढ़ाया जा सकता है। वहीं, उदयपुर-बांद्रा ट्रेन के लंबे और घुमावदार रूट पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने इसे डूंगरपुर के रास्ते चलाने की मांग की, जिससे यात्रियों के 8 से 10 घंटे बच सकेंगे। वहीं, राजकुमार रोत ने डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का नाम भील राजा डूंगर बरंडा के नाम पर रखने की मांग प्रमुखता से रखी। इसके अलावा, उन्होंने बिछीवाड़ा स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव, असारवा-जयपुर एक्सप्रेस में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और भूमि अधिग्रहण के बदले आदिवासियों को उचित मुआवजा दिलाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता अब केवल घोषणाओं से संतुष्ट होने वाली नहीं है, उसे धरातल पर काम चाहिए।
- लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने क्षेत्र की लंबित रेल परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने 14 वर्षों से अधूरी डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल परियोजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी बांसवाड़ा रेल मानचित्र से कटा हुआ है। रोत ने वंदे भारत एक्सप्रेस के अत्यधिक किराए को कम करने, इसे सूरत तक बढ़ाने और दिल्ली-मुंबई के लिए सीधी ट्रेन सेवा (मेवाड़ व चेतक एक्सप्रेस का विस्तार) की पुरजोर मांग की। साथ ही, उन्होंने डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का नाम भील राजा डूंगर बरंडा के नाम पर रखने और भूमि अधिग्रहण के बदले आदिवासियों को उचित मुआवजा दिलाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। सांसद ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि नई रेल लाइनों का उद्देश्य केवल क्षेत्र की खनिज संपदा का दोहन है, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।1
- सागवाड़ा। बढ़ती महंगाई और घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में निरंतर वृद्धि के विरोध में जिला कांग्रेस अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के तत्वावधान में सोमवार को सागवाड़ा में जोरदार प्रदर्शन किया गया। पूर्व विधायक सुरेंद्र बामनिया और प्रकोष्ठ अध्यक्ष मनोहर कोटेड के नेतृत्व में कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय से हाथों में तख्तियां और लॉरी में खाली गैस सिलेंडर लेकर मौन जुलूस के रूप में निकले। मुंह पर काली पट्टी बांधकर उपखंड कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ताओं ने वहां थाली बजाकर सरकार के विरुद्ध आक्रोश जताया। महामहिम राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर के दाम घटाने, प्रभावी सब्सिडी सुनिश्चित करने और पेट्रोल-डीजल पर करों की पुनर्समीक्षा कर आमजन को राहत देने की मांग की। इस दौरान चंद्रशेखर सिंघवी, अतुल सारगिया सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- अमृतलाल यादव भीम आर्मी जिला अध्यक्ष का आव्हान । सभी को #क्रांतिकारी_जयभीम #लाल_सलाम 🫡 🫡 मान्यवर कांशीराम जी साहेब की जन्म जयंती का कार्यक्रम डूंगरपुर के गोकुलपुरा अंबेडकर छात्रावास में रखा गया हैं ज्यादा से ज्यादा लोगो को पहुँचने हेतु आव्हान । *#हुल_उलगुलान 💪🏿💪🏿💪🏿* *#इंक़लाब ज़िंदाबाद 💪🏿💪🏿💪🏿*1
- डूंगरपुर जिले के चौरासी थाना क्षेत्र के भिंडा गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ शॉर्ट सर्किट के कारण एक केलूपोश मवेशी घर में भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में मवेशी घर के भीतर बंधे तीन बेजुबान जानवर जिंदा जल गए और पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। मामले के अनुसार, भिंडा गांव निवासी भेमा रावल के केलूपोश घर में अचानक शॉर्ट सर्किट से चिंगारी उठी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि मवेशियों को बाहर निकालने का मौका ही नहीं मिला। इस हादसे में घर के भीतर बंधी एक भैंस, भैंस का बछड़ा और एक बकरी की झुलसने से मौके पर ही मौत हो गई। पीड़ित भेमा रावल ने बताया कि उनका यह केलूपोश मकान दो हिस्सों में बंटा हुआ था। मकान के अगले हिस्से में वह अपनी आजीविका चलाने के लिए किराना की दुकान संचालित करते थे, जबकि पिछले हिस्से को उन्होंने मवेशी घर बना रखा था। आग की चपेट में आने से मवेशियों के साथ-साथ घर में रखा भारी मात्रा में घास और अनाज भी जलकर राख हो गया है। जिससे परिवार के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सर्वे करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है ताकि हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके। बाइट - भेमा रावल पीड़ित1
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- झाड़ोल में सहकारी समिति कार्मिकों ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन1
- महावीर इंटरनेशनल डूंगरपुर-बांसवाड़ा जोन का संभागीय अधिवेशन अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जैन के मुख्य आतिथ्य एवं जोन अध्यक्ष पृथ्वीराज जैन की अध्यक्षता में तलवाड़ा में संपन्न हुआ। अधिवेशन में संभाग के 22 केंद्रों के 225 पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए कनबा केंद्र को कुल पांच अवार्ड से नवाजा गया, जिसमें सचिव अखिलेश पी. जैन को 'बेस्ट सचिव' के अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही, 'सुकून की छांव' प्रोजेक्ट के तहत निशुल्क छाता वितरण व लंबी दूरी के सेवा कार्यों के लिए केंद्र को और भामाशाह श्रीमती पुष्पादेवी जैन को 'सर्वश्री अवार्ड' से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष गौतम राठौड़, अजीत कोठिया, विनोद दोषी व सुरेश गांधी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1