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शिक्षा नगरी कोटा में 17 जून को श्रीमान राहुल गांधी जी का आगमन होने जा रहा है। उनके कोटा आगमन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं व्यक्त की गई हैं।

8 hrs ago
user_Ramavtar Meghwal
Ramavtar Meghwal
Photographer Kanwas, Kota•
8 hrs ago
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शिक्षा नगरी कोटा में 17 जून को श्रीमान राहुल गांधी जी का आगमन होने जा रहा है। उनके कोटा आगमन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं व्यक्त की गई हैं।

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  • उत्तराखंड स्पोर्ट्स साइंस कॉन्क्लेव-2026 में खेल आधारित आर्थिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय द्वारा हल्द्वानी के गैलापार स्थित आईजी खेल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ कुलपति प्रो. अमित सिंहा ने किया। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में 'खेल हब परियोजना' क्रियान्वित की जा रही है, तथा विश्वविद्यालय में जुलाई से प्रवेश और अगस्त से पाठ्यक्रम शुरू होंगे। कॉन्क्लेव में कोटा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. अनुकृति शर्मा की 'स्पोर्ट्स मैनेजमेंट फॉर स्पोर्ट्स-लेड इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड यूथ जॉब अपॉर्च्युनिटीज इन उत्तराखंड' विषय पर प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डॉ. शर्मा ने तर्क दिया कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय भौगोलिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विशेषताओं के कारण देश का एक अग्रणी स्पोर्ट्स इकोनॉमी हब बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने रेखांकित किया कि हिमालयी क्षेत्र साहसिक, शीतकालीन और पर्वतीय खेलों के लिए विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करता है, वहीं राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से राज्य की खेल अधोसंरचना मजबूत हुई है। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश और हरिद्वार ने योग एवं वेलनेस पर्यटन में वैश्विक पहचान स्थापित की है। प्रो. अनुकृति शर्मा ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को खेल संगठनों, प्रतियोगिताओं, खिलाड़ियों और खेल व्यवसाय के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा एक बहुआयामी अनुशासन बताया। उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया, जिससे खेल आयोजन प्रबंधक, स्पोर्ट्स मार्केटिंग विशेषज्ञ, खेल विश्लेषक, स्टेडियम प्रबंधक, खेल पत्रकार और एडवेंचर टूरिज्म प्रबंधक जैसे विभिन्न व्यवसायों में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। डॉ. शर्मा ने स्पोर्ट्स इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना पर भी जोर दिया, ताकि युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर मिलें। इस दिशा में खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, स्टार्टअप इंडिया और उत्तराखंड स्टार्टअप नीति-2023 जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को सहायक बताया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उपकुलपति डॉ. रशिका सिद्दीकी ने बताया कि खेल विश्वविद्यालय और फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिससे दोनों संस्थानों के छात्र खेल संसाधनों का परस्पर उपयोग कर सकेंगे। कॉन्क्लेव में प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार, वर्ष 2026-27 से स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कार्यक्रम आरंभ करने, उद्योग एवं सरकारी संस्थाओं के साथ समझौते करने तथा आगामी वर्षों में शोध एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि विश्वविद्यालयों, सरकार और उद्योग जगत के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड को देश की 'स्पोर्ट्स कैपिटल' के रूप में स्थापित किया जा सकता है। कार्यक्रम में एनएसीआईटी के सलाहकार डॉ. अरुण कुमार, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंहा, अभिषेक इस्तार, गौतम विर्क और डी टाउन रोबोटिक्स के अविनाश चंद पाल ने भी अपने विचार साझा किए।
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    उत्तराखंड स्पोर्ट्स साइंस कॉन्क्लेव-2026 में खेल आधारित आर्थिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। उत्तराखंड राज्य खेल विश्वविद्यालय द्वारा हल्द्वानी के गैलापार स्थित आईजी खेल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन का शुभारंभ कुलपति प्रो. अमित सिंहा ने किया। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में 'खेल हब परियोजना' क्रियान्वित की जा रही है, तथा विश्वविद्यालय में जुलाई से प्रवेश और अगस्त से पाठ्यक्रम शुरू होंगे।

कॉन्क्लेव में कोटा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. अनुकृति शर्मा की 'स्पोर्ट्स मैनेजमेंट फॉर स्पोर्ट्स-लेड इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड यूथ जॉब अपॉर्च्युनिटीज इन उत्तराखंड' विषय पर प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। डॉ. शर्मा ने तर्क दिया कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय भौगोलिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विशेषताओं के कारण देश का एक अग्रणी स्पोर्ट्स इकोनॉमी हब बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने रेखांकित किया कि हिमालयी क्षेत्र साहसिक, शीतकालीन और पर्वतीय खेलों के लिए विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करता है, वहीं राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से राज्य की खेल अधोसंरचना मजबूत हुई है। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश और हरिद्वार ने योग एवं वेलनेस पर्यटन में वैश्विक पहचान स्थापित की है।

प्रो. अनुकृति शर्मा ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट को खेल संगठनों, प्रतियोगिताओं, खिलाड़ियों और खेल व्यवसाय के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा एक बहुआयामी अनुशासन बताया। उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया, जिससे खेल आयोजन प्रबंधक, स्पोर्ट्स मार्केटिंग विशेषज्ञ, खेल विश्लेषक, स्टेडियम प्रबंधक, खेल पत्रकार और एडवेंचर टूरिज्म प्रबंधक जैसे विभिन्न व्यवसायों में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। डॉ. शर्मा ने स्पोर्ट्स इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना पर भी जोर दिया, ताकि युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर मिलें। इस दिशा में खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, स्टार्टअप इंडिया और उत्तराखंड स्टार्टअप नीति-2023 जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को सहायक बताया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की उपकुलपति डॉ. रशिका सिद्दीकी ने बताया कि खेल विश्वविद्यालय और फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिससे दोनों संस्थानों के छात्र खेल संसाधनों का परस्पर उपयोग कर सकेंगे। कॉन्क्लेव में प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार, वर्ष 2026-27 से स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कार्यक्रम आरंभ करने, उद्योग एवं सरकारी संस्थाओं के साथ समझौते करने तथा आगामी वर्षों में शोध एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि विश्वविद्यालयों, सरकार और उद्योग जगत के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड को देश की 'स्पोर्ट्स कैपिटल' के रूप में स्थापित किया जा सकता है। कार्यक्रम में एनएसीआईटी के सलाहकार डॉ. अरुण कुमार, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंहा, अभिषेक इस्तार, गौतम विर्क और डी टाउन रोबोटिक्स के अविनाश चंद पाल ने भी अपने विचार साझा किए।
    user_Dushyant singh gehlot (journal
    Dushyant singh gehlot (journal
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • बहुचर्चित चंद्रेसल के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड के मामले में पुलिस ने तीन अन्य फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और पुलिस इनकी तलाश कर रही थी।
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    बहुचर्चित चंद्रेसल के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड के मामले में पुलिस ने तीन अन्य फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और पुलिस इनकी तलाश कर रही थी।
    user_Journalist Harish Yadav
    Journalist Harish Yadav
    Social Media Manager Ladpura, Kota•
    7 hrs ago
  • यह बात किसी भी व्यक्ति के लिए सत्य है कि उसकी कड़ी मेहनत, वर्षों का अथक संघर्ष और कुछ नया सीखने की प्रबल इच्छाशक्ति ही अंततः उसे अपने क्षेत्र का धुरंधर बना देती है। इन्हीं गुणों के बल पर एक इंसान एक दिन निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है।
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    यह बात किसी भी व्यक्ति के लिए सत्य है कि उसकी कड़ी मेहनत, वर्षों का अथक संघर्ष और कुछ नया सीखने की प्रबल इच्छाशक्ति ही अंततः उसे अपने क्षेत्र का धुरंधर बना देती है। इन्हीं गुणों के बल पर एक इंसान एक दिन निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है।
    user_VKH NEWS
    VKH NEWS
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • नगर निगम के अतिक्रमण अनुभाग द्वारा शहर में अवैध होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर और अस्थाई अतिक्रमणों के विरुद्ध लगातार तीसरे दिन एक विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई के तहत विभिन्न क्षेत्रों से सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर किए गए सभी अवैध होर्डिंग्स, विज्ञापन बोर्ड, पोस्टर-बैनर और अस्थाई अतिक्रमणों को हटाया गया। नगर निगम प्रशासन पिछले कई दिनों से मुनादी और जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को अतिक्रमण न करने की समझाइश दे रहा था, बावजूद इसके अवैध होर्डिंग्स और अस्थाई अतिक्रमणों की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसी के चलते, आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशानुसार, आज थर्मल चौराहा से महाराणा प्रताप चौराहा तक विशेष कार्रवाई करते हुए सभी अवैध होर्डिंग्स, बोर्ड और अस्थाई अतिक्रमणों को हटाया गया। इस दौरान, संबंधित लोगों को दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की कड़ी चेतावनी भी दी गई और भविष्य में सख्त कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की गई है कि वे अपना सामान दुकान की निर्धारित सीमा तक ही रखें तथा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-कचरा, निर्माण सामग्री या किसी भी प्रकार का अस्थाई अतिक्रमण न करें। निगम प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि नियमों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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    नगर निगम के अतिक्रमण अनुभाग द्वारा शहर में अवैध होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर और अस्थाई अतिक्रमणों के विरुद्ध लगातार तीसरे दिन एक विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई के तहत विभिन्न क्षेत्रों से सड़क और सार्वजनिक स्थलों पर किए गए सभी अवैध होर्डिंग्स, विज्ञापन बोर्ड, पोस्टर-बैनर और अस्थाई अतिक्रमणों को हटाया गया।

नगर निगम प्रशासन पिछले कई दिनों से मुनादी और जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को अतिक्रमण न करने की समझाइश दे रहा था, बावजूद इसके अवैध होर्डिंग्स और अस्थाई अतिक्रमणों की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसी के चलते, आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशानुसार, आज थर्मल चौराहा से महाराणा प्रताप चौराहा तक विशेष कार्रवाई करते हुए सभी अवैध होर्डिंग्स, बोर्ड और अस्थाई अतिक्रमणों को हटाया गया। इस दौरान, संबंधित लोगों को दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की कड़ी चेतावनी भी दी गई और भविष्य में सख्त कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई।

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की गई है कि वे अपना सामान दुकान की निर्धारित सीमा तक ही रखें तथा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-कचरा, निर्माण सामग्री या किसी भी प्रकार का अस्थाई अतिक्रमण न करें। निगम प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि नियमों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
    user_Mayur times news
    Mayur times news
    Artist लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • कोटा के चंद्रेसल मठ में हुए बहुचर्चित महंत देवानंद महाराज के हत्याकांड मामले में पुलिस ने आज दो और गिरफ्तारियाँ की हैं। इनमें मठ के पुराने पुजारी नंदनवन महाराज और पुरातत्व विभाग का एक कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों ने इस पूरे मामले को लूट और डकैती का रूप देने की साज़िश रची थी। इस कार्रवाई के साथ, मामले में अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि विधि के विरुद्ध संघर्षरत एक नाबालिग को भी निरुद्ध किया गया है।
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    कोटा के चंद्रेसल मठ में हुए बहुचर्चित महंत देवानंद महाराज के हत्याकांड मामले में पुलिस ने आज दो और गिरफ्तारियाँ की हैं। इनमें मठ के पुराने पुजारी नंदनवन महाराज और पुरातत्व विभाग का एक कर्मचारी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों ने इस पूरे मामले को लूट और डकैती का रूप देने की साज़िश रची थी। इस कार्रवाई के साथ, मामले में अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि विधि के विरुद्ध संघर्षरत एक नाबालिग को भी निरुद्ध किया गया है।
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • कोटा में जिला प्रशासन और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सियाम ऑडिटोरियम में ई-मित्र कियोस्क धारकों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिलेभर से आए 600 से अधिक ई-मित्र कियोस्क संचालकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं, योजनाओं और डिजिटल प्रक्रियाओं के संबंध में गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक सरल और सुलभ तरीके से पहुँचाने में ई-मित्र कियोस्क की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जनाधार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी विभिन्न सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में नागरिक ई-मित्र केंद्रों पर आते हैं, इसलिए संचालकों को सभी प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। जिला कलक्टर ने ई-मित्र संचालकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक आईटी टूल्स के उपयोग के प्रति अपडेट रहने का आह्वान किया, जिससे तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी सेवाओं का लाभ लोगों तक उनके घर के नजदीक पारदर्शी और त्वरित तरीके से पहुँचाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ई-मित्र केंद्रों पर सेवाओं के लिए केवल निर्धारित शुल्क ही लिया जाए और किसी भी प्रकार की ओवरचार्जिंग न की जाए, अन्यथा आमजन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के अतिरिक्त निदेशक महेन्द्र पाल सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कोटा जिले में वर्तमान में लगभग 2200 सक्रिय ई-मित्र कियोस्क संचालित हैं। कार्यशाला के दौरान मास्टर ट्रेनर आशुतोष कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और उसकी संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं, मास्टर ट्रेनर्स विमल खंडेलवाल, बी.एस. शेखावत, सुरेश मीणा और विनोद कुमार ने आधार कार्ड, जनाधार, जन्म-मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र, जाति एवं मूल निवास प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, बिजली-पानी बिल भुगतान, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, कृषि विभाग की अनुदान योजनाएं तथा एनएफएसए में नाम जोड़ने सहित विभिन्न सेवाओं की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षकों ने यह सुझाव भी दिया कि दस्तावेजों को बार-बार स्कैन करने के बजाय मेटाडाटा के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाए, जिससे कार्य की गति और गुणवत्ता में सुधार हो सके। कार्यशाला में यह भी सूचित किया गया कि यदि किसी ई-मित्र संचालक के विरुद्ध ओवरचार्जिंग की तीन शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो उसका कियोस्क ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान ई-मित्र संचालक दीपक कुमार प्रजापति और इदरीस अहमद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ई-मित्र केंद्र संचालन से उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है और वे आमजन की सेवा के साथ अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर पा रहे हैं। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त निदेशक सविता कृष्णिया, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश चौधरी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक एम.एम. शेख सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और 600 से अधिक ई-मित्र कियोस्क धारक उपस्थित रहे।
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    कोटा में जिला प्रशासन और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सियाम ऑडिटोरियम में ई-मित्र कियोस्क धारकों की जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिलेभर से आए 600 से अधिक ई-मित्र कियोस्क संचालकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं, योजनाओं और डिजिटल प्रक्रियाओं के संबंध में गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक सरल और सुलभ तरीके से पहुँचाने में ई-मित्र कियोस्क की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जनाधार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी विभिन्न सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में नागरिक ई-मित्र केंद्रों पर आते हैं, इसलिए संचालकों को सभी प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है। जिला कलक्टर ने ई-मित्र संचालकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक आईटी टूल्स के उपयोग के प्रति अपडेट रहने का आह्वान किया, जिससे तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी सेवाओं का लाभ लोगों तक उनके घर के नजदीक पारदर्शी और त्वरित तरीके से पहुँचाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ई-मित्र केंद्रों पर सेवाओं के लिए केवल निर्धारित शुल्क ही लिया जाए और किसी भी प्रकार की ओवरचार्जिंग न की जाए, अन्यथा आमजन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के अतिरिक्त निदेशक महेन्द्र पाल सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कोटा जिले में वर्तमान में लगभग 2200 सक्रिय ई-मित्र कियोस्क संचालित हैं।

कार्यशाला के दौरान मास्टर ट्रेनर आशुतोष कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और उसकी संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं, मास्टर ट्रेनर्स विमल खंडेलवाल, बी.एस. शेखावत, सुरेश मीणा और विनोद कुमार ने आधार कार्ड, जनाधार, जन्म-मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र, जाति एवं मूल निवास प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, बिजली-पानी बिल भुगतान, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पालनहार योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, कृषि विभाग की अनुदान योजनाएं तथा एनएफएसए में नाम जोड़ने सहित विभिन्न सेवाओं की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षकों ने यह सुझाव भी दिया कि दस्तावेजों को बार-बार स्कैन करने के बजाय मेटाडाटा के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाए, जिससे कार्य की गति और गुणवत्ता में सुधार हो सके। कार्यशाला में यह भी सूचित किया गया कि यदि किसी ई-मित्र संचालक के विरुद्ध ओवरचार्जिंग की तीन शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो उसका कियोस्क ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान ई-मित्र संचालक दीपक कुमार प्रजापति और इदरीस अहमद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ई-मित्र केंद्र संचालन से उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है और वे आमजन की सेवा के साथ अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर पा रहे हैं। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त निदेशक सविता कृष्णिया, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक वेद प्रकाश चौधरी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक एम.एम. शेख सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और 600 से अधिक ई-मित्र कियोस्क धारक उपस्थित रहे।
    user_Dushyant singh gehlot (journal
    Dushyant singh gehlot (journal
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • कोटा शहर के विज्ञान नगर थाना इलाके में डकनिया रोड पर जांबाज पत्रिका कार्यालय के सामने दो मोटरसाइकिलों की टक्कर में एक रिटायर्ड टीचर की मौत हो गई। पुलिस मृतक का पोस्टमार्टम करवा रही है और मामले की जांच में जुटी है। विज्ञान नगर थाना हेड कांस्टेबल कमल किशोर ने रविवार सुबह 10:00 बजे यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान रिटायर्ड टीचर जमील मोहम्मद के रूप में हुई है, जो जांबाज पत्रिका में कार्यरत थे। यह हादसा तब हुआ जब जमील मोहम्मद पत्रिका कार्यालय से वापस लौट रहे थे और गेट के सामने एक तेजी से आ रही मोटरसाइकिल ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर से घायल हुए जमील मोहम्मद को तत्काल मैत्री अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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    कोटा शहर के विज्ञान नगर थाना इलाके में डकनिया रोड पर जांबाज पत्रिका कार्यालय के सामने दो मोटरसाइकिलों की टक्कर में एक रिटायर्ड टीचर की मौत हो गई। पुलिस मृतक का पोस्टमार्टम करवा रही है और मामले की जांच में जुटी है।

विज्ञान नगर थाना हेड कांस्टेबल कमल किशोर ने रविवार सुबह 10:00 बजे यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान रिटायर्ड टीचर जमील मोहम्मद के रूप में हुई है, जो जांबाज पत्रिका में कार्यरत थे। यह हादसा तब हुआ जब जमील मोहम्मद पत्रिका कार्यालय से वापस लौट रहे थे और गेट के सामने एक तेजी से आ रही मोटरसाइकिल ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

टक्कर से घायल हुए जमील मोहम्मद को तत्काल मैत्री अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Ladpura, Kota•
    7 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के मुरैना में एक दर्दनाक ट्रेन हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई। यह हादसा उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की झूठी अफवाह फैलने के बाद हुआ, जिसके डर से यात्रियों ने ट्रेन की चेन खींच दी और चलती ट्रेन से कूदकर दूसरे ट्रैक पर आ गए। दुर्भाग्यवश, उसी समय दूसरे ट्रैक पर पातालकोट एक्सप्रेस आ रही थी, जिसकी चपेट में आकर ये यात्री कुचल गए। इस घटना में चार यात्रियों को संभलने तक का कोई मौका नहीं मिला और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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    मध्य प्रदेश के मुरैना में एक दर्दनाक ट्रेन हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई। यह हादसा उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की झूठी अफवाह फैलने के बाद हुआ, जिसके डर से यात्रियों ने ट्रेन की चेन खींच दी और चलती ट्रेन से कूदकर दूसरे ट्रैक पर आ गए।

दुर्भाग्यवश, उसी समय दूसरे ट्रैक पर पातालकोट एक्सप्रेस आ रही थी, जिसकी चपेट में आकर ये यात्री कुचल गए। इस घटना में चार यात्रियों को संभलने तक का कोई मौका नहीं मिला और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    2 hrs ago
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