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बरवाडीह प्रखंड में हल्की बारिश के बाद औरंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। औरंगा-छैचानी पुल के नीचे नदी पार करने में विशेषकर बाइक चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर सतर्कता बरतने की अपील की है। इसी प्रखंड में, बरवाडीह-बेतला को सतबरवा प्रखंड से जोड़ने वाले एक पुल का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
Gulam asgar
बरवाडीह प्रखंड में हल्की बारिश के बाद औरंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। औरंगा-छैचानी पुल के नीचे नदी पार करने में विशेषकर बाइक चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर सतर्कता बरतने की अपील की है। इसी प्रखंड में, बरवाडीह-बेतला को सतबरवा प्रखंड से जोड़ने वाले एक पुल का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
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- बरवाडीह थाना क्षेत्र के बरवाडीह-कुटमू मुख्य मार्ग पर स्थित ठुठाकुसुम के भगत सिंह चौक के समीप मंगलवार को एक गंभीर सड़क हादसा हो गया। यहाँ दो पल्सर बाइकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें दोनों बाइक चालक बुरी तरह घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह टक्कर इतनी भीषण थी कि इसमें एक बाइक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से, दोनों घायल चालकों को एंबुलेंस के माध्यम से बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहाँ उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।2
- उपायुक्त श्री संदीप कुमार ने जिले के निवासियों की जन समस्याओं को सुना। इन शिकायतों और मुद्दों के समाधान के लिए, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।1
- गढ़वा के चर्चित समाजसेवी विकास माली का गया स्थित कार्यालय इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि इस कार्यालय से विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन किया जाता है। कार्यालय की व्यवस्था और उसकी कार्यशैली को देखकर लोग काफी प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहीं से कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रभावी ढंग से निगरानी की जाती है। यह कार्यालय अपनी खासियत और कामकाज के तरीके के कारण लोगों के बीच लोकप्रियता बटोर रहा है।1
- सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में लोग कानून और मर्यादा की सीमाएं भूलते जा रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला बालूमाथ थाना परिसर से सामने आया है, जहाँ एक युवक ने थाने के अंदर भोजपुरी गानों पर रील बनाकर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपलोड की है। इन वीडियो में युवक खुद को प्रभावशाली और दबंग दिखाने की कोशिश कर रहा है, जिससे सोशल मीडिया पर 'भौकाल' झाड़ने का प्रयास किया गया। यह हैरान करने वाली बात है कि एक संवेदनशील थाना परिसर को ही ‘रील स्टूडियो’ बना दिया गया और बिना अनुमति के वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इस तरह की हरकतों से यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या पुलिस परिसर में वीडियो बनाना कानून व्यवस्था का मज़ाक नहीं है और ऐसे ‘रीलबाजों’ पर कब कार्रवाई होगी? विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया की इस अंधी दौड़ में युवा भटक रहे हैं, और ऐसे मामलों में प्रशासन के साथ-साथ अभिभावकों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने और कानून का सम्मान बनाए रखने की अपील की है, साथ ही यह संकेत भी दिए हैं कि ऐसे मामलों में कार्रवाई होने पर अन्य ‘रीलबाजों’ में भी हड़कंप मच सकता है। फिलहाल, सभी की नज़र इस बात पर टिकी है कि बालूमाथ पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि रील का यह ‘भौकाल’ कानूनी शिकंजे में आएगा या यूँ ही चलता रहेगा, क्योंकि इस तरह की हरकतें न सिर्फ पुलिस की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि समाज में भी गलत संदेश देती हैं।1
- झारखंड के गढ़वा जिले के लिए यह गौरव और खुशी की बात है कि स्थानीय फिल्म "लॉकडाउन के गोद में" को प्रतिष्ठित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि से जिले के फिल्म प्रेमियों, कलाकारों और युवाओं में उत्साह का माहौल है। यह फिल्म लॉकडाउन काल की संवेदनशील परिस्थितियों और आम लोगों के संघर्ष की कहानी को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत करती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे महज 20 वर्षीय युवा फिल्मकार विजय हिंद ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद मोबाइल फोन से शूट किया। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी (डीओपी) में नीरज कुमार, रवि रंजन और रमेश बाबू का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जबकि अजय बाबू समेत पूरी टीम ने निर्माण कार्य में अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म का निर्माण गढ़वा के वरिष्ठ फिल्म निर्माता दयाशंकर गुप्ता द्वारा किया गया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने इस चयन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे झारखंड से आई सैकड़ों फिल्मों के बीच गढ़वा की फिल्म का चुना जाना जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गढ़वा में फिल्म निर्माण के लिए आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं की कमी के बावजूद, यहां के युवा कलाकार अपनी प्रतिभा, मेहनत और जुनून से लगातार नई पहचान बना रहे हैं, जिसका उदाहरण विजय हिंद जैसे युवा फिल्मकार हैं जो दर्शाते हैं कि लगन और समर्पण से सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। "लॉकडाउन के गोद में" ने अपने प्रदर्शन के दौरान दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की थी और लॉकडाउन के दौरान आम लोगों की पीड़ा, संघर्ष व भावनात्मक पहलुओं को दर्शाने वाली इस फिल्म को एक प्रमुख न्यूज चैनल पर लगभग 20 लाख दर्शकों ने देखा था, जिसकी कहानी और प्रस्तुति को खूब सराहा गया। जानकारी के अनुसार, यह फिल्म 26 जून से 28 जून तक रांची स्थित सरला बिरला यूनिवर्सिटी में आयोजित चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की जाएगी। इस आयोजन में बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक, निर्देशक और निर्माता शामिल होंगे, और ऐसे मंच पर गढ़वा की फिल्म का प्रदर्शन जिले के लिए सम्मान की बात मानी जा रही है। फिल्म के चयन की खबर मिलते ही गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है, जहां कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने इसे स्थानीय प्रतिभाओं की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि जिले के अन्य युवा कलाकारों को भी प्रेरणा देगी और क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान प्राप्त होगी। वहीं, युवा फिल्मकार विजय हिंद की हालिया फिल्म "हॉस्पिटल" भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जो दर्द, संघर्ष और रोमांच से भरपूर है। इसमें विजय हिंद मुख्य भूमिका में हैं, जबकि अभिनेत्री रौनक तिवारी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से कहानी को मजबूत बनाया है। निर्माता दयाशंकर गुप्ता ने "हॉस्पिटल" के अंतिम क्लाइमैक्स की विशेष प्रशंसा की है, जिसे वे दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ने वाला मानते हैं। विजय हिंद ने दर्शकों के प्यार, स्नेह और आशीर्वाद को बेहतर फिल्में बनाने की प्रेरणा बताया है, यह कहते हुए कि उनका सपना है कि गढ़वा की फिल्मों को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पहचान मिले। गढ़वा की इस उपलब्धि को क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। फिल्म प्रेमियों का मानना है कि स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण आने वाले समय में गढ़वा को झारखंड के महत्वपूर्ण फिल्म केंद्रों में शामिल कर सकता है, और "लॉकडाउन के गोद में" का चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल में चयन जिले की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय प्रतिभाओं के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है।1
- बलरामपुर में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव के दौरान बच्चों का आत्मीयता से स्वागत किया गया।1
- झारखंड के गढ़वा निवासी विकास माली का बिहार के गया स्थित कार्यालय इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कार्यालय की सजावट, बेहतर व्यवस्था और इसका अनोखा अंदाज़ ही वह मुख्य कारण है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। दूर-दूर से लोग इस विशिष्ट कार्यालय को देखने के लिए पहुँच रहे हैं और इसकी खूब चर्चा भी कर रहे हैं। इस कार्यालय की खासियत देखकर लोग बेहद हैरान हैं, जिसकी पूरी जानकारी के लिए वीडियो अंत तक देखने की अपील की गई है।1
- लातेहार के उप विकास आयुक्त मोहम्मद सय्यद रियाज़ अहमद ने मंगलवार को बरवाडीह प्रखंड में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की गहन समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी रेखा रेशमा मिंज सहित आवास, मनरेगा, पेयजल, बाल विकास, जेएसएलपीएस (JSLPS) एवं अन्य विभागों के कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया। उप विकास आयुक्त ने सभी योजनाओं में तेजी लाने और आवास योजना से संबंधित ग्रामसभा कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रखंड मुख्यालय पंचायत में आवास योजना के जियो टैगिंग के नाम पर पंचायत सेवक विजय शंकर राम पर पैसे लेने के लगे आरोप को अत्यंत गंभीरता से लिया। इस आरोप पर संज्ञान लेते हुए, उप विकास आयुक्त ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को तत्काल विजय शंकर राम से स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। बैठक में खराब पड़े चापाकलों और जलमीनारों को भी शीघ्र दुरुस्त कराने का निर्देश जारी किया गया। समीक्षा बैठक से पहले, उप विकास आयुक्त ने मंगरा स्थित एकलव्य विद्यालय का निरीक्षण कर प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने बेतला के अखरा में नवनिर्मित पुलिस पिकेट का भी निरीक्षण किया। इस दौरान, सीओ लोकेश कुमार सिंह, बीपीओ दिलशाद आलम, सहायक अभियंता प्रभाकर मणि, पेयजल विभाग के जेई पीयूष रंजन और आवास समन्वयक शिव यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मी मौजूद थे।1
- गढ़वा में झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ की जिला शाखा ने अपनी विभिन्न सेवा संबंधी समस्याओं और मांगों के समाधान के लिए उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ के प्रतिनिधियों ने पंचायत सचिवों की लंबित समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए उनके शीघ्र निराकरण की मांग की है। सौंपे गए ज्ञापन में, संघ ने विशेष रूप से उन नव नियुक्त पंचायत सचिवों की सेवा संपुष्टि (कन्फर्मेशन) की मांग की है जो लंबे समय से कार्यरत हैं। संघ का कहना है कि कई पंचायत सचिव वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा संपुष्टि न होने के कारण उनमें असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, पंचायत सचिवों को नियमित रूप से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है, ताकि वे नई योजनाओं और विभागीय कार्यों की बढ़ती जिम्मेदारियों के लिए अद्यतन जानकारी और तकनीकी दक्षता प्राप्त कर अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकें। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि जिले के कई प्रखंडों में पंचायत सचिवों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके परिणामस्वरूप एक-एक पंचायत सचिव को कई पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है, जिससे कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयाँ आती हैं। संघ ने प्रशासन से रिक्त पदों पर जनसेवकों की नियुक्ति कर पंचायत सचिवों का कार्यभार कम करने की अपील की है। संघ के पदाधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत सचिव ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कार्यों का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा और आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। संघ का कहना है कि उनकी मांगें न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए भी आवश्यक हैं। पंचायत सचिव संघ ने उपायुक्त से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई पदाधिकारी और पंचायत सचिव उपस्थित रहे, जिन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा।1