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सोनभद्र के मांची थाना क्षेत्र में हुई वर्षा के दौरान पहाड़ से पड़वा नाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह आ जाने के कारण तीन व्यक्ति बह गए। इस घटना में एक व्यक्ति को सकुशल बचा लिया गया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है। वहीं, एक बालक की तलाश अभी भी जारी है। उक्त घटना के संबंध में सोनभद्र के क्षेत्राधिकारी सदर श्री राज सोनकर ने जानकारी दी है।
Bharat kumar bharat
सोनभद्र के मांची थाना क्षेत्र में हुई वर्षा के दौरान पहाड़ से पड़वा नाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह आ जाने के कारण तीन व्यक्ति बह गए। इस घटना में एक व्यक्ति को सकुशल बचा लिया गया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है। वहीं, एक बालक की तलाश अभी भी जारी है। उक्त घटना के संबंध में सोनभद्र के क्षेत्राधिकारी सदर श्री राज सोनकर ने जानकारी दी है।
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- एक सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा तंज कसते हुए यह सवाल उठाया गया है कि क्या उन्हें 'फर्जी अवार्ड' मिल रहे हैं। पोस्ट में कटाक्षपूर्ण लहजे में कहा गया है कि अंधभक्तों को दिखाना पड़ेगा कि मोदी जी क्या कर सकते हैं, जो इन अवार्डों की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त करता है।1
- अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने दावा किया है कि उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ने की चेतावनी दी है। बार एसोसिएशन ने इसके साथ ही एक प्रस्ताव भी पारित किया है, जिसके तहत इन आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।1
- भभुआ, कैमूर, बिहार में बाइपास रोड के वार्ड नंबर 23 पर स्थित Flipkart कार्यालय के समीप वाली सड़क का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण सड़क को जल्द से जल्द बनवाने की अपील की है।1
- कैमूर जिले के कुदरा और सकरी मोड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, जिससे अब स्थानीय निवासियों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है। यह स्थानीय स्तर पर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करा रहा है, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। इन चिकित्सा केंद्रों में अनुभवी चिकित्सकों की एक टीम आधुनिक तकनीक और उन्नत चिकित्सा पद्धति का उपयोग करते हुए सामान्य बीमारियों से लेकर जटिल रोगों और सर्जरी तक का सफलतापूर्वक उपचार कर रही है। यहाँ डॉ. संजय कुमार, डॉ. रीता कुमारी, सर्जन डॉ. अभिनव कटियार, सर्जन डॉ. मनीष तिवारी, फिजिशियन डॉ. मोहित शरण और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अस्पताल में सामान्य रोगों, आंतरिक रोगों (इंटरनल मेडिसिन), शिशु रोगों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसे सटीक जाँच, उचित परामर्श और आवश्यकतानुसार आधुनिक तकनीक के उपयोग से सुनिश्चित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले उन्हें छोटी-बड़ी बीमारियों या सर्जरी के लिए वाराणसी, पटना अथवा अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जिसमें समय और धन दोनों अधिक खर्च होते थे। अब क्षेत्र में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता से मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है, अनावश्यक खर्च में कमी आई है और आपातकालीन परिस्थितियों में भी त्वरित चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो रही है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि कुदरा और सकरी मोड़ के समीप विकसित हो रही ये आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ न केवल स्थानीय लोगों के लिए राहत का कारण बनी हैं, बल्कि पूरे कैमूर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा प्रदान कर रही हैं।4
- सोनभद्र के विंढमगंज–कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) में सोमवार, 29 जून 2026 की शाम लगभग 4:30 बजे हुई बारिश का पानी मंगलवार दोपहर तक भी जस का तस बना रहा। लगभग 12 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी जल निकासी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है। यह अंडरपास क्षेत्र के हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का एक प्रमुख मार्ग है, और जलभराव के कारण ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और मरीजों तक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन भी जोखिम उठाकर वहां से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, और यह भी कि जब समस्या की सूचना अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, तब भी राहत कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने, अंडरपास का तकनीकी निरीक्षण कराने और भविष्य के लिए एक स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर बना यह अंडरपास यदि हर बारिश में तालाब बन जाएगा, तो इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अब जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर इस गंभीर समस्या का समाधान कब होगा।1
- सिंगरौली के विंध्यनगर स्थित मैत्री सभागार में 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के अंतर्गत एक साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उपस्थित लोगों को साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी प्रदान करना और उन्हें साइबर अपराधों से बचाव के उपाय सिखाना था। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त साइबर जागरूकता क्लिप्स का प्रदर्शन करके लोगों को इन अपराधों से सावधान रहने का संदेश दिया गया। जागरूकता क्लिप्स के माध्यम से विभिन्न प्रकार की साइबर ठगी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिनमें अनजान लिंक पर क्लिक करना, फर्जी कॉल, ओटीपी/पिन साझा करना, केवाईसी अपडेट से जुड़ी धोखाधड़ी, लोन ऐप, क्यूआर कोड संबंधी ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए होने वाली धोखाधड़ी शामिल हैं। कार्यक्रम में यह बताया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी, पिन या कोई भी निजी जानकारी साझा न करें। साथ ही, किसी भी लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य कर लें।1
- सोनभद्र के विंढमगंज-कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) एक ही बारिश से हुए जलभराव के कारण करीब 18 घंटे से अधिक समय से पानी में डूबा हुआ है। 29 जून की शाम लगभग 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी मंगलवार तक पानी नहीं निकल पाने से हजारों लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह अंडरपास क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहनों का यहां से गुजरना लगभग असंभव हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन चालक भी भारी जोखिम उठा कर निकल रहे हैं। इस स्थिति के चलते कई लोगों को मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या उत्पन्न होती है, बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने आज तक जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इस अंडरपास में कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल अंडरपास से पानी निकलवाने, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक होते हैं, जब वे जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानी।1