सोनभद्र के विंढमगंज-कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) एक ही बारिश से हुए जलभराव के कारण करीब 18 घंटे से अधिक समय से पानी में डूबा हुआ है। 29 जून की शाम लगभग 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी मंगलवार तक पानी नहीं निकल पाने से हजारों लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह अंडरपास क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहनों का यहां से गुजरना लगभग असंभव हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन चालक भी भारी जोखिम उठा कर निकल रहे हैं। इस स्थिति के चलते कई लोगों को मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या उत्पन्न होती है, बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने आज तक जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इस अंडरपास में कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल अंडरपास से पानी निकलवाने, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक होते हैं, जब वे जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानी।
सोनभद्र के विंढमगंज-कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) एक ही बारिश से हुए जलभराव के कारण करीब 18 घंटे से अधिक समय से पानी में डूबा हुआ है। 29 जून की शाम लगभग 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी मंगलवार तक पानी नहीं निकल पाने से हजारों लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह अंडरपास क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहनों का यहां से गुजरना लगभग असंभव हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन चालक भी भारी जोखिम उठा कर निकल रहे हैं। इस स्थिति के चलते कई लोगों को मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या उत्पन्न होती है, बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने आज तक जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इस अंडरपास में कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल अंडरपास से पानी निकलवाने, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक होते हैं, जब वे जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानी।
- सोनभद्र के मान्ची थाना क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण नाले में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह हो गया, जिससे तीन व्यक्ति बह गए। इस घटना में, एक व्यक्ति को सकुशल बचा लिया गया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है। फिलहाल, बह गए एक बालक की तलाश लगातार जारी है। उक्त संबंध में सीओ सदर ने जानकारी दी है।1
- स्पेस टेक्नोलॉजी की मदद से निर्मित बिहार का एक नेशनल हाईवे आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। इस अभिनव निर्माण ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ध्यान आकर्षित किया है।1
- सोनभद्र के ओबरा नगर में, शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत, श्रम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में, विभिन्न प्रतिष्ठानों पर काम कर रहे पाँच नाबालिग बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इस अभियान ने नियमों की अनदेखी कर बाल श्रमिकों से काम कराने वाले नियोजकों में हड़कंप मचा दिया। श्रम विभाग की टीम ने नगर पंचायत ओबरा के गजराज नगर सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। गजराज नगर स्थित मुकेश जायसवाल के प्रतिष्ठान पर भी टीम ने कार्रवाई की, जहाँ बाल श्रम की पुष्टि होने पर आवश्यक साक्ष्य जुटाकर मौके पर ही पूरी कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोजकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई के बाद ओबरा क्षेत्र में बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में दहशत का माहौल बन गया है, और प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि बच्चों का बचपन छीनने वालों के खिलाफ अब लगातार सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- सोनभद्र के बभनी थाना क्षेत्र के डगडउआ टोला में आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक पिता की मौत हो गई, जबकि उनकी 17 वर्षीय पुत्री गंभीर रूप से झुलस गई। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसी बेटी को तत्काल जिला अस्पताल लोढ़ी रेफर किया गया है। इस दुःखद घटना से परिजनों में गहरा कोहराम मच गया है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।1
- गढ़वा जिले के चिनिया प्रखंड में सोमवार को 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का पल्स पोलियो अभियान जोर-शोर से शुरू किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को यह जीवनरक्षक दवा पिला रही हैं, ताकि कोई भी बच्चा इससे वंचित न रहे। इस अभियान के दौरान, चिनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एमपीडब्ल्यू लाल मोहम्मद अंसारी और एएनएम बबीता कुमारी ने पंचायत के सभी सहिया साथियों के साथ मिलकर चिनिया मुख्यालय और रानीचेरी सहित कई गांवों का दौरा किया और बच्चों का टीकाकरण किया। स्वास्थ्यकर्मियों ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे 0 से 5 वर्ष के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं और इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। चिनिया में पल्स पोलियो अभियान ने अब गति पकड़ ली है।1
- सोनभद्र के विंढमगंज–कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) में सोमवार, 29 जून 2026 की शाम लगभग 4:30 बजे हुई बारिश का पानी मंगलवार दोपहर तक भी जस का तस बना रहा। लगभग 12 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी जल निकासी के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है। यह अंडरपास क्षेत्र के हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का एक प्रमुख मार्ग है, और जलभराव के कारण ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और मरीजों तक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन भी जोखिम उठाकर वहां से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, और यह भी कि जब समस्या की सूचना अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, तब भी राहत कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने, अंडरपास का तकनीकी निरीक्षण कराने और भविष्य के लिए एक स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर बना यह अंडरपास यदि हर बारिश में तालाब बन जाएगा, तो इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अब जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर इस गंभीर समस्या का समाधान कब होगा।1
- सोनभद्र के विंढमगंज-कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) एक ही बारिश से हुए जलभराव के कारण करीब 18 घंटे से अधिक समय से पानी में डूबा हुआ है। 29 जून की शाम लगभग 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी मंगलवार तक पानी नहीं निकल पाने से हजारों लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह अंडरपास क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहनों का यहां से गुजरना लगभग असंभव हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन चालक भी भारी जोखिम उठा कर निकल रहे हैं। इस स्थिति के चलते कई लोगों को मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या उत्पन्न होती है, बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने आज तक जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इस अंडरपास में कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल अंडरपास से पानी निकलवाने, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक होते हैं, जब वे जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानी।1