सोनभद्र के ओबरा नगर में, शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत, श्रम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में, विभिन्न प्रतिष्ठानों पर काम कर रहे पाँच नाबालिग बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इस अभियान ने नियमों की अनदेखी कर बाल श्रमिकों से काम कराने वाले नियोजकों में हड़कंप मचा दिया। श्रम विभाग की टीम ने नगर पंचायत ओबरा के गजराज नगर सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। गजराज नगर स्थित मुकेश जायसवाल के प्रतिष्ठान पर भी टीम ने कार्रवाई की, जहाँ बाल श्रम की पुष्टि होने पर आवश्यक साक्ष्य जुटाकर मौके पर ही पूरी कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोजकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई के बाद ओबरा क्षेत्र में बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में दहशत का माहौल बन गया है, और प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि बच्चों का बचपन छीनने वालों के खिलाफ अब लगातार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सोनभद्र के ओबरा नगर में, शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत, श्रम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में, विभिन्न प्रतिष्ठानों पर काम कर रहे पाँच नाबालिग बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इस अभियान ने नियमों की अनदेखी कर बाल श्रमिकों से काम कराने वाले नियोजकों में हड़कंप मचा दिया। श्रम विभाग की टीम ने नगर पंचायत ओबरा के गजराज नगर सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। गजराज नगर स्थित मुकेश जायसवाल के प्रतिष्ठान पर भी टीम ने कार्रवाई की, जहाँ बाल श्रम की पुष्टि होने पर आवश्यक साक्ष्य जुटाकर मौके पर ही पूरी कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोजकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई के बाद ओबरा क्षेत्र में बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में दहशत का माहौल बन गया है, और प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि बच्चों का बचपन छीनने वालों के खिलाफ अब लगातार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- स्पेस टेक्नोलॉजी की मदद से निर्मित बिहार का एक नेशनल हाईवे आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। इस अभिनव निर्माण ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ध्यान आकर्षित किया है।1
- सोनभद्र के ओबरा नगर में, शासन के निर्देश पर चलाए जा रहे बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत, श्रम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ की गई ताबड़तोड़ छापेमारी में, विभिन्न प्रतिष्ठानों पर काम कर रहे पाँच नाबालिग बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इस अभियान ने नियमों की अनदेखी कर बाल श्रमिकों से काम कराने वाले नियोजकों में हड़कंप मचा दिया। श्रम विभाग की टीम ने नगर पंचायत ओबरा के गजराज नगर सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। गजराज नगर स्थित मुकेश जायसवाल के प्रतिष्ठान पर भी टीम ने कार्रवाई की, जहाँ बाल श्रम की पुष्टि होने पर आवश्यक साक्ष्य जुटाकर मौके पर ही पूरी कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मनोज शर्मा ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोजकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई के बाद ओबरा क्षेत्र में बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों में दहशत का माहौल बन गया है, और प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि बच्चों का बचपन छीनने वालों के खिलाफ अब लगातार सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- सोनभद्र के बभनी थाना क्षेत्र के डगडउआ टोला में आकाशीय बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक पिता की मौत हो गई, जबकि उनकी 17 वर्षीय पुत्री गंभीर रूप से झुलस गई। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसी बेटी को तत्काल जिला अस्पताल लोढ़ी रेफर किया गया है। इस दुःखद घटना से परिजनों में गहरा कोहराम मच गया है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।1
- सोनभद्र के मांची थाना क्षेत्र में हुई वर्षा के दौरान पहाड़ से पड़वा नाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह आ जाने के कारण तीन व्यक्ति बह गए। इस घटना में एक व्यक्ति को सकुशल बचा लिया गया है, जबकि एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है। वहीं, एक बालक की तलाश अभी भी जारी है। उक्त घटना के संबंध में सोनभद्र के क्षेत्राधिकारी सदर श्री राज सोनकर ने जानकारी दी है।1
- सोनभद्र जिले के रेणुकूट नगर के मुख्य बाजार में हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए बाइक सवार संजय कुमार ने वाराणसी ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। इस दुखद घटना का कथित लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जबकि हादसे में घायल हुए दूसरे युवक का इलाज अभी भी जारी है। संजय कुमार की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिजनों में गहरा कोहराम मच गया है, और स्थानीय पुलिस ने इस मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- सोनभद्र के विंढमगंज-कोन मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास (गेट संख्या-49) एक ही बारिश से हुए जलभराव के कारण करीब 18 घंटे से अधिक समय से पानी में डूबा हुआ है। 29 जून की शाम लगभग 4:30 बजे हुई मूसलाधार बारिश के बाद भी मंगलवार तक पानी नहीं निकल पाने से हजारों लोगों की जिंदगी बेहाल हो गई है और प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यह अंडरपास क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी कर्मचारी आवागमन करते हैं। पानी भरने के कारण दोपहिया वाहनों का यहां से गुजरना लगभग असंभव हो गया है, जबकि चारपहिया वाहन चालक भी भारी जोखिम उठा कर निकल रहे हैं। इस स्थिति के चलते कई लोगों को मजबूरन लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या उत्पन्न होती है, बावजूद इसके रेलवे प्रशासन ने आज तक जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि इस अंडरपास में कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से तत्काल अंडरपास से पानी निकलवाने, स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि विकास कार्य तभी सार्थक होते हैं, जब वे जनता की सुविधा बढ़ाएं, न कि उनकी परेशानी।1