शर्मसार मानवता: दमोह में शव के साथ पशुओं जैसा व्यवहार, कचरा गाड़ी में ले जाकर कचरा स्थल पर ही दफनाया दमोह, मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के दमोह जिले से प्रशासन की संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ नगर परिषद द्वारा एक शव को कचरा ढोने वाली गाड़ी में ले जाया गया और बिना किसी रीति-रिवाज या सम्मान के, कचरा फेंकने वाले स्थान पर ही दफना दिया गया। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना दमोह जिले के एक स्थानीय निकाय की है। मृतक की पहचान और मृत्यु के कारणों के बाद, नगर परिषद की जिम्मेदारी थी कि वह ससम्मान अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे। लेकिन नियमों और मर्यादाओं को ताक पर रखकर: शव को उठाने के लिए कचरा ढोने वाले वाहन का उपयोग किया गया। मुक्तिधाम या कब्रिस्तान के बजाय, शहर के बाहर कचरा डंपिंग साइट को शव दफनाने के लिए चुना गया। मृतक के परिजनों या सामाजिक संस्थाओं को सूचना दिए बिना ही इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया गया। सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन यह कृत्य न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी अपराध की श्रेणी में आता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों (जैसे अनुच्छेद 21 के तहत) में स्पष्ट कहा है कि: "गरिमा के साथ अंतिम संस्कार का अधिकार हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, चाहे वह जीवित हो या मृत।" राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, लावारिस या अज्ञात शवों का भी सम्मानजनक तरीके से निपटान करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। दमोह की इस घटना ने इन तमाम संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ा दी हैं। प्रशासनिक चुप्पी और आक्रोश घटना का वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन अब लीपापोती में जुटा है, लेकिन सवाल वही है— क्या एक इंसान की कीमत कचरे के बराबर रह गई है?
शर्मसार मानवता: दमोह में शव के साथ पशुओं जैसा व्यवहार, कचरा गाड़ी में ले जाकर कचरा स्थल पर ही दफनाया दमोह, मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के दमोह जिले से प्रशासन की संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ नगर परिषद द्वारा एक शव को कचरा ढोने वाली गाड़ी में ले जाया गया और बिना किसी रीति-रिवाज या सम्मान के, कचरा फेंकने वाले स्थान पर ही दफना दिया गया। क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना दमोह जिले के एक स्थानीय निकाय की है। मृतक की पहचान और
मृत्यु के कारणों के बाद, नगर परिषद की जिम्मेदारी थी कि वह ससम्मान अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे। लेकिन नियमों और मर्यादाओं को ताक पर रखकर: शव को उठाने के लिए कचरा ढोने वाले वाहन का उपयोग किया गया। मुक्तिधाम या कब्रिस्तान के बजाय, शहर के बाहर कचरा डंपिंग साइट को शव दफनाने के लिए चुना गया। मृतक के परिजनों या सामाजिक संस्थाओं को सूचना दिए बिना ही इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया गया। सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन यह कृत्य न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी अपराध की श्रेणी में आता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों (जैसे अनुच्छेद 21 के तहत)
में स्पष्ट कहा है कि: "गरिमा के साथ अंतिम संस्कार का अधिकार हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, चाहे वह जीवित हो या मृत।" राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, लावारिस या अज्ञात शवों का भी सम्मानजनक तरीके से निपटान करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। दमोह की इस घटना ने इन तमाम संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ा दी हैं। प्रशासनिक चुप्पी और आक्रोश घटना का वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन अब लीपापोती में जुटा है, लेकिन सवाल वही है— क्या एक इंसान की कीमत कचरे के बराबर रह गई है?
- कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती और ट्रिपिंग से आम नागरिक बेहद परेशान हैं। सुबह से ही बिजली गायब रहने के कारण दैनिक दिनचर्या और कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग से तत्काल सुधार की मांग की है।1
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- उत्तर प्रदेश के हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा पर उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की। इसके जवाब में, हिंदुओं ने छतों पर चढ़कर पत्थर फेंकने वालों को करारा जवाब दिया।1
- मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर टीकमगढ़ में जतारा तहसील के सेक्शन राइटर बृजेंद्र अरजरिया एक बुर्जुग किसान से रिश्वत ले रहे है... गरीब किसानों से पैसा लिया जा रहा है क्या मोहन सरकार के खजाने में अधिकारियों को सैलरी देने के पैसे भी नहीं है । आखिर पैसा जा कहा रहा है । ये सब मोहन यादव की सह पर हो रहा है । मोहन है तो मुमकिन है।1
- वन परिक्षेत्र बम्हनी बंजर अंतर्गत खुकसर पौड़ी बीट में तेंदुए के हमले से इलाके में दहशत जानकारी के अनुसार सोंच के लिए गए एक युवक पर अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया हमले में युवक घायल...?1
- ब्रेकिंग न्यूज़ बरेला क्षेत्र के उदयपुर के पास सुबह-सुबह दर्दनाक हादसा मंडला से आ रहे रेत के डंपर ने ट्रैक्टर को मारी टककर,50 मी तक घसीटा हुआ ले गया ट्रक, दो लोग गंभीर रूप से घायल जबलपुर रेफर1
- मध्य प्रदेश के कटनी जिले की बरहटा पंचायत में लाखों की नल-जल योजना शुरू होने से पहले ही बदहाल हो गई है। टंकी खाली पड़ी है, मोटर और ट्रांसफार्मर कबाड़ बन चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को आज तक शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाया। ग्रामीणों ने जिम्मेदारों पर लाखों रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए जल्द मरम्मत और संचालन की मांग की है।1
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा पर पथराव हुआ। जवाब में शोभायात्रा में शामिल भीड़ ने पथराव करने वालों को उन्हीं की छतों पर जाकर मुंहतोड़ जवाब दिया।1