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इंदौर के पटेल ब्रिज पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा, जब नगर निगम के पानी के एक टैंकर के अचानक ब्रेक फेल हो गए। इस गंभीर स्थिति में ड्राइवर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए टैंकर को डिवाइडर पर चढ़ा दिया, जिसके कारण एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।

1 hr ago
user_सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

इंदौर के पटेल ब्रिज पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा, जब नगर निगम के पानी के एक टैंकर के अचानक ब्रेक फेल हो गए। इस गंभीर स्थिति में ड्राइवर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए टैंकर को डिवाइडर पर चढ़ा दिया, जिसके कारण एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • धार और इंदौर जिले की सीमा से लगे खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला क्षेत्र में कथित करोड़ों रुपये के मुरम घोटाले का मामला गरमा गया है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों से बाहर खनन, बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी और खनिज माफियाओं को संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतों के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई। दरअसल, एक आर्मी ऑफिसर और प्रभावित किसानों द्वारा इस मामले को उच्च स्तर तक पहुँचाने के बाद ही खनिज विभाग की टीम मौके पर जाँच के लिए पहुँची। सूत्रों के अनुसार, शिकायत में किसानों की निजी भूमि पर भारी मात्रा में अवैध उत्खनन और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का स्पष्ट उल्लेख था। ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जब तक मामला भोपाल स्तर तक नहीं पहुँचा, तब तक जिम्मेदार विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सीमित खनन की अनुमति वाले क्षेत्रों से बाहर निकलकर आसपास की निजी कृषि भूमि तक जेसीबी और भारी मशीनों से खुदाई की गई है, जिससे खेतों में गहरे गड्ढे बन गए हैं और उपजाऊ भूमि को भारी क्षति पहुँची है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि ड्रोन सर्वे और वैज्ञानिक मापन कराया जाए, तो करोड़ों रुपये की वास्तविक राजस्व चोरी का खुलासा हो सकता है। मामले की जाँच के लिए पहुँचे अधिकारियों से पत्रकारों ने अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों की सीमा के उल्लंघन, राजस्व चोरी के प्रमाण और अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका जैसे कई अहम सवाल पूछे। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जाँच दल ने किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मीडिया से दूरी बनाते हुए मौके से रवाना हो गया। अधिकारियों की इस चुप्पी ने संदेहों को और बढ़ा दिया है, जिससे ग्रामीणों का कहना है कि यदि जाँच निष्पक्ष है तो जानकारी छिपाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। प्रभावित किसानों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अपनी भूमि को हुए नुकसान के लिए निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज, संभागायुक्त, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच, साथ ही ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और वैज्ञानिक मापन कराने की मांग उठाई है। फिलहाल, क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या करोड़ों के इस कथित मुरम घोटाले की निष्पक्ष जाँच होगी, क्या किसानों को न्याय मिलेगा, और क्या खनिज माफियाओं व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह जाँच भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
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    धार और इंदौर जिले की सीमा से लगे खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला क्षेत्र में कथित करोड़ों रुपये के मुरम घोटाले का मामला गरमा गया है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों से बाहर खनन, बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी और खनिज माफियाओं को संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतों के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

दरअसल, एक आर्मी ऑफिसर और प्रभावित किसानों द्वारा इस मामले को उच्च स्तर तक पहुँचाने के बाद ही खनिज विभाग की टीम मौके पर जाँच के लिए पहुँची। सूत्रों के अनुसार, शिकायत में किसानों की निजी भूमि पर भारी मात्रा में अवैध उत्खनन और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का स्पष्ट उल्लेख था। ग्रामीणों का आरोप है कि महीनों से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जब तक मामला भोपाल स्तर तक नहीं पहुँचा, तब तक जिम्मेदार विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सीमित खनन की अनुमति वाले क्षेत्रों से बाहर निकलकर आसपास की निजी कृषि भूमि तक जेसीबी और भारी मशीनों से खुदाई की गई है, जिससे खेतों में गहरे गड्ढे बन गए हैं और उपजाऊ भूमि को भारी क्षति पहुँची है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि ड्रोन सर्वे और वैज्ञानिक मापन कराया जाए, तो करोड़ों रुपये की वास्तविक राजस्व चोरी का खुलासा हो सकता है।

मामले की जाँच के लिए पहुँचे अधिकारियों से पत्रकारों ने अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों की सीमा के उल्लंघन, राजस्व चोरी के प्रमाण और अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका जैसे कई अहम सवाल पूछे। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जाँच दल ने किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मीडिया से दूरी बनाते हुए मौके से रवाना हो गया। अधिकारियों की इस चुप्पी ने संदेहों को और बढ़ा दिया है, जिससे ग्रामीणों का कहना है कि यदि जाँच निष्पक्ष है तो जानकारी छिपाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

प्रभावित किसानों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अपनी भूमि को हुए नुकसान के लिए निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज, संभागायुक्त, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच, साथ ही ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और वैज्ञानिक मापन कराने की मांग उठाई है। फिलहाल, क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या करोड़ों के इस कथित मुरम घोटाले की निष्पक्ष जाँच होगी, क्या किसानों को न्याय मिलेगा, और क्या खनिज माफियाओं व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह जाँच भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
    user_Jaypal Gurjar
    Jaypal Gurjar
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    38 min ago
  • इंदौर के सियागंज स्थित पटरल ब्रिज पर एक तेज़ रफ़्तार पानी का टैंकर अनियंत्रित होकर कई वाहनों से जा टकराया। इस दर्दनाक हादसे का सीसीटीवी फ़ुटेज भी सामने आया है, जिसमें टैंकर बेकाबू होकर सड़क पर खड़े और गुज़र रहे वाहनों को टक्कर मारते हुए साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर का पिछला टायर फटने के कारण चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा था। बताया गया है कि यह टैंकर पानी भरकर जवाहर मार्ग क्षेत्र में वितरण के लिए जा रहा था। राहत की बात यह है कि इस घटना में फिलहाल किसी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद पुलिस ने पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
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    इंदौर के सियागंज स्थित पटरल ब्रिज पर एक तेज़ रफ़्तार पानी का टैंकर अनियंत्रित होकर कई वाहनों से जा टकराया। इस दर्दनाक हादसे का सीसीटीवी फ़ुटेज भी सामने आया है, जिसमें टैंकर बेकाबू होकर सड़क पर खड़े और गुज़र रहे वाहनों को टक्कर मारते हुए साफ दिखाई दे रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर का पिछला टायर फटने के कारण चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा था। बताया गया है कि यह टैंकर पानी भरकर जवाहर मार्ग क्षेत्र में वितरण के लिए जा रहा था। राहत की बात यह है कि इस घटना में फिलहाल किसी प्रकार की जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली है।

हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद पुलिस ने पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
    user_SUNDARAM EXPRESS NEWS
    SUNDARAM EXPRESS NEWS
    Media company मल्हारगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • धार और इंदौर जिले की सीमा पर स्थित ग्राम खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला में कथित अवैध मुरम उत्खनन एक बड़े खनिज घोटाले का रूप ले चुका है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध खनन, करोड़ों रुपये की संभावित राजस्व चोरी, स्वीकृत पट्टों की सीमाओं का उल्लंघन और प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है। मामला इतना गंभीर हो गया कि एक आर्मी अधिकारी के हस्तक्षेप और उच्च स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद खनिज विभाग जांच के लिए सक्रिय हुआ। हालांकि, जांच दल के अधिकारियों ने मीडिया के सवालों से बचते हुए कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर संदेह गहरा गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, खण्डवा में खसरा क्रमांक 162 पर अकील मोहम्मद और खसरा क्रमांक 639 पर शहनबाज खान, तथा कल्याणसी खेड़ी में खसरा क्रमांक 642 पर हरीश पटेल और अमजद खान के नाम मुरम खनन पट्टे स्वीकृत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं ने स्वीकृत खदानों की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए निजी कृषि भूमि तक खुदाई फैलाई, जिससे उपजाऊ भूमि बर्बाद हो गई और गहरे गड्ढे बन गए। आरोप है कि स्वीकृत पट्टों को केवल कानूनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया, जबकि वास्तविक उत्खनन कई गुना बड़े क्षेत्र में हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लाखों घनमीटर मुरम का अवैध उत्खनन और शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। सबसे गंभीर आरोप यह है कि किसानों की निजी भूमि से निकाली गई मुरम को स्वीकृत खदानों के नाम पर जारी ट्रांजिट पास (टीपी) के माध्यम से पीथमपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पट्टाधारी स्वयं खनन नहीं कर रहे, बल्कि संचालन का जिम्मा दूसरों को सौंपा गया है, जो खदान सीमाओं का पालन नहीं कर रहे। क्षेत्र में अवैध उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, प्रभावित भूमि से जुड़े एक आर्मी अधिकारी द्वारा दस्तावेज़, खसरा रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के साथ शासन स्तर तक शिकायत पहुंचने के बाद ही खनिज विभाग सक्रिय हुआ। इस घटनाक्रम ने ग्रामीणों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम किसानों की शिकायतों पर वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों के दल ने स्थानीय पत्रकारों के सवालों, जैसे खनन की सीमा, निजी भूमि पर उत्खनन के प्रमाण, राजस्व चोरी की आशंका और अधिकारियों की भूमिका पर, कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और बिना जानकारी दिए लौट गए। इससे प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। इस अवैध उत्खनन से प्रभावित किसानों की कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे भविष्य में खेती करना भी मुश्किल हो सकता है। प्रभावित परिवारों में वे लोग भी शामिल हैं जिनके सदस्य सेना में सेवा दे चुके हैं या वर्तमान में देश की सेवा कर रहे हैं, जिन्होंने न्याय पर सवाल उठाया है। पीड़ित किसानों ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और उत्खनन की वैज्ञानिक माप शामिल है। उनकी मांग है कि राजस्व नुकसान का आकलन किया जाए और दोषी अधिकारियों एवं खनन माफियाओं पर कठोर कार्रवाई हो। क्षेत्र की जनता अब केवल जांच रिपोर्ट का नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है, क्योंकि इसी से प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता साबित होगी।
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    धार और इंदौर जिले की सीमा पर स्थित ग्राम खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला में कथित अवैध मुरम उत्खनन एक बड़े खनिज घोटाले का रूप ले चुका है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध खनन, करोड़ों रुपये की संभावित राजस्व चोरी, स्वीकृत पट्टों की सीमाओं का उल्लंघन और प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है। मामला इतना गंभीर हो गया कि एक आर्मी अधिकारी के हस्तक्षेप और उच्च स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद खनिज विभाग जांच के लिए सक्रिय हुआ। हालांकि, जांच दल के अधिकारियों ने मीडिया के सवालों से बचते हुए कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर संदेह गहरा गया है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, खण्डवा में खसरा क्रमांक 162 पर अकील मोहम्मद और खसरा क्रमांक 639 पर शहनबाज खान, तथा कल्याणसी खेड़ी में खसरा क्रमांक 642 पर हरीश पटेल और अमजद खान के नाम मुरम खनन पट्टे स्वीकृत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं ने स्वीकृत खदानों की सीमाओं का उल्लंघन करते हुए निजी कृषि भूमि तक खुदाई फैलाई, जिससे उपजाऊ भूमि बर्बाद हो गई और गहरे गड्ढे बन गए। आरोप है कि स्वीकृत पट्टों को केवल कानूनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया, जबकि वास्तविक उत्खनन कई गुना बड़े क्षेत्र में हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लाखों घनमीटर मुरम का अवैध उत्खनन और शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। सबसे गंभीर आरोप यह है कि किसानों की निजी भूमि से निकाली गई मुरम को स्वीकृत खदानों के नाम पर जारी ट्रांजिट पास (टीपी) के माध्यम से पीथमपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पट्टाधारी स्वयं खनन नहीं कर रहे, बल्कि संचालन का जिम्मा दूसरों को सौंपा गया है, जो खदान सीमाओं का पालन नहीं कर रहे।

क्षेत्र में अवैध उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, प्रभावित भूमि से जुड़े एक आर्मी अधिकारी द्वारा दस्तावेज़, खसरा रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के साथ शासन स्तर तक शिकायत पहुंचने के बाद ही खनिज विभाग सक्रिय हुआ। इस घटनाक्रम ने ग्रामीणों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम किसानों की शिकायतों पर वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों के दल ने स्थानीय पत्रकारों के सवालों, जैसे खनन की सीमा, निजी भूमि पर उत्खनन के प्रमाण, राजस्व चोरी की आशंका और अधिकारियों की भूमिका पर, कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और बिना जानकारी दिए लौट गए। इससे प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

इस अवैध उत्खनन से प्रभावित किसानों की कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे भविष्य में खेती करना भी मुश्किल हो सकता है। प्रभावित परिवारों में वे लोग भी शामिल हैं जिनके सदस्य सेना में सेवा दे चुके हैं या वर्तमान में देश की सेवा कर रहे हैं, जिन्होंने न्याय पर सवाल उठाया है। पीड़ित किसानों ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, जिसमें ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और उत्खनन की वैज्ञानिक माप शामिल है। उनकी मांग है कि राजस्व नुकसान का आकलन किया जाए और दोषी अधिकारियों एवं खनन माफियाओं पर कठोर कार्रवाई हो। क्षेत्र की जनता अब केवल जांच रिपोर्ट का नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है, क्योंकि इसी से प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता साबित होगी।
    user_राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    Newspaper publisher Indore, Madhya Pradesh•
    1 hr ago
  • इंदौर के पटेल ब्रिज पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा, जब नगर निगम के पानी के एक टैंकर के अचानक ब्रेक फेल हो गए। इस गंभीर स्थिति में ड्राइवर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए टैंकर को डिवाइडर पर चढ़ा दिया, जिसके कारण एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।
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    इंदौर के पटेल ब्रिज पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा, जब नगर निगम के पानी के एक टैंकर के अचानक ब्रेक फेल हो गए। इस गंभीर स्थिति में ड्राइवर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए टैंकर को डिवाइडर पर चढ़ा दिया, जिसके कारण एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।
    user_सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • इंदौर के जिला जेल चौराहा से पावर हाउस गेट तक, सड़क और फुटपाथ दोनों पर चौबीसों घंटे अतिक्रमण कर 'कार्य' किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, रट्टू रिक्शा और फल वाले पूरे दिन ध्वनि प्रदूषण करते हुए इन सार्वजनिक जगहों पर 'दुकानदारी' कर रहे हैं। आरोप है कि लोगों के चलने के लिए बनी 104 फीट चौड़ी यह सड़क अब मुख्य रूप से व्यवसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग की जा रही है, और इस गंभीर स्थिति पर नगर निगम 'पैसे लेकर' चुप्पी साधे हुए है।
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    इंदौर के जिला जेल चौराहा से पावर हाउस गेट तक, सड़क और फुटपाथ दोनों पर चौबीसों घंटे अतिक्रमण कर 'कार्य' किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, रट्टू रिक्शा और फल वाले पूरे दिन ध्वनि प्रदूषण करते हुए इन सार्वजनिक जगहों पर 'दुकानदारी' कर रहे हैं। आरोप है कि लोगों के चलने के लिए बनी 104 फीट चौड़ी यह सड़क अब मुख्य रूप से व्यवसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग की जा रही है, और इस गंभीर स्थिति पर नगर निगम 'पैसे लेकर' चुप्पी साधे हुए है।
    user_Lakku Yadav Jail Opposition Le
    Lakku Yadav Jail Opposition Le
    Local Politician इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • ऐसा प्रतीत होता है कि एक मुसलमान व्यक्ति ने धरती पर पहली बार सच्चाई बयान की है, जिसने कथित तौर पर मौलाना नेताओं और पूरे मुस्लिम समुदाय की पूरी पोल पट्टी खोल दी है। इस खुलासे के बाद, यह सवाल उठाया गया है कि अब किसे दोषी ठहराया जाएगा।
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    ऐसा प्रतीत होता है कि एक मुसलमान व्यक्ति ने धरती पर पहली बार सच्चाई बयान की है, जिसने कथित तौर पर मौलाना नेताओं और पूरे मुस्लिम समुदाय की पूरी पोल पट्टी खोल दी है। इस खुलासे के बाद, यह सवाल उठाया गया है कि अब किसे दोषी ठहराया जाएगा।
    user_प्रदेश खुलासा न्यूज
    प्रदेश खुलासा न्यूज
    Media company इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • इंदौर में लोकायुक्त पुलिस द्वारा महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर की गई छापेमार कार्रवाई में अब तक कुल 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। यह कार्रवाई बुधवार अल सुबह शुरू हुई और देर रात तक चली, जिसमें करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति और बैंक लॉकर से सोना-चांदी के आभूषण तथा निवेश संबंधी दस्तावेज मिले हैं। जांच के दौरान, पहले करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आई थी। बाद में एक बैंक लॉकर खोला गया, जिससे 24 लाख 76 हजार 630 रुपये मूल्य के सोने और चांदी के जेवरात बरामद कर जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त, कंडवाल के बेटों द्वारा संचालित डिपार्टमेंटल स्टोर में 35 लाख 73 हजार 218 रुपये का सामान, उनके घर से 38 लाख 48 हजार 530 रुपये मूल्य का घरेलू सामान और जिम में स्थापित उपकरणों की कीमत 2 लाख 71 हजार 10 रुपये आंकी गई है। घर से 4 लाख 79 हजार 294 रुपये मूल्य के अन्य जेवरात और नकदी भी बरामद हुई है, जिससे घर, जिम और अन्य स्थानों पर मिली चल संपत्तियों की कुल कीमत 1 करोड़ 6 लाख 98 हजार रुपये से अधिक है। लोकायुक्त जांच में कंडवाल और उनके परिवार के नाम पर कई अचल संपत्तियां भी सामने आई हैं। इनमें स्कीम नंबर-103 में स्थित एक चार मंजिला व्यावसायिक बिल्डिंग, स्कीम नंबर-140 में दो आवासीय प्लॉट, ग्राम टिगरिया-बादशाह में करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि तथा ग्राम भेंसलाय, सोनवाय और मलेंडी में स्थित अन्य भूमि शामिल हैं। लोकायुक्त निरीक्षक आशुतोष मिठास ने बताया कि टीम अब कंडवाल की आय और संपत्ति के स्रोतों की जांच कर रही है। उनके इंडियन ओवरसीज बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंकों में मौजूद खातों की भी पड़ताल की जा रही है। साथ ही, बीमा और निवेश संबंधी दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि कंडवाल ने अपनी पत्नी, दोनों बेटों और बहुओं सहित परिवार के सदस्यों के नाम पर भी कई संपत्तियाँ खरीदी हैं, जिनमें से कुछ संपत्तियां दान पत्र और गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित की गई हैं। इन सभी संपत्तियों की वैधता और स्रोतों की गहन जांच जारी है।
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    इंदौर में लोकायुक्त पुलिस द्वारा महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर की गई छापेमार कार्रवाई में अब तक कुल 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। यह कार्रवाई बुधवार अल सुबह शुरू हुई और देर रात तक चली, जिसमें करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति और बैंक लॉकर से सोना-चांदी के आभूषण तथा निवेश संबंधी दस्तावेज मिले हैं।

जांच के दौरान, पहले करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आई थी। बाद में एक बैंक लॉकर खोला गया, जिससे 24 लाख 76 हजार 630 रुपये मूल्य के सोने और चांदी के जेवरात बरामद कर जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त, कंडवाल के बेटों द्वारा संचालित डिपार्टमेंटल स्टोर में 35 लाख 73 हजार 218 रुपये का सामान, उनके घर से 38 लाख 48 हजार 530 रुपये मूल्य का घरेलू सामान और जिम में स्थापित उपकरणों की कीमत 2 लाख 71 हजार 10 रुपये आंकी गई है। घर से 4 लाख 79 हजार 294 रुपये मूल्य के अन्य जेवरात और नकदी भी बरामद हुई है, जिससे घर, जिम और अन्य स्थानों पर मिली चल संपत्तियों की कुल कीमत 1 करोड़ 6 लाख 98 हजार रुपये से अधिक है।

लोकायुक्त जांच में कंडवाल और उनके परिवार के नाम पर कई अचल संपत्तियां भी सामने आई हैं। इनमें स्कीम नंबर-103 में स्थित एक चार मंजिला व्यावसायिक बिल्डिंग, स्कीम नंबर-140 में दो आवासीय प्लॉट, ग्राम टिगरिया-बादशाह में करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि तथा ग्राम भेंसलाय, सोनवाय और मलेंडी में स्थित अन्य भूमि शामिल हैं।

लोकायुक्त निरीक्षक आशुतोष मिठास ने बताया कि टीम अब कंडवाल की आय और संपत्ति के स्रोतों की जांच कर रही है। उनके इंडियन ओवरसीज बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंकों में मौजूद खातों की भी पड़ताल की जा रही है। साथ ही, बीमा और निवेश संबंधी दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि कंडवाल ने अपनी पत्नी, दोनों बेटों और बहुओं सहित परिवार के सदस्यों के नाम पर भी कई संपत्तियाँ खरीदी हैं, जिनमें से कुछ संपत्तियां दान पत्र और गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित की गई हैं। इन सभी संपत्तियों की वैधता और स्रोतों की गहन जांच जारी है।
    user_SUNDARAM EXPRESS NEWS
    SUNDARAM EXPRESS NEWS
    Media company मल्हारगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • इंदौर के एमजी रोड थाना क्षेत्र स्थित चिमनबाग मैदान में चल रहे कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह विवाद टूर्नामेंट से एक टीम को बाहर किए जाने को लेकर हुआ, जिसके बाद मारपीट की घटना सामने आई। इस मामले में फरियादी यश टिकलिया ने एमजी रोड थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। यश ने बताया कि वह अपने साथियों अनिकेत बांगर और ऋषभ मेहरा के साथ चिमनबाग मैदान के कबड्डी ग्राउंड पर मौजूद था। उसी समय मयंक गौड़ और रोहन मेहरा वहां पहुंचे और संस्था वैष्णवी की टीम को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने का कारण पूछने लगे। इसी बात पर दोनों युवकों ने यश के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया। जब यश ने इसका विरोध किया, तो आरोपी और आक्रोशित हो गए और उन्होंने यश के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। घटना के बाद पीड़ित युवक यश टिकलिया ने एमजी रोड थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मयंक गौड़ और रोहन मेहरा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह पूरा विवाद इंदौर के एमजी रोड थाना क्षेत्र में कबड्डी टूर्नामेंट में हार-जीत की बात को लेकर हुआ था।
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    इंदौर के एमजी रोड थाना क्षेत्र स्थित चिमनबाग मैदान में चल रहे कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह विवाद टूर्नामेंट से एक टीम को बाहर किए जाने को लेकर हुआ, जिसके बाद मारपीट की घटना सामने आई।

इस मामले में फरियादी यश टिकलिया ने एमजी रोड थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। यश ने बताया कि वह अपने साथियों अनिकेत बांगर और ऋषभ मेहरा के साथ चिमनबाग मैदान के कबड्डी ग्राउंड पर मौजूद था। उसी समय मयंक गौड़ और रोहन मेहरा वहां पहुंचे और संस्था वैष्णवी की टीम को टूर्नामेंट से बाहर किए जाने का कारण पूछने लगे। इसी बात पर दोनों युवकों ने यश के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया। जब यश ने इसका विरोध किया, तो आरोपी और आक्रोशित हो गए और उन्होंने यश के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।

घटना के बाद पीड़ित युवक यश टिकलिया ने एमजी रोड थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मयंक गौड़ और रोहन मेहरा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह पूरा विवाद इंदौर के एमजी रोड थाना क्षेत्र में कबड्डी टूर्नामेंट में हार-जीत की बात को लेकर हुआ था।
    user_एस. एस. न्यूज सर्विस
    एस. एस. न्यूज सर्विस
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    23 min ago
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