अमेठी जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम केशवपुर मजरे पूरे मुहीबशाह में विद्युत विभाग द्वारा बिछाई गई 11 हजार वोल्टेज की एक लाइन को ग्रामीणों ने अवैध और गलत तरीका बताया है। उनका आरोप है कि इस लाइन से 12 से 15 घरों पर जान-माल का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस मामले पर आक्रोशित ग्रामीणों ने 30 जून को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर तत्काल जांच कराने और लाइन को किसी दूसरे सुरक्षित विकल्प से लगवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि बड़गांव पावर हाउस से एक प्राइवेट नलकूप के लिए यह 11 हजार वोल्ट की लाइन गांव के बिल्कुल बीच से, दरवाजों के सामने से होकर निकाली जा रही है। यह रास्ता फलदार वृक्षों, आम, जामुन और बांस की कोठ से भरा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि विभाग ने गांव के एक तालाब में ही दो बिजली के पोल गाड़ दिए हैं। इसके अतिरिक्त, यही तालाब पूरे गांव के पानी निकासी का एकमात्र साधन है और बरसाती पानी की निकासी के लिए बनी वैकल्पिक नाली के बीचों-बीच भी दो पोल और स्टे लगा दिए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इससे भविष्य में जल निकासी असंभव हो जाएगी और गंभीर जलभराव का खतरा पैदा होगा। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बार-बार मना करने के बावजूद विद्युत विभाग और नलकूप मालिक ने जबरन ये पोल गड़वा दिए। उन्हें आशंका है कि जलभराव की स्थिति में 11 हजार वोल्ट बिजली पेड़ या पोल के जरिए पानी में उतर सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामवासियों का कहना है कि लाइन बिछाने का एक दूसरा सुरक्षित विकल्प भी मौजूद है, लेकिन विभाग जानबूझकर आबादी वाले क्षेत्र से लाइन निकाल रहा है। बरसात में तालाब भरने से कई घरों में पानी घुस जाता है, ऐसे में 11 हजार वोल्ट की यह लाइन जान-माल के लिए लगातार खतरा बनी रहेगी। अजय कुमार, सहदेव सिंह, अभिषेक तिवारी, राजेश सिंह, राम कुमार और जीतलाल सहित समस्त ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी से इस मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द से जल्द 11 हजार वोल्ट की लाइन को दूसरे सुरक्षित स्थान से लगवाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि विभाग की यह घोर लापरवाही कभी भी एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
अमेठी जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम केशवपुर मजरे पूरे मुहीबशाह में विद्युत विभाग द्वारा बिछाई गई 11 हजार वोल्टेज की एक लाइन को ग्रामीणों ने अवैध और गलत तरीका बताया है। उनका आरोप है कि इस लाइन से 12 से 15 घरों पर जान-माल का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस मामले पर आक्रोशित ग्रामीणों ने 30 जून को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर तत्काल जांच कराने और लाइन को किसी दूसरे सुरक्षित विकल्प से लगवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि बड़गांव पावर हाउस से एक प्राइवेट नलकूप के लिए यह 11 हजार वोल्ट की लाइन गांव के बिल्कुल बीच से, दरवाजों के सामने से होकर निकाली जा रही है। यह रास्ता फलदार वृक्षों, आम, जामुन और बांस की कोठ से भरा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि विभाग ने गांव के एक तालाब में ही दो बिजली के पोल गाड़ दिए हैं। इसके अतिरिक्त, यही तालाब पूरे गांव के पानी निकासी का एकमात्र साधन है और बरसाती पानी की निकासी के लिए बनी वैकल्पिक नाली के बीचों-बीच भी दो पोल और स्टे लगा दिए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, इससे भविष्य में जल निकासी असंभव हो जाएगी और गंभीर जलभराव का खतरा पैदा होगा। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बार-बार मना करने के बावजूद विद्युत विभाग और नलकूप मालिक ने जबरन ये पोल गड़वा दिए। उन्हें आशंका है कि जलभराव की स्थिति में 11 हजार वोल्ट बिजली पेड़ या पोल के जरिए पानी में उतर सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामवासियों का कहना है कि लाइन बिछाने का एक दूसरा सुरक्षित विकल्प भी मौजूद है, लेकिन विभाग जानबूझकर आबादी वाले क्षेत्र से लाइन निकाल रहा है। बरसात में तालाब भरने से कई घरों में पानी घुस जाता है, ऐसे में 11 हजार वोल्ट की यह लाइन जान-माल के लिए लगातार खतरा बनी रहेगी। अजय कुमार, सहदेव सिंह, अभिषेक तिवारी, राजेश सिंह, राम कुमार और जीतलाल सहित समस्त ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी से इस मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द से जल्द 11 हजार वोल्ट की लाइन को दूसरे सुरक्षित स्थान से लगवाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि विभाग की यह घोर लापरवाही कभी भी एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
- अमेठी के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव में प्रस्तावित निजी 11 केवी पीटीडब्ल्यू (PTW) विद्युत लाइन को लेकर विवाद गहरा गया है। करणी सेना भारत के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड संघ चालक सहदेव सिंह ने एक प्रेस वार्ता कर विद्युत विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। राजेश सिंह के अनुसार, जिस भूमि से यह निजी 11 केवी लाइन ले जाने की तैयारी हो रही है, उसका एक हिस्सा न्यायालय में हकबरारी वाद के तहत विचाराधीन है, जबकि दूसरा हिस्सा उनकी निर्विवाद निजी भूमि है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी स्पष्ट असहमति के बावजूद विद्युत विभाग उनकी भूमि पर लाइन और विद्युत पोल स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 12 जून 2026 को एसडीओ कमलेश श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार सुधीर कुमार श्रीवास्तव, जेई उदयभान यादव और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में हुई बैठक में यह लिखित सहमति बनी थी कि न्यायालय में लंबित भूमि विवाद का निर्णय आने के बाद ही पोल लगाए जाएंगे। इस समझौते के बावजूद अब पोल स्थापना की कार्रवाई शुरू किए जाने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। प्रेस वार्ता में यह बताया गया कि प्रस्तावित लाइन के लिए एक वैकल्पिक और विवाद-मुक्त मार्ग उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद विभाग उनकी भूमि से ही लाइन ले जाने पर जोर दे रहा है। उन्होंने मांग की है कि यदि इस कार्य के लिए कोई वैधानिक आदेश, तकनीकी स्वीकृति या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जारी की गई है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। राजेश सिंह ने चक मार्ग पर पोल लगाए जाने से किसानों के ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों के आवागमन में संभावित बाधा का मुद्दा भी उठाया। साथ ही, उन्होंने कहा कि प्रस्तावित लाइन उनकी निजी भूमि पर स्थित गौशाला और बाग के ऊपर या निकट से गुजरेगी, जहां बड़े और घने पेड़ मौजूद हैं, जिससे विद्युत सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है। राजेश सिंह और सहदेव सिंह ने प्रशासन से न्यायालय के अंतिम निर्णय आने तक विवादित भूमि पर सभी प्रकार की विद्युत लाइन एवं पोल स्थापना की कार्रवाई रोकने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वे कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी नागरिक की निजी भूमि का उपयोग उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो।1
- अमेठी के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव में एक प्रस्तावित निजी 11 केवी पीटीडब्ल्यू (PTW) विद्युत लाइन को लेकर विवाद सामने आया है। करणी सेना भारत के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड संघ चालक सहदेव सिंह ने एक प्रेस वार्ता कर विद्युत विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, साथ ही मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। राजेश सिंह ने बताया कि जिस भूमि से यह निजी 11 केवी लाइन ले जाने की तैयारी हो रही है, उसका एक हिस्सा न्यायालय में हकबरारी वाद के तहत विचाराधीन है, जबकि दूसरा हिस्सा उनकी निर्विवाद निजी भूमि है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी स्पष्ट असहमति के बावजूद विद्युत विभाग उनकी भूमि पर लाइन और पोल स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। सिंह ने दावा किया कि 12 जून 2026 को एसडीओ कमलेश श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार सुधीर कुमार श्रीवास्तव, जेई उदयभान यादव और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में एक बैठक हुई थी, जिसमें यह लिखित सहमति बनी थी कि न्यायालय में लंबित भूमि विवाद का निर्णय आने के बाद ही पोल लगाए जाएंगे। उन्होंने इस समझौते के बावजूद अब पोल स्थापना की कार्रवाई शुरू करने पर कड़ी आपत्ति जताई। प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि प्रस्तावित लाइन के लिए एक वैकल्पिक और विवाद-मुक्त मार्ग उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद उनकी भूमि से ही लाइन ले जाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि यदि इस कार्य के लिए कोई वैधानिक आदेश, तकनीकी स्वीकृति या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जारी की गई है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। सिंह ने चक मार्ग पर पोल लगाए जाने से किसानों के ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों के आवागमन में संभावित बाधा का मुद्दा भी उठाया। इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित लाइन उनकी निजी भूमि पर स्थित गौशाला और बाग के ऊपर या निकट से गुजर रही है, जहाँ बड़े और घने पेड़ मौजूद हैं। इस स्थिति में उन्होंने विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन और संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की। राजेश सिंह और सहदेव सिंह ने प्रशासन से न्यायालय के अंतिम निर्णय तक विवादित भूमि पर सभी प्रकार की विद्युत लाइन और पोल स्थापना की कार्रवाई रोकने की मांग की, यह कहते हुए कि वे कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी नागरिक की निजी भूमि का उपयोग उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए, खासकर जब वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो। वहीं, इस मामले में एसडीओ कमलेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित मार्ग चकमार्ग और चारागाह भूमि पर स्थित है, जिसका राजस्व विभाग द्वारा मौके पर चिन्हांकन किया जा चुका है। उन्होंने बिजली विभाग पर लगाए जा रहे सभी आरोपों को निराधार बताया। एसडीओ के अनुसार, संबंधित विद्युत कनेक्शन वर्ष 2024 में स्वीकृत हुआ था। मामले में शिकायतें प्राप्त होने के बाद, जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। इस टीम ने नायब तहसीलदार की उपस्थिति में मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और राजस्व अभिलेखों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की।1
- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में बहन की लव मैरिज को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार एक खूनी अंजाम तक पहुँच गया है। प्रतापगढ़ पुलिस ने बहनोई की हत्या के मामले में फरार चल रहे 25-25 हजार रुपये के दो इनामी आरोपियों को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया है। मुठभेड़ में मुख्य आरोपी पिंटू वर्मा के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। यह मुठभेड़ जेठवारा थाना क्षेत्र में गजराही पुलिया, एसएनएस स्कूल के पास हुई। पुलिस के अनुसार, स्वाट टीम और जेठवारा पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर अपाचे बाइक सवार दो संदिग्ध युवकों को रोकने का प्रयास किया। खुद को घिरता देख आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में पुलिस की गोली मुख्य आरोपी पिंटू वर्मा के पैर में लगी और वह बाइक समेत गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध तमंचे, जिंदा कारतूस, खोखा कारतूस तथा हत्या में प्रयुक्त अपाचे मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस जाँच के मुताबिक, इस हत्याकांड की वजह एक साल पुरानी लव मैरिज थी। जेठवारा थाना क्षेत्र के खटवारा गाँव निवासी राजू सिंह का पिंटू वर्मा की बहन से प्रेम संबंध था। लगभग एक साल पहले दोनों घर छोड़कर चले गए थे और मंदिर में शादी कर ली थी। इस घटना से नाराज़ होकर पिंटू वर्मा ने तभी राजू सिंह से बदला लेने की ठान ली थी। करीब एक साल बाद, जब राजू सिंह अपने गाँव लौटा, तो पिंटू वर्मा को इसकी जानकारी मिल गई। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर राजू की हत्या की साजिश रची। अगले दिन, जब राजू सिंह बाइक से बाजार जा रहा था, तभी घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे घेर लिया और ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाकर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए थे। घटना के बाद मृतक के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर जाँच शुरू की। उसी दिन पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मुख्य आरोपी पिंटू वर्मा और उसका साथी फरार चल रहे थे, जिन पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। अब पुलिस मुठभेड़ में दोनों इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ इस चर्चित हत्याकांड में बड़ी सफलता मिलने का दावा कर रही है। घायल आरोपी पिंटू वर्मा को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी हुई है।4
- अमेठी नगर के अंबेडकर चौराहा स्थित बस स्टेशन के सामने शुक्रवार दोपहर कई घंटों तक भीषण जाम लगा रहा। यह जाम टीईटी की परीक्षा देकर निकल रहे परीक्षार्थियों की भारी भीड़ के बीच उस समय शुरू हुआ जब रामलीला मैदान को जाने वाली सड़क की पटरी पर एक ई-रिक्शा फंस गया। करीब 12 बजे हुए इस जाम के कारण पूरा यातायात ठप हो गया, जिससे अंबेडकर चौराहा से गौरीगंज रोड और रायबरेली रोड तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम इतना भयानक था कि इसमें एसडीएम पंकज कुमार मिश्रा की एंबुलेंस भी काफी देर तक फंसी रही। रोडवेज बसें, निजी वाहन, बाइक सवार और पैदल यात्री घंटों परेशान हुए, वहीं धूप में हलकान हुए सैकड़ों टीईटी परीक्षार्थियों की कई जरूरी बसें भी छूट गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर 12 बजे के आसपास परीक्षा केंद्रों से बस स्टेशन की ओर आ रहे परीक्षार्थियों के हुजूम के बीच एक ई-रिक्शा का पहिया रामलीला मैदान रोड की पटरी पर बने गड्ढे में धंस गया, जिससे उसे निकालने के प्रयास में पीछे से यातायात अवरुद्ध हो गया। सूचना मिलने पर ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद ई-रिक्शा को पटरी से हटाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे जाम खुल सका और करीब डेढ़ घंटे बाद यातायात सामान्य हो पाया। स्थानीय दुकानदारों ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बस स्टेशन के सामने अवैध पार्किंग और सड़क पर मौजूद गड्ढों के कारण आए दिन जाम लगता है। उन्होंने विशेष रूप से रामलीला मैदान रोड की टूटी पटरी का जिक्र करते हुए प्रशासन से स्थायी समाधान करने की मांग की, ताकि खासकर परीक्षा और त्योहारों के दिनों में ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त न हो।1
- अमेठी के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव में गुरुवार को प्रस्तावित निजी 11 केवी पीटीडब्ल्यू विद्युत लाइन को लेकर विवाद सामने आया। करणी सेना भारत के जिलाध्यक्ष राजेश सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड संघ चालक सहदेव सिंह ने प्रेस वार्ता कर विद्युत विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की। राजेश सिंह ने बताया कि जिस भूमि से यह निजी 11 केवी लाइन ले जाने की तैयारी है, उसका एक हिस्सा न्यायालय में हकबरारी वाद के तहत विचाराधीन है, जबकि दूसरा हिस्सा उनकी निर्विवाद निजी भूमि है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी स्पष्ट असहमति के बावजूद विभाग उनकी भूमि से लाइन और विद्युत पोल स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। राजेश सिंह ने यह भी दावा किया कि 12 जून 2026 को एसडीओ कमलेश श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार सुधीर कुमार श्रीवास्तव, जेई उदयभान यादव और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में यह लिखित सहमति बनी थी कि न्यायालय में लंबित भूमि विवाद का निर्णय आने के बाद ही पोल लगाए जाएंगे। इस सहमति के बावजूद अब पोल स्थापना की कार्रवाई शुरू होने पर उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित लाइन के लिए वैकल्पिक और विवाद-मुक्त मार्ग उपलब्ध है, फिर भी उनकी भूमि से ही लाइन ले जाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि यदि इस कार्य के लिए कोई वैधानिक आदेश, तकनीकी स्वीकृति या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जारी की गई है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, उन्होंने चक मार्ग पर पोल लगने से किसानों के ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों के आवागमन में संभावित बाधा का मुद्दा उठाया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि प्रस्तावित लाइन उनकी निजी भूमि पर बनी गौशाला और बाग के ऊपर या निकट से गुजरेगी, जहां बड़े और घने पेड़ हैं, और ऐसे में विद्युत सुरक्षा मानकों के पालन व संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की मांग की। राजेश सिंह और सहदेव सिंह ने प्रशासन से न्यायालय के अंतिम निर्णय तक विवादित भूमि पर सभी प्रकार की विद्युत लाइन और पोल स्थापना की कार्रवाई रोकने की मांग की। उन्होंने जोर दिया कि वे कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी नागरिक की निजी भूमि का उपयोग उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए, खासकर तब जब वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो। वहीं, इस मामले में एसडीओ कमलेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित मार्ग चकमार्ग और चारागाह भूमि पर स्थित है, जिसका राजस्व विभाग द्वारा मौके पर पहुंचकर चिन्हांकन किया जा चुका है। उन्होंने बिजली विभाग पर लगाए जा रहे सभी आरोपों को निराधार बताया। एसडीओ के अनुसार, संबंधित विद्युत कनेक्शन वर्ष 2024 में स्वीकृत हुआ था। मामले में मिली शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एक संयुक्त टीम गठित की गई थी, जिसमें राजस्व एवं विद्युत विभाग के अधिकारी शामिल थे। इस टीम ने नायब तहसीलदार की उपस्थिति में मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और राजस्व अभिलेखों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की।3
- अमेठी जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के भैरोपुर कैथोला गांव में एक जमीन विवाद को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। निर्माण कार्य के दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें एक महिला और उसकी दो बेटियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। मिली जानकारी के अनुसार, विवाद के दौरान महिला और उसकी बेटियों के साथ मारपीट की गई। इस पूरी घटना का किसी व्यक्ति ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। घायल महिला ने संग्रामपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है।1