जिस जमीन पर उगती थी घास, वहीं अब लहलहा रही सब्जियां, जगन्नाथ ने बदली खेती की तस्वीर जामताड़ा कहते हैं, हौसला हो तो पत्थर में भी रास्ता निकल आता है और मेहनत हो तो बंजर खेत में भी हरियाली मुस्कुराती है। इस कहावत को चरितार्थ किया है फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र के बिंदापाथर गांव के किसान जगन्नाथ गोराई ने। उन्होंने मेहनत, लगन और नई सोच के दम पर कभी बेकार पड़ी जमीन को हरियाली और आमदनी का जरिया बना दिया है। जिस एक एकड़ जमीन पर पहले घास-फूस के अलावा कुछ खास नहीं उगता था, आज उसी खेत में करीब 20 क्विंटल बैंगन की बिक्री हो चुकी है। मौसम के अनुसार मिर्च, नेनुआ, लौकी, भिंडी, टमाटर, फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती की जाती है।जगन्नाथ ने करीब 30 हजार रुपये की लागत से बैंगन की खेती शुरू की थी। मेहनत रंग लाई और एक सीजन में करीब दो लाख रुपये तक की आमदनी हुई। उनकी सफलता बताती है कि जमीन यदि बंजर नजर आए तो उसे छोड़ देना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। सही सोच, मेहनत और लगन से उसी जमीन को खुशहाली का आधार बनाया जा सकता है। जगन्नाथ बताते हैं कि पहले उक्त जमीन पर खेती नाममात्र की होती थी। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और संसाधनों की कमी भी बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों की उन्नत खेती शुरू करने का निर्णय लिया। शुरुआत में कई परेशानियां आईं, लेकिन लगातार मेहनत और खेती के तौर-तरीकों में बदलाव से खेत की तस्वीर बदलती चली गई।उन्होंने बताया कि बैंगन की खेती शुरू करने पर शुरुआती दौर में करीब 60 रुपये प्रति किलो की दर से बैंगन बिका। वर्तमान में भी बैंगन 30 रुपये प्रति किलो से अधिक की दर से बिक रहा है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। जगन्नाथ के अनुसार धान की खेती से आमदनी होती है, लेकिन उससे पूरे साल परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता है। इसके मुकाबले सब्जियों की खेती कम लागत में बेहतर मुनाफा देने के साथ नियमित आमदनी का जरिया बन सकती है। जगन्नाथ की बैंगन बिंदापाथर के अलावा हटिया, मिहिजाम, जामताड़ा, फतेहपुर और नाला के बाजारों में बिकती हैं। कई व्यापारी खेत पर पहुंचकर सीधे बैंगन खरीद लेते हैं। इससे किसान को उपज बाजार तक पहुंचाने की परेशानी और परिवहन खर्च कम होता है। सीधे बिक्री होने से बिचौलियों की भूमिका भी घटती है और किसान को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। जगन्नाथ की खेती देखकर गांव और आसपास के क्षेत्र के अन्य किसान भी सब्जी उत्पादन की ओर आकर्षित हुए हैं। अब दर्जनों किसान बैंगन और अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं। जगन्नाथ उन्हें बीज चयन, खाद के इस्तेमाल, सिंचाई और फसल प्रबंधन की जानकारी भी साझा करते हैं। किसानों के लिए उनका खेत किसी अनौपचारिक प्रशिक्षण केंद्र से कम नहीं है। यहां न कोई घंटी बजती है, न हाजिरी लगती है और न ब्लैकबोर्ड है, लेकिन फसल की कतारों के बीच किसान खेती की नई तकनीक जरूर सीख रहे हैं। जगन्नाथ का अनुभव दूसरे किसानों के लिए खेती की नई राह खोल रहा है। जगन्नाथ अपने भाई और पत्नी के साथ मिलकर पूरे साल सब्जियों की खेती करते हैं। खेत से परिवार को रोजाना ताजी और पौष्टिक सब्जियां भी मिलती हैं। इससे बाजार से सब्जियां खरीदने का खर्च कम हुआ है। यानी खेत अब केवल आमदनी का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की रसोई और आर्थिक मजबूती का भी आधार बन गया है।जगन्नाथ ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पंप उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सोलर पंप मिलने से डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च कम होगा। सिंचाई की सुविधा बेहतर होगी, उत्पादन लागत घटेगी और आमदनी में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। उनका मानना है कि यदि किसानों को समय पर तकनीकी सहायता और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो गांवों की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। इससे युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित कर रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। तथा जगन्नाथ गोराई किसान की सफलता नहीं, बल्कि बदलती सोच और मेहनत की तस्वीर है। जिस जमीन को कभी बेकार समझा जाता था, आज वही परिवार की खुशहाली का आधार बन गई है। उनकी मेहनत यह संदेश देती है कि मिट्टी से जुड़कर मेहनत की जाए तो बंजर धरती भी उम्मीद की फसल उगा सकती है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी गौर किशोर महतो ने बताया कि किसान यदि सब्जी की खेती सही समय पर और वैज्ञानिक तरीके से करें तो बेहतर उपज के साथ बाजार में अच्छे दाम भी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ गोराई की मेहनत और सब्जी उत्पादन को देखते हुए उन्हें उत्कृष्ट किसान की श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेज कर कृषि विभाग की ओर से सम्मानित किया जाएगा। क्षेत्र के अन्य किसानों का भी उत्कृष्ट किसान के रूप में चयन किया गया है।
जिस जमीन पर उगती थी घास, वहीं अब लहलहा रही सब्जियां, जगन्नाथ ने बदली खेती की तस्वीर जामताड़ा कहते हैं, हौसला हो तो पत्थर में भी रास्ता निकल आता है और मेहनत हो तो बंजर खेत में भी हरियाली मुस्कुराती है। इस कहावत को चरितार्थ किया है फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र के बिंदापाथर गांव के किसान जगन्नाथ गोराई ने। उन्होंने मेहनत, लगन और नई सोच के दम पर कभी बेकार पड़ी जमीन को हरियाली और आमदनी का जरिया बना दिया है। जिस एक एकड़ जमीन पर पहले घास-फूस के अलावा कुछ खास नहीं उगता था, आज उसी खेत में करीब 20 क्विंटल बैंगन की बिक्री हो चुकी है। मौसम के अनुसार मिर्च, नेनुआ, लौकी, भिंडी, टमाटर, फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती की जाती है।जगन्नाथ ने करीब 30 हजार रुपये की लागत से बैंगन की खेती शुरू की थी। मेहनत रंग लाई और एक सीजन में करीब दो लाख रुपये तक की आमदनी हुई। उनकी सफलता बताती है कि जमीन यदि बंजर नजर आए तो उसे छोड़ देना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। सही सोच, मेहनत और लगन से उसी जमीन को खुशहाली का आधार बनाया जा सकता है। जगन्नाथ बताते हैं कि पहले उक्त जमीन पर खेती नाममात्र की होती थी। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और संसाधनों की कमी भी बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों की उन्नत खेती शुरू करने का निर्णय लिया। शुरुआत में कई परेशानियां आईं, लेकिन लगातार मेहनत और खेती के तौर-तरीकों में बदलाव से खेत की तस्वीर बदलती चली गई।उन्होंने बताया कि बैंगन की खेती शुरू करने पर शुरुआती दौर में करीब 60 रुपये प्रति किलो की दर से बैंगन बिका। वर्तमान में भी बैंगन 30 रुपये प्रति किलो से अधिक की दर से बिक रहा है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। जगन्नाथ के अनुसार धान की खेती से आमदनी होती है, लेकिन उससे पूरे साल परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता है। इसके मुकाबले सब्जियों की खेती कम लागत में बेहतर मुनाफा देने के साथ नियमित आमदनी का जरिया बन सकती है। जगन्नाथ की बैंगन बिंदापाथर के अलावा हटिया, मिहिजाम, जामताड़ा, फतेहपुर और नाला के बाजारों में बिकती हैं। कई व्यापारी खेत पर पहुंचकर सीधे बैंगन खरीद लेते हैं। इससे किसान को उपज बाजार तक पहुंचाने की परेशानी और परिवहन खर्च कम होता है। सीधे बिक्री होने से बिचौलियों की भूमिका भी घटती है और किसान को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। जगन्नाथ की खेती देखकर गांव और आसपास के क्षेत्र के अन्य किसान भी सब्जी उत्पादन की ओर आकर्षित हुए हैं। अब दर्जनों किसान बैंगन और अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं। जगन्नाथ उन्हें बीज चयन, खाद के इस्तेमाल, सिंचाई और फसल प्रबंधन की जानकारी भी साझा करते हैं। किसानों के लिए उनका खेत किसी अनौपचारिक प्रशिक्षण केंद्र से कम नहीं है। यहां न कोई घंटी बजती है, न हाजिरी लगती है और न ब्लैकबोर्ड है, लेकिन फसल की कतारों के बीच किसान खेती की नई तकनीक जरूर सीख रहे हैं। जगन्नाथ का अनुभव दूसरे किसानों के लिए खेती की नई राह खोल रहा है। जगन्नाथ अपने भाई और पत्नी के साथ मिलकर पूरे साल सब्जियों की खेती करते हैं। खेत से परिवार को रोजाना ताजी और पौष्टिक सब्जियां भी मिलती हैं। इससे बाजार से सब्जियां खरीदने का खर्च कम हुआ है। यानी खेत अब केवल आमदनी का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की रसोई और आर्थिक मजबूती का भी आधार बन गया है।जगन्नाथ ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पंप उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सोलर पंप मिलने से डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च कम होगा। सिंचाई की सुविधा बेहतर होगी, उत्पादन लागत घटेगी और आमदनी में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। उनका मानना है कि यदि किसानों को समय पर तकनीकी सहायता और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो गांवों की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। इससे युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित कर रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। तथा जगन्नाथ गोराई किसान की सफलता नहीं, बल्कि बदलती सोच और मेहनत की तस्वीर है। जिस जमीन को कभी बेकार समझा जाता था, आज वही परिवार की खुशहाली का आधार बन गई है। उनकी मेहनत यह संदेश देती है कि मिट्टी से जुड़कर मेहनत की जाए तो बंजर धरती भी उम्मीद की फसल उगा सकती है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी गौर किशोर महतो ने बताया कि किसान यदि सब्जी की खेती सही समय पर और वैज्ञानिक तरीके से करें तो बेहतर उपज के साथ बाजार में अच्छे दाम भी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जगन्नाथ गोराई की मेहनत और सब्जी उत्पादन को देखते हुए उन्हें उत्कृष्ट किसान की श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेज कर कृषि विभाग की ओर से सम्मानित किया जाएगा। क्षेत्र के अन्य किसानों का भी उत्कृष्ट किसान के रूप में चयन किया गया है।
- श्रावणी मेला खत्म, बाबा मंदिर में फिर शुरू हुई स्पर्श पूजा। श्रावणी मेले के समापन के साथ शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गर्भगृह से अरघा हटा दिया गया। शनिवार सुबह से श्रद्धालु पूर्व की तरह बाबा बैद्यनाथ की स्पर्श पूजा कर सकेंगे। भादो मेले के दौरान गर्भगृह में रुद्राभिषेक पर पूरी तरह रोक रहेगी। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध व्यवस्था के तहत पूजा कराई जाएगी। वहीं, शीघ्र दर्शनम् कूपन का शुल्क फिलहाल 600 रुपये ही रहेगा। मेले को लेकर मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे और पर्याप्त संख्या में मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की तैनाती होगी।2
- आईआरबी-1 के डीएसपी प्रमोद कुमार सिंह की अचानक मौत, किचन में गिरने के बाद हुए बेहोश आईआरबी-1 के डीएसपी प्रमोद कुमार सिंह की अचानक मौत, किचन में गिरने के बाद हुए बेहोश1
- MMDR बिल के विरोध में कांग्रेस का टावर चौक पर एक दिवसीय महाधरना गिरिडीह। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए खनन एवं खनिज संशोधन विधेयक (MMDR Bill) के विरोध में गिरिडीह जिला कांग्रेस कमिटी की ओर से गुरुवार को टावर चौक पर एक दिवसीय महाधरना आयोजित किया गया। धरने में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए नए खनन कानून को झारखंड के हितों के खिलाफ बताया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने लोकसभा में नया खनन बिल पारित कर झारखंड के हितों पर कुठाराघात करने का काम किया है। उनका आरोप है कि इस कानून के माध्यम से राज्य के खनिज संसाधनों पर झारखंड के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और यहां संचालित कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का उपयोग राज्य के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं में होता है। ऐसे में नए खनन बिल से राज्य के हितों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध कर रही है। धरना कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर अन्य मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। नेताओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग उठाई। कार्यक्रम में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सह कोडरमा लोकसभा प्रभारी मणिशंकर और गिरिडीह जिला कांग्रेस प्रभारी सुरेंद्र सिंह समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस झारखंड के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।2
- सूबे के अल्पसंख्यक कल्याण एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री हफ़ीजुल हसन अंसारी ने गुरुवार को कानो में आयोजित पुल शिलान्यास कार्यक्रम में पथ प्रमंडल देवघर अन्तर्गत कानो से मदनकट्टा भाया महुआटांड़ मुरलीपहाड़ी, बस्कुपी, बदिया पथ के चैनेज 1+100 किलोमीटर में अवस्थित बगडरो नदी पर 8 करोड़ 25 लाख 53 हजार 200 रुपये की लागत से बनने वाली उच्चस्तरीय सेतु निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।1
- धनबाद में एक वीडियो सोशल मीडिया में हुआ वायरल वायरल वीडियो में दर्जनों की संख्या में आवारा कुत्ते एक बच्ची को काटते आ रहे नजर धनबाद में एक वीडियो सोशल मीडिया में हुआ वायरल वायरल वीडियो में दर्जनों की संख्या में आवारा कुत्ते एक बच्ची को काटते आ रहे नजर, वही जब सोशल मीडिया में इस मामले को प्रमुखता से रखा तो धनबाद नगर निगम के अधिकारियों की नींद खुली और आनंन फानन में वैसे आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया गया। हालांकि इस दौरान एक बात और समय सामने आई आवारा कुत्तों को पकड़ दे आए निगम कर्मी ने बताया कि इस काम में उन लोगों का सहयोग नहीं मिल रहा कई बार तो जब हम उन्हें पढ़ते हैं तो कुछ लोग उन्हें छुड़ा देते हैं निगम करनी है लोगों से सहयोग की अपील भी की अब सवाल यह उठता है की क्या हर काम हम अधिकारियों और कर्मियों के भरोसे छोड़ सकते हैं क्या हमारा कोई दायित्व नहीं बनता हमें भी अपनी जिंवरी समझनी चाहिए अपना क्षेत्र साफ सुथरा हो स्वच्छ हो सुरक्षित हो इसे हमें खुद आगे बढ़कर करना चाहिए निगम या अधिकारी अन्य संस्था हमारी सेवा के लिए है उससे पहले हमें सुधारना होगा और हमें एक साफ सुरक्षित समाज का निर्माण करना होगा1
- मसलिया थाना क्षेत्र में एनजीटी रोक के बावजूद गोवासोल घाट से बालू तस्करी एनजीटी की रोक के बावजूद गोवासोल घाट से दिनदहाड़े बालू की तस्करी जारी है। गुरुवार दोपहर बिना नंबर के ट्रैक्टर से बालू लोड करते देखा गया। ग्रामीणों का आरोप है कि रोज दर्जनों ट्रैक्टरों से अवैध उठाव हो रहा है। पूछने पर मजदूर भाग गए। अंचलाधिकारी रंजन यादव ने छापेमारी का आश्वासन दिया है।1
- Slug:- साइबर अपराध पर धनबाद पुलिस का बड़ा प्रहार, अब गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता अभियान 25 लाख लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य............... रात्रि चौपाल से लेकर संचार मित्र तक............... फर्जी सिम बेचने वालों पर भी पुलिस की नजर............... Anchor:- साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए धनबाद पुलिस अब बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है। लक्ष्य है जिले की करीब 25 लाख आबादी को साइबर अपराधियों के नए-नए हथकंडों से सतर्क करना। इसके लिए शहर से लेकर गांव तक पुलिस की टीमें पहुंच रही हैं। स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं, तो गांवों में अब रात्रि चौपाल के जरिए लोगों को साइबर ठगी से बचने के तरीके बताए जाएंगे। धनबाद पुलिस साइबर अपराधियों के साथ-साथ कथित तौर पर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर भी नजर रख रही है। धनबाद के डीएसपी विधि-व्यवस्था कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने साइबर सेफ्टी अवेयरनेस वीक और पुलिस की भावी रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 17 अगस्त से शुरू किए गए जागरूकता अभियान का उद्देश्य धनबाद की करीब 25 लाख आबादी को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करना है। पुलिस की टीमें स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचकर लोगों को फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी लिंक और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों से बचने के तरीके बता रही हैं। अभियान को सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। अब ग्रामीण इलाकों में रात्रि चौपाल लगाकर पुलिस सीधे लोगों से संवाद करेगी। इसके साथ ही जागरूकता पुस्तिकाओं का वितरण, ऑडियो-वीडियो वैन के जरिए प्रचार और शॉपिंग मॉल समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष वीडियो सेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर सुरक्षा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से चलने वाली मुहिम है। लोग खुद सतर्क रहें और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक करें। साइबर जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए दूरसंचार विभाग और धनबाद पुलिस ने मिलकर संचार मित्र कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके तहत आईआईटी (आइएसएम) के 13 युवाओं को संचार मित्र बनाया गया है। इन युवाओं को पुलिस और दूरसंचार विभाग की ओर से 24 घंटे की विशेष ओरिएंटेशन ट्रेनिंग दी गई है। ये संचार मित्र लोगों को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ संदिग्ध मोबाइल नंबर और संचार सेवाओं की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 1930, चक्षु पोर्टल और संचार साथी पोर्टल के उपयोग की जानकारी देंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले पोषण सखी और आंगनवाड़ी सेविकाओं को भी साइबर सुरक्षा के जमीनी नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए धनबाद पुलिस अब उन्हें संसाधन उपलब्ध कराने वालों पर भी कार्रवाई कर रही है। ग्रामीण एसपी के मुताबिक, डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की मदद से ऐसे दुकानों और स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां कथित तौर पर फर्जी या अवैध दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इनपुट और डेटा के विश्लेषण के बाद संबंधित ठिकानों पर छापेमारी और कार्रवाई की जा रही है। वहीं धनबाद की सीमा से सटे जामताड़ा, गिरिडीह और देवघर के इलाकों को साइबर अपराध के लिहाज से संवेदनशील मानते हुए विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। इन इलाकों में भी चौपाल और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही साइबर अपराध की राह पर जाने वाले युवाओं को पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि वे समय रहते इस रास्ते से दूर हो जाएं, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर जागरूकता अभियान को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद धनबाद पुलिस ने इसे केवल एक सप्ताह तक सीमित नहीं रखने का फैसला किया है। अब हर सप्ताह एक से दो बार स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध पर केवल कार्रवाई से पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि आम लोग ठगी के तरीकों को पहचानें, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें। Byte:- एस. मोहम्मद याकूब – ग्रामीण एसपी, धनबाद। V/O-Final:- कुल मिलाकर धनबाद पुलिस की रणनीति साफ है—एक तरफ साइबर अपराधियों और उनके नेटवर्क पर कार्रवाई, तो दूसरी तरफ आम लोगों को जागरूक कर उन्हें साइबर ठगी से बचाना। अब देखना होगा कि शहर से लेकर गांव तक चलाया जा रहा यह अभियान साइबर अपराध पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।2
- रिश्ते खून से ही नहीं, विश्वास और सम्मान से भी बनते हैं: मंत्री डॉ इरफान अंसारी। #जामताड़ा से उदय किशोर सिंह की रिपोर्ट# जामताड़ा के मिहिजाम में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सैकड़ों बहनों ने जामताड़ा विधायक सह स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की कलाई पर रेशम की डोर बांधी। इस भावुक पल ने भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और आपसी विश्वास को और मजबूत किया। बहनों का स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद पाकर मंत्री भावुक हो गए। डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उनके लिए मां और बहनों के सम्मान से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी बहनों को आगे लाने, उन्हें सम्मान और अधिकार दिलाने का प्रयास किया है और आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “आज इन सभी बहनों के बीच मैंने संकल्प लिया है कि जब तक मेरी सांस है, मैं अपनी बहनों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकार के लिए मजबूती से खड़ा रहूंगा।” मंत्री ने कहा कि बहनों की कलाई पर बंधी यह राखी उनके लिए महज एक धागा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, वादा और जीवनभर निभाने वाला रिश्ता है। रक्षाबंधन के इस आयोजन ने भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सामाजिक सम्मान का भावपूर्ण संदेश दिया।1