बिसंडा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोर्रा खुर्द के ग्रामीण स्थानीय सचिव और प्रधान से अत्यंत परेशान हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सचिव अमीनुद्दीन और प्रधान अपने कमीशन में डूबे रहते हैं, जिसके कारण गांव में विकास का कोई भी कार्य नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आवास योजनाओं में भी खुलेआम पैसा लिया जाता है, और बिना कमीशन के कोई भी कार्य एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता। ग्रामीणों की शिकायत है कि जब वे कोई भी काम कराने जाते हैं, तो महिला हो या पुरुष, उन्हें सीधे तौर पर इनकार कर दिया जाता है, क्योंकि अमीनुद्दीन बिना कमीशन के अपनी कलम नहीं चलाते। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव और प्रधान ने "बाबा के आदेशों" की भी अवहेलना की है, और उनके प्रतिनिधि के हौसले बुलंद हैं। सचिव ने कथित रूप से यह भी कहा है कि वह बिना कमीशन के कोई भुगतान नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सचिव का पेट केवल वेतन से नहीं भरता, बल्कि वे विकास के नाम पर मिलने वाले पैसे को खाकर "गरगज की तरह" फूल रहे हैं।
बिसंडा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोर्रा खुर्द के ग्रामीण स्थानीय सचिव और प्रधान से अत्यंत परेशान हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सचिव अमीनुद्दीन और प्रधान अपने कमीशन में डूबे रहते हैं, जिसके कारण गांव में विकास का कोई भी कार्य नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आवास योजनाओं में भी खुलेआम पैसा लिया जाता है, और बिना कमीशन के कोई भी कार्य एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता। ग्रामीणों की शिकायत है कि जब वे कोई भी काम कराने जाते हैं, तो महिला हो या पुरुष, उन्हें सीधे तौर पर इनकार कर दिया जाता है, क्योंकि अमीनुद्दीन बिना कमीशन के अपनी कलम नहीं चलाते। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव और प्रधान ने "बाबा के आदेशों" की भी अवहेलना की है, और उनके प्रतिनिधि के हौसले बुलंद हैं। सचिव ने कथित रूप से यह भी कहा है कि वह बिना कमीशन के कोई भुगतान नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सचिव का पेट केवल वेतन से नहीं भरता, बल्कि वे विकास के नाम पर मिलने वाले पैसे को खाकर "गरगज की तरह" फूल रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक रोडवेज की चलती बस में एक महिला के जेवर चोरी हो गए। इस घटना के बाद पीड़ितों ने सिविल लाइन पुलिस चौकी पहुँचकर प्रभारी से गुहार लगाई है।1
- बांदा में विकास की आड़ में शहर की पहचान बन चुके 80 वर्ष पुराने बरगद, पीपल और नीम के वृक्षों को काटने की तैयारी से जनता में भारी आक्रोश है। पल्हरी रोड पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की खबर फैलते ही शनिवार को छात्र, समाजसेवी और आम नागरिक घरों से निकलकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने पेड़ों को बचाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, वहीं आम नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'विकास चाहिए, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं'। नागरिकों ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सड़क पहले से चौड़ी है और नाली व बिजली के खंभों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है, तब इन वृक्षों को आखिर क्यों निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, जिसमें व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया कि शायद बरगद मुफ्त छाया देने, पीपल वर्षों से ऑक्सीजन बांटने या नीम धरती को मजबूती देने के कारण दोषी ठहराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा व्यंग्य तो यह है कि अधिकारी कटान का कोई आदेश न होने की बात कह रहे हैं, जिस पर जनता ने पूछा कि फिर कुल्हाड़ी किसकी अनुमति से चली। वरिष्ठ पूर्व छात्र नेता रितेश त्रिपाठी ने शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए पेड़ों को काटना 'आग पर घी डालने जैसा' बताया, और वातानुकूलित कमरों में बैठकर फैसले लेने वालों पर सवाल उठाए जिन्हें 48-50 डिग्री की तपिश महसूस नहीं होती। छात्र नेता अमित यादव और शमशेर यादव ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों के कटान पर स्थायी रोक नहीं लगाई गई, तो छात्र सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि उस सोच को भी है जो हरियाली को विकास की राह का रोड़ा मानती है। फिलहाल पल्हरी रोड पर पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी कायम है कि क्या बांदा अपने बरगद बचा पाएगा, या फिर आने वाली पीढ़ियां केवल इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी कि यहाँ कभी पेड़ हुआ करते थे। लोगों ने जोर देकर कहा कि पेड़ कटते हैं तो सिर्फ लकड़ी नहीं गिरती, बल्कि एक शहर की सांसें टूटती हैं, एक पीढ़ी की छांव छिनती है, और विकास के नाम पर इंसान अपनी ही कब्र के लिए धूप इकट्ठा करता है। इस दौरान पूरा बांदा कुल्हाड़ी के सामने दीवार बन गया और पल्हरी रोड पर बरगद और पीपल के पक्ष में जनसैलाब उमड़ पड़ा।1
- बबेरू में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर योगाभ्यास का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने भाग लिया।1
- देशभर में सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से कई परियोजनाओं पर लगातार काम जारी है। इन नए एक्सप्रेसवे के निर्माण से यात्रा के समय में कमी आने, कनेक्टिविटी में सुधार होने और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञ इस पहल को देश के बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।1
- लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड क्षेत्र में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब विकास योजनाओं और सरकारी उपलब्धियों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाकर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बुंदेलखंड की 19 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) को केवल तीन सीटें मिली थीं। हालांकि, हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने क्षेत्र की चार में से तीन सीटों पर जीत हासिल कर भाजपा के सामने एक नई चुनौती पेश की है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए, जहां समाजवादी पार्टी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और पीडीए, संविधान तथा आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं भाजपा विकास और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में झांसी, ललितपुर, महोबा और राठ का दौरा किया, जहां उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान दावा किया कि प्रदेश सरकार की योजनाओं से बुंदेलखंड में विकास को गति मिली है और पलायन पर भी नियंत्रण हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बुंदेलखंड में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। दोनों दल संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान के जरिए अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि, विकास योजनाओं और राजनीतिक रणनीतियों का जनता पर कितना असर होगा, इसका फैसला आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे ही करेंगे।2
- मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, सड़क, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर गहन ध्यान केंद्रित किया है।1
- महोबा के जिला चिकित्सालय परिसर से एक मोटरसाइकिल चोरी होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद वाहन मालिक ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, वाहन स्वामी ने अपनी मोटरसाइकिल अस्पताल परिसर में खड़ी की थी। कुछ समय बाद जब वह वापस लौटा, तो उसकी मोटरसाइकिल मौके से गायब मिली। सूचना मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए अस्पताल परिसर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां देखी गई हैं और पुलिस उसकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस जल्द ही आरोपी तक पहुँचने की उम्मीद जता रही है। जिला चिकित्सालय जैसे सार्वजनिक स्थान से हुई इस वाहन चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जाँच की जा रही है और चोरी का जल्द ही खुलासा किया जाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चलती रोडवेज बस में चोरी की एक वारदात सामने आई है, जहाँ एक महिला के बैग से पचास हज़ार रुपये कीमत के चांदी के जेवरात पार कर दिए गए। दयाशंकर तिवारी अपनी बहू को फतेहपुर जनपद ले जा रहे थे, तभी चोरों ने चलती बस में यह घटना अंजाम दी। इस घटना के बाद, पीड़ित दयाशंकर तिवारी अपनी बहू के साथ सिविल लाइन पुलिस चौकी कार्यालय पहुँचे। उन्होंने सिविल लाइन पुलिस चौकी प्रभारी को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर इस मामले में कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की मांग की है।4