राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी थाना क्षेत्र में कार्यरत महिला कांस्टेबल सोहन कुंवर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर अब गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। वरमंडल निवासी सोहन कुंवर की मौत के बाद राजपूत समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को तेज कर दिया है। मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के संभाग प्रभारी डी.डी. सिंह राणावत ने प्रतापगढ़ के जिला पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपकर इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि महिला कांस्टेबल को लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते वे भारी तनाव में थीं और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। समाज ने कांस्टेबल रामलाल गुर्जर और राहुल लबाना की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। डी.डी. सिंह राणावत ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय नहीं मिला तो समाज बड़े आंदोलन करने पर मजबूर होगा। इस बीच, महिला कांस्टेबल सोहन कुंवर का पोस्टमार्टम के बाद उनके निवास स्थान वरमंडल में अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने पहुंचकर पुष्पमाला अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी।
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी थाना क्षेत्र में कार्यरत महिला कांस्टेबल सोहन कुंवर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर अब गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। वरमंडल निवासी सोहन कुंवर की मौत के बाद राजपूत समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की
मांग को तेज कर दिया है। मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के संभाग प्रभारी डी.डी. सिंह राणावत ने प्रतापगढ़ के जिला पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपकर इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि महिला कांस्टेबल को लंबे समय
से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते वे भारी तनाव में थीं और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। समाज ने कांस्टेबल रामलाल गुर्जर और राहुल लबाना की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। डी.डी. सिंह राणावत ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार
को जल्द न्याय नहीं मिला तो समाज बड़े आंदोलन करने पर मजबूर होगा। इस बीच, महिला कांस्टेबल सोहन कुंवर का पोस्टमार्टम के बाद उनके निवास स्थान वरमंडल में अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने पहुंचकर पुष्पमाला अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी।
- राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी थाना क्षेत्र में कार्यरत महिला कांस्टेबल सोहन कुंवर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर अब गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। वरमंडल निवासी सोहन कुंवर की मौत के बाद राजपूत समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को तेज कर दिया है। मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के संभाग प्रभारी डी.डी. सिंह राणावत ने प्रतापगढ़ के जिला पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपकर इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि महिला कांस्टेबल को लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते वे भारी तनाव में थीं और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। समाज ने कांस्टेबल रामलाल गुर्जर और राहुल लबाना की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। डी.डी. सिंह राणावत ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय नहीं मिला तो समाज बड़े आंदोलन करने पर मजबूर होगा। इस बीच, महिला कांस्टेबल सोहन कुंवर का पोस्टमार्टम के बाद उनके निवास स्थान वरमंडल में अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने पहुंचकर पुष्पमाला अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी।4
- नीमच शहर के स्कीम नंबर 36-ए स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में 31 मई से लेकर 7 जून तक एक सात दिवसीय धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ होगा, जिसमें श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा, भूमिया सरकार का दिव्य दरबार और महाप्रसादी सहित कई अन्य धार्मिक आयोजन शामिल रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कार्यक्रम स्थल पर विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं।1
- दतिया में बुधवार, 29 मई 2026 को मांझी समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। समाज ने विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची क्रमांक-12 से हटाने और उन्हें मूल मांझी जनजाति के रूप में मान्यता देने की मांग की। उनका कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों में इन जातियों को मांझी जनजाति का अभिन्न हिस्सा माना गया है। ज्ञापन में बताया गया कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख द्वारा 7 जनवरी 1950 को जारी परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS-49 में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को मांझी जाति के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग मध्यप्रदेश के आयुक्त द्वारा जारी पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी इन समुदायों को मूल रूप से मांझी जनजाति में समाहित माना गया है। समाज ने यह भी दावा किया कि 13 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश विधानसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न क्रमांक-1121 के उत्तर में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने भी स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश क्षेत्र के केवट, धीमर, मल्लाह एवं भोई समुदाय मांझी जनजाति के ही अंग हैं। मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया एवं टीकमगढ़ जिलों में "मांझी" नाम से कोई पृथक जाति मौजूद नहीं है। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को ही मूल मांझी जनजाति के रूप में जाना और पहचाना जाता है। समाजजनों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उपलब्ध ऐतिहासिक एवं शासकीय दस्तावेजों का गहन परीक्षण कर इन समुदायों को ओबीसी सूची से हटाकर उन्हें मूल मांझी जनजाति के समस्त अधिकार प्रदान किए जाएं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उसे शासन स्तर तक उचित कार्रवाई हेतु भेजने का आश्वासन दिया।2
- मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील के रणायरा गांव में स्थित खेड़ापति बालाजी मंदिर पर पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार पांच कुण्डीय यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। गांव के भक्तों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस धार्मिक अनुष्ठान से गांव में सुख-शांति बनी रहती है, वहीं आंधी, तूफान और बीमारियों जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भी रक्षा होती है। श्रद्धालुओं के अनुसार, बालाजी महाराज के दरबार में सच्चे मन से जो भी मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होती है। इस वार्षिक आयोजन को रणायरा गांव की बालाजी महाराज समिति द्वारा हर वर्ष बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न कराया जाता है। यज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होने पहुँचते हैं, जिससे पूरे गांव में एक धार्मिक माहौल बना हुआ है और भक्तजन सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।4
- पुलिस की पिटाई से बचने के लिए कुछ बदमाशों ने अनोखे नारे लगाना शुरू कर दिया। वे लगातार चिल्लाते रहे, "हम छींगु के चेले हैं, पुलिस ने हमे पेले हैं," ताकि उन्हें पुलिस की मार से राहत मिल सके।1