क्या है जेनेटिक कमेटी जिला पदाधिकारी शेखपुरा की अध्यक्षता में जेनेटिक कमेटी का गठन किया गया शेखपुरा - आज दिनांक 17 फरवरी 2026 को जिला पदाधिकारी शेखपुरा की अध्यक्षता में जेनेटिक कमेटी का गठन किया गया साथ ही इस कमेटी में शामिल सभी सदस्यों का जुनोटिक कमेटी के कार्य जिम्मेदारी और भूमिका पर उनका उन्मुखीकरण किया गया. जुनोटिक कमेटी के बारे में सभी सदस्यों को विस्तार से बताया गया कि यह कमेटी वैसे बीमारियों जो पशुओ से मनुष्यों मे फैलती है वैसी बीमारियों पर निगरानी रखेगी साथ ही उनके फैलाव को रोकने वाली गतिविधियों का संचालन करवाएगी। बीमारियां जो जानवरों के द्वारा आघात करने एवं जानवरों के माध्यम से वायरस बैक्टीरिया और हवा के माध्यम से मनुष्यों में फैलती है उनका इलाज एवं समुदाय मे जागरूकता फैलाने का कार्य कमेटी करेगी। इस कमिटी के बैठक मे सिविल सर्जन, ए सी एम ओ, उप विकास आयुक्त, पशुपालन पदाधिकारी, वन विभाग के प्रतिनिधि, IMA के प्रेजिडेंट DR मृगेंद्र प्रसाद सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शिक्षा, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, आई डी एस पी के प्रतिनिधि एवं UNFPA/PCI के प्रतिनिधि शामिल थे। जिला पदाधिकारी महोदय के द्वारा निदेश दिया गया की पशुपालन विभाग अपना सर्विलेंस बनाये रखे ताकि कहीं से भी किसी पशु पक्षी की आकस्मिक और सामान्य से अधिक मृत्यु हो तो उसकी रिपोर्टिंग और सेम्पल जाँच ससमय कराई का सके साथ ही सभी मुर्गी फार्म, सूअर पालने वाले एवं बुचड़खाना को निर्देश दिया जाए की वे साफ सफाई का पुरा ध्यान रखें। स्वास्थय विभाग अपनी तैयारी रखें की अगर कही भी ज़ुनोटिक डिजिज की सूचना प्राप्त होती है तो आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा तत्काल मुहैया कराई जा सके। वन विभाग को भी निर्देशित किया गया की वे भी पक्षियों की जंगल मे मृत्यु की रिपोर्टिंग निश्चित रूप से करें एवं COMPILE रिपोर्ट प्रतिदिन जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जाए। अन्य सभी विभाग समुदाय को साफ सफाई रखने एवं बीमारियों के लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें इसके लिए जागरूकता भी फैलाये।
क्या है जेनेटिक कमेटी जिला पदाधिकारी शेखपुरा की अध्यक्षता में जेनेटिक कमेटी का गठन किया गया शेखपुरा - आज दिनांक 17 फरवरी 2026 को जिला पदाधिकारी शेखपुरा की अध्यक्षता में जेनेटिक कमेटी का गठन किया गया साथ ही इस कमेटी में शामिल सभी सदस्यों का जुनोटिक कमेटी के कार्य जिम्मेदारी और भूमिका पर उनका उन्मुखीकरण किया गया. जुनोटिक कमेटी के बारे में सभी सदस्यों को विस्तार से बताया गया कि यह कमेटी वैसे बीमारियों जो पशुओ से मनुष्यों मे फैलती है वैसी बीमारियों पर निगरानी रखेगी साथ ही उनके फैलाव को रोकने वाली गतिविधियों का संचालन करवाएगी। बीमारियां जो जानवरों के द्वारा आघात करने एवं जानवरों के माध्यम से वायरस बैक्टीरिया और हवा के माध्यम से मनुष्यों में फैलती है उनका इलाज एवं समुदाय मे जागरूकता फैलाने का कार्य कमेटी करेगी। इस कमिटी के बैठक मे सिविल सर्जन, ए सी एम ओ, उप विकास आयुक्त, पशुपालन पदाधिकारी, वन विभाग के प्रतिनिधि, IMA के प्रेजिडेंट DR मृगेंद्र प्रसाद सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शिक्षा, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, आई डी एस पी के प्रतिनिधि एवं UNFPA/PCI के प्रतिनिधि शामिल थे। जिला पदाधिकारी महोदय के द्वारा निदेश दिया गया की पशुपालन विभाग अपना सर्विलेंस बनाये रखे ताकि कहीं से भी किसी पशु पक्षी की आकस्मिक और सामान्य से अधिक मृत्यु हो तो उसकी रिपोर्टिंग और सेम्पल जाँच ससमय कराई का सके साथ ही सभी मुर्गी फार्म, सूअर पालने वाले एवं बुचड़खाना को निर्देश दिया जाए की वे साफ सफाई का पुरा ध्यान रखें। स्वास्थय विभाग अपनी तैयारी रखें की अगर कही भी ज़ुनोटिक डिजिज की सूचना प्राप्त होती है तो आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा तत्काल मुहैया कराई जा सके। वन विभाग को भी निर्देशित किया गया की वे भी पक्षियों की जंगल मे मृत्यु की रिपोर्टिंग निश्चित रूप से करें एवं COMPILE रिपोर्ट प्रतिदिन जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जाए। अन्य सभी विभाग समुदाय को साफ सफाई रखने एवं बीमारियों के लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें इसके लिए जागरूकता भी फैलाये।
- अरारी गांव में 11 उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन कटा, 13,460 रुपये की वसूली लोहान पंचायत अंतर्गत अरारी गांव में बिजली विभाग द्वारा बकाया राशि को लेकर सख्ती बरती गई। मंगलवार को चलाए गए विशेष अभियान के तहत कुल 11 उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। इस दौरान विभाग ने बकाया धारकों से 13,460 रुपये की वसूली भी की। इस संबंध में जानकारी देते हुए विभाग के कनीय अभियंता (जेई) राजकुमार प्रसाद ने बताया कि लंबे समय से बकाया राशि का भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के विरुद्ध यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा पूर्व में भी नोटिस जारी कर उपभोक्ताओं से समय पर बिजली बिल जमा करने की अपील की गई थी, बावजूद इसके भुगतान नहीं होने पर कनेक्शन विच्छेद की कार्रवाई की गई। अभियान मंगलवार की शाम लगभग 5 बजे तक चला। इस दौरान विभागीय कर्मियों की टीम गांव में मौजूद रही और बकाया उपभोक्ताओं से संपर्क कर राशि जमा कराने का प्रयास किया गया। जेई ने स्पष्ट किया कि जो उपभोक्ता अपना बकाया शीघ्र जमा कर देंगे, उनका कनेक्शन नियमानुसार पुनः बहाल कर दिया जाएगा। बिजली विभाग ने सभी उपभोक्ताओं से समय पर बिल भुगतान करने की अपील की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सके।1
- जाति का, का मतलब जानवर होता है,, धरम एक, भरम,, है,, इंसान जोड़ो यात्रा,, BLCP ITS ASHOK SAMRAT RAJ KUMAR PRINCE SSDBIHARCOD1081
- भारत सरकार द्वारा देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं और नीतियों को लागू किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रस्तावित “विकसित भारत जी राम जी अधिनियम 2025” का उद्देश्य समग्र विकास, सुशासन और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। अधिनियम का मुख्य उद्देश्य इस अधिनियम का लक्ष्य भारत को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तथा आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रमुख प्रावधान देश में उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देना युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना डिजिटल और तकनीकी विकास को गति देना महिलाओं, किसानों और कमजोर वर्गों के लिए विशेष योजनाएँ पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस अधिनियम के तहत गाँवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और वंचित वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत किया जाएगा, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके। देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस अधिनियम के प्रावधान प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो भारत तेजी से आर्थिक प्रगति करेगा और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरेगा। निष्कर्ष “विकसित भारत जी राम जी अधिनियम 2025” देश के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाना है।1
- दिल्ली प्रस्थान से पहले सभी का स्नेह और प्यार मिला, साथ ही बड़ो का आशीर्वाद मिला, और होली से पूर्व थोड़ा ग़ुलाल के संग आनंद... और जायका...4
- अच्छाई दिखाइए, अच्छे बनिये, ज़रूरतमंद को आवश्य जगह दीजिए #railway #rpf_awareness #humanity1
- आईएएस अधिकारी बिहार में भूलभुलैया कर रहे हैं और बिहार की जनता पलायन कर रही है1
- लखीसराय। शहर के नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा स्थान में श्री संयुक्त समिति बड़ी दुर्गा स्थान के तत्वावधान में श्री श्री 1008 नवदुर्गा माता का सातवां वार्षिक उत्सव समारोह 18 फरवरी को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। मंदिर परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में देखी गईं। मंदिर परिसर एवं मुख्य द्वार को आकर्षक तरीके से सजाया गया है। रंग-बिरंगी झालरों, विद्युत सजावट एवं फूल-मालाओं से पूरे क्षेत्र को उत्सवी स्वरूप दिया गया है। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस अवसर पर माता का अलौकिक भाव-श्रृंगार किया जाएगा तथा 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। इसके साथ ही विशेष पूजन, महाआरती और संध्या प्रसाद वितरण का भी कार्यक्रम निर्धारित है। समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्था की जा रही है। भक्तों की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।समारोह को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना हुआ है।1
- चेवाड़ा में आंगनबाड़ी सेविकाओं का दो दिवसीय परीक्षण संपन्न चेवाड़ा स्थित अंबेडकर भवन में शिशु एवं बाल आहार, पोषण तथा देखभाल विषय पर आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए आयोजित दो दिवसीय परीक्षण मंगलवार की शाम 4 बजे संपन्न हो गया। इस परीक्षण का उद्देश्य सेविकाओं को बच्चों के समुचित पोषण, स्वास्थ्य देखभाल एवं संतुलित आहार की जानकारी को परखना एवं सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय समन्वयक पंकज कुमार की देखरेख में परीक्षण की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन से आंगनबाड़ी सेविकाओं की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है तथा शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। दो दिनों तक चले इस परीक्षण में विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं ने भाग लिया। परीक्षण में शिशु आहार की गुणवत्ता, कुपोषण की पहचान, टीकाकरण की जानकारी तथा बच्चों की समग्र देखभाल से संबंधित विषयों पर प्रश्न पूछे गए। समापन अवसर पर समन्वयक ने प्रतिभागियों को अपने-अपने केंद्रों पर सीखी गई बातों को व्यवहार में लागू करने का आह्वान किया। कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।1