तेज हवाएं और बरसात ने 3 दिनों से ढाया कहर ग्राम में जगह-जगह जल भराव खुली विकास की पोल महीनो से सफाई कर्मचारी के नदारत रहने से ग्राम में पट्टि-पढी नालिया हैजा जैसी भयंकर बीमारियों को दे रही गंदगी न्योता आखिरकार कैसे होती है बगैर हाजिरी के सफाई कर्मचारी के पैरोल पर दस्तक नहीं उठाना उचित समझा रहे Ado पंचायत सूरतगंज पत्रकारों का फोन ब्यूरो चीफ समित अवस्थी बाराबंकी/जहां एक तरफ योगी सरकार स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है और ग्राम पंचायत में ग्रामों की साफ सफाई हेतु सफाई कर्मचारियों को नियुक्त कर वेतन भुगतान कर रही है वही एक मामला सामने आया है विकासखंड सूरतगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत करमुल्लापुर के ग्राम भिटौली का जहां पर पिछले कई महीनो से सफाई कर्मचारी नदारत रहे हैं और पहले कभी अगर कभी आ भी गए तो एक ही जगह की बार-बार हर एक एंगल से फोटो खींच करके शासन व प्रशासन को भेज देते हैं इस बार की 3 दिनों में बरसात व काफी तेज हवाएं चली बरसात में स्वच्छता की पोल खोलते हुए नजर आ रही है गांव के अंदर जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ है और स्थिर बना हुआ है क्योंकि गांव के अंदर की नालियां सारी पटी पड़ी है जिससे कि गांव के अंदर का गंदा पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है और वहीं दूसरी ओर वह गंदा पानी गांव में हैजा जैसे भयंकर बीमारियों को न्योता दे रहा है हालांकि गौर करने लायक यह बात है कि जब सफाई कर्मचारी ग्राम में साफ सफाई करने नहीं आते हैं महीनों तक नदारत रहते हैं तो उनके पैरोल पर दस्तखत कैसे हो जाते हैं आखिरकार कौन इसका जिम्मेदार बगैर काम किया कैसे निकल रही है कैसे मिल रहा है उनको भुगतान इस विषय में जब Ado पंचायत सूरतगंज से फोन द्वारा संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा हालांकि खबर प्रशासन के बाद अब देखना यह है कि शासन प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है फिलहाल फैसला समय की गोद में
तेज हवाएं और बरसात ने 3 दिनों से ढाया कहर ग्राम में जगह-जगह जल भराव खुली विकास की पोल महीनो से सफाई कर्मचारी के नदारत रहने से ग्राम में पट्टि-पढी नालिया हैजा जैसी भयंकर बीमारियों को दे रही गंदगी न्योता आखिरकार कैसे होती है बगैर हाजिरी के सफाई कर्मचारी के पैरोल पर दस्तक नहीं उठाना उचित समझा रहे Ado पंचायत सूरतगंज पत्रकारों का फोन ब्यूरो चीफ समित अवस्थी बाराबंकी/जहां एक तरफ योगी सरकार स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है और ग्राम पंचायत में ग्रामों की साफ सफाई हेतु सफाई कर्मचारियों को नियुक्त कर वेतन भुगतान कर रही है वही एक मामला सामने आया है विकासखंड सूरतगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत करमुल्लापुर के ग्राम भिटौली का जहां पर पिछले कई महीनो से सफाई कर्मचारी नदारत रहे हैं और पहले कभी अगर कभी आ भी गए तो एक ही जगह की बार-बार हर एक एंगल से फोटो खींच करके शासन व प्रशासन को भेज देते हैं इस बार की 3 दिनों में बरसात व काफी तेज हवाएं
चली बरसात में स्वच्छता की पोल खोलते हुए नजर आ रही है गांव के अंदर जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ है और स्थिर बना हुआ है क्योंकि गांव के अंदर की नालियां सारी पटी पड़ी है जिससे कि गांव के अंदर का गंदा पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है और वहीं दूसरी ओर वह गंदा पानी गांव में हैजा जैसे भयंकर बीमारियों को न्योता दे रहा है हालांकि गौर करने लायक यह बात है कि जब सफाई कर्मचारी ग्राम में साफ सफाई करने नहीं आते हैं महीनों तक नदारत रहते हैं तो उनके पैरोल पर दस्तखत कैसे हो जाते हैं आखिरकार कौन इसका जिम्मेदार बगैर काम किया कैसे निकल रही है कैसे मिल रहा है उनको भुगतान इस विषय में जब Ado पंचायत सूरतगंज से फोन द्वारा संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा हालांकि खबर प्रशासन के बाद अब देखना यह है कि शासन प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है फिलहाल फैसला समय की गोद में
- कन्नौज: वर्दी का फर्ज निभाया, 5 जिंदगियां बचाईं- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पलटी कार में फंसी थीं 5 जिंदगियां। तभी सिपाही अमित तेवतिया और पत्नी अर्चना सिंह ने रुककर राइफल से कार के शीशे तोड़े और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला सिपाही दंपति की बहादुरी और सूझबूझ को सलाम1
- 🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏 बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है। 😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है। 🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर 🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏 बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है। 😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है। 🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर1
- जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।। अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है। सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है। तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई है। अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।3
- वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी........... वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।1
- लखनऊ। वजीरगंज के एसए अपार्टमेंट में मची अफरा-तफरी, 400-500 लोगों को बाहर निकाला जा रहा लखनऊ के वजीरगंज क्षेत्र स्थित एसए अपार्टमेंट में उस समय हड़कंप मच गया, जब अपार्टमेंट में करीब 400 से 500 लोगों के मौजूद होने की सूचना सामने आई। अपार्टमेंट के गिरने की आशंका के चलते एहतियातन लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई है। मौके पर राहत एवं बचाव की तैयारियां की जा रही हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। अपार्टमेंट को खाली कराने की कार्रवाई जारी है।1
- मड़ियांव क्षेत्र के फैजुल्लागंज वार्ड चतुर्थ में 60 फीता रोड दाउदनगर चौराहे पर जल भराव के कारण भारी विरोध प्रदर्शन जारी लोगों ने रोड जमकर क्षेत्रीय पूर्व पार्षद जलाल यादव ब्रेकिंग न्यूज़ ✍️ लखनऊ खबर की अगुवाई में धरना प्रदर्शन दे रहे हैं मौके पर थाना मड़ियावा इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा अपनी पुलिस टीम के साथ मौजूद है1
- Post by राम जी दीक्षित पत्रकार1
- मटियारी चौराहे से शाहपुर जाने वाली मेंन सड़क का हाल हुआ खस्ताहाल इतना ही नहीं सड़क की हालत देखकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार की विकास कार्य की खुली पोल Lko यह वीडियो किसी बिहड़ गांव का नहीं बल्कि भरवारा वार्ड के शाहपुर मार्ग का रास्ता है इस रास्ते से ही शाहपुर निवासी सहित आसपास बसी कई कॉलोनीवासी इसी मार्ग से गुजरते हैं...1
- बाढ़ क्षेत्र में नहीं आ रही बिजली, जनता परेशान, तीन दिन से बाढ़ क्षेत्र अंधेरे में, जीव जंतुओं से बना खतरा, बिजली अधिकारी लापरवाहीं आई सामने, आश्वासन देने के बाद भी नहीं चालू हो पा रही बिजली, मंत्री के दावे फेल नजर आ रहे हैं।1