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जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।। अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है। सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है। तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई है। अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।

17 hrs ago
user_Sunil Verma
Sunil Verma
Farmer महमूदाबाद, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
17 hrs ago
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जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।। अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों

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में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है। सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है। तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई

है। अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।

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  • 🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏 बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है। 😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है। 🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर 🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏 बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है। 😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है। 🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर
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    🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏
बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है।
🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर
🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏
बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है।
🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर
    user_हंसराज वर्मा पत्रकार
    हंसराज वर्मा पत्रकार
    Appliances customer service महमूदाबाद, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।। अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है। सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है। तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई है। अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।
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    जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।।

अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में
महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है।
सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है।
तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई है।
अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।
    user_Sunil Verma
    Sunil Verma
    Farmer महमूदाबाद, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • हेतमापुर में 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में सवाई नदी का मंदिर पर निशाना बाराबंकी के सूरतगंज क्षेत्र के खेतमापुर में नेपाल से छोड़ा गया पानी और लगातार बारिश से आज नदी किनारे बनी 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में समा चुकी है और नदी ने 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा बना हुआ लगातार हुई कटान से प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और कटान को रोकने के लिए मशीनों के जरिए पत्थर मिट्टी डालकर रोकने का प्रयास किया जा रहा है
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    हेतमापुर में 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में सवाई नदी का मंदिर पर निशाना
बाराबंकी के सूरतगंज क्षेत्र के खेतमापुर में नेपाल से छोड़ा गया पानी  और लगातार बारिश से आज नदी किनारे बनी 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में समा चुकी है और नदी ने 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास  मंदिर पर खतरा बना हुआ  लगातार हुई कटान से प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं  और कटान को रोकने के लिए मशीनों के जरिए पत्थर मिट्टी डालकर रोकने का प्रयास किया जा रहा है
    user_रवि रावत पत्रकार फतेहपुर बाराबंकी
    रवि रावत पत्रकार फतेहपुर बाराबंकी
    फतेहपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला सीतापुर में नारेबाजी के साथ जीआईसी चौराहे पहुंचे कार्यकर्ता, सड़क जाम को लेकर पुलिस से हुई झड़प संवाददाता,, नरेश गुप्ता सीतापुर। वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने व गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार दोपहर शहर में प्रदर्शन किया। जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंख अस्पताल स्थित गांधी प्रतिमा के पास एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता लालबाग के रास्ते जीआईसी चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के प्रयास को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कांग्रेस नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप जिला अध्यक्ष डॉ. ममता वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार देश में वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की। शहर अध्यक्ष शिशिर वाजपेई ने कहा कि राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग की। पुतला छीनने को लेकर पुलिस पर आरोप पूर्व जिला अध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पुतला छीनने का प्रयास किया और उसे अपने साथ ले गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी। पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश निषाद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। विनीत दीक्षित ने राहुल गांधी को विपक्ष की आवाज बताया, जबकि पूर्व शहर अध्यक्ष संतोष भार्गव ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को कांग्रेसजनों का दायित्व बताया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद प्रदर्शन में कमला रावत, प्रदीप सिंह चौहान, धीरेश कश्यप, संजय कुमार सनी, आमोद मिश्रा, सतीश अग्निहोत्री, शबनम, शोभित अवस्थी, नरेंद्र वर्मा, अनुपमा द्विवेदी, कृष्णा मुरारी मिश्रा, अयूब अहमद डंपी, इस्लाम अंसारी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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    वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला
वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला
सीतापुर में नारेबाजी के साथ जीआईसी चौराहे पहुंचे कार्यकर्ता, सड़क जाम को लेकर पुलिस से हुई झड़प
संवाददाता,, नरेश गुप्ता 
सीतापुर। वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने व गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार दोपहर शहर में प्रदर्शन किया। जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंख अस्पताल स्थित गांधी प्रतिमा के पास एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता लालबाग के रास्ते जीआईसी चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका।
प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के प्रयास को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
कांग्रेस नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
जिला अध्यक्ष डॉ. ममता वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार देश में वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की।
शहर अध्यक्ष शिशिर वाजपेई ने कहा कि राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग की।
पुतला छीनने को लेकर पुलिस पर आरोप
पूर्व जिला अध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पुतला छीनने का प्रयास किया और उसे अपने साथ ले गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी।
पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश निषाद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। विनीत दीक्षित ने राहुल गांधी को विपक्ष की आवाज बताया, जबकि पूर्व शहर अध्यक्ष संतोष भार्गव ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को कांग्रेसजनों का दायित्व बताया।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में कमला रावत, प्रदीप सिंह चौहान, धीरेश कश्यप, संजय कुमार सनी, आमोद मिश्रा, सतीश अग्निहोत्री, शबनम, शोभित अवस्थी, नरेंद्र वर्मा, अनुपमा द्विवेदी, कृष्णा मुरारी मिश्रा, अयूब अहमद डंपी, इस्लाम अंसारी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_Naresh Gupta Reporter
    Naresh Gupta Reporter
    सिधौली, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • तेज हवाएं और बरसात ने 3 दिनों से ढाया कहर ग्राम में जगह-जगह जल भराव खुली विकास की पोल महीनो से सफाई कर्मचारी के नदारत रहने से ग्राम में पट्टि-पढी नालिया हैजा जैसी भयंकर बीमारियों को दे रही गंदगी न्योता आखिरकार कैसे होती है बगैर हाजिरी के सफाई कर्मचारी के पैरोल पर दस्तक नहीं उठाना उचित समझा रहे Ado पंचायत सूरतगंज पत्रकारों का फोन ब्यूरो चीफ समित अवस्थी बाराबंकी/जहां एक तरफ योगी सरकार स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है और ग्राम पंचायत में ग्रामों की साफ सफाई हेतु सफाई कर्मचारियों को नियुक्त कर वेतन भुगतान कर रही है वही एक मामला सामने आया है विकासखंड सूरतगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत करमुल्लापुर के ग्राम भिटौली का जहां पर पिछले कई महीनो से सफाई कर्मचारी नदारत रहे हैं और पहले कभी अगर कभी आ भी गए तो एक ही जगह की बार-बार हर एक एंगल से फोटो खींच करके शासन व प्रशासन को भेज देते हैं इस बार की 3 दिनों में बरसात व काफी तेज हवाएं चली बरसात में स्वच्छता की पोल खोलते हुए नजर आ रही है गांव के अंदर जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ है और स्थिर बना हुआ है क्योंकि गांव के अंदर की नालियां सारी पटी पड़ी है जिससे कि गांव के अंदर का गंदा पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है और वहीं दूसरी ओर वह गंदा पानी गांव में हैजा जैसे भयंकर बीमारियों को न्योता दे रहा है हालांकि गौर करने लायक यह बात है कि जब सफाई कर्मचारी ग्राम में साफ सफाई करने नहीं आते हैं महीनों तक नदारत रहते हैं तो उनके पैरोल पर दस्तखत कैसे हो जाते हैं आखिरकार कौन इसका जिम्मेदार बगैर काम किया कैसे निकल रही है कैसे मिल रहा है उनको भुगतान इस विषय में जब Ado पंचायत सूरतगंज से फोन द्वारा संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा हालांकि खबर प्रशासन के बाद अब देखना यह है कि शासन प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है फिलहाल फैसला समय की गोद में
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    तेज हवाएं और बरसात ने 3 दिनों से ढाया कहर ग्राम में जगह-जगह जल भराव खुली विकास की पोल

महीनो से सफाई कर्मचारी के नदारत रहने से ग्राम में पट्टि-पढी नालिया हैजा जैसी भयंकर बीमारियों को दे रही गंदगी न्योता 

आखिरकार कैसे होती है बगैर हाजिरी के सफाई कर्मचारी के पैरोल पर दस्तक नहीं  उठाना उचित समझा रहे Ado पंचायत सूरतगंज पत्रकारों का फोन 
ब्यूरो चीफ समित अवस्थी 
बाराबंकी/जहां एक तरफ योगी सरकार स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है और ग्राम पंचायत में ग्रामों की साफ सफाई हेतु सफाई कर्मचारियों को नियुक्त कर वेतन भुगतान कर रही है वही एक मामला सामने आया है विकासखंड सूरतगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत करमुल्लापुर के ग्राम भिटौली का जहां पर पिछले कई महीनो से सफाई कर्मचारी नदारत रहे हैं और पहले कभी अगर कभी आ भी गए तो एक ही जगह की बार-बार हर एक एंगल से फोटो खींच करके शासन व प्रशासन को भेज देते हैं इस बार की 3 दिनों में बरसात व काफी तेज हवाएं चली बरसात में स्वच्छता की पोल खोलते हुए नजर आ रही है गांव के अंदर जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ है और स्थिर बना हुआ है क्योंकि गांव के अंदर की नालियां सारी पटी पड़ी है जिससे कि गांव के अंदर का गंदा पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है और वहीं दूसरी ओर वह गंदा पानी गांव में हैजा जैसे भयंकर बीमारियों को न्योता दे रहा है हालांकि गौर करने लायक यह बात है कि जब सफाई कर्मचारी ग्राम में साफ सफाई करने नहीं आते हैं महीनों तक नदारत रहते हैं तो उनके पैरोल पर दस्तखत कैसे हो जाते हैं आखिरकार कौन इसका जिम्मेदार बगैर काम किया कैसे निकल रही है कैसे मिल रहा है उनको भुगतान इस विषय में जब Ado पंचायत सूरतगंज से फोन द्वारा संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा हालांकि खबर प्रशासन के बाद अब देखना यह है कि शासन प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है फिलहाल फैसला समय की गोद में
    user_चीफ ब्यूरो समित अवस्थी BBK
    चीफ ब्यूरो समित अवस्थी BBK
    रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • घाघरा का कहर जारी।नदी में समाई मस्जिद ऐतिहासिक मंदिर के अस्तित्व को खतरा सूरतगंज (बाराबंकी)। सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू-घाघरा नदी का रौद्र रूप रविवार को और विकराल हो गया। लगातार हो रही तेज बारिश के बीच नदी में कटान की रफ्तार अचानक बढ़ गई। कई दिनों से नदी के मुहाने पर खड़ी मस्जिद आखिरकार तेज धारा की चपेट में आकर नदी में समा गई। वहीं अब कटान बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है। दूसरी ओर हेतमापुर स्थित पशु चिकित्सालय भी कटान की जद में आ गया है। अस्पताल की बाउंड्री पहले ही नदी में समा चुकी है, जिसके बाद भवन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सामान बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। तेजी से बदलते हालात ने आसपास के ग्रामीणों में दहशत बढ़ा दी है।ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कई दिनों से नदी लगातार किनारे की जमीन को काट रही थी। शनिवार को पशु चिकित्सालय नदी के मुख्य कटाव वाले हिस्से से करीब 10 मीटर दूर बताया जा रहा था, लेकिन इसी बीच उसकी बाउंड्री नदी की तेज धारा में समा गई। इसके बाद कटान तेजी से अस्पताल भवन की ओर बढ़ने लगी। रविवार को स्थिति और गंभीर हो गई। नदी की तेज धारा जमीन को लगातार काटकर अपने साथ बहा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान की यही रफ्तार जारी रही तो पशु चिकित्सालय का भवन भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा। बाबा नारायण दास मंदिर के आसपास भी कटान का असर दिखाई देने लगा है, जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कई दिनों से नदी के मुहाने पर खड़ी मस्जिद का हिस्सा लगातार कटान की चपेट में आ रहा था। शनिवार के बाद नदी की धारा और तेज हुई और रविवार को मस्जिद पूरी तरह नदी की चपेट में आकर समा गई। मस्जिद के नदी में समाने के बाद ग्रामीणों को नदी की कटान की भयावहता का अंदाजा हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि नदी जिस तेजी से जमीन काट रही है, उससे आसपास के घरों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी खतरा बढ़ गया है। लगातार बढ़ती कटान की सूचना पर रविवार को रामनगर एसडीएम आकांक्षा गुप्ता हेतमापुर पहुंचीं और कटान प्रभावित क्षेत्र का मौके पर जायजा लिया। उन्होंने नदी की तेज धारा से हो रहे भू-कटान, संवेदनशील स्थानों और चल रहे बचाव कार्य की जानकारी ली। एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर पत्थर, बोल्डर और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था तेज करने तथा बचाव कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने को कहा। साथ ही नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने तथा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। हेतमापुर में लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए एडीएम निरंकार सिंह, एडिशनल एसपी और सीओ ने भी मौके पर पहुंचकर कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नदी की तेज धारा से हो रहे कटाव और संवेदनशील स्थानों की स्थिति देखी तथा मौके पर मौजूद अधिकारियों से बचाव कार्य की जानकारी ली।अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने, ग्रामीणों को सतर्क रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों के लगातार मौके पर पहुंचने से ग्रामीणों को राहत तो मिली, लेकिन नदी की बढ़ती कटान को लेकर चिंता बरकरार है। उधर, सरयू-घाघरा नदी में बढ़ती कटान और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए रविवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रंजन गौतम ने भी हेतमापुर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के साथ ग्रामीणों से भी जानकारी ली।सीएमओ ने बाढ़ राहत केंद्र पर संचालित स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाएं देखीं और स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ और कटान प्रभावित ग्रामीणों को उपचार के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।सरयू-घाघरा की लगातार बढ़ती कटान से उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके घर अभी नदी की चपेट से बचे हुए हैं। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।ग्रामीण दिलीप वर्मा, राजू, मोहम्मद शरीफ, सलीम, रामू, श्यामू, रामराज, राजित, आयुधिया, रघुराई, मैकू लाल, लोटन, दुवारिका, रमेश, लतीफ, सलीम कबाड़ी, सलीम दर्जी, सफीक, सूरज, दीपक, रामपाती और यूनुस आदि का कहना है कि नदी की कटान इतनी तेजी से हो रही है कि कुछ ही घंटों में हालात बदल जा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी का बहाव तेज है और किनारों की मिट्टी कमजोर हो चुकी है। ऐसे में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कटान और बढ़ सकती है।हेतमापुर में एक तरफ मस्जिद नदी में समा चुकी है, दूसरी तरफ पशु चिकित्सालय की बाउंड्री बह चुकी है और बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब कटान पहुंच गई है। ऐसे में ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन द्वारा कराए जा रहे बचाव कार्य पर टिकी है।
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    घाघरा का कहर जारी।नदी में समाई मस्जिद ऐतिहासिक मंदिर के अस्तित्व को खतरा 
सूरतगंज (बाराबंकी)। सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र के हेतमापुर में सरयू-घाघरा नदी का रौद्र रूप रविवार को और विकराल हो गया। लगातार हो रही तेज बारिश के बीच नदी में कटान की रफ्तार अचानक बढ़ गई। कई दिनों से नदी के मुहाने पर खड़ी मस्जिद आखिरकार तेज धारा की चपेट में आकर नदी में समा गई। वहीं अब कटान बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच गई है। दूसरी ओर हेतमापुर स्थित पशु चिकित्सालय भी कटान की जद में आ गया है। अस्पताल की बाउंड्री पहले ही नदी में समा चुकी है, जिसके बाद भवन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सामान बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। तेजी से बदलते हालात ने आसपास के ग्रामीणों में दहशत बढ़ा दी है।ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कई दिनों से नदी लगातार किनारे की जमीन को काट रही थी। शनिवार को पशु चिकित्सालय नदी के मुख्य कटाव वाले हिस्से से करीब 10 मीटर दूर बताया जा रहा था, लेकिन इसी बीच उसकी बाउंड्री नदी की तेज धारा में समा गई। इसके बाद कटान तेजी से अस्पताल भवन की ओर बढ़ने लगी। रविवार को स्थिति और गंभीर हो गई। नदी की तेज धारा जमीन को लगातार काटकर अपने साथ बहा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान की यही रफ्तार जारी रही तो पशु चिकित्सालय का भवन भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा। बाबा नारायण दास मंदिर के आसपास भी कटान का असर दिखाई देने लगा है, जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कई दिनों से नदी के मुहाने पर खड़ी मस्जिद का हिस्सा लगातार कटान की चपेट में आ रहा था। शनिवार के बाद नदी की धारा और तेज हुई और रविवार को मस्जिद पूरी तरह नदी की चपेट में आकर समा गई। मस्जिद के नदी में समाने के बाद ग्रामीणों को नदी की कटान की भयावहता का अंदाजा हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि नदी जिस तेजी से जमीन काट रही है, उससे आसपास के घरों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी खतरा बढ़ गया है। लगातार बढ़ती कटान की सूचना पर रविवार को रामनगर एसडीएम आकांक्षा गुप्ता हेतमापुर पहुंचीं और कटान प्रभावित क्षेत्र का मौके पर जायजा लिया। उन्होंने नदी की तेज धारा से हो रहे भू-कटान, संवेदनशील स्थानों और चल रहे बचाव कार्य की जानकारी ली। एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर पत्थर, बोल्डर और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था तेज करने तथा बचाव कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने को कहा। साथ ही नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने तथा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। हेतमापुर में लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए एडीएम निरंकार सिंह, एडिशनल एसपी और सीओ ने भी मौके पर पहुंचकर कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नदी की तेज धारा से हो रहे कटाव और संवेदनशील स्थानों की स्थिति देखी तथा मौके पर मौजूद अधिकारियों से बचाव कार्य की जानकारी ली।अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने, ग्रामीणों को सतर्क रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों के लगातार मौके पर पहुंचने से ग्रामीणों को राहत तो मिली, लेकिन नदी की बढ़ती कटान को लेकर चिंता बरकरार है। उधर, सरयू-घाघरा नदी में बढ़ती कटान और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए रविवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रंजन गौतम ने भी हेतमापुर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कटान प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के साथ ग्रामीणों से भी जानकारी ली।सीएमओ ने बाढ़ राहत केंद्र पर संचालित स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाएं देखीं और स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ और कटान प्रभावित ग्रामीणों को उपचार के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।सरयू-घाघरा की लगातार बढ़ती कटान से उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके घर अभी नदी की चपेट से बचे हुए हैं। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।ग्रामीण दिलीप वर्मा, राजू, मोहम्मद शरीफ, सलीम, रामू, श्यामू, रामराज, राजित, आयुधिया, रघुराई, मैकू लाल, लोटन, दुवारिका, रमेश, लतीफ, सलीम कबाड़ी, सलीम दर्जी, सफीक, सूरज, दीपक, रामपाती और यूनुस आदि का कहना है कि नदी की कटान इतनी तेजी से हो रही है कि कुछ ही घंटों में हालात बदल जा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी का बहाव तेज है और किनारों की मिट्टी कमजोर हो चुकी है। ऐसे में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कटान और बढ़ सकती है।हेतमापुर में एक तरफ मस्जिद नदी में समा चुकी है, दूसरी तरफ पशु चिकित्सालय की बाउंड्री बह चुकी है और बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब कटान पहुंच गई है। ऐसे में ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन द्वारा कराए जा रहे बचाव कार्य पर टिकी है।
    user_Mohd zaid
    Mohd zaid
    रामनगर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी........... वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।
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    वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी...........
वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी?
अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए?
क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है?
और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं?
यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है।
डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल
यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है।
ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है?
हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है।
ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि—
1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं?
2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है?
3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है?
4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए।
मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?
यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं।
अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।?
अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए?
क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है?
और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं?
यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है।
डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल
यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है।
ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है?
हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है।
ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि—
1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं?
2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है?
3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है?
4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए।
मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?
यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं।
अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।
    user_NATIONAL INDIA TV
    NATIONAL INDIA TV
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    11 min ago
  • Two Delhi University students were arrested after two Hindu College students alleged that a group of men in an SUV harassed them, followed them and attempted to pull them into the vehicle in Mukherjee Nagar, northwest Delhi. 📍 What happened? * The incident reportedly occurred around 9:30 PM on September 23 near Hakikat Park. * The women alleged that occupants of a white SUV passed inappropriate comments, abused them after they objected and followed them. * When the women stopped to record the incident, the occupants allegedly tried to pull them into the vehicle. * They fled after one of the women’s friends started filming. 👮 Police action * Abhinav and Abhimanyu, both identified as DU students, were arrested. * Police also seized the SUV allegedly used in the incident. * A third accused, Naman, identified by police as the alleged driver and a DU law student, was still being sought in the reports. * An FIR was registered under Sections 78 (stalking), 79 (words/gestures intended to insult the modesty of a woman) and 3(5) (common intention) of the BNS. Police are also examining the student’s allegation that she and her friend approached multiple police stations before the FIR was registered. #india #news #delhi #student #college
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    Two Delhi University students were arrested after two Hindu College students alleged that a group of men in an SUV harassed them, followed them and attempted to pull them into the vehicle in Mukherjee Nagar, northwest Delhi.

📍 What happened?

* The incident reportedly occurred around 9:30 PM on September 23 near Hakikat Park.
* The women alleged that occupants of a white SUV passed inappropriate comments, abused them after they objected and followed them.
* When the women stopped to record the incident, the occupants allegedly tried to pull them into the vehicle.
* They fled after one of the women’s friends started filming. 

👮 Police action

* Abhinav and Abhimanyu, both identified as DU students, were arrested.
* Police also seized the SUV allegedly used in the incident.
* A third accused, Naman, identified by police as the alleged driver and a DU law student, was still being sought in the reports. 
* An FIR was registered under Sections 78 (stalking), 79 (words/gestures intended to insult the modesty of a woman) and 3(5) (common intention) of the BNS. 

Police are also examining the student’s allegation that she and her friend approached multiple police stations before the FIR was registered.

#india #news #delhi #student #college
    user_आशीष मिश्र बहराइच
    आशीष मिश्र बहराइच
    TV News Anchor महासी, बहराइच, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
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