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वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला सीतापुर में नारेबाजी के साथ जीआईसी चौराहे पहुंचे कार्यकर्ता, सड़क जाम को लेकर पुलिस से हुई झड़प संवाददाता,, नरेश गुप्ता सीतापुर। वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने व गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार दोपहर शहर में प्रदर्शन किया। जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंख अस्पताल स्थित गांधी प्रतिमा के पास एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता लालबाग के रास्ते जीआईसी चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के प्रयास को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कांग्रेस नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप जिला अध्यक्ष डॉ. ममता वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार देश में वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की। शहर अध्यक्ष शिशिर वाजपेई ने कहा कि राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग की। पुतला छीनने को लेकर पुलिस पर आरोप पूर्व जिला अध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पुतला छीनने का प्रयास किया और उसे अपने साथ ले गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी। पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश निषाद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। विनीत दीक्षित ने राहुल गांधी को विपक्ष की आवाज बताया, जबकि पूर्व शहर अध्यक्ष संतोष भार्गव ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को कांग्रेसजनों का दायित्व बताया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद प्रदर्शन में कमला रावत, प्रदीप सिंह चौहान, धीरेश कश्यप, संजय कुमार सनी, आमोद मिश्रा, सतीश अग्निहोत्री, शबनम, शोभित अवस्थी, नरेंद्र वर्मा, अनुपमा द्विवेदी, कृष्णा मुरारी मिश्रा, अयूब अहमद डंपी, इस्लाम अंसारी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

17 hrs ago
user_Naresh Gupta Reporter
Naresh Gupta Reporter
सिधौली, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
17 hrs ago

वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला सीतापुर में नारेबाजी के साथ जीआईसी चौराहे पहुंचे कार्यकर्ता, सड़क जाम को लेकर पुलिस से हुई झड़प संवाददाता,, नरेश गुप्ता सीतापुर। वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने व गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार दोपहर शहर में प्रदर्शन किया। जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंख अस्पताल स्थित गांधी प्रतिमा के पास एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता लालबाग के रास्ते जीआईसी चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के प्रयास को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कांग्रेस नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप जिला अध्यक्ष डॉ. ममता वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार देश में वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की। शहर अध्यक्ष शिशिर वाजपेई ने कहा कि राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग की। पुतला छीनने को लेकर पुलिस पर आरोप पूर्व जिला अध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पुतला छीनने का प्रयास किया और उसे अपने साथ ले गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी। पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश निषाद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। विनीत दीक्षित ने राहुल गांधी को विपक्ष की आवाज बताया, जबकि पूर्व शहर अध्यक्ष संतोष भार्गव ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को कांग्रेसजनों का दायित्व बताया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद प्रदर्शन में कमला रावत, प्रदीप सिंह चौहान, धीरेश कश्यप, संजय कुमार सनी, आमोद मिश्रा, सतीश अग्निहोत्री, शबनम, शोभित अवस्थी, नरेंद्र वर्मा, अनुपमा द्विवेदी, कृष्णा मुरारी मिश्रा, अयूब अहमद डंपी, इस्लाम अंसारी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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    वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला
वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के खिलाफ फूंका पुतला
सीतापुर में नारेबाजी के साथ जीआईसी चौराहे पहुंचे कार्यकर्ता, सड़क जाम को लेकर पुलिस से हुई झड़प
संवाददाता,, नरेश गुप्ता 
सीतापुर। वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने व गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार दोपहर शहर में प्रदर्शन किया। जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंख अस्पताल स्थित गांधी प्रतिमा के पास एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता लालबाग के रास्ते जीआईसी चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका।
प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के प्रयास को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
कांग्रेस नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
जिला अध्यक्ष डॉ. ममता वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार देश में वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की।
शहर अध्यक्ष शिशिर वाजपेई ने कहा कि राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने की मांग की।
पुतला छीनने को लेकर पुलिस पर आरोप
पूर्व जिला अध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पुतला छीनने का प्रयास किया और उसे अपने साथ ले गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी।
पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश निषाद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। विनीत दीक्षित ने राहुल गांधी को विपक्ष की आवाज बताया, जबकि पूर्व शहर अध्यक्ष संतोष भार्गव ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को कांग्रेसजनों का दायित्व बताया।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में कमला रावत, प्रदीप सिंह चौहान, धीरेश कश्यप, संजय कुमार सनी, आमोद मिश्रा, सतीश अग्निहोत्री, शबनम, शोभित अवस्थी, नरेंद्र वर्मा, अनुपमा द्विवेदी, कृष्णा मुरारी मिश्रा, अयूब अहमद डंपी, इस्लाम अंसारी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
    user_Naresh Gupta Reporter
    Naresh Gupta Reporter
    सिधौली, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • 🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏 बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है। 😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है। 🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर 🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏 बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है। 😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है। 🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर
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    🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏
बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है।
🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर
🌊💔 सरयू का रौद्र रूप… आस्था पर मंडराया बड़ा संकट! 🙏
बाराबंकी के हेतमापुर में प्राचीन बाबा नारायण दास मंदिर के मुहाने तक पहुंची सरयू की तेज कटान… हर लहर के साथ मंदिर की नींव पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
😢 जिस धाम में वर्षों से गूंजती रही आस्था की आवाजें, आज उसी धाम को निगलने के लिए नदी की धार बेताब नजर आ रही है।
🚨 एक तरफ उफनती सरयू… दूसरी तरफ सदियों पुराना मंदिर… और बीच में सांसें थामे खड़े श्रद्धालु!#हेतमापुर #बाबानारायणदासमंदिर #सरयू #कटान #बाराबंकी #आस्था_पर_संकट #मंदिर_बचाओ #सरयू_का_कहर
    user_हंसराज वर्मा पत्रकार
    हंसराज वर्मा पत्रकार
    Appliances customer service महमूदाबाद, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।। अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है। सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है। तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई है। अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।
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    जलभराव में डूबी धान की तैयार फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा।।

अगेंथुवा पंचायत के कई गांवों में भारी नुकसान, शाहबाजपुर भी जलभराव की चपेट में
महमूदाबाद। सदरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अगेंथुवा के तराई इलाके में लगातार बारिश के बाद हुए जलभराव से किसानों की तैयार धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। कई खेतों में धान की फसल पानी में डूबी हुई है। तेज हवा और बारिश से पेड़ गिरने के कारण भी नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर सर्वे कराकर फसल क्षति का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार अगेंथुवा पंचायत के सुरखूपुरवा, तुरनी, पासिन पुरवा, अगेंथुवा, खुशरुवा और शाहबाजपुर सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में धान की फसल जलभराव की चपेट में है। किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय खेतों में पानी भरने से लागत डूबने का खतरा बढ़ गया है।
सुरखूपुरवा निवासी मोहम्मद इद्रीश की नौ बीघा, जगदीश की 15 बीघा, संजय की 15 बीघा, मोहम्मद आफाक की तीन बीघा, विसुन कुमार की 15 बीघा, अजय कुमार की 10 बीघा और मोहम्मद याकूब की पांच बीघा फसल पानी में डूबी बताई गई है।
तुरनी में राधेलाल की छह बीघा, किस्मतुल की छह बीघा और जंगली की पांच बीघा फसल प्रभावित हुई है। पासिन पुरवा में रेमेश की बटाई पर लगी 22 बीघा और छोटे लाल की 15 बीघा फसल भी जलमग्न बताई गई है।
अगेंथुवा में कल्लू की तीन बीघा, श्याम लाल की 20 बीघा, सुनीता देवी की पांच बीघा और विमल कुमार की 40 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। खुशरुवा में मोहम्मद इस्लाम की नौ बीघा, अनीस की चार बीघा और राम अकबाल की सात बीघा फसल प्रभावित बताई गई है। शाहबाजपुर गांव में भी जलभराव से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात किसानों ने कही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर मौके पर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो तैयार फसल का नुकसान और बढ़ सकता है।
    user_Sunil Verma
    Sunil Verma
    Farmer महमूदाबाद, सीतापुर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • लखनऊ में चलती कार का वीडियो वायरल तहज़ीब के शहर लखनऊ की सड़कों पर चलती कार में अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, जांच की मांग लखनऊ। राजधानी लखनऊ में चलती कार के अंदर कथित अश्लील हरकत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। वायरल वीडियो में कार के अंदर आपत्तिजनक गतिविधि दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किया गया तथा इसमें शामिल लोगों की पहचान क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों पर संबंधित अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए। मामले में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच के बाद ही घटना की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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    लखनऊ में चलती कार का वीडियो वायरल
तहज़ीब के शहर लखनऊ की सड़कों पर चलती कार में अश्लील हरकत का वीडियो वायरल, जांच की मांग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में चलती कार के अंदर कथित अश्लील हरकत
का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
वायरल वीडियो में कार के अंदर आपत्तिजनक गतिविधि दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किया गया तथा इसमें शामिल लोगों की पहचान क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों पर संबंधित अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए। मामले में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और जांच के बाद ही घटना की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
    user_Zahira Bano
    Zahira Bano
    Media company बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    12 min ago
  • आज दिनांक 28 सितंबर 2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का प्रेस कॉन्फ्रेंस 🐘🐘
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    आज दिनांक 28 सितंबर 2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का प्रेस कॉन्फ्रेंस 🐘🐘
    user_अंकित कुमार
    अंकित कुमार
    Social worker बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    15 min ago
  • वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी........... वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।? अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे। उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था। ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है? उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन? मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए? क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है? और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं? यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है। डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है। ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है? हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई। विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है। ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि— 1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं? 2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है? 3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है? 4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? 5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए। मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है? यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।
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    वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी...........
वर्दी के आदेश का पालन नहीं तो जिम्मेदारी किसकी?
अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए?
क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है?
और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं?
यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है।
डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल
यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है।
ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है?
हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है।
ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि—
1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं?
2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है?
3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है?
4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए।
मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?
यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं।
अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।?
अक्टूबर 2019 के फैसले के बाद एक दिसंबर से लागू हुआ था ट्रैफिक पुलिस का नया ड्रेस कोड, उपनिरीक्षक भी थे दायरे में
लखनऊ। उत्तर प्रदेश यातायात पुलिस में निर्धारित वर्दी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अक्टूबर 2019 में यातायात पुलिस की वर्दी में बदलाव का निर्णय लिया गया था और एक दिसंबर 2019 से नया ड्रेस कोड लागू किया गया था। इसमें यातायात पुलिस के सिपाही से लेकर उपनिरीक्षक और निरीक्षक तक को निर्धारित वर्दी धारण करने के निर्देश दिए गए थे।
उस समय जारी व्यवस्था के मुताबिक यातायात पुलिस के लिए सफेद शर्ट और नेवी ब्लू पैंट, नीली कैप तथा निर्धारित अन्य सामान का ड्रेस कोड तय किया गया था। विशेष रूप से उपनिरीक्षक और निरीक्षक की वर्दी पर यातायात चिह्न लगाए जाने का भी प्रावधान बताया गया था।
ऐसे में लखनऊ यातायात पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक एवं टीआई प्रभारी विनोद कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान में भी यातायात पुलिस के लिए निर्धारित ड्रेस कोड प्रभावी है और यदि है तो उसका अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है?
उपनिरीक्षक ने निर्धारित वर्दी नहीं पहनी तो जिम्मेदार कौन?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी यातायात उपनिरीक्षक द्वारा विभागीय ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या संबंधित अधिकारी को निर्धारित वर्दी पहनने के लिए निर्देश दिए गए?
क्या उन्हें वर्दी से अलग पोशाक धारण करने की कोई लिखित अनुमति प्राप्त है?
और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो क्या संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई की या नहीं?
यही सवाल लखनऊ यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी खड़ा होता है।
डीसीपी ट्रैफिक की जिम्मेदारी पर भी उठेंगे सवाल
यदि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से लागू है और उसके अनुपालन की जिम्मेदारी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर है, तो उसकी निगरानी भी संबंधित कमांड एवं पर्यवेक्षण व्यवस्था का हिस्सा होती है।
ऐसे में यदि किसी उपनिरीक्षक द्वारा लगातार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता है और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा कि क्या इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी डीसीपी ट्रैफिक की भी बनती है?
हालांकि, किसी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने से पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी कब हुई, क्या निर्देश दिए गए और उस पर क्या विभागीय कार्रवाई की गई।
विभागीय आदेश सार्वजनिक करे पुलिस मुख्यालय
उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर विभागीय परिपत्रों और वर्दी से संबंधित आदेशों का अभिलेख उपलब्ध है।
ऐसे में इस पूरे मामले में पारदर्शिता के लिए लखनऊ यातायात पुलिस अथवा पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट करना चाहिए कि—
1. अक्टूबर 2019 में जारी ड्रेस कोड संबंधी आदेश वर्तमान में प्रभावी है या नहीं?
2. यदि प्रभावी है तो यातायात उपनिरीक्षक के लिए निर्धारित वर्दी क्या है?
3. क्या उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह को निर्धारित ड्रेस कोड से अलग वर्दी धारण करने की कोई लिखित अनुमति मिली है?
4. यदि अनुमति नहीं है तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?
5. यदि ड्रेस कोड में बाद में कोई संशोधन हुआ है तो उसका शासनादेश अथवा पुलिस मुख्यालय का आदेश सार्वजनिक किया जाए।
मामला केवल एक पुलिसकर्मी की वर्दी का नहीं है। सवाल यह है कि जब पुलिस मुख्यालय किसी ड्रेस कोड का आदेश जारी करता है तो उसका पालन कराने की जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है?
यदि अधीनस्थ पुलिसकर्मी निर्धारित आदेश का पालन नहीं करता और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से विभागीय अनुशासन और पर्यवेक्षण व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं।
अब देखना यह होगा कि लखनऊ यातायात पुलिस इस मामले में यह स्पष्ट करती है कि उपनिरीक्षक की वर्दी विभागीय नियमों के अनुरूप थी, किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति से थी या फिर निर्धारित ड्रेस कोड का उल्लंघन था।
    user_NATIONAL INDIA TV
    NATIONAL INDIA TV
    Local News Reporter बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    59 min ago
  • हेतमापुर में 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में सवाई नदी का मंदिर पर निशाना बाराबंकी के सूरतगंज क्षेत्र के खेतमापुर में नेपाल से छोड़ा गया पानी और लगातार बारिश से आज नदी किनारे बनी 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में समा चुकी है और नदी ने 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर पर खतरा बना हुआ लगातार हुई कटान से प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और कटान को रोकने के लिए मशीनों के जरिए पत्थर मिट्टी डालकर रोकने का प्रयास किया जा रहा है
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    हेतमापुर में 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में सवाई नदी का मंदिर पर निशाना
बाराबंकी के सूरतगंज क्षेत्र के खेतमापुर में नेपाल से छोड़ा गया पानी  और लगातार बारिश से आज नदी किनारे बनी 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में समा चुकी है और नदी ने 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास  मंदिर पर खतरा बना हुआ  लगातार हुई कटान से प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं  और कटान को रोकने के लिए मशीनों के जरिए पत्थर मिट्टी डालकर रोकने का प्रयास किया जा रहा है
    user_रवि रावत पत्रकार फतेहपुर बाराबंकी
    रवि रावत पत्रकार फतेहपुर बाराबंकी
    फतेहपुर, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • आप सुन रहे हैं इंडिया लाइव न्यूज़। अंकित कुमार के साथ। कमोडिटी बाजार से बड़ी खबर है। सोने और चांदी की कीमतों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी करीब ₹8,500 से ज्यादा टूटकर ₹2,28,600 प्रति किलो पहुंच गई। वहीं 24 कैरेट सोना करीब ₹4,000 गिरकर ₹1,48,115 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम बताया जा रहा है। वैश्विक बाजारों के दबाव और मुनाफावसूली को गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारों की नजर अब सोने-चांदी के भाव पर बनी हुई है। सोना-चांदी के ताजा भाव के लिए जुड़े रहिए इंडिया लाइव न्यूज़ के साथ। मैं हूँ अंकित कुमार। नमस्कार
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    आप सुन रहे हैं इंडिया लाइव न्यूज़। अंकित कुमार के साथ।

कमोडिटी बाजार से बड़ी खबर है। सोने और चांदी की कीमतों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी करीब ₹8,500 से ज्यादा टूटकर ₹2,28,600 प्रति किलो पहुंच गई। वहीं 24 कैरेट सोना करीब ₹4,000 गिरकर ₹1,48,115 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब ₹1,41,000 प्रति 10 ग्राम बताया जा रहा है।

वैश्विक बाजारों के दबाव और मुनाफावसूली को गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। त्योहार और शादी के सीजन से पहले खरीदारों की नजर अब सोने-चांदी के भाव पर बनी हुई है।

सोना-चांदी के ताजा भाव के लिए जुड़े रहिए इंडिया लाइव न्यूज़ के साथ। मैं हूँ अंकित कुमार। नमस्कार
    user_अंकित कुमार
    अंकित कुमार
    Social worker बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    47 min ago
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