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स्टेशन से हाल्ट बना खीरी टाउन, जनता आज भी कर रही इंसाफ का इंतज़ार रिपोर्ट -शहनवाज़ गौरी लखीमपुर खीरी जनपद का कस्बा खीरी टाउन एक ऐसा कस्बा, जहां कभी ब्रिटिश शासनकाल में छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन हुआ करता था। उस समय यह स्टेशन सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि पूरे कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा था। व्यापार, नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हजारों लोग इसी स्टेशन पर निर्भर रहते थे। समय बदला, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने यानी अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। लोगों को उम्मीद जगी कि अब कस्बा खीरी को एक आधुनिक बड़ी लाइन का रेलवे स्टेशन मिलेगा। लोगों ने सोचा कि अब सफर आसान होगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और कस्बे को नई पहचान मिलेगी।लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि बड़ी लाइन बनने के बाद खीरी रेलवे स्टेशन को स्टेशन नहीं बल्कि सिर्फ रेलवे हाल्ट बना दिया जाएगा, लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कस्बे के लोग सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन हुआ, कई दिनों तक अनशन चला। स्थानीय नेताओं ने मंच से आश्वासन दिया कि खीरी का स्टेशन, स्टेशन ही रहेगा, उसे हाल्ट में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा।लोगों ने नेताओं के वादों पर भरोसा किया। धरना खत्म हुआ, अनशन टूटा और लोगों को लगा कि अब न्याय होगा। लेकिन वक्त बीतता गया और नेताओं के वादे भी हवा हो गए। आखिरकार खीरी रेलवे स्टेशन को खीरी टाउन हाल्ट में बदल दिया गया। सिंगल पटरी बिछा दी गई और दोनों तरफ खीरी टाउन हाल्ट का बोर्ड लगा दिया गया, जो आज भी लोगों को अधूरे वादों की याद दिलाता है।रेलवे स्टेशन के हाल्ट में बदलने के बाद सबसे बड़ा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ा। करीब 70 हजार की आबादी वाले इस कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इसी स्टेशन से सफर करते थे। सुबह 5 बजे और 6 बजे की ट्रेन पकड़कर व्यापारी लखनऊ जाते थे, अपना कारोबार संभालते थे और शाम को वापस लौट आते थे। उस समय कई ट्रेनें रुकती थीं और स्टेशन होने की वजह से पर्याप्त समय तक ठहराव भी रहता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ट्रेनें कम हो गई हैं और जो ट्रेनें आती भी हैं, उनका ठहराव एक मिनट से भी कम का होता है। इतनी कम देर में अधिकांश यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाते। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे प्लेटफॉर्म पर ही छूट जाते हैं।स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। न बैठने की समुचित व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा, न शौचालय, और सबसे बड़ी समस्या यात्रियों को समय पर टिकट तक नहीं मिल पाता। यानी नाम के लिए रेलवे हाल्ट, लेकिन सुविधाएं लगभग शून्य।स्थानीय लोग कई बार रेलवे विभाग, जनप्रतिनिधियों, सांसदों और मंत्रियों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। पत्राचार हुआ, शिकायतें हुईं, मीडिया ने भी कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन नतीजा आज भी जस का तस है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर खीरी टाउन रेलवे स्टेशन किन नेताओं की उदासीनता का शिकार हुआ? जब यहां हजारों यात्री रोज सफर करते हैं, जब यह कस्बा व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, जब जनता लगातार मांग कर रही है तो फिर इसे दोबारा रेलवे स्टेशन का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से खीरी टाउन की जनता की सीधी मांग है कि इस उपेक्षित हाल्ट की तरफ ध्यान दिया जाए। यहां ट्रेनों का ठहराव बढ़ाया जाए, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और सबसे महत्वपूर्ण खीरी टाउन हाल्ट को फिर से रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया जाए।क्योंकि विकास की बात तभी पूरी होगी, जब छोटे कस्बों की आवाज भी सुनी जाएगी। खीरी टाउन आज भी अपने हिस्से के उस विकास का इंतजार कर रहा है, जिसका वादा वर्षों पहले किया गया था। #KheriTown #KheriTownRailwayHalt #RailwayStation #LakhimpurKheri #SaveKheriStation #RailwayDevelopment #PublicIssue #GroundReport #UPNews #IndianRailways #RailwayMinistry #PMOIndia #DevelopmentForAll #VoiceOfPeople #JusticeForKheriTown

2 hrs ago
user_Shahnawaz Gauri
Shahnawaz Gauri
Media house लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

स्टेशन से हाल्ट बना खीरी टाउन, जनता आज भी कर रही इंसाफ का इंतज़ार रिपोर्ट -शहनवाज़ गौरी लखीमपुर खीरी जनपद का कस्बा खीरी टाउन एक ऐसा कस्बा, जहां कभी ब्रिटिश शासनकाल में छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन हुआ करता था। उस समय यह स्टेशन सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि पूरे कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा था। व्यापार, नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हजारों लोग इसी स्टेशन पर निर्भर रहते थे। समय बदला, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने यानी अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। लोगों को उम्मीद जगी कि अब कस्बा खीरी को एक आधुनिक बड़ी लाइन का रेलवे स्टेशन मिलेगा। लोगों ने सोचा कि अब सफर आसान होगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और कस्बे को नई पहचान मिलेगी।लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि बड़ी लाइन बनने के बाद खीरी रेलवे स्टेशन को स्टेशन नहीं बल्कि सिर्फ रेलवे हाल्ट बना दिया जाएगा, लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कस्बे के लोग सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन हुआ, कई दिनों तक अनशन चला। स्थानीय नेताओं ने मंच से आश्वासन दिया कि खीरी का स्टेशन, स्टेशन ही रहेगा, उसे हाल्ट में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा।लोगों ने नेताओं के वादों पर भरोसा किया। धरना खत्म हुआ, अनशन टूटा और लोगों को लगा कि अब न्याय होगा। लेकिन वक्त बीतता गया और नेताओं के वादे भी हवा हो गए। आखिरकार खीरी रेलवे स्टेशन को खीरी टाउन हाल्ट में बदल दिया गया। सिंगल पटरी बिछा दी गई और दोनों तरफ खीरी टाउन हाल्ट का बोर्ड लगा दिया गया, जो आज भी लोगों को अधूरे वादों की याद दिलाता है।रेलवे स्टेशन के हाल्ट में बदलने के बाद सबसे बड़ा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ा। करीब 70 हजार की आबादी वाले इस कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इसी स्टेशन से सफर करते थे। सुबह 5 बजे और 6 बजे की ट्रेन पकड़कर व्यापारी लखनऊ जाते थे, अपना कारोबार संभालते थे और शाम को वापस लौट आते थे। उस समय कई ट्रेनें रुकती थीं और स्टेशन होने की वजह से पर्याप्त समय तक ठहराव भी रहता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ट्रेनें कम हो गई हैं और जो ट्रेनें आती भी हैं, उनका ठहराव एक मिनट से भी कम का होता है। इतनी कम देर में अधिकांश यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाते। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे प्लेटफॉर्म पर ही छूट जाते हैं।स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। न बैठने की समुचित व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा, न शौचालय, और सबसे बड़ी समस्या यात्रियों को समय पर टिकट तक नहीं मिल पाता। यानी नाम के लिए रेलवे हाल्ट, लेकिन सुविधाएं लगभग शून्य।स्थानीय लोग कई बार रेलवे विभाग, जनप्रतिनिधियों, सांसदों और मंत्रियों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। पत्राचार हुआ, शिकायतें हुईं, मीडिया ने भी कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन नतीजा आज भी जस का तस है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर खीरी टाउन रेलवे स्टेशन किन नेताओं की उदासीनता का शिकार हुआ? जब यहां हजारों यात्री रोज सफर करते हैं, जब यह कस्बा व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, जब जनता लगातार मांग कर रही है तो फिर इसे दोबारा रेलवे स्टेशन का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से खीरी टाउन की जनता की सीधी मांग है कि इस उपेक्षित हाल्ट की तरफ ध्यान दिया जाए। यहां ट्रेनों का ठहराव बढ़ाया जाए, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और सबसे महत्वपूर्ण खीरी टाउन हाल्ट को फिर से रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया जाए।क्योंकि विकास की बात तभी पूरी होगी, जब छोटे कस्बों की आवाज भी सुनी जाएगी। खीरी टाउन आज भी अपने हिस्से के उस विकास का इंतजार कर रहा है, जिसका वादा वर्षों पहले किया गया था। #KheriTown #KheriTownRailwayHalt #RailwayStation #LakhimpurKheri #SaveKheriStation #RailwayDevelopment #PublicIssue #GroundReport #UPNews #IndianRailways #RailwayMinistry #PMOIndia #DevelopmentForAll #VoiceOfPeople #JusticeForKheriTown

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  • रिपोर्ट -शहनवाज़ गौरी लखीमपुर खीरी जनपद का कस्बा खीरी टाउन एक ऐसा कस्बा, जहां कभी ब्रिटिश शासनकाल में छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन हुआ करता था। उस समय यह स्टेशन सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि पूरे कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा था। व्यापार, नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हजारों लोग इसी स्टेशन पर निर्भर रहते थे। समय बदला, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने यानी अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। लोगों को उम्मीद जगी कि अब कस्बा खीरी को एक आधुनिक बड़ी लाइन का रेलवे स्टेशन मिलेगा। लोगों ने सोचा कि अब सफर आसान होगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और कस्बे को नई पहचान मिलेगी।लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि बड़ी लाइन बनने के बाद खीरी रेलवे स्टेशन को स्टेशन नहीं बल्कि सिर्फ रेलवे हाल्ट बना दिया जाएगा, लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कस्बे के लोग सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन हुआ, कई दिनों तक अनशन चला। स्थानीय नेताओं ने मंच से आश्वासन दिया कि खीरी का स्टेशन, स्टेशन ही रहेगा, उसे हाल्ट में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा।लोगों ने नेताओं के वादों पर भरोसा किया। धरना खत्म हुआ, अनशन टूटा और लोगों को लगा कि अब न्याय होगा। लेकिन वक्त बीतता गया और नेताओं के वादे भी हवा हो गए। आखिरकार खीरी रेलवे स्टेशन को खीरी टाउन हाल्ट में बदल दिया गया। सिंगल पटरी बिछा दी गई और दोनों तरफ खीरी टाउन हाल्ट का बोर्ड लगा दिया गया, जो आज भी लोगों को अधूरे वादों की याद दिलाता है।रेलवे स्टेशन के हाल्ट में बदलने के बाद सबसे बड़ा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ा। करीब 70 हजार की आबादी वाले इस कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इसी स्टेशन से सफर करते थे। सुबह 5 बजे और 6 बजे की ट्रेन पकड़कर व्यापारी लखनऊ जाते थे, अपना कारोबार संभालते थे और शाम को वापस लौट आते थे। उस समय कई ट्रेनें रुकती थीं और स्टेशन होने की वजह से पर्याप्त समय तक ठहराव भी रहता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ट्रेनें कम हो गई हैं और जो ट्रेनें आती भी हैं, उनका ठहराव एक मिनट से भी कम का होता है। इतनी कम देर में अधिकांश यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाते। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे प्लेटफॉर्म पर ही छूट जाते हैं।स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। न बैठने की समुचित व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा, न शौचालय, और सबसे बड़ी समस्या यात्रियों को समय पर टिकट तक नहीं मिल पाता। यानी नाम के लिए रेलवे हाल्ट, लेकिन सुविधाएं लगभग शून्य।स्थानीय लोग कई बार रेलवे विभाग, जनप्रतिनिधियों, सांसदों और मंत्रियों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। पत्राचार हुआ, शिकायतें हुईं, मीडिया ने भी कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन नतीजा आज भी जस का तस है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर खीरी टाउन रेलवे स्टेशन किन नेताओं की उदासीनता का शिकार हुआ? जब यहां हजारों यात्री रोज सफर करते हैं, जब यह कस्बा व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, जब जनता लगातार मांग कर रही है तो फिर इसे दोबारा रेलवे स्टेशन का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से खीरी टाउन की जनता की सीधी मांग है कि इस उपेक्षित हाल्ट की तरफ ध्यान दिया जाए। यहां ट्रेनों का ठहराव बढ़ाया जाए, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और सबसे महत्वपूर्ण खीरी टाउन हाल्ट को फिर से रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया जाए।क्योंकि विकास की बात तभी पूरी होगी, जब छोटे कस्बों की आवाज भी सुनी जाएगी। खीरी टाउन आज भी अपने हिस्से के उस विकास का इंतजार कर रहा है, जिसका वादा वर्षों पहले किया गया था। #KheriTown #KheriTownRailwayHalt #RailwayStation #LakhimpurKheri #SaveKheriStation #RailwayDevelopment #PublicIssue #GroundReport #UPNews #IndianRailways #RailwayMinistry #PMOIndia #DevelopmentForAll #VoiceOfPeople #JusticeForKheriTown
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    रिपोर्ट -शहनवाज़ गौरी
लखीमपुर खीरी जनपद का कस्बा खीरी टाउन एक ऐसा कस्बा, जहां कभी ब्रिटिश शासनकाल में छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन हुआ करता था। उस समय यह स्टेशन सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि पूरे कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा था। व्यापार, नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हजारों लोग इसी स्टेशन पर निर्भर रहते थे। समय बदला, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने यानी अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। लोगों को उम्मीद जगी कि अब कस्बा खीरी को एक आधुनिक बड़ी लाइन का रेलवे स्टेशन मिलेगा। लोगों ने सोचा कि अब सफर आसान होगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और कस्बे को नई पहचान मिलेगी।लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि बड़ी लाइन बनने के बाद खीरी रेलवे स्टेशन को स्टेशन नहीं बल्कि सिर्फ रेलवे हाल्ट बना दिया जाएगा, लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कस्बे के लोग सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन हुआ, कई दिनों तक अनशन चला। स्थानीय नेताओं ने मंच से आश्वासन दिया कि खीरी का स्टेशन, स्टेशन ही रहेगा, उसे हाल्ट में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा।लोगों ने नेताओं के वादों पर भरोसा किया। धरना खत्म हुआ, अनशन टूटा और लोगों को लगा कि अब न्याय होगा। लेकिन वक्त बीतता गया और नेताओं के वादे भी हवा हो गए। आखिरकार खीरी रेलवे स्टेशन को खीरी टाउन हाल्ट में बदल दिया गया। सिंगल पटरी बिछा दी गई और दोनों तरफ खीरी टाउन हाल्ट का बोर्ड लगा दिया गया, जो आज भी लोगों को अधूरे वादों की याद दिलाता है।रेलवे स्टेशन के हाल्ट में बदलने के बाद सबसे बड़ा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ा। करीब 70 हजार की आबादी वाले इस कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इसी स्टेशन से सफर करते थे। सुबह 5 बजे और 6 बजे की ट्रेन पकड़कर व्यापारी लखनऊ जाते थे, अपना कारोबार संभालते थे और शाम को वापस लौट आते थे। उस समय कई ट्रेनें रुकती थीं और स्टेशन होने की वजह से पर्याप्त समय तक ठहराव भी रहता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ट्रेनें कम हो गई हैं और जो ट्रेनें आती भी हैं, उनका ठहराव एक मिनट से भी कम का होता है। इतनी कम देर में अधिकांश यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाते। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे प्लेटफॉर्म पर ही छूट जाते हैं।स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। न बैठने की समुचित व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा, न शौचालय, और सबसे बड़ी समस्या यात्रियों को समय पर टिकट तक नहीं मिल पाता। यानी नाम के लिए रेलवे हाल्ट, लेकिन सुविधाएं लगभग शून्य।स्थानीय लोग कई बार रेलवे विभाग, जनप्रतिनिधियों, सांसदों और मंत्रियों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। पत्राचार हुआ, शिकायतें हुईं, मीडिया ने भी कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन नतीजा आज भी जस का तस है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर खीरी टाउन रेलवे स्टेशन किन नेताओं की उदासीनता का शिकार हुआ? जब यहां हजारों यात्री रोज सफर करते हैं, जब यह कस्बा व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, जब जनता लगातार मांग कर रही है तो फिर इसे दोबारा रेलवे स्टेशन का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से खीरी टाउन की जनता की सीधी मांग है कि इस उपेक्षित हाल्ट की तरफ ध्यान दिया जाए। यहां ट्रेनों का ठहराव बढ़ाया जाए, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और सबसे महत्वपूर्ण खीरी टाउन हाल्ट को फिर से रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया जाए।क्योंकि विकास की बात तभी पूरी होगी, जब छोटे कस्बों की आवाज भी सुनी जाएगी। खीरी टाउन आज भी अपने हिस्से के उस विकास का इंतजार कर रहा है, जिसका वादा वर्षों पहले किया गया था।
#KheriTown
#KheriTownRailwayHalt
#RailwayStation
#LakhimpurKheri
#SaveKheriStation
#RailwayDevelopment
#PublicIssue
#GroundReport
#UPNews
#IndianRailways
#RailwayMinistry
#PMOIndia 
#DevelopmentForAll
#VoiceOfPeople
#JusticeForKheriTown
    user_Shahnawaz Gauri
    Shahnawaz Gauri
    Media house लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • "BJP में PDA के लोग पार्टी छोड़ना चाहते है. पीड़ित है, दुखी है अपमानित हो रहे है वहां. जहां तक गोंडा के पूर्व सांसद का सवाल है. राजनीति में क्या मोड़ आयेगें. अभी एक्सप्रेसवे की बात हो रही है यहां फैंटा नही बनता मिरंडा बनता है. अगली बार जब मैं आऊंगा तो हरदोई का बना हुआ छोटा मिरंडा आपको पिलाऊंगा" - अखिलेश यादव, अध्यक्ष, सपा (बृजभूषण शरण सिंह के समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने के कयासों पर)
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    "BJP में PDA के लोग पार्टी छोड़ना चाहते है. पीड़ित है, दुखी है अपमानित हो रहे है वहां. जहां तक गोंडा के पूर्व सांसद का सवाल है. राजनीति में क्या मोड़ आयेगें. अभी एक्सप्रेसवे की बात हो रही है यहां फैंटा नही बनता मिरंडा बनता है. अगली बार जब मैं आऊंगा तो हरदोई का बना हुआ छोटा मिरंडा आपको पिलाऊंगा"
- अखिलेश यादव, अध्यक्ष, सपा
(बृजभूषण शरण सिंह के समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने के कयासों पर)
    user_प्रेस रिपोर्टर मतलुम सिद्दीक़ी
    प्रेस रिपोर्टर मतलुम सिद्दीक़ी
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by संदीप कुमार शर्मा
    1
    Post by संदीप कुमार शर्मा
    user_संदीप कुमार शर्मा
    संदीप कुमार शर्मा
    Photographer लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • तिकुनिया खीरी/रायपुर में दुर्गा जी की मूर्ति एवं शंकर जी के प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में श्रीमद् भागवत कथा एवं पहले दिन निकाली कलश यात्रा का शुभारंभ रायपुर मंदिर से कलश यात्रा का शुभारंभ 30/4/26 को कमेटी के द्वारा निकाली गई जिसमें माता एवं बहने ने बढ़ चढ़कर भाग लिया कलश यात्रा पैदल रायपुर होते कुल्होरी गांव में होते हुए तिकुनिया कस्बे होते हुए देवी मंदिर से फिर कुल्होरी होते हुए रायपुर मंदिर पर पहुंची जिसमें कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे
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    तिकुनिया खीरी/रायपुर में दुर्गा जी की मूर्ति एवं शंकर जी के प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में श्रीमद् भागवत कथा एवं पहले दिन निकाली कलश यात्रा का शुभारंभ रायपुर मंदिर से कलश यात्रा का शुभारंभ 30/4/26 को कमेटी के द्वारा निकाली गई जिसमें माता एवं बहने ने बढ़ चढ़कर भाग लिया कलश यात्रा पैदल रायपुर होते कुल्होरी गांव में होते हुए तिकुनिया कस्बे होते हुए देवी मंदिर से फिर कुल्होरी होते हुए रायपुर मंदिर पर पहुंची जिसमें कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे
    user_लवकुश कुमार पत्रकार
    लवकुश कुमार पत्रकार
    लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *ब्रेकिंग न्यूज़ औरैया -* औरैया में अचानक बदला मौसम, चली तेज हवा हुई हल्की बारिश। तेज हवा के चलने से नीम का पेड़ गिरा, महिला की दबकर हुई मौत। घटना से गांव में मचा हड़कंप, परिजनों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल। सूचना पर पहुंची पुलिस आवश्यक विधिक कार्रवाई में जुटी। औरैया जनपद के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चांदूपुर ककरैया का मामला।
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    *ब्रेकिंग न्यूज़ औरैया -*
औरैया में अचानक बदला मौसम, चली तेज हवा हुई हल्की बारिश।
तेज हवा के चलने से नीम का पेड़ गिरा, महिला की दबकर हुई मौत।
घटना से गांव में मचा हड़कंप, परिजनों का रो-रोकर हुआ बुरा हाल।
सूचना पर पहुंची पुलिस आवश्यक विधिक कार्रवाई में जुटी।
औरैया जनपद के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चांदूपुर ककरैया का मामला।
    user_Sanjay rathour
    Sanjay rathour
    Tour operator लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • UP में कल आई तेज आंधी की गति कुछ क्षेत्रों में 100 किलोमीटर से अधिक दर्ज की गई ये गति इतनी अधिक थी बड़े बड़े पेड़ तक जड़ से उखड़ गए प्रदेश भर में कल आये तूफान और वर्षा से अब तक कुल 18 लोगों की मौत की खबर है
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    UP में कल आई तेज आंधी की गति कुछ क्षेत्रों में 100 किलोमीटर से अधिक दर्ज की गई
ये गति इतनी अधिक थी बड़े बड़े पेड़ तक जड़ से उखड़ गए
प्रदेश भर में कल आये तूफान और वर्षा से अब तक कुल 18 लोगों की मौत की खबर है
    user_Shoaib Khan
    Shoaib Khan
    Local News Reporter लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • पलिया नगर के मालगोदाम रोड पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलता एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा कथित अस्पताल संचालित हो रहा है, जिस पर न तो कोई नाम-पट्ट लगा है और न ही कहीं अस्पताल का नाम अंकित है। महज एक छोटे से कमरे में टीनशेड के नीचे मरीजों को बेतरतीब ढंग से भर्ती किया जा रहा है। स्थिति यह है कि भर्ती किए गये मरीजों को बेंचों पर लिटाया जा रहा है। न तो वहां समुचित बेड की व्यवस्था है और न ही चादर या अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मरीज बेहद असुविधाजनक हालात में इलाज ले रहे हैं, जो स्वास्थ्य मानकों की खुलेआम अनदेखी को दर्शाता है। इस तथाकथित अस्पताल में न तो किसी प्रकार के मानक पूरे किए जा रहे हैं और न ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यहां मरीजों को भर्ती कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह अवैध रूप से संचालित अस्पताल ऐसी जगह स्थित है, जहां से प्रतिदिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद अब तक इस ओर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ी या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। मामले को लेकर लोगों में आक्रोश है। जनता की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग जांच कराकर तत्काल कार्रवाई करे, ताकि इस तरह के अवैध और मानकविहीन अस्पतालों पर रोक लगाई जा सके और लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।
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    पलिया नगर के मालगोदाम रोड पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलता एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ऐसा कथित अस्पताल संचालित हो रहा है, जिस पर न तो कोई नाम-पट्ट लगा है और न ही कहीं अस्पताल का नाम अंकित है। महज एक छोटे से कमरे में टीनशेड के नीचे मरीजों को बेतरतीब ढंग से भर्ती किया जा रहा है।
स्थिति यह है कि भर्ती किए गये मरीजों को बेंचों पर लिटाया जा रहा है। न तो वहां समुचित बेड की व्यवस्था है और न ही चादर या अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मरीज बेहद असुविधाजनक हालात में इलाज ले रहे हैं, जो स्वास्थ्य मानकों की खुलेआम अनदेखी को दर्शाता है।
इस तथाकथित अस्पताल में न तो किसी प्रकार के मानक पूरे किए जा रहे हैं और न ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यहां मरीजों को भर्ती कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह अवैध रूप से संचालित अस्पताल ऐसी जगह स्थित है, जहां से प्रतिदिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद अब तक इस ओर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ी या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
मामले को लेकर लोगों में आक्रोश है। जनता की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग जांच कराकर तत्काल कार्रवाई करे, ताकि इस तरह के अवैध और मानकविहीन अस्पतालों पर रोक लगाई जा सके और लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।
    user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • Post by संदीप कुमार शर्मा
    1
    Post by संदीप कुमार शर्मा
    user_संदीप कुमार शर्मा
    संदीप कुमार शर्मा
    Photographer लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
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