ईसानगर में गरीब, आशा, मजदूर और किसान बेहाल—सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में, निजी अस्पतालों का बढ़ता जाल किसकी जवाबदेही? सफेदपोश नेताओं की जुमलेबाजी के बीच 81 ग्राम पंचायतों की चीख! ईसानगर में गरीब, आशा, मजदूर और किसान बेहाल—सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में, निजी अस्पतालों का बढ़ता जाल किसकी जवाबदेही? ईसानगर/धौरहरा। मंचों पर विकास के बड़े-बड़े दावे, लेकिन जमीन पर बदहाली का आलम! धौरहरा विधानसभा क्षेत्र के ईसानगर इलाके की 81 ग्राम पंचायतों से उठती समस्याएं उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं, जिनमें क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलने की बात कही जाती है। गरीब आदमी बीमारी में इलाज के लिए भटक रहा है, आशा कार्यकर्ता अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं, मजदूर और किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह फैलते निजी अस्पताल और क्लीनिक ग्रामीणों के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़े हैं। क्या सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी कमजोर है कि गरीब को मजबूरी में निजी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाना पड़े? सांसद-विधायक से सीधा सवाल—जनता की सुध कौन लेगा? जब जनता समस्याओं के साथ खड़ी है तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी आखिर कहां है? सांसद और विधायक क्षेत्र की इन समस्याओं पर कब खुलकर जवाब देंगे? पीएचसी/सीएचसी की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वास्थ्य विभाग और अधीक्षक की जवाबदेही तय क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या गरीब अपनी समस्या बताने के लिए भी डरे? क्या अपने हक की आवाज उठाना गुनाह है? यदि किसी गरीब, मजदूर, किसान या आशा कार्यकर्ता को अपनी समस्या उठाने पर डराने, दबाने या उसके साथ बल प्रयोग किए जाने का आरोप सामने आता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा गंभीर सवाल है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। बाढ़ पीड़ितों की हालत भी सवालों के घेरे में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के सामने जीवन बचाने और दोबारा बसने की चुनौती है। ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी योजनाएं और राहत आखिर कागज से निकलकर जमीन तक कब पहुंचेंगी? अगर 81 ग्राम पंचायतों की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है, तो फिर विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हक की आवाज न्यूज़ चैनल का सवाल बेहद सीधा है— जुमले कब खत्म होंगे और जमीन पर व्यवस्था कब उतरेगी? गरीब कब तक अपने हक के लिए भटकता रहेगा? निजी अस्पतालों के बढ़ते जाल के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा? 81 ग्राम पंचायतों की बदहाली का जिम्मेदार कौन है? जनता वोट देती है, टैक्स देती है और व्यवस्था चलाती है— तो फिर जनता को अपने ही अधिकारों के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़े? हक की आवाज न्यूज़ चैनल जनहित • जनसेवा • निर्भीक पत्रकारिता किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं—सवाल व्यवस्था से है और जवाब जनता के सामने चाहिए।
ईसानगर में गरीब, आशा, मजदूर और किसान बेहाल—सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में, निजी अस्पतालों का बढ़ता जाल किसकी जवाबदेही? सफेदपोश नेताओं की जुमलेबाजी के बीच 81 ग्राम पंचायतों की चीख! ईसानगर में गरीब, आशा, मजदूर और किसान बेहाल—सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में, निजी अस्पतालों का बढ़ता जाल किसकी जवाबदेही? ईसानगर/धौरहरा। मंचों पर विकास के बड़े-बड़े दावे, लेकिन जमीन पर बदहाली का आलम! धौरहरा विधानसभा क्षेत्र के ईसानगर इलाके की 81 ग्राम पंचायतों से उठती समस्याएं उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं, जिनमें क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलने की बात कही जाती है। गरीब आदमी बीमारी में इलाज के लिए भटक रहा है, आशा कार्यकर्ता अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं, मजदूर और किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह फैलते निजी अस्पताल और क्लीनिक ग्रामीणों के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़े हैं। क्या सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी कमजोर है कि गरीब को मजबूरी में निजी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाना पड़े? सांसद-विधायक से सीधा सवाल—जनता की सुध कौन लेगा? जब जनता समस्याओं के साथ खड़ी है तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी आखिर कहां है? सांसद और विधायक क्षेत्र की इन समस्याओं पर कब खुलकर जवाब देंगे? पीएचसी/सीएचसी की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वास्थ्य विभाग और अधीक्षक की जवाबदेही तय क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या गरीब अपनी समस्या बताने के लिए भी डरे? क्या अपने हक की आवाज उठाना गुनाह है? यदि किसी गरीब, मजदूर, किसान या आशा कार्यकर्ता को अपनी समस्या उठाने पर डराने, दबाने या उसके साथ बल प्रयोग किए जाने का आरोप सामने आता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा गंभीर सवाल है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। बाढ़ पीड़ितों की हालत भी सवालों के घेरे में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के सामने जीवन बचाने और दोबारा बसने की चुनौती है। ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी योजनाएं और राहत आखिर कागज से निकलकर जमीन तक कब पहुंचेंगी? अगर 81 ग्राम पंचायतों की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है, तो फिर विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हक की आवाज न्यूज़ चैनल का सवाल बेहद सीधा है— जुमले कब खत्म होंगे और जमीन पर व्यवस्था कब उतरेगी? गरीब कब तक अपने हक के लिए भटकता रहेगा? निजी अस्पतालों के बढ़ते जाल के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा? 81 ग्राम पंचायतों की बदहाली का जिम्मेदार कौन है? जनता वोट देती है, टैक्स देती है और व्यवस्था चलाती है— तो फिर जनता को अपने ही अधिकारों के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़े? हक की आवाज न्यूज़ चैनल जनहित • जनसेवा • निर्भीक पत्रकारिता किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं—सवाल व्यवस्था से है और जवाब जनता के सामने चाहिए।
- सिसैया खुर्द में देर रात पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामा, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों से मारपीट का दावा, 16 लोगों के घायल होने की बात; एएसपी पूर्वी ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से की पूछताछ धौरहरा-खीरी। धौरहरा क्षेत्र के सिसैया खुर्द गांव में सोमवार की देर रात पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर मामला गरमा गया है। ग्रामीणों ने पुलिस पर घरों में घुसकर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई में करीब 16 लोग घायल हुए, जिन्हें देर रात उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक सोमवार की रात धौरहरा पुलिस चार पहिया वाहनों से गांव पहुंची। आरोप है कि पुलिस के पहुंचते ही गांव की बिजली काट दी गई और इसके बाद कई ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। ग्रामीणों का कहना है कि कथित कार्रवाई के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी चोटें आईं। प्रदर्शन के बाद कार्रवाई का आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाल ही में विधायक के खिलाफ गांव में प्रदर्शन किया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि इसी घटनाक्रम के बाद पुलिस गांव पहुंची और कथित रूप से सख्ती की गई। हालांकि प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बीच वास्तविक संबंध क्या था, यह जांच का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोग अपने घरों से निकलकर इधर-उधर भागने लगे। ग्रामीणों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। एएसपी पूर्वी गांव पहुंचे, ग्रामीणों से की पूछताछ मामला सामने आने के बाद एएसपी पूर्वी गौतम गांव पहुंचे और ग्रामीणों से पूरे घटनाक्रम के संबंध में जानकारी ली। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी शिकायतें रखीं। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि पुलिस के वाहन गांव में पहुंचते ही कथित रूप से लाठियां बरसाई गईं। उनका आरोप है कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। ग्रामीणों ने अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 16 लोगों के घायल होने का दावा ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस की कथित पिटाई में लगभग 16 लोग घायल हुए। घायलों को उसी रात सीएचसी ले जाया गया, जहां उनका उपचार कराया गया। अब ग्रामीण इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस के पक्ष की भी होगी अहम भूमिका वहीं, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। पुलिस की ओर से कार्रवाई की वजह, मौके की परिस्थितियों और बल प्रयोग के संबंध में क्या तथ्य सामने रखे जाते हैं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। ग्रामीणों का आरोप है कि इंस्पेक्टर धौरहरा पूरे मामले में खुद को बचाने के लिए घटनाक्रम को अलग तरीके से पेश कर रहे हैं। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। निष्पक्ष जांच की मांग सिसैया खुर्द प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोमवार की रात गांव में वास्तव में क्या हुआ और पुलिस को वहां किस परिस्थिति में कार्रवाई करनी पड़ी। ग्रामीणों के आरोप, घायलों के मेडिकल रिकॉर्ड, मौके पर मौजूद लोगों के बयान तथा पुलिस का आधिकारिक पक्ष—इन सभी के आधार पर निष्पक्ष जांच से ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी पुलिसकर्मी की ओर से नियमों का उल्लंघन या अनावश्यक बल प्रयोग सामने आता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। नोट: इस खबर में मारपीट और पुलिस कार्रवाई से संबंधित बातें ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच/आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम तथ्य स्पष्ट होंगे।1
- ईसानगर में गरीब, आशा, मजदूर और किसान बेहाल—सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में, निजी अस्पतालों का बढ़ता जाल किसकी जवाबदेही? सफेदपोश नेताओं की जुमलेबाजी के बीच 81 ग्राम पंचायतों की चीख! ईसानगर में गरीब, आशा, मजदूर और किसान बेहाल—सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में, निजी अस्पतालों का बढ़ता जाल किसकी जवाबदेही? ईसानगर/धौरहरा। मंचों पर विकास के बड़े-बड़े दावे, लेकिन जमीन पर बदहाली का आलम! धौरहरा विधानसभा क्षेत्र के ईसानगर इलाके की 81 ग्राम पंचायतों से उठती समस्याएं उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं, जिनमें क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलने की बात कही जाती है। गरीब आदमी बीमारी में इलाज के लिए भटक रहा है, आशा कार्यकर्ता अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं, मजदूर और किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह फैलते निजी अस्पताल और क्लीनिक ग्रामीणों के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़े हैं। क्या सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी कमजोर है कि गरीब को मजबूरी में निजी अस्पतालों का दरवाजा खटखटाना पड़े? सांसद-विधायक से सीधा सवाल—जनता की सुध कौन लेगा? जब जनता समस्याओं के साथ खड़ी है तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी आखिर कहां है? सांसद और विधायक क्षेत्र की इन समस्याओं पर कब खुलकर जवाब देंगे? पीएचसी/सीएचसी की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वास्थ्य विभाग और अधीक्षक की जवाबदेही तय क्यों नहीं होनी चाहिए? क्या गरीब अपनी समस्या बताने के लिए भी डरे? क्या अपने हक की आवाज उठाना गुनाह है? यदि किसी गरीब, मजदूर, किसान या आशा कार्यकर्ता को अपनी समस्या उठाने पर डराने, दबाने या उसके साथ बल प्रयोग किए जाने का आरोप सामने आता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा गंभीर सवाल है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। बाढ़ पीड़ितों की हालत भी सवालों के घेरे में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के सामने जीवन बचाने और दोबारा बसने की चुनौती है। ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी योजनाएं और राहत आखिर कागज से निकलकर जमीन तक कब पहुंचेंगी? अगर 81 ग्राम पंचायतों की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है, तो फिर विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हक की आवाज न्यूज़ चैनल का सवाल बेहद सीधा है— जुमले कब खत्म होंगे और जमीन पर व्यवस्था कब उतरेगी? गरीब कब तक अपने हक के लिए भटकता रहेगा? निजी अस्पतालों के बढ़ते जाल के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा? 81 ग्राम पंचायतों की बदहाली का जिम्मेदार कौन है? जनता वोट देती है, टैक्स देती है और व्यवस्था चलाती है— तो फिर जनता को अपने ही अधिकारों के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़े? हक की आवाज न्यूज़ चैनल जनहित • जनसेवा • निर्भीक पत्रकारिता किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं—सवाल व्यवस्था से है और जवाब जनता के सामने चाहिए।1
- 🔥 धौरहरा विधानसभा 141 🗳️ निर्दलीय प्रत्याशी ✊ न पार्टी का दबाव, न किसी का डर 📢 जनता की आवाज़ ही मेरी ताकत 🌾 किसान • मजदूर • नौजवान की लड़ाई 🤝 जनता के बीच, जनता के साथ 🔥 धौरहरा विधानसभा 141 🗳️ निर्दलीय प्रत्याशी ✊ न पार्टी का दबाव, न किसी का डर 📢 जनता की आवाज़ ही मेरी ताकत 🌾 किसान • मजदूर • नौजवान की लड़ाई 🤝 जनता के बीच, जनता के साथ1
- कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में दो अलग-अलग अभियानों में दो मगरमच्छों का सुरक्षित रेस्क्यू,,,, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में दो अलग-अलग अभियानों में दो मगरमच्छों का सुरक्षित रेस्क्यू,,,, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग की वन विभाग टीम ने आज दो अलग-अलग घटनाओं में रिहाइशी इलाकों से दो मगरमच्छों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया है। 1. ककरहा रेंज (पैरुआ गांव): आज तड़के लगभग 3:45 बजे पैरुआ गांव में एक घर के अंदर मगरमच्छ घुसने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सुबह 5:30 बजे तक मगरमच्छ को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। तत्पश्चात उसे भीऊरवीर घाट नहर में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया। 2. मोतीपुर रेंज (मिहीपुरवा नगर पंचायत): मिहीपुरवा नगर पंचायत के घनी आबादी वाले क्षेत्र में मगरमच्छ के भटक कर आ जाने की शिकायतें मिलने के बाद, वन विभाग द्वारा तीन दिन पूर्व एक मगरमच्छ पकड़ने का पिंजरा (crocodile trapping cage) लगाया गया था। आज 15 सितंबर की सुबह मगरमच्छ पिंजरे में सुरक्षित रूप से कैद हो गया, जिसे बाद में उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। जनहित में अपील एवं सुरक्षा सलाह बाढ़ के मौसम के कारण जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ अक्सर भटक कर ग्रामीण और शहरी रिहाइशी इलाकों में पहुंच रहे हैं। वन विभाग समस्त नागरिकों से निम्नलिखित सावधानियां बरतने की अपील करता है: 1. जल निकायों से दूर रहें: बाढ़ के पानी, जलमग्न रास्तों और नदी-नालों के किनारे जाने से बचें। 2. सतर्कता बरतें: मवेशियों और पालतू जानवरों को पानी के स्रोतों के पास न जाने दें। 3. तत्काल सूचना दें: मगरमच्छ दिखने पर उसे छेड़ने या पकड़ने का प्रयास बिल्कुल न करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग से संपर्क करें।2
- फूलबेहड़ में सड़क हादसा: एक की मौत, स्कूल जा रही छात्रा घायल लखीमपुर खीरी फूलबेहड़ क्षेत्र में फूलबेहड़ और सरवा के बीच सड़क हादसा हो गया। स्कूल जा रही छात्रा को मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि छात्रा घायल बताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।1
- उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बर्तन व्यापारी स्वर्गीय विनोद साहनी हत्याकांड के बाद सिराथू से विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल पुलिस को चकमा देकर पीड़ित परिवार से मिलने उनके आवास पर पहुँचीं। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार, प्रशासन और कानून व्यवस्था पर कड़ा हमला बोला। मुख्य बिंदु और प्रमुख बयान: कानून-व्यवस्था पर हमला: पल्लवी पटेल ने कहा कि प्रदेश में आतंकवादियों से ज़्यादा खतरा "जातिवादियों" से है। सत्ता-संरक्षित लोग दलितों, पिछड़ों और वंचितों को निशाना बना रहे हैं और सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है। कार्रवाई को अपर्याप्त बताया: उन्होंने कहा कि केवल चार लोगों की गिरफ्तारी या पुलिस अधिकारियों के निलंबन से परिवार को न्याय नहीं मिलेगा। आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रमुख माँगे: पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। पूरे परिवार को सुरक्षा और शस्त्र लाइसेंस मुहैया कराया जाए। प्रशासनिक घेराबंदी को छकाया: गोंडा प्रशासन और पुलिस नेताओं को पहुँचने से रोकने के लिए मुस्तैद थी (चंद्रशेखर आजाद और अजय राय को रास्ते में ही रोक लिया गया था), लेकिन पल्लवी पटेल चकमा देकर विनोद साहनी की पत्नी और बच्चों से मिलने में सफल रहीं और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया।1
- लखीमपुर में बड़े धूमधाम से मनाई गई है ऋषि पंचमी महिलाओं ने रखा उपवास और संतों का लिया आशीर्वाद लखीमपुर में आज दिनांक 15 सितंबर 2026 को ऋषि पंचमी का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शिव मंदिर में पहुंचकर ब्राह्मण और पुजारी का और संतों का लिया आशीर्वाद1
- मानव स्वास्थ के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं मिलेट्स उत्पाद: डीएम मिलेट्स स्टोर का डीएम ने किया निरीक्षण,,,,, बहराइच जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने उप कृषि निदेशक विनय कुमार वर्मा व जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी के साथ किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय के निकट महाराणा प्रताप चौक पर उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम द्वारा वित्तपोषित मिलेट्स स्टोर का निरीक्षण किया। मिलेट्स स्टोर पहुंचने पर संचालक श्रीमती पूनम सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट का डीएम का स्वागत किया तथा स्टोर पर उपलब्ध उत्पादों के बारे में जानकारी प्रदान की। उल्लेखनीय है कि माह जुलाई में ग्राम बेड़नापुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा मिलेट्स स्टोर को अनुदान के रूप में रू. 20 लाख की धनराशि का डेमो चेक प्रदान किया गया था। मिलेट्स स्टोर के निरीक्षण के दौरान उप कृषि निदेशक श्री वर्मा ने बताया कि आमजनमानस तक जनपद के किसानों द्वारा उत्पादित मिलेट्स उत्पादों जैसे चना, ज्वार, बाजरा, कोदो, सांवा, रागी, कुटकी, मक्का, शुद्ध तेल, घी, बेसन, आंटा इत्यादि की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु मिलेट्स स्टोर की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि मिलेट्स स्टोर स्थापित होने से जिले के उपभोक्ताओं को सुगमता के साथ मिलेट्स उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। श्री वर्मा ने बताया कि मानव स्वास्थ्य के लिए मिलेट्स उत्पाद अत्यन्त उपयोगी हैं। मानव स्वास्थ के लिए श्री अन्न की उपयोगिता को देखते हुए जिलाधिकारी श्री पाण्डेय ने निर्देश दिया कि आमजनमानस विशेषकर आज की युवा पीढ़ी को रोज़मर्रा की जिन्दगी में फास्ट फूड के स्थान श्री अन्न का उपयोग करने हेतु प्रेरित किया जाय।4