*छावनी जन आंदोलन समिति ने जबलपुर केंट बोर्ड सीईओ को 10 सूत्रीय मांगों का चेतावनी पत्र सौंपा।* छावनी जन आंदोलन समिति,जबलपुर द्वारा छावनी क्षेत्र के निवासियों, व्यापारियों एवं आम नागरिकों की लंबे समय से लंबित एवं गंभीर समस्याओं के समाधान हेतु यह 10 सूत्रीय मांग पत्र केंट बोर्ड सीईओ राजीव कुमार को चेतावनी पत्र सौंपा एवं विस्तार से छावनी क्षेत्र की जनता और व्यापारियों की समस्याओं को रखा तथा निम्नलिखित मांगों पर शीघ्र कार्यवाही की मांग की गई— 1. छावनी परिषद में बकाया टैक्स पर लगाए जा रहे ब्याज को पूर्णतः माफ किया जाए तथा टैक्स भुगतान के लिए नकद जमा करने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए। 2. शासकीय दुकानों का किराया छावनी परिषद के निर्धारित नियमों के अंतर्गत ही बढ़ाया जाए तथा ट्रेड लाइसेंस जारी करने में पारदर्शिता और नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। 3. छावनी क्षेत्र के निवासियों के मकानों पर लगाए गए एरियर्स (बकाया राशि) को जनहित में समाप्त किया जाए। 4. छावनी परिषद के अस्पताल में मरीजों से लिए जाने वाले जांच/परीक्षण पर्ची शुल्क को कम कर पूर्व की भांति 10/- रु रखा जाए तथा ऑफलाइन व्यवस्था पुनः लागू की जाए। 5. छावनी क्षेत्र में मकानों की मरम्मत अथवा छोटे निर्माण कार्य के दौरान की जाने वाली सीलिंग की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए। 6. बगीचा, बंगला एवं कंपाउंड एरिया की अदला-बदली से संबंधित वर्ष 2018 से लंबित प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए। 7. छावनी क्षेत्र के फुटपाथ एवं रेहड़ी-पटरी के गरीब व्यापारियों को आजीविका चलाने हेतु दुकान लगाने की अनुमति प्रदान की जाए। 8. माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अवैध रूप से स्थापित हुए यूनिपोल को तत्काल हटाया जाए । 9. केंट बोर्ड द्वारा रजिस्ट्री पर रोक हटाई जाए इससे शासन प्रशासन को भी राजस्व की हानि हो रही है और केंट बोर्ड की जनता भी परेशान हैं । 10. विगत 5 वर्षों में जब से केंट बोर्ड भंग हुआ है , बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर एजेंडे की सभी कॉपी केंट बोर्ड की वेव साइट पर अपलोड की जाएं । उपरोक्त सभी मांगों को केंट बोर्ड सीईओ राजीव कुमार ने गंभीरता से सुना एवं सकारात्मक माहौल में छावनी जन आंदोलन समिति सदस्यों को आश्वासन दिया कि शीघ्र ही वह इन समस्याओं का समाधान करेंगे जिससे छावनी क्षेत्र की जनता और व्यापारियों को राहत मिलेगी।अंत में छावनी जन आंदोलन समिति ने 15 दिन की चेतावनी देते हुए कहा कि आप इन सभी समस्याओं का शीघ्र निराकरण करें जिससे जनता में आक्रोश व्याप्त है उसे राहत मिले। इस छावनी जन आंदोलन समिति को भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, जय महाकाल संघ, अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल, छावनी व्यापारी संघ, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय छावनी विकास जन मंच तथा छावनी क्षेत्र के नागरिकों का व्यापक समर्थन प्राप्त है। चेतावनी पत्र सौंपने वालों में कन्हैया तिवारी,ऐड.प्रणव अवस्थी,अभिषेक चौकसे,नकुल गुप्ता,डॉ. ऋषि बावरिया,एड द्वारका वर्मा,ऐड.चैतन्य चंसोरिया,नागेश केसरवानी,बाबू अन्ना,राजेश कुशवाहा,पंकज गुप्ता, भागचंद पटेल, टिन्नू सोनी, राहुल रजक, जयराज पिल्ले, सौरभ अग्रवाल, राजकुमार यादव, दीपक पासी इत्यादि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
*छावनी जन आंदोलन समिति ने जबलपुर केंट बोर्ड सीईओ को 10 सूत्रीय मांगों का चेतावनी पत्र सौंपा।* छावनी जन आंदोलन समिति,जबलपुर द्वारा छावनी क्षेत्र के निवासियों, व्यापारियों एवं आम नागरिकों की लंबे समय से लंबित एवं गंभीर समस्याओं के समाधान हेतु यह 10 सूत्रीय मांग पत्र केंट बोर्ड सीईओ राजीव कुमार को चेतावनी पत्र सौंपा एवं विस्तार से छावनी क्षेत्र की जनता और व्यापारियों की समस्याओं को रखा तथा निम्नलिखित मांगों पर शीघ्र कार्यवाही की मांग की गई— 1. छावनी परिषद में बकाया टैक्स पर लगाए जा रहे ब्याज को पूर्णतः माफ किया जाए तथा टैक्स भुगतान के लिए नकद जमा करने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए। 2. शासकीय दुकानों का किराया छावनी परिषद के निर्धारित नियमों के अंतर्गत
ही बढ़ाया जाए तथा ट्रेड लाइसेंस जारी करने में पारदर्शिता और नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। 3. छावनी क्षेत्र के निवासियों के मकानों पर लगाए गए एरियर्स (बकाया राशि) को जनहित में समाप्त किया जाए। 4. छावनी परिषद के अस्पताल में मरीजों से लिए जाने वाले जांच/परीक्षण पर्ची शुल्क को कम कर पूर्व की भांति 10/- रु रखा जाए तथा ऑफलाइन व्यवस्था पुनः लागू की जाए। 5. छावनी क्षेत्र में मकानों की मरम्मत अथवा छोटे निर्माण कार्य के दौरान की जाने वाली सीलिंग की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए। 6. बगीचा, बंगला एवं कंपाउंड एरिया की अदला-बदली से संबंधित वर्ष 2018 से लंबित प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए। 7. छावनी क्षेत्र के फुटपाथ एवं रेहड़ी-पटरी के गरीब व्यापारियों को आजीविका
चलाने हेतु दुकान लगाने की अनुमति प्रदान की जाए। 8. माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अवैध रूप से स्थापित हुए यूनिपोल को तत्काल हटाया जाए । 9. केंट बोर्ड द्वारा रजिस्ट्री पर रोक हटाई जाए इससे शासन प्रशासन को भी राजस्व की हानि हो रही है और केंट बोर्ड की जनता भी परेशान हैं । 10. विगत 5 वर्षों में जब से केंट बोर्ड भंग हुआ है , बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर एजेंडे की सभी कॉपी केंट बोर्ड की वेव साइट पर अपलोड की जाएं । उपरोक्त सभी मांगों को केंट बोर्ड सीईओ राजीव कुमार ने गंभीरता से सुना एवं सकारात्मक माहौल में छावनी जन आंदोलन समिति सदस्यों को आश्वासन दिया कि शीघ्र ही वह इन समस्याओं का समाधान करेंगे
जिससे छावनी क्षेत्र की जनता और व्यापारियों को राहत मिलेगी।अंत में छावनी जन आंदोलन समिति ने 15 दिन की चेतावनी देते हुए कहा कि आप इन सभी समस्याओं का शीघ्र निराकरण करें जिससे जनता में आक्रोश व्याप्त है उसे राहत मिले। इस छावनी जन आंदोलन समिति को भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, जय महाकाल संघ, अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल, छावनी व्यापारी संघ, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय छावनी विकास जन मंच तथा छावनी क्षेत्र के नागरिकों का व्यापक समर्थन प्राप्त है। चेतावनी पत्र सौंपने वालों में कन्हैया तिवारी,ऐड.प्रणव अवस्थी,अभिषेक चौकसे,नकुल गुप्ता,डॉ. ऋषि बावरिया,एड द्वारका वर्मा,ऐड.चैतन्य चंसोरिया,नागेश केसरवानी,बाबू अन्ना,राजेश कुशवाहा,पंकज गुप्ता, भागचंद पटेल, टिन्नू सोनी, राहुल रजक, जयराज पिल्ले, सौरभ अग्रवाल, राजकुमार यादव, दीपक पासी इत्यादि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
- छावनी जन आंदोलन समिति,जबलपुर द्वारा छावनी क्षेत्र के निवासियों, व्यापारियों एवं आम नागरिकों की लंबे समय से लंबित एवं गंभीर समस्याओं के समाधान हेतु यह 10 सूत्रीय मांग पत्र केंट बोर्ड सीईओ राजीव कुमार को चेतावनी पत्र सौंपा एवं विस्तार से छावनी क्षेत्र की जनता और व्यापारियों की समस्याओं को रखा तथा निम्नलिखित मांगों पर शीघ्र कार्यवाही की मांग की गई— 1. छावनी परिषद में बकाया टैक्स पर लगाए जा रहे ब्याज को पूर्णतः माफ किया जाए तथा टैक्स भुगतान के लिए नकद जमा करने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए। 2. शासकीय दुकानों का किराया छावनी परिषद के निर्धारित नियमों के अंतर्गत ही बढ़ाया जाए तथा ट्रेड लाइसेंस जारी करने में पारदर्शिता और नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। 3. छावनी क्षेत्र के निवासियों के मकानों पर लगाए गए एरियर्स (बकाया राशि) को जनहित में समाप्त किया जाए। 4. छावनी परिषद के अस्पताल में मरीजों से लिए जाने वाले जांच/परीक्षण पर्ची शुल्क को कम कर पूर्व की भांति 10/- रु रखा जाए तथा ऑफलाइन व्यवस्था पुनः लागू की जाए। 5. छावनी क्षेत्र में मकानों की मरम्मत अथवा छोटे निर्माण कार्य के दौरान की जाने वाली सीलिंग की कार्रवाई तत्काल बंद की जाए। 6. बगीचा, बंगला एवं कंपाउंड एरिया की अदला-बदली से संबंधित वर्ष 2018 से लंबित प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए। 7. छावनी क्षेत्र के फुटपाथ एवं रेहड़ी-पटरी के गरीब व्यापारियों को आजीविका चलाने हेतु दुकान लगाने की अनुमति प्रदान की जाए। 8. माननीय सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अवैध रूप से स्थापित हुए यूनिपोल को तत्काल हटाया जाए । 9. केंट बोर्ड द्वारा रजिस्ट्री पर रोक हटाई जाए इससे शासन प्रशासन को भी राजस्व की हानि हो रही है और केंट बोर्ड की जनता भी परेशान हैं । 10. विगत 5 वर्षों में जब से केंट बोर्ड भंग हुआ है , बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर एजेंडे की सभी कॉपी केंट बोर्ड की वेव साइट पर अपलोड की जाएं । उपरोक्त सभी मांगों को केंट बोर्ड सीईओ राजीव कुमार ने गंभीरता से सुना एवं सकारात्मक माहौल में छावनी जन आंदोलन समिति सदस्यों को आश्वासन दिया कि शीघ्र ही वह इन समस्याओं का समाधान करेंगे जिससे छावनी क्षेत्र की जनता और व्यापारियों को राहत मिलेगी।अंत में छावनी जन आंदोलन समिति ने 15 दिन की चेतावनी देते हुए कहा कि आप इन सभी समस्याओं का शीघ्र निराकरण करें जिससे जनता में आक्रोश व्याप्त है उसे राहत मिले। इस छावनी जन आंदोलन समिति को भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, जय महाकाल संघ, अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल, छावनी व्यापारी संघ, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय छावनी विकास जन मंच तथा छावनी क्षेत्र के नागरिकों का व्यापक समर्थन प्राप्त है। चेतावनी पत्र सौंपने वालों में कन्हैया तिवारी,ऐड.प्रणव अवस्थी,अभिषेक चौकसे,नकुल गुप्ता,डॉ. ऋषि बावरिया,एड द्वारका वर्मा,ऐड.चैतन्य चंसोरिया,नागेश केसरवानी,बाबू अन्ना,राजेश कुशवाहा,पंकज गुप्ता, भागचंद पटेल, टिन्नू सोनी, राहुल रजक, जयराज पिल्ले, सौरभ अग्रवाल, राजकुमार यादव, दीपक पासी इत्यादि कार्यकर्ता उपस्थित थे।4
- सारथियों का पैदल मार्च, हिला देगा भोपाल का सिंहासन! अमरकंटक से उठी क्रांति की चिंगारी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सडक़ों पर उतरा ड्राइवर महासंघ उमरिया पहुंचा जत्था, 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास का होगा घेराव उमरिया//जब देश और प्रदेश की धडक़नें यानी वाहनों के पहिये थामने की चेतावनी दी जाए, तो समझ लेना चाहिए कि सब्र का बांध टूट चुका है। मध्य प्रदेश ड्राइवर महासंघ ने अपनी उपेक्षा और जायज हक की लड़ाई के लिए शंखनाद कर दिया है। 8 मार्च को पवित्र नगरी अमरकंटक से शुरू हुई यह पदयात्रा अब न्याय की मशाल बनकर राजधानी भोपाल की ओर बढ़ रही है। बुधवार को यह जत्था उमरिया पहुँचा, जहाँ ड्राइवरों के तेवर देख साफ हो गया कि इस बार वे केवल ज्ञापन देने नहीं, बल्कि आर-पार का फैसला करने जा रहे हैं। अब मैदान में होगा मुकाबला ड्राइवर महासंघ के पदाधिकारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि अब तक दर्जनों बार जिलों के कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन शासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी। अधिकारियों ने इन मांगों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। अब प्रदेश के हजारों ड्राइवर एक होकर 8 अप्रैल को भोपाल के जमुरी मैदान में जुटेंगे और वहां से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी टालमटोल हुई, तो पूरे मध्य प्रदेश में चक्का जाम कर दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सम्मान और सुरक्षा की जंग ड्राइवर महासंघ ने सरकार के सामने अपनी 14 प्रमुख मांगें रखी हैं, जो उनके वजूद से जुड़ी हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 106/2 को पूर्णत: निरस्त करने की मांग। दुर्घटना में मृत्यु पर 20 लाख, अपंगता पर 10 लाख और इलाज के लिए 5 लाख रुपये की बीमा राशि सुनिश्चित हो। 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन और आवास के लिए 5 लाख रुपये की सहायता। ड्राइवरों को द्वितीय श्रेणी सैनिक की मान्यता दी जाए और 1 सितंबर को ड्राइवर दिवस घोषित हो। राजमार्गों पर प्रशासन की अवैध वसूली और आम नागरिकों द्वारा की जाने वाली मारपीट के खिलाफ सख्त कानून बने। राजमार्गों पर विश्राम गृह, शौचालय और पार्किंग की समुचित व्यवस्था हो। जब तक हक नहीं, तब तक चैन नहीं 13 मार्च को पदयात्रा उमरिया पहुंची, जहां स्थानीय ड्राइवरों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। रात्रि विश्राम के बाद सुबह यह कारवां फिर भोपाल की ओर कूच कर गया। यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्रदेश उपाध्यक्ष द्वारिका प्रसाद द्विवेदी और संगठन मंत्री तेज बाली शर्मा ने कहा कि ड्राइवर समाज अब जाग चुका है। वह दिन-रात मेहनत कर देश की अर्थव्यवस्था चलाता है, लेकिन बदले में उसे केवल अपमान और असुरक्षा मिलती है। इस पदयात्रा में संभागीय कोषाध्यक्ष राकेश गौतम, जिला महामंत्री मोहन यादव, उपाध्यक्ष राम किशोर, मीडिया प्रभारी मदन यादव सहित डिंडोरी और उमरिया के जिलाध्यक्ष क्रमश: नाथू यादव और राज कुमार रैदास अपनी पूरी टीम के साथ डटे हुए हैं। हजारों किलोमीटर की यह पदयात्रा केवल एक मार्च नहीं, बल्कि सरकार के लिए खतरे की घंटी है। यदि 8 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस ठोस कदम नहीं उठाया, तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था का चरमराना तय है।1
- अनूपपुर। घर से घसीट कर युवती का अपहरण, एक तरफा प्रेम में युवक ने दिया घटना को अंजाम, आरोपी धराएं #अनूपपुर #अनूपपुरपुलिस #anuppurcollectar#post #छत्तीसगढ़1
- सिंगरौली। जिले के एक पावर प्लांट में मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद शनिवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में मजदूर मौके पर इकट्ठा हो गए और प्रबंधन के खिलाफ जमकर आक्रोश जताने लगे। बताया जा रहा है कि मजदूर की मौत के बाद गुस्साए श्रमिकों ने हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और आक्रोशित भीड़ ने मौके पर पहुंची पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ कर दी। हालात काबू में करने के लिए पुलिस बल को अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ी। मजदूरों का आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था और काम करने की परिस्थितियां ठीक नहीं हैं, जिसके कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। वहीं घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी है और मामले की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मजदूर की मौत के कारणों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।1
- ब्यौहारी में अवैध कब्जा हटाने पहुँची फॉरेस्ट विभाग की टीम के साथ नगर परिषद अध्यक्ष राजन गुप्ता द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए उन्होंने टीम को धमकी दी कि JCB जब्त कर नगरपालिका ले जाऊंगा। घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।1
- मानपुर रेंज के डोगरा टोला पहड़िया में आग का कहर : तीन दिन से धधक रही पहड़िया,वन्य जीवन और वन संपदा पर गम्भीर संकट* -वन परिक्षेत्र मानपुर के बिजौरी बीट अंतर्गत डोगरा टोला पहड़िया में पिछले तीन दिनों से भीषण आग लगी हुई है।स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पूरी पहड़ियां धधक कर जल चुकी हैं और आग अब भरमिला के महुआ हार की ओर तेजी से बढ़ रही है। इस सम्बन्ध में बिजौरी बीट गार्ड तेजलाल बैगा ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से आग को बुझाने का प्रयास कर रहे हैं और अभी फिर से अपने श्रमिकों के साथ आग पर नियंत्रण पाने के लिए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग की समय पर कार्रवाई न करने की लापरवाही पर चिंता व्यक्त की है उनका कहना है कि आग फैलने से वन्य जीव,जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों को गंभीर नुकसान हो रहा है।स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि वन विभाग आग पर नियंत्रण व राहत कार्यवाही शुरू करे ताकि वन और वन्य जीवन सुरक्षित रह सकें।4
- Post by RAHUL YADAV1
- रीवा। नेशनल हाईवे 39 पर स्थित खड्ढा टोल प्लाजा एक बार फिर विवादों में आ गया है। यहां कार से जा रहे एक युवक के साथ टोल कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर जमकर मारपीट करने का मामला सामने आया है। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर कार सवार युवक और टोल कर्मियों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि टोल कर्मचारियों ने युवक के साथ मारपीट शुरू कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन तब तक युवक को काफी चोटें लग चुकी थीं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल प्लाजा पर अक्सर वाहन चालकों के साथ अभद्रता की शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं अब लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो की जांच कर दोषी टोल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।1