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प्रयागराज में जलजमाव को लेकर सपा का जोरदार प्रदर्शन, डीएम को सौंपा ज्ञापन, नहीं मानी बात तो बड़ा आंदोलन। प्रयागराज में जलजमाव को लेकर सपा का जोरदार प्रदर्शन, डीएम को सौंपा ज्ञापन, नहीं मानी बात तो बड़ा आंदोलन प्रयागराज शहर में भारी बारिश के बाद हुए जलजमाव को लेकर समाजवादी पार्टी महानगर इकाई ने शुक्रवार को पत्थर गिरजा घर धरना स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन ने किया। कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन एसीएम प्रथम ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपा और समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की मांग की। सपा ने ज्ञापन में बताया कि मुंडेरा, धूमनगंज, करेली, गौस नगर, जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, सलोरी, राजापुर, बेली गांव समेत दर्जनों मोहल्लों में कई दिनों से पानी भरा है। सीवर का पानी घरों में घुस गया है। नैनी स्टेशन रोड, जमुनानगर बस्ती, चीनी मिल, रामलीला मैदान, महेवा, डांडी, नैनी बाजार में भी जलभराव है। नेताओं ने कहा कि पेयजल, राशन और बिजली की भारी किल्लत है। गंदे पानी से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। सपा ने भाजपा सरकार पर "स्मार्ट सिटी" के नाम पर धन की बर्बादी का आरोप लगाया। सपा ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष अनिल यादव, एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव, पूर्व विधायक सत्यवीर मुन्ना, बासुदेव यादव समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

4 hrs ago
user_Rohit Sharma
Rohit Sharma
निष्पक्षता से खबर को प्रकाशित करना मेरा बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago

प्रयागराज में जलजमाव को लेकर सपा का जोरदार प्रदर्शन, डीएम को सौंपा ज्ञापन, नहीं मानी बात तो बड़ा आंदोलन। प्रयागराज में जलजमाव को लेकर सपा का जोरदार प्रदर्शन, डीएम को सौंपा ज्ञापन, नहीं मानी बात तो बड़ा आंदोलन प्रयागराज शहर में भारी बारिश के बाद हुए जलजमाव को लेकर समाजवादी पार्टी महानगर इकाई ने शुक्रवार को पत्थर गिरजा घर धरना स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन ने किया।

कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन एसीएम प्रथम ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपा और समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की मांग की। सपा ने ज्ञापन में बताया कि मुंडेरा, धूमनगंज, करेली, गौस नगर, जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, सलोरी, राजापुर, बेली गांव समेत दर्जनों मोहल्लों में कई दिनों से पानी भरा है। सीवर का पानी घरों में घुस गया है। नैनी स्टेशन रोड, जमुनानगर बस्ती, चीनी मिल, रामलीला मैदान, महेवा, डांडी, नैनी बाजार में भी

जलभराव है। नेताओं ने कहा कि पेयजल, राशन और बिजली की भारी किल्लत है। गंदे पानी से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। सपा ने भाजपा सरकार पर "स्मार्ट सिटी" के नाम पर धन की बर्बादी का आरोप लगाया। सपा ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष अनिल यादव, एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव, पूर्व विधायक सत्यवीर मुन्ना, बासुदेव यादव समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

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  • प्रयागराज के नारी बारी से सुरवल साहनी ने एच30 में मजदूरों से भरा ट्रैक्टर पलटा कुछ लोगो की मौत और दर्जन भर लोग हुए घायल प्रयागराज के नारी बारी से सुरवल साहनी ने एच30 में मजदूरों से भरा ट्रैक्टर पलटा कुछ लोगो की मौत और दर्जन भर लोग हुए घायल
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    प्रयागराज के नारी बारी से सुरवल साहनी ने एच30 में मजदूरों  से भरा ट्रैक्टर पलटा कुछ लोगो की मौत और दर्जन भर  लोग हुए घायल
प्रयागराज के नारी बारी से सुरवल साहनी ने एच30 में मजदूरों  से भरा ट्रैक्टर पलटा कुछ लोगो की मौत और दर्जन भर  लोग हुए घायल
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • अंजना मैडम पत्रकारिता करते हुए नजर आई बीजेपी के लिए खतरे कि घंटी। अंजना ने लाइव डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला की बोलती बंद कर दी अंजना: क्या आप अपने बच्चों को डिटर्जेंट मिला हुआ खाना खिला सकते हैं, जैसा छात्रों को मिड-डे मील में दिया गया? अंजना : अब मैं रोज़ ये तस्वीरें दिखाऊँगी और अपनी डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता से सवाल पूछूँगी ज़रा सोचिए, अगर पत्रकार नियमित रूप से इसी तरह रीढ़ की हड्डी दिखाकर सवाल पूछने लगें तो क्या होगा! अंजना मैडम आजकल बदली बदली सी क्यो दिख रही है ....
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    अंजना मैडम पत्रकारिता करते हुए नजर आई बीजेपी के लिए खतरे कि घंटी। 

अंजना ने लाइव डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला की बोलती बंद कर दी 

अंजना: क्या आप अपने बच्चों को डिटर्जेंट मिला हुआ खाना खिला सकते हैं, जैसा छात्रों को मिड-डे मील में दिया गया?
अंजना : अब मैं रोज़ ये तस्वीरें दिखाऊँगी और अपनी डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता से सवाल पूछूँगी
ज़रा सोचिए, अगर पत्रकार नियमित रूप से इसी तरह रीढ़ की हड्डी दिखाकर सवाल पूछने लगें तो क्या होगा!
अंजना मैडम आजकल बदली बदली सी क्यो दिख रही है ....
    user_दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
    दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
    मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • सहारनपुर बिग ब्रेकिंग दिशा की बैठक में भिड़ गए सांसद इमरान और विधायक आशु। सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक के बीच बहस आप चेयर से अनुमति लेकर सवाल पूछें- इमरान मसूद ये दिशा की बैठक है कोई रैली नहीं- आशु मलिक। इमरान मसूद ने कहा यहां तो नियम ही चलेगा। सवाल मेरा है मैं जवाब से संतुष्ट नहीं हूं- आशु सवाल हम नहीं पूछेंगे तो कौन पूछेगा- आशु मलिक। इमरान ने कहा दूसरे लोगों को भी बोलने दीजिए। सवालों की बारी और समय को लेकर नोकझोंक सहारनपुर बिग ब्रेकिंग दिशा की बैठक में भिड़ गए सांसद इमरान और विधायक आशु। सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक के बीच बहस आप चेयर से अनुमति लेकर सवाल पूछें- इमरान मसूद ये दिशा की बैठक है कोई रैली नहीं- आशु मलिक। इमरान मसूद ने कहा यहां तो नियम ही चलेगा। सवाल मेरा है मैं जवाब से संतुष्ट नहीं हूं- आशु सवाल हम नहीं पूछेंगे तो कौन पूछेगा- आशु मलिक। इमरान ने कहा दूसरे लोगों को भी बोलने दीजिए। सवालों की बारी और समय को लेकर नोकझोंक
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    सहारनपुर बिग ब्रेकिंग

दिशा की बैठक में भिड़ गए सांसद इमरान और विधायक आशु।

सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक के बीच बहस

आप चेयर से अनुमति लेकर सवाल पूछें- इमरान मसूद

ये दिशा की बैठक है कोई रैली नहीं- आशु मलिक।

इमरान मसूद ने कहा यहां तो नियम ही चलेगा।

सवाल मेरा है मैं जवाब से संतुष्ट नहीं हूं- आशु

सवाल हम नहीं पूछेंगे तो कौन पूछेगा- आशु मलिक।

इमरान ने कहा दूसरे लोगों को भी बोलने दीजिए।

सवालों की बारी और समय को लेकर नोकझोंक
सहारनपुर बिग ब्रेकिंग
दिशा की बैठक में भिड़ गए सांसद इमरान और विधायक आशु।
सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक के बीच बहस
आप चेयर से अनुमति लेकर सवाल पूछें- इमरान मसूद
ये दिशा की बैठक है कोई रैली नहीं- आशु मलिक।
इमरान मसूद ने कहा यहां तो नियम ही चलेगा।
सवाल मेरा है मैं जवाब से संतुष्ट नहीं हूं- आशु
सवाल हम नहीं पूछेंगे तो कौन पूछेगा- आशु मलिक।
इमरान ने कहा दूसरे लोगों को भी बोलने दीजिए।
सवालों की बारी और समय को लेकर नोकझोंक
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • अंडरपास में जलभराव से राहगीर परेशान, विभागीय लापरवाही उजागर अंडरपास में जलभराव से राहगीर परेशान, विभागीय लापरवाही उजागर *मेजा, प्रयागराज।* मेजा क्षेत्र के मेजा रोड स्थित रेलवे अंडरपास पुलिया में पानी भरने से राहगीरों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अंडरपास राहगीरों के लिए सबब बन गया है। बरसात का मौसम शुरू होते ही इस पुलिया की पुरानी समस्या फिर सामने आ गई है। पानी की निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण बरसात का पानी अंडरपास में ही जमा हो जाता है। कई-कई दिनों तक पानी भरा रहने से वहां कीचड़ और फिसलन हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी भरे होने के कारण पैदल चलने वालों, स्कूली बच्चों और बाइक सवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिसलन के कारण आए दिन बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। वहीं चार पहिया वाहनों के गुजरने पर गंदा पानी राहगीरों पर उछल जाता है। रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या विभागीय कर्मचारियों और रेलवे विभाग की लापरवाही की देन है। हर साल बरसात से पहले नाले और अंडरपास की सफाई का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। समय पर सफाई न होने से जल निकासी पूरी तरह बाधित है। क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और रेलवे विभाग से मांग की है कि अंडरपास पुलिया में जमा पानी की तुरंत निकासी कराई जाए और स्थायी जल निकास की व्यवस्था की जाए, ताकि राहगीरों को इस परेशानी से निजात मिल सके।
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    अंडरपास में जलभराव से राहगीर परेशान, विभागीय लापरवाही उजागर
अंडरपास में जलभराव से राहगीर परेशान, विभागीय लापरवाही उजागर
*मेजा, प्रयागराज।* मेजा क्षेत्र के मेजा रोड स्थित रेलवे अंडरपास पुलिया में पानी भरने से राहगीरों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अंडरपास राहगीरों के लिए सबब बन गया है।
बरसात का मौसम शुरू होते ही इस पुलिया की पुरानी समस्या फिर सामने आ गई है। पानी की निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण बरसात का पानी अंडरपास में ही जमा हो जाता है। कई-कई दिनों तक पानी भरा रहने से वहां कीचड़ और फिसलन हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी भरे होने के कारण पैदल चलने वालों, स्कूली बच्चों और बाइक सवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिसलन के कारण आए दिन बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। वहीं चार पहिया वाहनों के गुजरने पर गंदा पानी राहगीरों पर उछल जाता है। रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या विभागीय कर्मचारियों और रेलवे विभाग की लापरवाही की देन है। हर साल बरसात से पहले नाले और अंडरपास की सफाई का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। समय पर सफाई न होने से जल निकासी पूरी तरह बाधित है।
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और रेलवे विभाग से मांग की है कि अंडरपास पुलिया में जमा पानी की तुरंत निकासी कराई जाए और स्थायी जल निकास की व्यवस्था की जाए, ताकि राहगीरों को इस परेशानी से निजात मिल सके।
    user_Dhananjay Prajapati
    Dhananjay Prajapati
    Artist Meja, Prayagraj•
    21 hrs ago
  • प्रयागराज-भारी बारिश के चलते वरिष्ठ पत्रकार का तीन मंजिला मकान जमींदोज..... मड़ौका (करछना), प्रयागराज जिला के करछना तहसील अंतर्गत वार्ड नंबर 29, मड़ौका गांव में आपदा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। बीती 18 अगस्त 2026 की रात करीब 8 बजे, लगातार हो रही भारी बारिश और जलभराव के कारण वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार भारतीया का तीन मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे में पीड़ित पत्रकार की जीवन भर की गाढ़ी कमाई मलबे में तब्दील हो गई है। गनीमत रही कि घटना से महज 10 मिनट पहले ही खतरे को भांपते हुए परिवार बाहर निकल आया था, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया। पत्रकार अनिल कुमार भारतीय के अनुसार, मकान के पीछे लंबे समय से हो रहे जलभराव और पानी की निकासी न होने के कारण मकान की नींव पूरी तरह कमजोर हो चुकी थी। 18 अगस्त 2026 की रात अचानक दीवारें चटकने लगीं, जिसके बाद पूरा परिवार आनन-फानन में बाहर भागा। देखते ही देखते उनकी तीन पीढ़ियों की मेहनत से खड़ा किया गया आशियाना जमींदोज हो गया। घर में रखा सारा कीमती सामान, जरूरी दस्तावेज, अनाज और कपड़े मलबे में दबकर नष्ट हो गए हैं। इस भीषण तबाही के बाद से अनिल भारतीय के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर उठे सवाल, इतने बड़े हादसे के बाद सिर्फ लेखपाल और पार्षद ही मौके पर पहुँचे इस बड़ी आपदा के बाद स्थानीय प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना रहा है। घटना को बीते कई घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मौके पर केवल स्थानीय लेखपाल और क्षेत्र के पार्षद ही औपचारिकता पूरी करने पहुँचे हैं। जिले के किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (DM, SDM या नगर निगम के आला अफसरों) ने न तो घटनास्थल का दौरा किया और न ही पीड़ित परिवार से फोन पर संपर्क कर ढांढस बंधाने की जहमत उठाई। एक चौथे स्तंभ के सिपाही (पत्रकार) के साथ प्रशासन के इस उपेक्षापूर्ण व्यवहार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।जलभराव की स्थायी समस्या बनी कालस्थानीय निवासियों का कहना है कि मड़ौका के इस इलाके में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन जल निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया। इसी प्रशासनिक लापरवाही की कीमत आज एक सम्मानित पत्रकार परिवार को अपना घर गंवाकर चुकानी पड़ी है। पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय और मुआवजे की गुहार खुले आसमान के नीचे दाने-दाने को मोहताज पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता, रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मकान के पुनर्निर्माण के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासन की ओर से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत नहीं दी गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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    प्रयागराज-भारी बारिश के चलते वरिष्ठ पत्रकार का तीन मंजिला मकान जमींदोज.....
मड़ौका (करछना), प्रयागराज जिला के करछना तहसील अंतर्गत वार्ड नंबर 29, मड़ौका गांव में आपदा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। बीती 18 अगस्त 2026 की रात करीब 8 बजे, लगातार हो रही भारी बारिश और जलभराव के कारण वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार भारतीया का तीन मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे में पीड़ित पत्रकार की जीवन भर की गाढ़ी कमाई मलबे में तब्दील हो गई है। गनीमत रही कि घटना से महज 10 मिनट पहले ही खतरे को भांपते हुए परिवार बाहर निकल आया था, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया।
पत्रकार अनिल कुमार भारतीय के अनुसार, मकान के पीछे लंबे समय से हो रहे जलभराव और पानी की निकासी न होने के कारण मकान की नींव पूरी तरह कमजोर हो चुकी थी। 18 अगस्त 2026 की रात अचानक दीवारें चटकने लगीं, जिसके बाद पूरा परिवार आनन-फानन में बाहर भागा। देखते ही देखते उनकी तीन पीढ़ियों की मेहनत से खड़ा किया गया आशियाना जमींदोज हो गया। घर में रखा सारा कीमती सामान, जरूरी दस्तावेज, अनाज और कपड़े मलबे में दबकर नष्ट हो गए हैं। इस भीषण तबाही के बाद से अनिल भारतीय के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर उठे सवाल, इतने बड़े हादसे के बाद सिर्फ लेखपाल और पार्षद ही मौके पर पहुँचे इस बड़ी आपदा के बाद स्थानीय प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना रहा है। घटना को बीते कई घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मौके पर केवल स्थानीय लेखपाल और क्षेत्र के पार्षद ही औपचारिकता पूरी करने पहुँचे हैं। जिले के किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (DM, SDM या नगर निगम के आला अफसरों) ने न तो घटनास्थल का दौरा किया और न ही पीड़ित परिवार से फोन पर संपर्क कर ढांढस बंधाने की जहमत उठाई। एक चौथे स्तंभ के सिपाही (पत्रकार) के साथ प्रशासन के इस उपेक्षापूर्ण व्यवहार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।जलभराव की स्थायी समस्या बनी कालस्थानीय निवासियों का कहना है कि मड़ौका के इस इलाके में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन जल निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया। इसी प्रशासनिक लापरवाही की कीमत आज एक सम्मानित पत्रकार परिवार को अपना घर गंवाकर चुकानी पड़ी है। पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय और मुआवजे की गुहार खुले आसमान के नीचे दाने-दाने को मोहताज पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता, रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मकान के पुनर्निर्माण के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शासन की ओर से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत नहीं दी गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
    user_Mohd. Haroon
    Mohd. Haroon
    Local News Reporter करछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • प्रयागराज के करछना ब्लॉक के डीहा गांव में लगातार बारिश के चलते कई घरों में पानी घुस गया है। जलभराव से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब ग्रामीण वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मदद और राहत की गुहार लगा रहे हैं। यहां से BJP विधायक पीयूष रंजन निषाद जी हैं प्रयागराज करछना के डीहा में भारी बारिश से पानी घरों में घुसा लोग परेशान
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    प्रयागराज के करछना ब्लॉक के डीहा गांव में लगातार बारिश के चलते कई घरों में पानी घुस गया है। जलभराव से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब ग्रामीण वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मदद और राहत की गुहार लगा रहे हैं। यहां से BJP विधायक पीयूष रंजन निषाद जी हैं
प्रयागराज करछना के डीहा में भारी बारिश से पानी घरों में घुसा लोग परेशान
    user_GP News INDIA
    GP News INDIA
    Tour and travels करछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • स्कूल में Gen Alpha का हल्ला बोल! 200 छात्रों और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा #GenAlpha #SchoolProtest #KannaujNews #bstv स्कूल में Gen Alpha का हल्ला बोल! 200 छात्रों और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा #GenAlpha #SchoolProtest #KannaujNews #bstv
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    स्कूल में Gen Alpha का हल्ला बोल! 200 छात्रों और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

#GenAlpha #SchoolProtest #KannaujNews #bstv
स्कूल में Gen Alpha का हल्ला बोल! 200 छात्रों और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
#GenAlpha #SchoolProtest #KannaujNews #bstv
    user_Deepak raj Bind
    Deepak raj Bind
    Local News Reporter बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • अयोध्या - चंपत राय के लेटर बम पर नृपेंद्र मिश्र का बयान - मैंने पत्र नहीं देखा , आप लोग विवाद कराना चाहते हैं !! अयोध्या - चंपत राय के लेटर बम पर नृपेंद्र मिश्र का बयान - मैंने पत्र नहीं देखा , आप लोग विवाद कराना चाहते हैं !!
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    अयोध्या -

चंपत राय के लेटर बम पर नृपेंद्र मिश्र का बयान - 

मैंने पत्र नहीं देखा , आप लोग विवाद कराना चाहते हैं !!
अयोध्या -
चंपत राय के लेटर बम पर नृपेंद्र मिश्र का बयान - 
मैंने पत्र नहीं देखा , आप लोग विवाद कराना चाहते हैं !!
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • जगदीशपुर की जलमग्न सड़क ने खोली विकास की पोल, निर्माण के बाद एक ईंट तक नहीं लगी—ग्रामीण पूछ रहे, आखिर किसके भरोसे है गांव?* प्रधान के विकास कार्यों पर उठे सवाल, सड़क- नाली-जलनिकासी की बदहाली बनी व्यवस्था का आईना; शिकायतों के बीच एसडीएम शिखा शंखवार के संज्ञान से अब शुक्रवार के निरीक्षण पर टिकीं निगाहें* बारा, जसरा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जगदीशपुर में सड़क पर भरा पानी अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि गांव में विकास और जिम्मेदारी के दावों की खुली पड़ताल बन गया है। जिस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण आवागमन करते हैं, वही रास्ता इन दिनों पानी से लबालब है। पैदल चलने वालों से लेकर दोपहिया वाहन चालकों तक को रास्ता पार करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की यह हालत अचानक नहीं बनी, बल्कि लंबे समय से रखरखाव और जलनिकासी की अनदेखी का नतीजा है। ऐसे में अब सवाल सीधे ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है—आखिर प्रधान द्वारा गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, किन समस्याओं का संज्ञान लिया गया और किन समस्याओं को यूं ही छोड़ दिया गया? ग्रामीणों के मुताबिक वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में इसी सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से आज तक सड़क पर मरम्मत के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई। यदि यह दावा सही है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि निर्माण के बाद सड़क के रखरखाव की व्यवस्था क्या रही? सड़क की हालत लगातार खराब होती रही तो ग्राम पंचायत स्तर पर इसकी सुध क्यों नहीं ली गई? आखिर किस स्तर पर इसकी निगरानी होनी थी और अब तक किसी जिम्मेदार ने इसकी वास्तविक स्थिति का संज्ञान क्यों नहीं लिया? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पानी भरने के पीछे केवल बारिश को जिम्मेदार ठहराकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यदि पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था होती तो सड़क पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति क्यों बनती? गांव में नाली और जलनिकासी की व्यवस्था किस स्थिति में है?यदि नाली है तो उसकी सफाई कब हुई? यदि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है तो उसे विकसित कराने की जिम्मेदारी किसकी है? ये सवाल अब ग्रामीणों की जुबान पर हैं। सबसे बड़ा सवाल ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को लेकर भी उठ रहा है। प्रधान द्वारा अब तक गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, उनकी प्राथमिकता क्या रही और जिन रास्तों से बड़ी आबादी गुजरती है, उनकी हालत पर कितनी बार ध्यान दिया गया? ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब सड़क, नाली, जलनिकासी और सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत जरूरत सामने आती है तो ग्रामीणों को अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंचना पड़ता है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि ग्राम पंचायत में विकास का वास्तविक पैमाना क्या है—कागजों पर दर्ज कार्य या जमीन पर दिखाई देने वाली सुविधा? ग्रामीणों के अनुसार समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उनका आरोप है कि न तो स्थानीय स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान कराया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को गंभीरता से देखा। आधी से अधिक आबादी के आवागमन से जुड़े रास्ते का इस तरह पानी में डूबा रहना व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जरूर हलचल दिखाई दी। गुरुवार को मीडिया द्वारा उपजिलाधिकारी बारा शिखा शंखवार से समस्या के संबंध में बातचीत की गई। उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराने तथा ग्रामीणों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस तत्परता से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है, लेकिन अब असली सवाल निरीक्षण के बाद होने वाली कार्रवाई का है। क्या शुक्रवार का निरीक्षण केवल सड़क पर भरे पानी की तस्वीर देखकर लौट आएगा या फिर सड़क निर्माण से लेकर उसके रखरखाव, जलनिकासी और ग्राम पंचायत की भूमिका तक पूरी स्थिति की पड़ताल होगी?क्या यह देखा जाएगा कि वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में कराया गया निर्माण किस स्थिति में है और उसके बाद सड़क के रखरखाव के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या ग्राम पंचायत से यह पूछा जाएगा कि इस महत्वपूर्ण रास्ते की समस्या को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि शिकायतें हुई थीं तो उन पर क्या संज्ञान लिया गया? ग्रामीणों की परेशानी का असली समाधान तभी माना जाएगा जब निरीक्षण के बाद सड़क से पानी हटे, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बने और जरूरत के अनुसार सड़क की मरम्मत कराई जाए। महज पानी निकाल देना समस्या का अंत नहीं होगा, क्योंकि अगली बारिश में यदि वही पानी फिर सड़क पर जमा हो गया तो पूरा मामला वहीं लौट आएगा। जरूरत स्थायी जलनिकासी और मजबूत सड़क व्यवस्था की है। जगदीशपुर की सड़क अब प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल बनकर खड़ी है।निर्माण हुआ तो उसके बाद रखरखाव क्यों नहीं हुआ? सड़क खराब हुई तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई? पानी भरता रहा तो जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई? ग्रामीण शिकायत करते रहे तो संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? और यदि ग्राम पंचायत में विकास कार्य हुए हैं तो उनका असर जमीन पर कहां दिखाई दे रहा है? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। शुक्रवार का स्थलीय निरीक्षण यह तय करेगा कि जगदीशपुर की शिकायत सिर्फ एक और शिकायत बनकर फाइलों में दबती है या फिर मौके की हकीकत देखकर जिम्मेदारी और समाधान दोनों की दिशा में ठोस कदम उठता है। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए; निरीक्षण नहीं, समाधान चाहिए; और कागजी विकास नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए
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    जगदीशपुर की जलमग्न सड़क ने खोली विकास की पोल, निर्माण के बाद एक ईंट तक नहीं लगी—ग्रामीण पूछ रहे, आखिर किसके भरोसे है गांव?*
प्रधान के विकास कार्यों पर उठे सवाल, सड़क- नाली-जलनिकासी की बदहाली बनी व्यवस्था का आईना; शिकायतों के बीच एसडीएम शिखा शंखवार के संज्ञान से अब शुक्रवार के निरीक्षण पर टिकीं निगाहें*
बारा, जसरा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जगदीशपुर में सड़क पर भरा पानी अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि गांव में विकास और जिम्मेदारी के दावों की खुली पड़ताल बन गया है। जिस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण आवागमन करते हैं, वही रास्ता इन दिनों पानी से लबालब है। पैदल चलने वालों से लेकर दोपहिया वाहन चालकों तक को रास्ता पार करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की यह हालत अचानक नहीं बनी, बल्कि लंबे समय से रखरखाव और जलनिकासी की अनदेखी का नतीजा है। ऐसे में अब सवाल सीधे ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है—आखिर प्रधान द्वारा गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, किन समस्याओं का संज्ञान लिया गया और किन समस्याओं को यूं ही छोड़ दिया गया? ग्रामीणों के मुताबिक वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में इसी सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से आज तक सड़क पर मरम्मत के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई। यदि यह दावा सही है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि निर्माण के बाद सड़क के रखरखाव की व्यवस्था क्या रही? सड़क की हालत लगातार खराब होती रही तो ग्राम पंचायत स्तर पर इसकी सुध क्यों नहीं ली गई? आखिर किस स्तर पर इसकी निगरानी होनी थी और अब तक किसी जिम्मेदार ने इसकी वास्तविक स्थिति का संज्ञान क्यों नहीं लिया? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पानी भरने के पीछे केवल बारिश को जिम्मेदार ठहराकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यदि पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था होती तो सड़क पर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति क्यों बनती? गांव में नाली और जलनिकासी की व्यवस्था किस स्थिति में है?यदि नाली है तो उसकी सफाई कब हुई? यदि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है तो उसे विकसित कराने की जिम्मेदारी किसकी है? ये सवाल अब ग्रामीणों की जुबान पर हैं। सबसे बड़ा सवाल ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को लेकर भी उठ रहा है। प्रधान द्वारा अब तक गांव में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए, उनकी प्राथमिकता क्या रही और जिन रास्तों से बड़ी आबादी गुजरती है, उनकी हालत पर कितनी बार ध्यान दिया गया? ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब सड़क, नाली, जलनिकासी और सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत जरूरत सामने आती है तो ग्रामीणों को अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंचना पड़ता है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि ग्राम पंचायत में विकास का वास्तविक पैमाना क्या है—कागजों पर दर्ज कार्य या जमीन पर दिखाई देने वाली सुविधा? ग्रामीणों के अनुसार समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उनका आरोप है कि न तो स्थानीय स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान कराया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को गंभीरता से देखा। आधी से अधिक आबादी के आवागमन से जुड़े रास्ते का इस तरह पानी में डूबा रहना व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जरूर हलचल दिखाई दी। गुरुवार को मीडिया द्वारा उपजिलाधिकारी बारा शिखा शंखवार से समस्या के संबंध में बातचीत की गई। उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराने तथा ग्रामीणों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए समाधान निकालने का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस तत्परता से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है, लेकिन अब असली सवाल निरीक्षण के बाद होने वाली कार्रवाई का है। क्या शुक्रवार का निरीक्षण केवल सड़क पर भरे पानी की तस्वीर देखकर लौट आएगा या फिर सड़क निर्माण से लेकर उसके रखरखाव, जलनिकासी और ग्राम पंचायत की भूमिका तक पूरी स्थिति की पड़ताल होगी?क्या यह देखा जाएगा कि वर्तमान ब्लॉक प्रमुख के कार्यकाल में कराया गया निर्माण किस स्थिति में है और उसके बाद सड़क के रखरखाव के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या ग्राम पंचायत से यह पूछा जाएगा कि इस महत्वपूर्ण रास्ते की समस्या को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि शिकायतें हुई थीं तो उन पर क्या संज्ञान लिया गया? ग्रामीणों की परेशानी का असली समाधान तभी माना जाएगा जब निरीक्षण के बाद सड़क से पानी हटे, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बने और जरूरत के अनुसार सड़क की मरम्मत कराई जाए। महज पानी निकाल देना समस्या का अंत नहीं होगा, क्योंकि अगली बारिश में यदि वही पानी फिर सड़क पर जमा हो गया तो पूरा मामला वहीं लौट आएगा। जरूरत स्थायी जलनिकासी और मजबूत सड़क व्यवस्था की है। जगदीशपुर की सड़क अब प्रशासन के सामने एक सीधा सवाल बनकर खड़ी है।निर्माण हुआ तो उसके बाद रखरखाव क्यों नहीं हुआ? सड़क खराब हुई तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई? पानी भरता रहा तो जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई? ग्रामीण शिकायत करते रहे तो संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? और यदि ग्राम पंचायत में विकास कार्य हुए हैं तो उनका असर जमीन पर कहां दिखाई दे रहा है? अब गेंद प्रशासन के पाले में है। शुक्रवार का स्थलीय निरीक्षण यह तय करेगा कि जगदीशपुर की शिकायत सिर्फ एक और शिकायत बनकर फाइलों में दबती है या फिर मौके की हकीकत देखकर जिम्मेदारी और समाधान दोनों की दिशा में ठोस कदम उठता है। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए; निरीक्षण नहीं, समाधान चाहिए; और कागजी विकास नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए
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    दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
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