चौरी जंगल में अवैध कटान का मामला, वन विभाग ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का लिया निर्णय कृष्ण चंद राणा पांगी न्यूज़ टुडे. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के पांगी वन मंडल के साच वन परिक्षेत्र के अंतर्गत चौरी जंगल में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की नाक के नीचे अवैध कटान का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार हाल ही में देवदार के 8 से 10 बड़े पेड़ काटे गए हैं। हैरानी की बात यह है कि कटे हुए पेड़ों के ठूंठों को मिट्टी और देवदार की पत्तियों से ढक दिया गया था, जिससे इस अवैध गतिविधि को छिपाने की कोशिश की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहा सिलसिला है। आरोप है कि सैकड़ों पेड़ वन माफिया की भेंट चढ़ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब वन विभाग का कार्यालय और कर्मचारियों के आवास इस जंगल से महज एक किलोमीटर की दूरी पर हैं, तो इस तरह का अवैध कटान कैसे हो गया। ऐसे में दूरदराज के जंगलों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी पांगी के छोटा बंबल, बिलडू मौझी सहित कई जंगलों में देवदार के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इनकी जांच आज तक पूरी नहीं हो पाई है। लोगों को आशंका है कि चौरी जंगल का मामला भी कहीं उसी तरह ठंडे बस्ते में न डाल दिया जाए। वन विभाग द्वारा पांगी के जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाने और गश्त करने के दावे किए जाते रहे हैं। विभाग अपने आधिकारिक पेज पर इसकी वीडियो भी साझा करता है, लेकिन साच वन परिक्षेत्र के कार्यालय से सटे चौरी जंगल में ही पेड़ों का कट जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने वन रक्षक, वन पाल और वन परिक्षेत्र अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। इस मामले पर वन मंडल अधिकारी पांगी रवि गुलेरिया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है और वन परिक्षेत्र अधिकारी साच को पुलिस थाना में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही एक जांच कमेटी का गठन किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों पर शक है, उनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की धारा 72 सी के तहत सर्च वारंट जारी कर पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों की मौजूदगी में तलाशी ली जाएगी। यदि संबंधित व्यक्ति वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो लकड़ी को जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
चौरी जंगल में अवैध कटान का मामला, वन विभाग ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का लिया निर्णय कृष्ण चंद राणा पांगी न्यूज़ टुडे. हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के पांगी वन मंडल के साच वन परिक्षेत्र के अंतर्गत चौरी जंगल में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की नाक के नीचे अवैध कटान का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार हाल ही में देवदार के 8 से 10 बड़े पेड़ काटे गए हैं। हैरानी की बात यह है कि कटे हुए पेड़ों के ठूंठों को मिट्टी और देवदार की पत्तियों से ढक दिया गया था, जिससे इस अवैध गतिविधि को छिपाने की कोशिश की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहा सिलसिला है। आरोप है कि सैकड़ों पेड़ वन माफिया की भेंट चढ़ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब वन विभाग का कार्यालय और कर्मचारियों के आवास इस जंगल से महज एक किलोमीटर की दूरी पर हैं, तो इस तरह का अवैध कटान कैसे हो गया। ऐसे में दूरदराज के जंगलों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी पांगी के छोटा बंबल, बिलडू मौझी सहित कई जंगलों में देवदार के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इनकी जांच आज तक पूरी नहीं हो पाई है। लोगों को आशंका है कि चौरी जंगल का मामला भी कहीं उसी तरह ठंडे बस्ते में न डाल दिया जाए। वन विभाग द्वारा पांगी के जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाने और गश्त करने के दावे किए जाते रहे हैं। विभाग अपने आधिकारिक पेज पर इसकी वीडियो भी साझा करता है, लेकिन साच वन परिक्षेत्र के कार्यालय से सटे चौरी जंगल में ही पेड़ों का कट जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने वन रक्षक, वन पाल और वन परिक्षेत्र अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। इस मामले पर वन मंडल अधिकारी पांगी रवि गुलेरिया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है और वन परिक्षेत्र अधिकारी साच को पुलिस थाना में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही एक जांच कमेटी का गठन किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों पर शक है, उनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की धारा 72 सी के तहत सर्च वारंट जारी कर पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों की मौजूदगी में तलाशी ली जाएगी। यदि संबंधित व्यक्ति वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो लकड़ी को जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- Post by न्यूज रिपोर्टर1
- Post by Till The End News1
- आपनें लात मारने बाली गाय भैंस तो देखी होगी, आज एक पुलिसकर्मी को देख लीजिए। घटना #शिमला की है1
- 7saal se reh rha hu Mallika tak nei bni , saara paani road price nikalta hai . road bi kharaab hoga ... shame on govt. jaldi se hall kijiye iska1
- हमीरपुर - हमीरपुर जिला के ढोह गांव से संबंध रखने वाले भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी एयर कमोडोर भूपेंद्र सिंह कंवर के एयर वाइस मार्शल बनने से पूरा प्रदेश उनके ऊपर नाज कर रहा है। उन्होंने हमीरपुर जिला का जहां मान बढ़ाया है तो अपने परिवार को गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरा हमीरपुर उनके ऊपर गर्व महसूस कर रहा है। एयर वाइस मार्शल भूपेंद्र सिंह कंवर सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा से एयर कमोडोर बनने वाले प्रथम अधिकारी रहे हैं और इसके बाद एयर वाइस मार्शल के पद तक पहुंचने वाले भी पहले अधिकारी हैं। उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (पर्सनल एंड सिविलियन्स) का पदभार ग्रहण किया। लगभग 34 वर्षों की उत्कृष्ट एवं समर्पित सेवा के बाद उनकी यह उपलब्धि न केवल हमीरपुर बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इलाके के लोगों ने उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भूपेंद्र सिंह कंवर ने अपने समर्पणए अनुशासन और उत्कृष्ट कार्यशैली से न केवल परिवार बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। लोगों का मानना है कि यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि कड़ी मेहनत, प्रतिबद्धता और देशभक्ति के भाव से कोई भी ऊंचाइयों को छू सकता है। एयर वाइस मार्शल कंवर का जन्म हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के ढोह गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा कंजियांण और ऊना में प्राप्त की तथा वर्ष 1981 में सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा की चौथी बैच में प्रवेश लिया। वर्ष 1987 में उन्होंने 78वें कोर्स के तहत राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश किया और दिसंबर 1991 में भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग नेविगेशन शाखा में कमीशन प्राप्त किया। भूपेंद्र सिंह कंवर के भाई वीरेंद्र कंवर ने बताया कि एयर वाइस मार्शल बनकर उन्होंने प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनकी यह उपलब्धि समाज के लिए प्रेरणादायक है। पूरा परिवार उनकी उपलब्ध पर नाज कर रहा है। उन्होंने बताया कि भाई भूपेंद्र सिंह शुरू से ही काफी मेहनती रही है। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज व इस मुकाम पर हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बताया कि भूपेंद्र सिंह कंवर की एयर वाइस मार्शल के पद पर पदोन्नति से हमीरपुर का नाम रोशन हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र से इस तरह से इस तरह का प्रतिभावान व्यक्ति का उच्च पद प्राप्त करने से पूरा क्षेत्र खुशी है। भूपेंद्र सिंह कंवर की प्रारंभिक शिक्षा भोरंज क्षेत्र से हुई है। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की हैं।1
- Post by Ranjeet Singh1
- बंगाणा, हिमाचल प्रदेश की नदियाँ—ब्यास, रावी और सतलुज—जहाँ एक ओर अपार जल संसाधन देती हैं, वहीं दूसरी ओर कयाकिंग एवं कैनोइंग जैसे खेलों में प्रदेश को अग्रणी बना सकती हैं। आज राज्य के **250–300 से अधिक खिलाड़ी** इस खेल से जुड़े हुए हैं और कई बार **राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन** कर चुके हैं। यह साबित करता है कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। फिर भी, यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक स्थिति है कि आज तक इस खेल के लिए न तो पर्याप्त **सरकारी कोचों की नियुक्ति** हो पाई है और न ही आवश्यक प्रशिक्षण सुविधाएँ विकसित की गई हैं। परिणामस्वरूप, **खिलाड़ी और कोच अन्य राज्यों में जाकर अभ्यास करने के लिए मजबूर हो रहे हैं**, जो न केवल आर्थिक रूप से कठिन है, बल्कि राज्य की खेल व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक कोच के रूप में निरंतर प्रयासों के बावजूद, सीमित संसाधनों—जैसे बोट्स, सेफ्टी गियर, स्थायी प्रशिक्षण केंद्र और वित्तीय सहायता—की कमी खिलाड़ियों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। यह स्थिति प्रतिभा के पलायन (Talent Migration) को बढ़ावा दे रही है, जो किसी भी राज्य के लिए गंभीर नुकसान है।अतः हिमाचल प्रदेश सरकार एवं खेल विभाग से यह **दृढ़ अपील** है कि खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए **तत्काल प्रभाव से आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ। स्थायी एवं आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना * योग्य कोचों की नियुक्ति * आवश्यक उपकरण एवं सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता * खिलाड़ियों के लिए आर्थिक सहायता एवं प्रोत्साहन योजनाएँ “जब अपने ही राज्य में अवसर नहीं मिलते, तो प्रतिभा पलायन के लिए मजबूर हो जाती है— कोच शाम लाल एवं खिलाड़ियों में मानसी राणा, मुस्कान,निकिता, तन्वी,नेहा,महक,सुलक्ष ठाकुर,शरीफ मोहम्मद,सौरभ चौधरी,सुशांत कुमार, जसवीर सिंह, दिव्यांशु,सचिन कुमार,अजित सिंह,अजय कुमार सहित अन्य खिलाड़ियों की आवाज़। फोटो सहित1
- Post by Till The End News1